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स्‍वास्‍थ्‍य मंत्रालय द्वारा देश में सबसे बड़े कुष्‍ठ रोग निदान अभियान की शुरुआत

स्‍वास्‍थ्‍य मंत्रालय द्वारा देश में सबसे बड़े कुष्‍ठ रोग निदान अभियान की शुरुआत

भारत से कुष्‍ठ रोग के आमूल उन्‍मूलन के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी के दृष्टिकोण के अनुपालन में स्‍वास्‍थ्‍य एवं परिवार कल्‍याण मंत्री श्री जे.पी. नड्डा ने राष्‍ट्रीय कुष्‍ठ निवारण कार्यक्रम की समीक्षा की। इसके अनुरुप स्‍वास्‍थ्‍य एवं परिवार कल्‍याण मंत्रालय ने अब तक का सबसे बड़ा कुष्‍ठ रोग निदान अभियान (एलसीडीसी) शुरू किया है। यह अभियान 5 सितंबर, 2016 से 19 राज्‍यों/केंद्र शासित प्रदेशों के 149 जिलों में शुरु कर दिया गया है। उक्‍त अभियान 15 दिन चलेगा और इस दौरान उपरोक्‍त जिलों के 1656 संभागों/शहरी क्षेत्रों के कुल 32 करोड़ लोगों की जांच की जाएगी। इस काम में 297604 टीमों को लगाया गया है जिनमें एक महिला आशा कर्मी और एक पुरुष स्‍वयंसेवी शामिल हैं। ये टीमें निर्धारित क्षेत्रों के प्रत्‍येक घर का दौरा करेंगी और कुष्‍ठ रोग के संबंध में परिवार के सभी सदस्‍यों की जांच करेंगी।

इस अभियान के तहत जिन राज्‍यों और केंद्र शासित प्रदेशों को रखा गया है, उनमें आंध्र प्रदेश, असम, बिहार, छत्‍तीसगढ़, गुजरात, हरियाणा, झारखंड, कर्नाटक, महाराष्‍ट्र, नगालैंड, ओडिशा, तमिलनाडु, उत्‍तर प्रदेश, उत्‍तराखंड, पश्चिम बंगाल, चंडीगढ़, दादरा एवं नागर हवेली, दिल्‍ली और लक्षद्वीप शामिल हैं। इस अभियान में उन जिलों को शामिल किया गया है जहां पिछले तीन सालों में कुष्‍ठ रोग दर 10,000 की आबादी पर एक से अधिक मामलों में पाई गई है।

कुष्‍ठ रोग निदान अभियान दुनिया में अपनी तरह का अनोखा कदम है जिसके तहत लक्षित आबादी के प्रत्‍येक सदस्‍य की जांच की जाएगी। यह जांच एक पुरुष और एक महिला स्‍वयंसेवी वाली खोजी टीमें करेंगी। यह जांच टीमें घर-घर जाएंगी और स्‍थानीय क्षेत्र से संबंधित योजना के अनुसार अचिन्हित कुष्‍ठ रोग के मामलों की जांच करेंगी। अभियान का उद्देश्‍य है कि प्रभावित व्‍यक्तियों में कुष्‍ठ रोग का शुरुआत में ही निदान कर लिया जाए ताकि उन्‍हें शारीरिक अक्षमता और अंगों की खराबी से बचाया जा सके। इसके अलावा ऐसे लोगों का समय पर उपचार किया जाएगा ताकि सामुदायिक स्‍तर पर रोग के फैलाव को रोका जा सके।

पहला एलसीडीसी मार्च-अप्रैल 2016 को 7 राज्‍यों के 50 जिलों में शुरू किया गया था। इसके तहत बिहार, छत्‍तीसगढ़, झारखंड, मध्‍य प्रदेश, महाराष्‍ट्र, ओडिशा और उत्‍तर प्रदेश को रखा गया था तथा लगभग 60.8 करोड़ आबादी इसके दायरे में थी। अभियान के दौरान 65427 शंकित मामलों की पहचान की गई थी, जिनमें से बाद में 4120 मामले सही पाए गए थे।

( Source – PIB )

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