अमृता के शास्त्रीय गायन और समरजीत के सितार ने बांधी शमां

भारतीय संगीत कला को समर्पित संस्था प्राचीन कला केन्द्र द्वारा इंडिया हैबीटेट सेंटर के सहयोग से आज यहां प्राचीन कला केन्द्र की तिमाही बैठक का आयोजन किया गया ।लीजेन्ट आफ टूमारो श्रृंखला के तहत इस कड़ी को अमृता दता मजूमदार के षास्त्रीय गायन और समरजीत सेन के सितार वादन से सजाया गया था।
अमृता दता के खून में संगीत बसता है। सिलचर जैसे हरे भरे खूबसूरत स्थान में जन्मी अमृता को बचपन से ही संगीत से प्यार था। पाॅंच वशर््ा की आयु में अमृता ने श्रीमती परमिता नंदी से गायन की षिक्षा लेनी षुरू की। रविंद्रा भारती विष्वविद्यालय से संगीत में स्नातक अमृता आजकल दिल्ली विष्वविद्यालय से संगीत में पीएचडी कर रही है।
1983 में जन्में समरजीत ने बचपन में संगीत की षिक्षा प्रोफैसर सुकुमार चंदा से ली। इसके पष्चात पंडित बुद्धादेव दासगुप्ता से सितार की बारीकियों को सीखा। समरजीत नौजवान पीढ़ी के प्रतिभावान कलाकार हैं। समरजीत आॅल इंडिया रेडियो के ए ग्रेड कलाकार हैं। समर के सितार वादन में मधुरता एवं संगीत का अद्भुत समन्वय है।
आज की दो प्रस्तुतियों में अमृता दता के षास्त्रीय गायन से बैठक का आगाज़ हुआ। राग अभोगी में निबद्ध विलम्बित एक द्रुत ख्याल की बंदिषें पेष करके अमृता ने खूब तालियां बटोरी। इसके पष्चात‘‘ सावरीयां प्यारे रे मोरी गुनिया’’ में दादरा पेष करके इन्होंने रागों की षुद्धता से प्रस्तुतिकरण तथा गायकी व तंत्रकारी अंगों पर अपनी महारथ को खूब दर्षाया। अपनी प्रस्तुति का समापन मीरा भजन से किया ‘‘माए री मैं तो गिरधर के घर जाउॅं’’ से किया। इस प्रस्तुति से अमृता ने दर्षकों की खूब तालियां बटोरी।
कार्यक्रम की दूसरी प्रस्तुति में समरजीत सेन ने अपनी मधुर प्रस्तुति से दर्षकों का मन मोह लिया। इन्होंने राग दरबारी कान्हड़ा में आलाप,जोड़ आलाप का बखूबी प्रदर्षन किया। विलम्बित और द्रुत तीन ताल में झाले एवं गत के सुंदर प्रदर्षन से समरजीत ने दर्षकों की खूब वाहवाही लूटी। इसके पष्चात समर ने नायकी कान्हड़ा मध्य और द्रुत लय तीन ताल की गत का मधुर प्रदर्षन किया। कार्यक्रम का समापन समरजीत ने बड़े गुलाम अली खंा साहिब की प्रसिद्ध ठुमरी ’’का करूॅं सजनी आए ना बालम’’ से करके दर्षकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
कार्यक्रम में बिवाकर चैधरी ने तबले,जाकिर धौलपुरी ने हारमोनियम एवं सुभाश़्ा कांति दास ने तबले पर बखूबी संगत की। अंत में रजिस्ट्ार षोभा कौसर एवं सचिव श्री सजल कौसर ने कलाकारों को सम्मानित किया।

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