मदरसों में ड्रेस कोड का मौलवियों ने किया विरोध

नई दिल्ली : उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने मदसरों को रजिस्टर्ड कराने और राष्ट्रगान का अनिवार्य रुप से पालन कराने के आदेश के बाद जल्द ही नया फरमान सुना सकती है. मंगलवार को कैबिनेट मंत्री मोहसिन रज़ा ने यूपी के मदरसों में ड्रेस कोड लागू करने की वकालत की. हालांकि सरकार की ओर से ऐसा कोई आदेश नहीं जारी किया गया है. लेकिन मुस्लिम संगठनों ने इसका विरोध शुरू कर दिया है.मोहसिन रजा के प्रदेश के मदरसों में ड्रेस कोड लागू करने के बयान पर मौलवी सूफियां निजामी ने आपत्ति जताते हुए कहा, ‘देश में चल रहे सभी मदरसों और कॉलेज के लिए ड्रेस कोड सरकार नहीं तय करती है. यह निर्णय संस्थान की प्रबंध समिति लेती है। तो इस तरह का भेदभाव मदरसों के साथ क्यों?’
मदरसों के लिए परेशान ना हो सरकार

मदरसा दारूल उलूम फिरंगी महल ने भी मोहसिन रजा के बयान का विरोध किया। मौलवी मोहम्मद हारून ने भी कहा, ‘यह हम पर छोड़ देना चाहिए कि मदरसों के लिए क्या अच्छा है क्या नहीं, वैसे भी मदरसों में बमुश्किल 1-2 फीसदी बच्चे ही पढ़ने आते हैं। सरकार इसके लिए परेशान न हो।

क्या बोले थे मोहसिन रजा?
अल्पसंख्यक मामलों के राज्यमंत्री मोहसिन रजा ने मंगलवार को बयान देते हुए कहा था कि मदरसों के बच्चों को मुख्यधारा में जोड़ने के लिए हमने एनसीआरटी की किताबें लागू की हैं. जिससे धार्मिक शिक्षा के साथ उन्हें सामाजिक शिक्षा भी मिल सके. आमतौर पर बच्चे कुर्ता-पायजामा पहन कर आते हैं। इससे उनकी पहचान एक धर्म विशेष से होती है। उनमें हीन भावना आती है। इसे खत्म करना जरूरी है। सरकार चाहती है कि मदरसे के बच्चे सामान्य स्कूली बच्चों की तरह दिखें।

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