विनिवेश को गति देने के लिए मंत्रिमंडल का बड़ा फैसला, आईओसी और एनटीपीसी में मंजूरी

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नई दिल्‍ली,। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (आईओसी) और नेशनल थर्मल पॉवर कॉरपोरेशन (एनटीपीसी) में विनिवेश को मंजूरी दे दी है । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्‍यक्षता में बुधवार को हुई मंत्रिमंडल की बैठक में एनटीपीसी में पांच प्रतिशत और आईओसी में 10 प्रतिशत हिस्‍सेदारी बेचने को मंजूरी दी गई । चालू वित्‍त वर्ष 2015-16 में सरकार की ओर से विनिवेश का यह पहला फैसला है । दोनों कंपनियों में विनिवेश से सरकार को 14 से 15 हजार करोड़ रुपए मिलने की उम्‍मीद है। इसके अलावा, मंत्रिमंडल की बैठक में नई यूरिया नीति, बेनामी बिल, नमामी गंगे परियोजना और चाइल्‍ड लेबर एक्‍ट में संशोधन को भी मंजूरी दे दी है ।केंद्र सरकार की योजना चालू वि‍त्‍त वर्ष के दौरान करीब एक दर्जन सार्वजनि‍क क्षेत्र की कंपनि‍यों में अपनी हि‍स्‍सेदारी बेचने की योजना है। सरकार ने चालू वित्‍त वर्ष में 12 सरकारी कंपनियों में विनिवेश के जरिए 41000 करोड़ रुपए जुटाने का लक्ष्‍य रखा है। माना जा रहा है कि‍आईओसी और एनटीपीसी के बाद सरकार नेशनल फर्टि‍लाइजर, एमएमटीसी, हिंदुस्‍तान कॉपर और आईटीडीसी में भी जल्‍द विनिवेश का फैसला किया जाएगा। वि‍नि‍वेश वि‍भाग सरकारी कंपनि‍यों में 5 से 15 प्रतिशत हि‍स्‍सेदारी बेचने के लि‍ए मंत्रिमंडल नोट का ड्राफ्ट जारी कर चुकी है ।गौरतलब हो कि केंद्र की मोदी सरकार ने मौजूदा वित्त वर्ष के लिए करीब 70,000 करोड़ रुपए का विनिवेश लक्ष्य तय किया है । विनिवेश करने वाली कंपनियों को दो हिस्सों में बांटा गया है । इनमें 41,000 करोड़ रुपए पीएसयू में हिस्‍सेदारी बेचकर जुटाए जाएंगे, जबकि 28,500 करोड़ रुपए सरकारी कंपनियों में स्‍ट्रैटजिक सेल से जुटाने की योजना है ।सरकारी फर्टिलाइजर कंपनियों को बूस्‍ट देने के उद्देश्‍य से मंत्रिमंडल ने नई यूरिया पॉलिसी को मंजूरी दे दी है । यूरिया की नई निवेश नीति के तहत पांच साल में उत्पादन शुरू करने पर ही सरकारी मदद दी जाएगी और उत्पादन शुरू होने के 8 साल बाद तक सब्सिडी मिलती रहेगी। हर प्रोजेक्ट के लिए 300 करोड़ रुपए की बैंक गारंटी जरूरी है लेकिन सरकारी कंपनियों को बैंक गारंटी नहीं देनी होगी। बैंक गारंटी तीन किस्तों में वापस होगी। यूरिया की नई पॉलिसी को मंत्रिमंडल की मंजूरी मिलने की खबर से फर्टिलाइजर कंपनियों के शेयरों में जोरदार तेजी आई है।यूरिया की नई निवेश नीति से निजी कंपनियों के मुकाबले सरकारी कंपनियों को ज्यादा फायदा मिलेगा। कंपनियों को पूरे यूरिया उत्पादन पर सब्सिडी मिलेगी। नई नीति में प्राइवेट कंपनियों को 300 करोड़ की बैंक गारंटी देनी होगी, पर सरकारी कंपनियों के लिए बैंक गारंटी का कोई प्रावधान नहीं रखा गया है

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