वैज्ञानिकों की आकस्मिक मौतों की जांच की मांग

वैज्ञानिकों की आकस्मिक मौतों की जांच की मांग
वैज्ञानिकों की आकस्मिक मौतों की जांच की मांग

अंतरिक्ष और उपग्रह प्रक्षेपण में भारत को आत्मनिर्भर बनाने का श्रेय देश के वैज्ञानिक समुदाय को देने के साथ ही लोकसभा में पिछले एक दशक में कई वैज्ञानिकों की आकस्मिक मौतों का मामला उठा और केंद्र सरकार से इसकी जांच की मांग की गयी।

शून्यकाल के दौरान सदन में यह मामला उठाते हुए भाजपा के वीरेन्द्र कुमार सोनकर ने कहा कि वर्ष 2000 से लेकर 2013 तक देश के 77 वैज्ञानिकों की आकस्मिक मौत हो चुकी है।

उन्होंने कहा कि देश पिछले करीब दस साल की अवधि में अपने कई महान वैज्ञानिकों को खो चुका है जिनमें ई आर महालिंगम का भी मामला शामिल है जो 8 जून 2009 को सुबह सैर पर गए थे और पांच दिन बाद उनका शव मिला था।

सोनकर ने वैज्ञानिकों की मौतों को रोकने के लिए सरकार से ठोस उपाय करने तथा वैज्ञानिकों की मौतों के इन मामलों की जांच करने की मांग की गयी।

माकपा के जितेन्द्र चौधरी ने माओवादी उग्रवाद से प्रभावित इलाकों में सुरक्षा बलों के कथित अत्याचार का मामला उठाया और कहा कि छत्तीसगढ़ के बीजापुर और सुकमा जिलों में माओवाद से निपटने के नाम पर सुरक्षा बलों द्वारा स्थानीय आदिवासी लोगों को निशाना बनाया जा रहा है और उन्हें उनके मानवाधिकारों से वंचित किया जा रहा है।

उन्होंने दोषी सुरक्षा बलों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की।

भाजपा के लक्ष्मी नारायण यादव ने देश के 62 छावनी बोडरे के तहत आने वाले सिविल और डिफेंस इलाकों के प्रशासन और विकास का मुद्दा उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि बोडरे द्वारा केवल डिफेंस इलाकों का विकास किया जाता है जबकि सिविल क्षेत्र पिछड़े रह जाते हैं।

उन्होंने सभी इलाकों को स्थानीय निगम के तहत लाए जाने की मांग की।

( Source – पीटीआई-भाषा )

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