सेना ने की ऐतिहासिक कार्रवाई

indian_army_03102013सेना ने की ऐतिहासिक कार्रवाई
नई दिल्ली,। ने में के दो कैंप पुरी तरह तबाह कर डाले । सेना की इस कार्रवाई में करीब सौ के मारे जाने की खबर है । सूचना और प्रसारण मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौर ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि ये प्रधानमंत्री द्वारा लिया गया ऐतिहासिक और साहसिक फैसला था । ये उन पड़ोसी देशों के लिये भी एक कड़ा संदेश है जो आतंकवाद को बढ़ावा देते हैं ।गौरतलब है कि गत सप्ताह चार जून को मणिपुर के चंदेल जिले में ने घात लगाकर हमला किया था जिससे सेना के 18 जवान शहीद हो गए । इसके बाद सरकार ने तय किया कि के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए । उसी का नतीजा रहा कि सेना को पक्की खबर मिली कि मणिपुर और नगालैंड सीमा पर उग्रवादी फिर से हमले की साजिश रचने में लगे हैं। फिर क्या था, म्यांमार सरकार के सहयोग से योजनाबद्ध तरीके से सेना ने उग्रवादी कैंपों पर सुबह साढ़े नौ बजे हमला बोल दिया ।सेना की इस कार्रवाई में अभी तक 100 से ज्यादा के मारे जाने की खबर हैं। इनमें ज्यादातर वही उग्रवादी थे जो घात लगाकर 18 जवानों की हत्या करने में शामिल थे । इस अभियान में के दो कैंप पूरी तरह से तबाह कर दिए गए हैं । 18 जवानों की हत्या के बाद निराश और क्रोधित भारतीय सेना के लिए इस कार्रवाई को मनोबल ऊंचा करने वाला बताया जा रहा है। इस कार्रवाई में सेना के दोनों विंग थलसेना और वायुसेना का इस्तेमाल किया गया ।सेना के सूत्रों का कहना है कि 1993 के बाद भारतीय सेना ने म्यांमार बॉर्डर पार करके ऐसे कार्रवाई को अंजाम दिया और इसमें वहां की सरकार व सेना ने भी भारतीय सेना का भरपूर सहयोग किया । सूत्रों के अनुसार भारतीय पैरा कमांडो सुबह MI-17 हेलीकॉप्टर से म्यांमार सीमा में गए और ऑपरेशन को अंजाम देकर वापस लौट आए । खास बात ये भी कि इस कार्रवाई में कोई भी कमांडो घायल तक नहीं हुआ ।इससे पहले 2003 में सेना ने ऐसा ऑपरेशन भूटान सीमा में घुसकर उल्फा के खिलाफ किया था । सेना ने जिस तरह की कार्रवाई की है, ऐसे ही हालात 2008 में मुंबई हमले के वक्त भी बन गए थे । उस समय भी नियंत्रण रेखा (एलओसी) पार करके पाक अधिकृत कश्मीर (पीओके) में ऐसी ही कार्रवाई की बात कही जा रही थी, लेकिन सरकार की ओर से ग्रीन सिग्नल न मिलने की वजह सेना सरहद पार बैठे आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं कर पाई । वैसे म्यांमार से लगी भारत की सीमा 1643 किलोमीटर लंबी है। दोनों देशों के बीच पाकिस्तान सीमा का तरह बाड़ नहीं लगी है। इसकी का फायदा कई दफा उग्रवादी संग्ठन उठाते हैं और यही वजह है कि 4 जून को उग्रवादी मणिपुर में सेना के काफिले पर हमला करने के बाद म्यांमार की तरफ भाग निकले थे।

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