सत्ता सेवा के 55……

अनिल अनूप 

राष्ट्रपति अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव का जवाब देते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने ‘सत्ता भोग’ के 55 साल और ‘सेवा-भाव’ के 55 माह की तुलना पेश की। अपनी सरकार के पांच साला कार्यकाल का रिपोर्ट कार्ड देश के सामने रखा। राष्ट्रपति अभिभाषण पर यह भी संसदीय परंपरा है, लेकिन पक्ष और विपक्ष ने 2019 के आम चुनाव के मद्देनजर अपने-अपने प्रभाव क्षेत्रों को संबोधित किया। कदाचित प्रधानमंत्री मोदी का लोकसभा में यह आखिरी भाषण था। इस बार उन्होंने रोजगार के कुछ आंकड़े पेश किए, राफेल विमान सौदे पर पहली बार बोले और उसके जरिए कांग्रेस सरकारों की रक्षा-खरीद की नीति पर प्रहार किए और यह साबित करने की भी कोशिश की कि संविधान, लोकतंत्र और संवैधानिक संस्थाओं की सबसे अधिक तबाही और बर्बादी कांग्रेस ने ही की है। अपने राजनीतिक और चुनावी भाषण की शुरुआत उन्होंने ‘मोदीमय मुहावरे’ से की ‘उल्टा चोर चौकीदार को डांटे।’ यह राफेल विवाद पर ‘चौकीदार चोर है’ के राहुल गांधी के नारे का भी पलटजवाब था। बेरोजगारी सबसे संवेदनशील मुद्दा रहा है, जो मोदी सरकार के खिलाफ ताकतवर युवा पीढ़ी के जनमत को लामबंद कर सकता है। प्रधानमंत्री मोदी ने उस चक्रव्यूह को भेदने की कोशिश की है और पहली बार वोट देने वाले करोड़ों युवा मतदाताओं को लोकतंत्र की मुख्यधारा में शामिल होने की बधाई भी दी है। प्रधानमंत्री 55 साल की कांग्रेस सरकारों को ‘सत्ता का भोग’ और भाजपा-एनडीए की 55 माह की सरकार को ‘सेवा-भाव’ की संज्ञा देते हैं, लिहाजा तुलना करते हुए देश के सामने यथार्थ पेश करते हैं कि आखिर उनकी सरकार ने क्या-क्या काम किए हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने पहली बार विस्तृत फलक पर रोजगार के ब्योरे लोकसभा में रखे हैं। उन्होंने आरोपिया भाषा में कहा कि 55 साल की कांग्रेस सत्ता के दौरान रोजगार की कोई मानक व्यवस्था ही नहीं थी। प्रधानमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि 85-90 फीसदी नौकरियां और रोजगार असंगठित क्षेत्र और 10-15 फीसदी संगठित क्षेत्र में दी जाती रही हैं। उन्होंने दावा किया कि 2017 और नवंबर, 2018 के बीच करीब 15 माह में करीब 1.80 करोड़ युवा पहली बार भविष्य निधि (पीएफ) से जुड़े और उनकी उम्र 28 साल से कम थी। जाहिर है, उन्हें नौकरी मिली होगी, तभी उनका पीएफ काटा गया। असंगठित क्षेत्र में प्रधानमंत्री मोदी ने ब्योरे दिए कि बीते चार सालों के दौरान करीब 36 लाख ट्रक जैसे भारी वाहन और करीब 27 लाख ऑटो खरीदे गए। उन्हें पार्किंग के लिए तो खरीदा नहीं गया होगा। परिवहन क्षेत्र में करीब 2.25 करोड़ रोजगार पैदा हुए। एनपीएस में 1.20 करोड़ नए पेंशनर रजिस्टर हुए। होटल में करीब 50 फीसदी की बढ़ोतरी हुई और पर्यटन के क्षेत्र में करीब 1.50 करोड़ लोगों को रोजगार मिला। प्रधानमंत्री ने राष्ट्रीय राजमार्ग, रेलवे स्टेशनों के आधुनिकीकरण, हवाई अड्डों और करोड़ों घरों के निर्माण में भी रोजगार मुहैया कराने का उल्लेख किया। अब सवाल है कि क्या देश रोजगार संबंधी प्रधानमंत्री मोदी की इस परिभाषा को स्वीकार करेगा? प्रधानमंत्री बनने से पहले मोदी ने जो दो करोड़ सालाना नौकरियां और रोजगार देने का देश से वादा किया था, क्या वह यही है? प्रधानमंत्री के इन ब्योरों पर देश की प्रतिक्रिया क्या होगी, यह 2019 का जनादेश ही तय करेगा, लेकिन अब बेरोजगारी और नौकरियों पर राजनीति एकतरफा नहीं होगी। प्रधानमंत्री मोदी ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा चूंकि कांग्रेस वायुसेना को मजबूत नहीं देखना चाहती, लिहाजा राफेल सौदा रद्द कराना चाहती है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर कांग्रेस किस कंपनी को राफेल का काम दिलाना चाहती है? प्रधानमंत्री का यह भी आरोप था कि करीब 30 सालों तक कांग्रेस सरकारों ने सेना को निहत्था बनाए रखा। बुलेट प्रूफ जैकेट तक नहीं खरीदी गईं। 55 साल की सत्ता के दौरान दलाली के बिना कोई भी रक्षा सौदा नहीं किया गया। राफेल के पूरे ब्योरे देखकर ही सुप्रीम कोर्ट ने उसे क्लीन चिट दी है। इसी संदर्भ में प्रधानमंत्री ने संवैधानिक संस्थाओं का भी जिक्र किया। कांग्रेस सरकार ने आपातकाल थोपा, सेना को अपमानित किया, अनुच्छेद 356 के तहत 100 बार चुनी हुई राज्य सरकारों को बर्खास्त किया, अकेले इंदिरा गांधी ने ही 50 बार इसका दुरुपयोग किया, देश के प्रधान न्यायाधीश के खिलाफ महाभियोग लाने की साजिश की, योजना आयोग को गाली दी, चुनाव आयोग पर आरोप लगाए और कैबिनेट के निर्णय को सरेआम फाड़ा। संविधान और संवैधानिक संस्थाओं को बर्बाद हमने किया है या 55 साल की सरकारों के दौरान किया गया। बहरहाल कई और मुद्दे प्रधानमंत्री मोदी ने उठाए हैं, जिनके जरिए चुनावी एजेंडा तय करने की कोशिश की गई है।

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