आर्यजगत के संन्यासी एवं विद्वानों का सम्मान

ओ३म्


“डीएवी कालेज प्रबन्ध समिति, दिल्ली का आभार एवं धन्यवाद”           

     आर्य प्रादेशिक प्रतिनिधि सभा, दिल्ली और डी0ए0वी0 कालेज मैनेजमेंट कमेटी, दिल्ली की ओर से महात्मा हंसराज जी का जयन्ती समारोह इस वर्ष दिनांक 20-4-2019 को पुणे के डी0ए0वी0 पब्लिक स्कूल में आयोजित किया गया। इस समारोह में आर्यजगत के 18 विद्वानों को सम्मानित करने की योजना बनी। इस कार्यक्रम में देश के विभिन्न स्थानों से 17 विद्वानों पुणे पहुंचे जिनके आगमन, प्रस्थान, निवास एवं सम्मान आदि की भव्य योजना सफलतापूर्वक सम्पन्न की गई। उत्तरकाशी के एक आश्रम में निवास करने वाले स्वामी वेदानन्द सरस्वती जी को हमारे साथ जाना था परन्तु वह अस्वस्थ होने के कारण पूणे की यात्रा नहीं कर सके। हमें इन 18 विद्वानों में सम्मिलित किया गया और हम भी देहरादून के डी0ए0वी0 पब्लिक स्कूल के संस्कृताचार्य एवं धर्मशिक्षक श्री गिरीश चन्द्र जोशी जी के साथ पुणे समारोह में उपस्थित हुए। डी0ए0वी0 कालेज प्रबन्ध समिति के प्रधान यशस्वी श्री पूनम सूरी जी ने सभी विद्वानों को मंच पर आसन देकर एक-एक कर उनका शाल, तुलसी के पौधे, सम्मान पत्र सहित नगद धनराशि देकर सम्मान किया। आयोजन में हजारों की संख्या में श्रोता भी थे तथा मंच पर डी0ए0वी0 कालेज के प्रमुख सहयोगियों सहित आमत्रित विद्वान भी सम्मिलित थे। इससे पूर्व आयोजित वृहद एवं भव्य देवयज्ञ में डॉ0 पूनम सूरी जी सपत्नीक यजमान थे। उन्होंने सभी आमंत्रित विद्वानों से आशीर्वाद लिया और वहां उपस्थित सभी नर-नारियों पर गुलाब के लाल पुष्प की पंखड़ियों से उनके निकट जाकर पुष्प वर्षा की।

                हम इन विद्वानों सहित अपने सम्मान के लिये आर्य प्रादेशिक प्रतिनिधि सभा, दिल्ली एवं डी0ए0वी0 प्रबन्धन कमेटी, दिल्ली का हृदय से आभार व्यक्त करने सहित कृतज्ञता एवं धन्यवाद ज्ञापित करते हैं। इन सभी विद्वानों ने पुणे पहुंच कर, वहां कार्यक्रम के संचालकों से मिलकर तथा हंसराज जयन्ती समारोह की प्रस्तुतियों को देखकर प्रसन्नता का अनुभव किया। हम समझते हैं कि डी0ए0वी0 स्कूल एवं कालेजों में देश में जो लगभग 30 लाख बच्चे शिक्षा प्राप्त करते हैं, वह अन्य ईसाई संस्थाओं द्वारा चलाये जा रहे पब्लिक स्कूलों में दी जाने वाली ईसाईमत की शिक्षा आदि के प्रभाव से कुछ-कुछ बच पा रहे हैं। इन बच्चों को महर्षि दयानन्द, आर्य महापुरुषों एवं आर्यसमाज आन्दोलन सहित आर्यसमाज के सिद्धान्तों एवं मान्यताओं से परिचित कराया जाता है। सभी विद्यालयों में धर्म-शिक्षक नियुक्त हैं जो इस कार्य को करते हैं। स्कूलों में यज्ञ आदि का भी अनुष्ठान होता है। वैदिक धर्म एवं संस्कृति की महत्ता का प्रकाश इन स्कूलों एवं कालेजों के आचायों वा अध्यापक-अध्यापिकाओं सहित विद्यार्थियों को प्राप्त होता है। दिनांक 20-4-2019 को आयोजित समारोह में हजारों लोगों के जनसमूह को सम्बोधित करते हुए सभा एवं कमेटी के प्रधान डॉ0 पूनम सूरी जी ने महात्मा हंसराज जी के जीवन का विस्तार से परिचय दिया और उनके जीवन के त्याग व तप की प्रमुख रूप से चर्चा व विवेचना करते चर्चा करते हुए महात्मा जी के आर्यसमाज के प्रचार प्रसार व सामाजिक महत्व के कार्यों में योगदान को रेखांकित किया। इस विषयक जानकारी हम कुछ देर बाद एक अन्य लेख के माध्यम से देने का प्रयत्न करेंगे।

                हमें इस आयोजन में उपस्थित होकर प्रसन्नता का अनुभव हुआ और डी0ए0वी0 स्कूल व कालेजों के कार्यों को देखने व समझने का भी अवसर मिला। हम आज के समय में डी0ए0वी0 स्कूल व कालेज आन्दोन के विस्तार की आवश्यकता अनुभव करते हैं जिसका कारण ईसाई मिशनिरियों के स्कूलों में कराई जाने वाली बच्चों की प्रार्थना व संस्कार हैं। अभी कुछ दिन पूर्व ही अपने पड़ोस की एक पांच वर्षीय बच्ची से उसके स्कूल की प्रार्थना सुनकर हमें चिन्ता व दुःख हुआ। आज हम अनेक गुरुकुलों में भी देखते हैं कि वहां सीबीएसई पाठ्यक्रम को अपनाया गया है और उन्हें आधुनिक विषयों सहित कम्प्यूटर शिक्षा का भी ज्ञान कराया जाता है।

                जिन विद्वानों को इस आयोजन में सम्मान कि लिये आमंत्रित किया गया, उनके नाम इस प्रकार हैं:

1-  स्वामी श्रद्धानन्द जी (परली, महाराष्ट्र)

2-  स्वामी वेदानन्द सरस्वती जी (उत्तरकाशी, उत्तराखण्ड)

3-  स्वामी आशुतोष परिव्राजक (रोजड, गुजरात)

4-  आचार्य सत्यानन्द वेदवागीश (अजमेर, राजस्थान)

5-  डॉ0 कुंजदेव मनीषी (नैष्ठिक ब्रह्मचारी) (आमसेना, उड़ीसा)

6-  स्वामी गुरुकुलानन्द कच्चाहारी (पिथौरागढ़, उत्तराखण्ड)

7-  स्वामी शुद्धानन्द सरस्वती (कोलाघाट, पश्चिमी बंगाल)

8-  स्वामी धर्मानन्द सरस्वती (बहरोड़, राजस्थान)

9-  श्रीमती इन्दुमती हरिदास सावंत (लातूर, महाराष्ट्र)

10- आचार्य उदयन मीमांसक (हैदराबाद, तेलगाना)

11- डॉ0 रघुवीर वेदालंकार (दिल्ली)

12- श्री मनमोहन कुमार आर्य (देहरादून, उत्तराखण्ड)

13- पण्डित योगिराज ‘भारती’ (परली वैद्यनाथ, महाराष्ट्र)

14- श्री योगेन्द्र कुमार उपाध्याय (गुरुकुल आमसेना, उड़ीसा)

15- श्री रामचन्द्र क्रान्तिकारी (सीतामढ़ी, बिहार)

16- डॉ0 ब्रह्मदत्त (कोलाघाट, पश्चिम बंगाल)

17- श्री योगेन्द्र याज्ञिक (होशंगाबाद, मध्यप्रदेश)

18- आचार्य विजयवीर विद्यालंकार (हैदराबाद, तेलंगाना)

                हम एक बार पुनः इस आयोजन में आर्यजगत के शीर्ष विद्वानों का सम्मान करने सहित हमें भी आमंत्रित करने के लिये आर्य प्रादेशिक प्रतिनिधि सभा एवं डी0ए0वी0 स्कूल मैनेजमेंट कमेटी, दिल्ली का साधुवाद, आभार, कृतज्ञता ज्ञापन एवं हार्दिक धन्यवाद करते हैं। ओ३म् शम्।

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