अखिल भारत हिंदू महासभा ने की मांग सावरकर जी को मिले भारत रत्न, देश की राजधानी दिल्ली में स्थित अकबर रोड का नाम किया जाए सावरकर मार्ग, बने इतिहास शोध संस्थान और शांतिवन के पास स्थापित किया जाए क्रांति वन

नई दिल्ली। अखिल भारत हिंदू महासभा की आज एक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक संपन्न हुई । जिसमें पार्टी पदाधिकारियों ने वीर सावरकर जी को उनकी जयंती के अवसर पर याद कर भावपूर्ण पुष्पांजलि अर्पित की। पार्टी ने हिंदूवादी चिंतन के महानायक और क्रांतिवीर सावरकर के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की।
इस अवसर पर पार्टी ने मांग की है कि क्रांतिवीर सावरकर जी को भारत रत्न प्रदान किया जाए। इस संबंध में जारी की गई प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से पार्टी के राष्ट्रीय राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संदीप कालिया ने कहा कि सावरकर जी का चिंतन और दर्शन इस देश के लिए जितना 1947 में उपयोगी था , उससे अधिक आज उपयोगी है । क्योंकि कांग्रेस की सरकारों के माध्यम से जिस प्रकार देश के हिंदू समाज की उपेक्षा कर समाज में विसंगतियां उत्पन्न की गई हैं , उन्हें दूर करने में सावरकर जी का चिंतन सहायक हो सकता है।
श्री कालिया ने कहा कि केंद्र की मोदी सरकार के रहते देश के हिंदू जनमानस में यह प्रबल इच्छा रही है कि स्वातंत्र्यवीर सावरकर जी को यथाशीघ्र भारत रत्न प्रदान किया जाए , परंतु इस अपेक्षा पर केंद्र की मोदी सरकार और महाराष्ट्र की उद्धव सरकार दोनों ही खरी नहीं उतर पा रही हैं , जबकि दोनों ही पार्टियां सावरकर जी को अपना आदर्श मानकर राजनीति करती रही हैं । उन्होंने कहा कि हम केंद्र की मोदी सरकार से फिर अनुरोध करते हैं कि वह सावरकर जी को उनका यथोचित सम्मान प्रदान करते हुए उन्हें भारत रतन देकर इतिहास में भी उनके साथ किए गए अन्याय को समाप्त करने की दिशा में ठोस पहल करे।
श्री कालिया ने कहा कि राजघाट के पास शांतिवन के साथ ही एक स्थान क्रांतिवन के नाम से देश के अमर क्रांतिकारी सावरकर जी को समर्पित किया जाए। जिसमें 1857 की क्रांति से लेकर 1947 तक के सभी क्रांतिकारियों के महान आंदोलनों को दीवारों पर इस प्रकार चित्रित किया जाए जिससे आजादी के आंदोलन का छुपा हुआ इतिहास अपना सही स्थान प्राप्त कर जाए और लोगों को देश के क्रांतिकारियों और उनके आंदोलनों की सही जानकारी हो सके। पार्टी ने यह भी मांग की है कि देश की राजधानी दिल्ली में इंडिया गेट के पास भी क्रांतिकारियों को समर्पित ऐसा ही एक स्थल विकसित किया जाए। जिसमें सावरकर जी की आदमकद प्रतिमा स्थापित की जाए। इसके अतिरिक्त पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बाबा नंद किशोर मिश्र ने कहा कि देश की राजधानी दिल्ली में स्थित अकबर रोड का नाम बदलकर इतिहास के महानायक सावरकर जी के नाम पर सावरकर मार्ग किया जाए।
पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में पार्टी के वरिष्ठ राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ राकेश कुमार आर्य ने अपने विचार व्यक्त करते हुए क्रांतिकारियों के सिरमौर वीर सावरकर जी के नाम पर इतिहास शोध संस्थान स्थापित कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि सावरकर जी इतिहास का गहरा ज्ञान रखते थे और इतिहास का गौरव पूर्ण ढंग से लेखन करना उनके जीवन का उद्देश्य था। उनका वह सपना तभी साकार हो सकता है जब इतिहास शोध संस्थान जैसी संस्था देश में स्थापित हो। जिसमें इतिहास को दोबारा नए सिरे से गौरव पूर्ण ढंग से लिखे जाने कीआवश्यकता है। पार्टी के महासचिव एस.डी. विजयन , राष्ट्रीय संगठन मंत्री योगी जय नाथ जी महाराज, राष्ट्रीय कार्यालय मंत्री विपिन खुराना, राष्ट्रीय संगठन सचिव श्रीनिवास आर्य, राष्ट्रीय सह कार्यालय मंत्री सत्यजीत कुमार, राष्ट्रीय कार्यालय सचिव नीरपाल भाटी ने भी सावरकर जी के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की और अपने विचार व्यक्त किए।

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  1. कैसी विडंबना है इंडिया में रहते कोई इतिहास शोध संस्थान स्थापित किये जाने की बात करे! जब रक्तरंजित इंडिया-विभाजन के पश्चात अलग पाकिस्तान बन गया और समय बीतते मुक्ति युद्ध के उपरान्त मार्च २६, १९७१ को पूर्वी पाकिस्तान स्वतंत्र बांग्लादेश भी बना तो आज ज्यों के त्यों अपनाए अंग्रेजों द्वारा दिए विधिक ग्रंथों में अंग्रेजी भाषा व कार्यशैली-आधारित शेष रह गए इंडिया में किस प्रकार के शोधकार्य की अपेक्षा की जा रही है? इस बीच हमारे पड़ोसी देश, बर्मा से म्यान्मार व सीलोन से श्री लंका बन गए| उन्नीस सौ सैंतालीस में स्वतन्त्र देश को भारतवर्ष के नाम से यदि परिभाषित किया गया होता तो जिस प्रकार इंडिया में हिंदू समाज की उपेक्षा कर समाज में जब कभी विसंगतियां उत्पन्न की गई हैं, भारतवर्ष में सनातन धर्म के प्रचलन अथवा धर्म के पालन हेतु आचरण व अनुशासन द्वारा वे स्वतः दूर हो चुकी होतीं| |

    आज सकारात्मक राजनीतिक वातावरण में क्यों न हम पहले इंडिया को भारतवर्ष के नाम में परिवर्तित करने की मांग करें ताकि उपयुक्त आधार पर आधारित समाज के सभी क्षेत्रों में राष्ट्र हित विकास-उन्मुख कार्यकलाप में न केवल इतिहास शोध संस्थान ही नहीं अन्य प्राथमिकताओं पर भी बात की जा सके|

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