मध्‍य प्रदेश में आत्‍मनिर्भर भारत के तहत आयुर्वेद में डिप्लोमा पाठ्यक्रम होगा शुरू

डॉ. मयंक चतुर्वेदी


भोपाल, 21 दिसम्‍बर(हि.स.)। मध्‍य प्रदेश में इन दिनों संस्‍कृत भाषा के लिए अनेक नए प्रयोग शुरू हुए हैं, शासन स्‍तर पर आरंभ हुए इन सभी प्रयासों से आशा यही है कि संस्‍कृत विशिष्‍टता से नीचे उतरकर आम लोगों की भाषा बने और पुरातन संसकृत साहित्‍य में जो ज्ञान का खजाना भरा हुआ है, वह आज जनमानस तक सहजता से पहुंच सके। इसके लिए अब स्‍कूली शिक्षा विभाग के मंत्री इंदर सिंह परमार ने जैसे कमर कसली हो, सोमवार जिस तरह से महर्षि पतंजलि संस्‍कृत संस्‍थान की बैठक उन्‍होंने ली और एक के बाद एक संस्‍कृत उत्‍थान के उनके जो निर्णय लिए गए, उससे अब यही लग रहा है कि प्रदेश में संस्‍कृत का मान गौरव बढ़ने जा रहा है।

दरअसल, संस्‍कृत आज भी कुछ लोगों तक सीमित भाषा बनी हुई है, जिसके चलते उसमें समाहित गहरे ज्ञान का लाभ आम लोगों को नहीं हो पा रहा। ऐसे में सोमवार को महर्षि पतंजलि संस्‍कृत संस्‍थान की समीक्षा बैठक लेते हुए मंत्री श्री परमार ने कहा है कि ”संस्कृत भाषा उपेक्षा की नहीं, अपेक्षा की भाषा बनना चाहिए और इसलिए हमारे ये सभी प्रयास हैं।” उन्‍होंने कहा कि ”संस्कृत में प्राचीन ज्ञान की वैज्ञानिक परंपरा मिलती है, यदि वर्तमान में उसका अध्ययन और विस्तार से शोध किया जाता है तो निश्चित तौर पर उस में बहुत कुछ ऐसा है जो आज भी हमारे समाज जीवन के लिए अत्‍यधिक उपयोगी है। ”

उन्होंने कहा कि संस्कृत भाषा के उन्नयन, इसमें निरंतर के नवाचारों के लिए हमारी कोशिश है कि विभिन्न विषयों को लेकर केंद्र सरकार से अनुदान प्राप्त किया जाए, जिसके लिए वे अति शीघ्र मानव संसाधन मंत्री डॉ. निशंकजी से मिलने वाले हैं । उन्होंने आज इस समीक्षा बैठक में जिन महत्वपूर्ण विषयों पर अपनी बात रखी और अधिकारियों को निर्देश दिए, उसमें प्रमुखता से निर्णय किया गया कि एनसीआर के अनुरूप 55 पाठ्य पुस्तकों को बाल मनोविज्ञान की दृष्टि से संस्‍कृत में तैयार कराया जाएगा । प्रदेश के 5 मॉडल स्कूल जो संस्कृत के चल रहे हैं उन सभी में वर्तमान में लोगों की कमी है, इस कमी को अतिशीघ्र दूर करते हुए इन्‍हें आवासीय बनाया जाएगा तथा वर्तमान में हायर सेकेंडरी में उपलब्ध पदों का नवीन सेटअप यहां उपलब्ध कराया जाएगा।

इसके साथ ही 28 शासकीय संस्कृत विद्यालयों में भी गार्गी विद्यालय आवासीय के समान ही पद संरचना उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए । वहीं, प्रदेश के हर जिला मुख्यालय पर एक शासकीय विद्यालय में अरुण (एलकेजी), उदय (यूकेजी) सिलेबस की कक्षा 4 तक में भी संस्कृत कक्षा प्रारंभ की जाएगी। उल्लेखनीय है कि पूर्व में संस्कृत का अध्‍ययन कक्षा 5 से प्रारंभ होता था । लेकिन अब हर जिले में एक मॉडल विद्यालय तैयार कर यह संस्‍कृत शिक्षा कक्षा एलकेजी से शुरू हो सकेगी । इसके अलावा शासकीय आदर्श संस्कृत विद्यालय उज्जैन का महाकालेश्वर वेदिक संस्थान में संविलियन करने की कार्रवाई भी किए जाने का निर्णय मंत्रीद्वय ने लिया है ।

साथ ही आत्मनिर्भर भारत के तहत आयुर्वेद में डिप्लोमा पाठ्यक्रम मध्यप्रदेश में शीघ्र प्रारंभ करने का निर्णय लिया गया है । संस्कृत भाषा को कंप्यूटर की भाषा बनाने हेतु एक राष्ट्रीय कांफ्रेंस का आयोजन भी आने वाले दिनों में मध्यप्रदेश में होने जा रहा है, इसके साथ ही अन्‍य कई प्रकार के नवाचार भी आरंभ होंगे । समीक्षा बैठक में मंत्री परमार ने कहा है कि उज्जैन की वेधशाला को विश्व स्तरीय बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं, वह अतिशीघ्र नए स्‍वरूप में हम सभी के सामने होगी । इसके अलावा पंचशील नगर को भोपाल में संस्कृत भाषा बोलने वाला नगर बनाए जाने पर महर्षि पतंजलि संस्थान द्वारा काम शुरू कर दिया गया है, श्री परमार ने कहा है कि संस्‍कृत के विकास एवं उन्‍नयन में कोई कमी नहीं आने दी जाएगी, जहां जिसको जैसी जरूरत हो इस कार्य के लिए वह कभी भी निसंकोच आकर मुझसे मिल सकता है।

उल्लेखनीय है कि स्‍कूली शिक्षा मंत्री बनने के बाद 8 दिसंबर को महर्षि पतंजलि संस्कृत संस्थान का श्री परमार ने कार्यभार ग्रहण किया था, उसके बाद यह उनकी पहली संस्थान की समीक्षा बैठक थी । इस बैठक के दौरान निदेशक पीआर तिवारी, उपनिदेशक प्रशांत डोलस सहित तमाम पदाधिकारी मौजूद रहे।

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