2019 के युद्ध का असर


अनिल अनूप

दिल्ली के रामलीला मैदान में भारतीय जनता पार्टी की राष्ट्रीय परिषद की बैठक में बोलते हुए भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने कहा कि 2019 का चुनाव वैचारिक युद्ध का चुनाव है। दो विचारधाराएं आमने सामने खड़ी हैं। 2019 का युद्ध सदियों तक असरछोडऩे वाला है और इसलिए मैं मानता हूं कि इसे जीतना बहुत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि 2019 का चुनाव भारत के गरीब के लिए बहुत मायने रखता है। स्टार्टअप को लेकर निकले युवाओं के लिए ये चुनाव मायने रखता है। करोड़ों भारतीय जो दुनिया में भारत का गौरव देखने चाहते हैं उनके लिए ये चुनाव मायने रखता है। विपक्ष के महागठबंधन को ढकोसला करार देते हुए उन्होंने कहा कि एक-दूसरे का मुंह न देखने वाले आज हार के डर से एक साथ आ गए हैं, वो जानते हैं कि अकेले नरेंद्र मोदी को हराना मुमकिन नहीं है। शाह ने कहा कि 2014 के चुनाव में हम इन दलों को पराजित कर चुके हैं और आगे भी इन्हें पराजित करेंगे। भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि उत्तर प्रदेश में भाजपा की सीट 73 से बढ़कर 74 सीटें होगी, यह 72 नहीं होगी। उन्होंने दावा किया कि 2019 में भाजपा के नेतृत्व में राजग की सरकार बनेगी। अमित शाह ने कहा कि ये अधिवेशन भारतीय जनता पार्टी के देशभर में फैले कार्यकर्ताओं के लिए संकल्प करने का अधिवेशन है। उन्होंने कहा कि भाजपा कार्यकर्ता अयेज योद्धा ‘मोदी’ के नेतृत्व में चुनाव में जा रहे हैं। ऐसे में कार्यकत्र्ताओं को जोश में बढऩा चाहिए लेकिन होश नहीं खोना चाहिए। शाह ने कहा कि भाजपा चाहती है कि जल्द से जल्द उसी स्थान पर भव्य राम मंदिर का निर्माण हो और इसमें कोई दुविधा नहीं है। उन्होंने कहा, ‘हम प्रयास कर रहे हैं कि सुप्रीम कोर्ट में चल रहे केस की जल्द से जल्द सुनवाई हो लेकिन कांग्रेस इसमें भी रोड़े अटकाने का काम कर रही है। 

भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने 2019 के लोकसभा चुनावों को वैचारिक युद्ध करार देते हुए इसे ब्रिटिश-मराठा युद्ध के साथ जोड़ते हुए कहा कि 131 युद्ध जीतने वाले मराठों के एक युद्ध के हारने से देश 200 वर्षों तक अंग्रेजों का गुलाम रहा। स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात शायद पहली बार होने वाले लोकसभा चुनाव देश के जन के सम्मुख एक बड़ी चुनौती बनकर सामने आया है। लोकसभा चुनाव में जिस तरह भाजपा को मात देने के लिए विभिन्न विचारधाराओं वाली तथा आपसी मतभेद के कारण एक दूसरे के विरोधी राजनीतिक दल करीब आ रहे हैं। उससे तो स्पष्ट है कि बिना किसी सैद्धांतिक या विचारधारा की सहमति के यह दल केवल और केवल भाजपा को एकता से और विशेषतया नरेन्द्र मोदी को पद से हटाने के लिए इकट्ठे हुए हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का केवल इतना कसूर है कि वह राष्ट्रहित को प्राथमिकता देते हुए सबको साथ ले सबका विकास हेतु ही उनकी नीतियां हैं। प्रशासनिक, राजनीतिक, आर्थिक तथा सामाजिक स्तर पर मोदी सरकार ने वह बड़े कदम उठाए जो पिछली स. मनमोहन सिंह की सरकार सोचकर भी नहीं उठा पाई। धर्मनिरपेक्षता के नाम पर जो तृष्टिकरण का खेल देश में चला आ रहा था उस पर राष्ट्रवादी नीतियों से लगाम लगाई तथा भ्रष्टाचार को रोकने हेतू गरीब आदमी को बैंकों के साथ जोड़ उन्हें सीधी वित्तीय सहायता देनी शुरू की जिससे देश की आर्थिक स्थिति में एक सकारात्मक बदलाव आया। जीएसटी की दरों को व्यवहारिक बनाते हुए छोटे और मध्यम श्रेणी के उद्यमियों और व्यापारियों को राहत मोदी सरकार दे रही है। विपक्ष भ्रम और भ्रातियां फैलाने में लगा हुआ और मोदी सरकार को कटघरे में खड़ा करने का प्रयास कर रहा है। विपक्ष की आवाज के साथ आवाज मिलाने वाले अधिकतर वह ही लोग है जिनकी रीति-नीति पर मोदी सरकार की नीतियां नकेल डालने में सफल रही है। 2019 के लोकसभा चुनाव देश का भविष्य निर्धारित करने वाले होंगे। यह चुनाव मात्र चुनाव न होकर देश की दशा और दिशा को निर्धारित करने वाले होंगे। इसलिए साधारण जन के साथ साथ राजनीतिक दलों को भी सतर्क होकर जिम्मेवारी से अपना कर्तव्य निभाना होगा। भाजपा अध्यक्ष इसे जब विचार धाराओं की लड़ाई कहते हैं तो उचित ही कहते हैं।    

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

* Copy This Password *

* Type Or Paste Password Here *

Captcha verification failed!
CAPTCHA user score failed. Please contact us!