Homeराजनीतिविषम परिस्थिति में ही मनुज रुप ईश्वर अवतरित होते

विषम परिस्थिति में ही मनुज रुप ईश्वर अवतरित होते

—विनय कुमार विनायक
स्त्री की रक्षा करना सीखो गिद्ध जटायु से
परित्यक्ता सती नारीकी परवरिश करना सीखो
डाकूरत्नाकर से महाकवि बनेबाल्मीकि से!

नारी के बलात्कारी को संहार करो भीमबनकर
रावण जैसेअत्याचारी का नाश करना सीखो
वन केतुच्छवानर,हनुमान, भालूप्रजातिसे!

अच्छा काम करने के लिए जरूरी नहीं
कुलीन जातिवर्ण समाज में जन्म लेना
अच्छा काम करने के लिए जरूरी है
बुरे से बुरे वक्त में भी अच्छा निर्णय लेना!

अजामिल से सीखो संतति का नाम चयन करना,
स्वनाम धन्य संतान पैदा कर मुक्ति पाओ,
पुत्र का नाम पुकार कर भगवत भजन गाओ!

अजामिलचाहते तो तैमूरलंग जैसेहत्यारेराक्षस
का नाम रख सकते थेअपनेपुत्र नारायण का,
फिर युगों तक आदर्श कथा के नायक वे नहीं होते!

अगरसमाज ने नारी को गणिका बनाया,
तो क्यागणिका ने ईश्वर का नाम सुआ को पढ़ाकर
पाप योनि से मानव को मुक्ति पानानहीं सिखा गई?

कोई जरुरी नहीं कि मानव कोसदापरिस्थितिठीकमिले,
महामानव तोबनते ही हैं विषम परिस्थिति से निकल के!

अगर महाराणा प्रतापघास की रोटी नहीं खाते
तो आक्रांता बाबर पौत्र अकबर की नींदकैसे उड़ाते!

अगर गुरु अर्जुनदेवव उनकेप्रपौत्र गुरु तेग बहादुर को
जहांगीरवऔरंगजेब नेबर्बरतासेशहीदनहींकिएहोते,
तोनानकके संतसिखलड़ाकू सिपाहीकैसे बनजाते!

अगर बिहार पंजाब में गुरु गोविंद सिंह सोढ़ी
और महाराष्ट्र मेंशिवाजी महाराज नहीं जन्मलेते,
तो क्रूर अताताई औरंगजेब से देशकौनउबारते?
विषम स्थिति में ही मनुज रुप मेंईश्वरअवतरित होते!
—विनय कुमार विनायक

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