प्रकृति के दोहन से मानव अस्तित्व खतरे में – सरताज

OB-US274_iflood_H_20120925061831 मानव द्वारा प्रकृति का इतना दोहन किया गया कि मानव के अस्तित्व पर खतरा मंडराने लगा है, जब भूमि ही नहीं रहेगी तो जीवन के अस्तित्व पर खतरा उत्पन्न हो जायेगा। हो रही बंजर भूमि, भूमि क्षरण के लिए मानव द्वारा रासायनिक खादों का प्रयोग है। जीवन के लिए भूमि को बचाना अनिवार्य हो गया है। उक्त बातें भारतीय जीवन कल्याण समिति के बैनरतले राष्ट्रीय पर्यावरण जागरूकता अभियान के तहत एक कार्यक्रम में पूर्व कमोडोर इण्डियन नेवी सरताज इमाम ने कहीं।
उन्होंने हवाई एवं समुद्री यात्राओं के समय पर्यावरण प्रदूषण की समस्याओं से अवगत कराया। इस अवसर पर उन्होंने वृक्षारोपण भी किया। विशिष्ट अतिथि इलाहाबाद विश्वविद्यालय की प्रो.डा. विमला व्यास ने कहा कि महात्मा गांधी के आदर्शा पर चलते हुए प्रकृति का उतना ही दोहन करें जितनी आवश्यकता है, अन्यथा नुकसान होगा। संस्था सचिव रजिया सुल्तान ने कहा कि जीवन को बचाने के लिए भाषण की नहीं अपितु अमल की आवश्यकता है। हम सभी एक-एक पेड़ लगाये तो क्लीन इण्डिया बनाने में मदद होगी। गिरधारी लाल ने कहा कि हमें रासायनिक खादों के प्रयोग से बचना चाहिए। डी.के.शर्मा ने कहा कि भूमि को बचाने के लिए जन अभियान चलाना होगा। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए श्याम सुन्दर सिंह पटेल ने कहा कि मैं सैनिक रह चुका हूं इसलिए मैं अपना दायित्व अधिक समझता हूं, प्रकृति के बिना जीवन की कल्पना करना असंभव है।
कार्यक्रम के तहत पर्यावरण जागरूकता के लिए एक नाटक का मंचन भी किया गया जिसका शीर्षक चैन से जीना है तो जाग जाइये। नाटक में कलाकारों के रूप में इलाहाबाद विश्वविद्यालय की छात्रा मिन्जा कमर एण्ड ग्रुप शामिल रहा। कार्यक्रम में नागेन्द्र अस्थाना, पुष्पा पाण्डेय, धीरेन्द्र श्रीवास्तव, अजय राय, डा.प्रमोद शुक्ला, शैलेन्द्र सिंह, निजाम, श्याम सुुन्दर  शर्मा, रिनी येशु, जयश्री सिंह गौर, रूखसाना आदि लोग उपस्थित रहे।

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