वर्ष 2021 में सूर्य छाया पुत्री ताप्ती महाकुंभ में दस स्नान होगें


सृष्टि की प्राचिन नदी सूर्य छाया पुत्री ताप्ती का वर्ष 2021 में आने वाले कुंभ मेले के लिए गंगा में स्नान करने के बजाय नर्मदाचंल / ताप्तीचंल के लोग अनावश्क्य भीड़ – भाड़ से बचने के लिए बैतूल जिले में 250 किमी बहने वाली ताप्ती नदी में मुलताई से लेकर खण्डवा जिले की सीमा तक चिन्हीत दस पावन धामों एवं तीर्थ स्थलो पर स्नान लाभ ले सकते है। नर्मदा के बाद पूरी दुनिया में केवल ताप्ती ही अपनी मुख्य धारा पश्चिम की ओर बहते हुए विपरीत पूर्व की ओर बहने के कारण सूर्यमुखी – सूर्यमुखी – पूर्व मुखी नदी कहलाई है।
बैतूल जिले में अग्रितोड़ा में अपने पिता की ओर मुड़ कर बहने की ओर कारण ही ताप्ती को सूर्यमुखी – सूरज मूखी के नाम से पुकारा जाता है। यहां पर मकर संक्राति के पूर्व पर अधिक से अधिक संख्या में लोग स्नान – ध्यान करने आते है। बैतूल – परतवाड़ा मार्ग पर केरपानी के आगे बोरगांव – बोथिया से तथा  बैतूल आठनेर मार्ग पर सेहरा से पीपला होते हुए अग्रितोड़ा पहुंचा जा सकता है। माँ सूर्यपुत्री ताप्ती जागृति समिति मध्यप्रदेश ने वर्ष 2021 में पडऩे वाले कुंभ पर्व की दिन तीथियों के अनुसार ताप्ती महाकुंभ की तारीखो की घोषणा की है। समिति प्रदेश अध्यक्ष एवं ताप्ती भक्तरामकिशोर पंवार ने  ताप्तीचंल एवं रेवाचंल के लिए ताप्ती स्नान का कलैण्डर जारी करते हुए ताप्ती भक्तो से अपील की है कि हर व्यक्ति ताप्ती स्नान के बाद अपने संग ताप्जी जल लेकर जाए और कुंभ महापर्व में 48 दिनो मेे कोविड 19 के प्रभाव से गांव मंदिरो – मठो- तीर्थ स्थलो – पूजाघरो- पोखर – तालाबो – कुआ – बावली – और अन्य जल पाने वाले माध्यमो के साथ – साथ अपने घर – गोठान – मकान – दुकान – गली – मोहल्ला का शुद्धिकरण करे। कुंभ की तीथियों पर होने वाले स्न्नान के समय ताप्ती जल मे विशेष प्रकार के गुणो का स्वर्ग – आकाश मार्ग से विर्सजन होता है। ऐसे गुणकारी तत्वो का ताप्ती जल मे मिश्रण और उस जल में स्नान से आत्मा एवं शरीर की शुद्धि होती है।  
समिति प्रदेश अध्यक्ष श्री रामकिशोर पंवार के द्वारा जारी विज्ञिप्त के अनुसार
  2021    की सदी का पहला ताप्ती शाही कुंभ स्नान
ताप्ती महाकुंभ 2021 का पहला शाही स्नान गुरुवार 11 मार्च को शिवधाम बारहलिंग में होगा। इस दिन महाशिवरात्रि रहेगी।
  2021    की सदी का दुसरा ताप्ती शाही कुंभ स्नान
सोमवार 12 अप्रैल  2021    सोमवती अमावस्या को बैतूल परतवाड़ा रोड़ पर स्थित सूर्य परिवार मंदिर ताप्ती बैराज के सामने बैतूल में होगा।
२०२१ की सदी का तीसरा ताप्ती शाही कुंभ स्नान
बुधवार, 14 अप्रैल  2021   १ मेष संक्रांति को श्रवण तीर्थ त्रिवेणी संगम (तवा – ताप्ती – अम्भोरा ) कुटखेड़ी मुलताई में होगा।
  2021    की सदी का चौथा ताप्ती शाही कुंभ स्नान
वैशाखी, मंगलवार, 27 अप्रैल 2021    चैत्र माह की पूर्णिमा पर पारसडोह धनोरा में होगा।

पेज एक से जारी
वर्ष  2021    के पुण्य सलिला सूर्य छायापुत्री माँ ताप्ती के
250 किमी के प्रवाह क्षेत्र में आने वाले प्रमुख स्नान के दिन
गुरुवार 14 जनवरी 2021 मकर सक्रांति सूर्यमुखी / सूरज मुखी  अग्रि तोड़ा
(बैतूल आठनेर रोड़ से सेहरा – पीपला के नीचे – बैतूल से परतवाड़ा मार्ग पर बोथी बोरगांव के नीचे )
 गुरुवार, 11 फरवरी  2021    मौनी अमावस्या, ताप्ती बैराज के सामने
बैतूल से परतवाड़ा रोड़ पर सूर्य परिवार मंदिर के सामने
मंगलवार, 16 फरवरी  2021    बसंत पंचमी को बैतूल – आठनेर रोड़ के पास ताप्ती घाट
शनिवार, 27 फरवरी 2021    माघ पूर्णिमा घोघरा घाट (चोहटा – पोपटी के पास) भीमपुर
मंगलवार, 13 अप्रैल 2021    चैत्र शुक्ल प्रतिपदा (हिन्दी नववर्ष) खुर्दा घाट दामजीपुरा भीमपुर
बुधवार, 21 अप्रैल  2021    राम नवमी देवलघाट मोहटा के पास दामजीपुरा भीमपुर
सूर्य छाया पुत्री माँ पुण्य सलिला मोक्ष दायनी ताप्ती सरोवर मुलताई एवं
 शिवधाम बारहलिंग तथा श्रवण तीर्थ कुटखेड़ी में सभी तीथियों पर स्नान होगा।
कुंभ से जुड़ी प्राचीन मान्यता
कुंभ के संबंध में समुद्र मंथन की कथा प्रचलित है। इस कथा के अनुसार प्राचीन समय में एक बार महर्षि दुर्वासा के श्राप की वजह से स्वर्ग श्रीहीन यानी स्वर्ग से ऐश्वर्य, धन, वैभव खत्म हो गया था। तब सभी देवता भगवान विष्णु के पास गए। विष्णुजी ने उन्हें असुरों के साथ मिलकर समुद्र मंथन करने का सुझाव दिया। उन्होंने बताया कि समुद्र मंथन से अमृत निकलेगा, अमृत पान से सभी देवता अमर हो जाएंगे। देवताओं ने ये बात असुरों के राजा बलि को बताई तो वे भी समुद्र मंथन के लिए तैयार हो गए। इस मंथन में वासुकि नाग की नेती बनाई गई और मंदराचल पर्वत की सहायता से समुद्र को मथा गया था। समुद्र मंथन में 14 रत्न निकले थे। इन रत्नो में कालकूट, विष, कामधेनु , उच्चैश्रवा घोड़ा, ऐरावत हाथी, कौस्तुभ मणि, कल्पवृक्ष, अप्सरा रंभा, महालक्ष्मी, वारुणी देवी, चंद्रमा, पारिजात वृक्ष, पांचजन्य शंख, भगवान धनवंतरि अपने हाथों में अमृत कलश लेकर निकले थे। जब अमृत कलश निकला तो सभी देवता और असुर उसका पान करना चाहते थे। अमृत के लिए देवताओं और दानवों में युद्ध होने लगा। इस दौरान कलश से अमृत की बूंदें चार स्थानों हरिद्वार, प्रयाग, नासिक और उज्जैन में गिरी थीं। ये युद्ध 12 वर्षों तक चला था, इसलिए इन चारों स्थानों पर हर 12 – 12 वर्ष में एक बार कुंभ मेला लगता है।
कुंभ की तीथी समय में
सूर्य परिवार की भूमिका
महाकुंभ का धार्मिक महत्व तब बढ़ता है जब सूर्य परिवार के सदस्यों का उसमें योगदान होता है। सूर्य की दोनो पुत्रिया ताप्ती और यमुना के बिना महाकुंभ की कल्पना नहीं की जा सकती है। इलाहबाद में त्रिवेणी गंगा – यमुना – विलुप्त सरस्वती के संगम में यमुना और गंगा ही दिखाई देता है लेकिन मध्यप्रदेश के बैतूल जिले में तवा – ताप्ती – अम्भोरा के त्रिवेणी संगम जिसे श्रवण तीर्थ भी कहा गया है वहां पर तीनो नदियों में बीच की नदी ताप्ती है। दोनो ओर से नदियां आकर मिलती है ऐसा पूरी दुनिया में कही नही है जहां पर बहती हुई बीच की नदी में दो अगल – अगल दिशाओ की नदियां आकर मिलती है। पुण्य सलिला सूर्य पुत्री ताप्ती ही सृष्टि के निमार्ण के समय धरती पर एक मात्र जलदेवी के रूप में अवतरीत नदी है। ताप्ती के बाद ही गंगा – यमुना – सरस्वती अवतरीत हुई है।
खगोल गणनाओं के अनुसार यह मेला मकर संक्राति के दिन प्रारम्भ होता है, जब पुण्य सलिला माँ ताप्ती के पिता सूर्य और चन्द्रमा, वृश्चिक राशि में और वृहस्पति, मेष राशि में प्रवेश करते हैं।  मकर संक्राति  के होने वाले इस योग को कुम्भ स्नान – योग कहते हैं और इस दिन को विशेष मंगलकारी माना जाता है, क्योंकि ऐसा माना जाता है कि इस दिन पृथ्वी से उच्च लोकों के द्वार इस दिन खुलते हैं और इस प्रकार इस दिन स्नान करने से आत्मा को उच्च लोकों की प्राप्ति सहजता से हो जाती है। यहाँ स्नान करना साक्षात् स्वर्ग दर्शन माना जाता है। इसका हिन्दू धर्म मे बहुत ज्यादा महत्व है। 

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