जयपुर साहित्योत्सव-2018 में दिखेंगे साहित्य व कला के नये रंग, वक्ताओं के नामों की हुई घोषणा

जयपुर साहित्योत्सव-2018 में दिखेंगे साहित्य व कला के नये रंग, वक्ताओं के नामों की हुई घोषणा
में दिखेंगे साहित्य व कला के नये रंग, वक्ताओं के नामों की हुई घोषणा

साहित्य जगत का कुंभ कहे जाने वाले ‘जयपुर साहित्योत्सव’ में अगले वर्ष जनवरी में एक बार फिर से दुनिया भर के साहित्य, कला, समाज, राजनीति और सांस्कृतिक जगत के जाने-माने और प्रभावशाली लोगों एवं इसके प्रतिनिधि हस्ताक्षरों का आना तय है। यह साहित्योत्सवआपको एक नये क्लेवर में इन तमाम क्षेत्रों के विविध रंगों व आयामों से रू-ब-रू कराने को लेकर पूरी तरह से तैयार है।

‘‘जी जयपुर साहित्योत्सव’’ के 11वें संस्करण का आयोजन अगले वर्ष 25 से 29 जनवरी तक जयपुर के दिग्गी पैलेस होटल में होगा।

इस वर्ष इस महोत्सव में लगभग 35 देशों से 350 से भी अधिक लेखक, चिंतक, राजनेता, पत्रकार, सिनेमा और कला व संस्कृति जगत के लोग भाग ले रहे हैं, जिसमें अधिकतर लोग नोबेल पुरस्कार, मैन बुकर, पुलित्जर पुरस्कार, पद्म विभूषण और साहित्य अकादमी जैसे प्रतिष्ठित पुरस्कारों से सम्मानित शख्सियतें शामिल हैं, जो 15 से अधिक भारतीय और 20 अंतरराष्ट्रीय भाषाओं का प्रतिनिधित्त्व करते हैं।

कल दिल्ली स्थित ताज महल होटल में आयोजित इस महोत्सव के प्रीव्यू में आयोजकों ने इसमें भाग लेने वाले वक्ताओं की संपूर्ण सूची जारी कर दी, जिसमें अपने-अपने क्षेत्रों में महारथ हासिल करने वाली दुनिया भर की कई नामचीन हस्तियों के नाम शामिल हैं।

इस सूची में एडम निकोल्सन, एलेक्जेंद्र हैरिस, हामिद करजई, शशि थरूर, सुभाष चंद्रा, स्वप्न दासगुप्ता, शीला दीक्षित, ब्रह्मा चेलानी, सी राजा मोहन, गुरचरण दास, होमी भाभा, पी साईंनाथ, राजदीप सरदेसाई, ओम थानवी, अनंत पद्मनाभन, शोभा डे, टी.सी.ए. राघवन, वीर सांघवी, जाकिर हुसैन शर्मिला टैगोर, अनुराग कश्यप, विशाल भारद्वाज, जावेद अख्तर, शबाना आजमी, मीरा नायर,नंदिता दास, अशोक वाजपेयी, मृदुला गर्ग इत्यादि जैसे लोग शामिल हैं।

आयोजकों का कहना है कि यह महोत्सव साहित्य व कला के मर्म को संवेदनात्मक धरातल प्रदान करने के साथ-साथ सामाजिक, राजनीतिक व सांस्कृतिक विषयों से संबंधित ज्वलंत मुद्दों को अपनी आवाज प्रदान करता है, जहां दुनिया भर से आये लोग अपनी विचारों को इसके विस्तृत पटल पर रखते हैं और अपनी आवाज को दुनिया भर में पहुंचाते हैं।

( Source – PTI )

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