परौंख की मिट्टी बनी मेरी भाग्यविधाता-राष्ट्रपति

शिव शरण त्रिपाठी
कानपुर देहात । भारत के राष्ट्रपति श्रीराम नाथ कोविंद ने रविवार को अपनी जन्मभूमि ग्राम परौंख कानपुर देहात में आयोजित जनसभा में गांववासियों को संबोधित करते हुए कहा कि मेरे आने से आपलोगों को जितनी खुशी हो रही है उससे ज्यादा मुझे खुशी है। उन्होंने कहा कि सही मायने में अपनी मातृभूमि में आने की जो लालसा होती है उसकी प्रतीक्षा थी। उन्होंने कहा कि वह जब हेलीकॉप्टर से उतरे तो वंदना करते हुए मातृभूमि का चरणस्पर्श किया और यह प्रार्थना की कि आगे बिलम्ब न हो जन्मभूमि पर जल्दी से जल्दी आने का मौका मिले।
माननीय राष्ट्रपति ने कहा कि माननीय राज्यपाल एवं मुख्यमंत्री जी उत्तर प्रदेश शासन के साथ पथरी देवी जाकर दर्शन किया व आशीर्वाद लिया। उन्होंने कहा कि भीमराव अम्बेडकर पार्क में पुष्पांजलि अर्पित करने का भी सौभाग्य मिला। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश शासन ने ग्राम परौंख स्थित भीमराव अम्बेडकर पार्क में डॉ. भीमराव अम्बेडकर जी की संगमरमर की भव्य प्रतिमा लगाये जाने की बात कही है। उन्होंने कहा कि कभी मेरा पैतृक निवास रहा जो अब मिलन केंद्र के रूप में जाना जाता है वहां भी जाने का सौभाग्य मिला, मेरा यह निर्णय उचित ही था कि मिलन केंद्र को ग्राम पंचायत को सौंप दिया जाए। इस मिलन केंद्र का उपयोग महिलाओं के जीवकोपार्जन से संबंधित कार्यों के लिए किया जाए मुख्यमंत्री जी की यह सलाह उचित है। उन्होंने कहा कि अपनी जन्मभूमि पर आकर उनकी स्मृतियां सजीव हो गई हैं। उन्होंने कहा कि वीरांगना झलकारी बाई इंटर कालेज में भी जाने का सौभाग्य मिला, साथ ही वहां स्थापित मंदिर में भगवान शंकर के दर्शन का भी सौभाग्य मिला।
माननीय राष्ट्रपति ने कहा कि जिस पृष्ठभूमि से आप आए हैं उसी पृष्ठभूमि से मैं भी आया हूं। हम सब बराबर दर्जे के हैं। उन्होंने कहा कि मैने सपने में भी कल्पना नहीं की थी कि गांव से निकलकर एक सामान्य बालक देश के सर्वोच्च पद को प्राप्त करेगा, यह लोकतांत्रिक प्रक्रिया की देन है कि मैं आज इस सर्वोच्च पद पर आसीन हूं। उन्होंने कहा कि मैने रेलवे से यात्रा करने का निर्णय इस कारण लिया जिससे भारत के विकास के तस्वीर की एक झलक देख सकूं, रेलवे ने जिस फ्रेडकॉरिडोर का निर्माण कराया है वह निश्चित रूप से आर्थिक गतिविधियों को बढ़ाएगा उसके बेहतर परिणाम आने वाले दिनों में देखने को मिलेंगे। उन्होंने आगे कहा कि उत्तर प्रदेश ने प्रधानमंत्री तो नौ दिए हैं लेकिन राष्ट्रपति उत्तर प्रदेश मैं अकेला हूं, अब मैने आप सबके लिए रास्ते खोल दिए हैं, आपके पास अवसर है इस सर्वोच्च पद को प्राप्त करने का। उन्होंने देश के स्वतंत्रता सेनानियों को नमन किया और आगे कहा कि मेरे व्यक्तित्व के निर्माण में इस गांव की मिट्टी का अहम योगदान है। उन्होंने कहा कि आज भी माता-पिता का सम्मान करना हमारी संस्कृति में स्पष्टरूप से दिखलाई पड़ता है। आज भी बुजुर्गों को पिता का दर्जा दिया जा रहा है बड़ों का सम्मान करने की परम्परा आज भी जारी है।
उन्होंने संस्कृत के एक श्लोक को याद करते हुए कहा कि जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी…अर्थात जननी और जन्मभूमि स्वर्ग से भी महान है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2019 में यहां आने का कार्यक्रम तय हो चुका था लेकिन संवैधानिक कार्यों के चलते सम्भव नहीं हो सका। तत्पश्चात वर्ष 2020 के दौरान कोविड महामारी के कारण यहां आना संभव नहीं हो सका। इसके बावजूद भी वह गांव के लोगों से निरंतर संपर्क में बने रहे। उन्होंने कहा कि मैं कहीं भी रहूं मेरे गांव की मिट्टी की खुशबू सदैव मेरे अन्तरात्मा में बसी रहती है। यह मेरी मातृभूमि है। इस मिट्टी की शक्ति ने मुझे राष्ट्रपति भवन तक पहुंचा दिया। मैं राष्ट्रपति भवन में रहता हूं तो भी अपने गांव की मिट्टी से सदैव जुड़ा रहता हूं। जब देश से बाहर रहता हूं तो भारत माता के पुत्र के रूप में रहता हूं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने उन्हें अपने गांव आने के लिए प्रेरित किया, आज जब मैं अपने गांव आया हूं तो मुझे यह देखकर अत्यंत खुशी हो रही है कि यहां पर पक्के मकान और बिजली की उपलब्धता है, पूरे गांव का मैने भ्रमण किया उस भ्रमण के दौरान जिस तरह हमें गांव के लोगों का अगाध प्रेम मिला उससे मेरा मन गदगद हो गया। उन्होंने इसके लिए गांव के लोगों का आभार प्रकट किया।
माननीय राष्ट्रपति ने अपने सहपाठी जसवंत, विजय पाल सिंह, हरीराम, चंद्रभान सिंह भदौरिया, दशरथ सिंह आदि को याद करते हुए कहा कि इनके साथ ही मैने अपने शिक्षा जीवन की शुरुआत की व जीवन मूल्यों का निर्माण हुआ। इस गांव में राजनैतिक चेतना जगाने की शुरुआत स्वर्गीय बजरंग सिंह ने की थी। राम मनोहर लोहिया जैसे व्यक्तित्व को हमारे गांव में लाने का श्रेय स्वर्गीय बजरंग सिंह को ही जाता है। इस मौके पर उन्होंने अपने सभी साथी सहपाठियों को याद किया। जिन्होंने गांव में सामाजिक व आध्यात्मिक चेतना एवं सामाजिक सद्भाव को बढ़ाने का काम किया। उन्होंने गांव की दिवंगत आत्माओं को श्रद्धांजलि दी।
माननीय राष्ट्रपति जी ने कहा कि अपने जीवन के 14-15 वर्ष अपने गांव में बिताए हैं। गांव से लगाव कभी कम नहीं हुआ। उन्होंने अपने प्रधानाध्यापक शंभूनाथ त्रिपाठी को याद करते हुए कहा कि उन्होंने सीख दिया था कि अपने माता-पिता के पैर छूकर ही अपने कार्यों को प्रारंभ करें उनकी यह सीख आजीवन प्रेरित करती रही।
उन्होंने कहा कि एक अदृश्य वायरस जिसका नाम कोरोना है संपूर्ण मानव समाज को झकझोरकर रखा दिया है इसका दुष्परिणाम हम सब भुगत रहे हैं, इसके लिए अधिक से अधिक सावधानी बरतने की जरूरत है। उन्होंने मुख्यमंत्री जी की प्रशंसा करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश में कोरोना वायरस को रोकने के लिए वैक्सीन, टीकाकरण में व्यापक कदम उठाए हैं। कोराना ने स्वच्छता के प्रति जागरूकता को बढ़ाया है। उन्होंने कहा कि पूरे देश में टीकाकरण का अभियान चल रहा है। स्वयं को टीका लगाएं व दूसरों को भी टीकाकरण के लिए प्रेरित करें। प्रमुख गांवों, तहसील स्तर पर जाकर वैक्सीन लगाएं। उन्होंने कहा कि मानव के व्यक्तित्व निर्माण के लिए शिक्षा जरूरी है। शिक्षा मूल्यों को जन्म देती है, विकास को बढ़ावा देती है, भावी पीढ़ी के लिए मार्गदर्शक का कार्य करती है इसीलिए जरूरी है सभी नागरिक शिक्षित बने।
अपनी जन्मभूमि की इस यात्रा ने मेरे अंदर ऊर्जा का संचार किया है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति भवन देश की विरासत है देश के हर व्यक्ति को विरासत को देखने का हक है आप सब राष्ट्रपति भवन आकर देखें। मैं जल्द ही परौंख व आसपास के क्षेत्र में आऊंगा।
माननीय राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल ने कहा कि माननीय राष्ट्रपति जी ने विभिन्न पदों पर रहते हुए दलितों के उत्थान के लिए काम किया। समाज के वंचित वर्गों के उत्थान के लिए लड़ाई लड़ते रहे। आपका जीवन हम सभी के लिए प्रेरणादायक है। उन्होंने कहा कि माननीय राष्ट्रपति जी ने यहां आ करके हम सभी का मान बढ़ाया है। माननीय राज्यपाल ने माननीय राष्ट्रपति जी के मातृभूमि आने पर उनका हार्दिक स्वागत किया। उन्होंने कहा कि माननीय राष्ट्रपति जी ने उन्हें जीवनपर्यंत उच्चकोटि का आदर्श बनाए रखा। उन्होंने माननीय राष्ट्रपति जी के राजनैतिक जीवन में किए गए संघर्षों का जिक्र किया।
मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश शासन श्री योगी आदित्यनाथ जी ने माननीय राष्ट्रपति जी के मातृभूमि के प्रथम आगमन पर स्वागत करते हुए कहा कि माननीय राष्ट्रपति जी का इस गांव में जन्म से लेकर बचपन तक स्वर्णिम यादों से जुड़े रहे हैं। उन्होंने कहा कि वीरांगना झलकारी बाई राजकीय इंटर कालेज बनाने एवं सरकार को समर्पित करने के लिए उनका हृदय से आभार व्यक्त करता हूं। इस कालेज को राज्य सरकार को दान देकर जो कार्य किया है उसके विकास में राज्यसरकार पूरा सहयोग देगी। उन्होंने कहा कि माननीय राष्ट्रपति जी आज मातृभूमि का ऋण चुकता करने के लिए आए हैं। यह उनकी जन्मभूमि व कर्मभूमि है। उन्होंने कहा कि कोरोना महामारी के कारण पूरी दुनियां की अर्थव्यवस्था अस्तव्यस्त हो गई है। माननीय प्रधानमंत्री की अगुवाई में पूरा देश कोरोना से मजबूती से लड़ रहा है। उन्होंने कहा कि बचाव के लिए जागरूक होना जरूरी है। उन्होंने कहा कि माननीय प्रधानमंत्री जी ने मंत्र दिया है दो गज की दूरी, मास्क है जरूरी। उन्होंने कहा कि मास्क किसी भी प्रकार के इन्फेक्शन से बचाव में सहायक हो सकता है, कोई भी व्यक्ति टेस्ट कराने से भागे ना। गांव में निगरानी समिति के लोग जो कहें उसी के अनुरूप इलाज कराकर दवा जरूर लें। समीप के स्वास्थ्य केंद्र में जाकर दिखवाएं। वर्तमान में पूरे देश में वैक्सीनेशन का कार्यक्रम चल रहा है। अपनी बारी आने पर वैक्सीन जरूर लें। उन्होंने कहा कि माननीय प्रधानमंत्री जी की प्रेरणा से कानपुर देहात में मेडिकल कालेज की स्थापना की स्वीकृति मिल चुकी है। उन्होंने कहा कि बहुत जल्द कानपुर देहात में मेडिकल कालेज की स्थापना होगी। उन्होंने कहा कि भारत के गांव ने हम सबको विभिन्न प्रकार के संस्कारों से जोड़ा है। भारत के सनातन परंपरा के संस्कार ही हमें स्वअनुशासन और स्वावलंबन की ओर अग्रसर करते हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें पहली बार परौंख गांव में आने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है। राष्ट्रपति जी की स्मृतियों को संजोने का और उन्हें नजदीक से देखने का सौभाग्य मुझे प्राप्त हुआ। जिस जन्मभूमि में हमारा जन्म हुआ है उस जन्मभूमि के प्रति हमारे कर्तव्य हैं उन कर्तव्यों को माननीय राष्ट्रपति जी ने बखूबी पूरा किया है।
हेलीपैड पर उतरने के उपरांत सबसे पहले वह पथरी माता के मंदिर गए और पूजा अर्चना के साथ माथा टेका। इसके बाद वह अंबेडकर पार्क गए और अंबेडकर जी की प्रतिमा पर राष्ट्रपति द्वारा पुष्पांजलि अर्पित की गई। साथ ही राज्यपाल व मुख्यमंत्री ने भी पुष्पांजलि अर्पित किया। इसके उपरांत वह अपने पैतृक निवास स्थल पर बने मिलन केंद्र पहुंचे और उसकी खूबसूरती देख भावविभोर हुए। तत्पश्चात वीरांगना झलकारी बाई इंटर कालेज का निरीक्षण कर पठन पाठन की जानकारी ली। इस मौके पर पुलिस बैंड द्वारा राष्ट्रधुन बजाया गया साथ ही वीरांगना झलकारी बाई राजकीय इंटर कालेज की छात्राओं ने स्वागत गीत प्रस्तुत किया। मुख्यमंत्री जी ने माननीय राष्ट्रपति जी को अंगवस्त्र भेंटकर सम्मानित किया। साथ ही क्षेत्र के इतिहास को दर्शाते हुए चित्र भेंट किया। माननीय राज्यपाल ने देश की प्रथम महिला सविता कोविंद को शॉल व गणेश जी की मूर्ति भेंटकर सम्मानित किया। इस मौके पर राष्ट्रपति के भाई प्यारे लाल ने गांव के सबसे बुजुर्ग व्यक्ति मोती लाल गुप्ता को पितृ सम्मान से सम्मानित किया और उनकी भाभी विद्यावती ने गांव की सबसे बुजुर्ग महिला सुशीला देवी को मातृ सम्मान से सम्मानित किया। उनके भाई शिव कुमार और राम स्वरूप भारती ने झलकारी बाई इंटर कालेज के प्रधानाचार्य विमल अग्निहोत्री को गुरु सम्मान से सम्मानित किया।
इस मौके पर मा0 सांसद अकबरपुर श्री देवेन्द्र सिंह उर्फ भोले जी, श्री अजीत सिंह पाल जी, मा0 राज्यमंत्री इलेक्ट्रानिक्स एवं आईटी, उत्तर प्रदेश, प्रोफेसर, डा0 रामशंकर कठेरिया, मा0 सांसद इटावा आदि के अलावा अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

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