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एनजीटी ने ‘पर्यावरण को क्षति’ पहुंचाने के लिए बिल्डर को 40 लाख रुपये देने को कहा

एनजीटी ने ‘पर्यावरण को क्षति’ पहुंचाने के लिए बिल्डर को 40 लाख रुपये देने को कहा

राष्ट्रीय हरित अधिकरण :एनजीटी: की पीठ ने यहां एक बिल्डर को गैरकानूनी तरीके से पहाड़ों को काटने और पेड़ों के काटने से पर्यावरण को पहुंची कथित क्षति की भरपायी करने का निर्देश दिया।

न्यायिक सदस्य यू डी साल्वी और विशेषज्ञ सदस्य रंजन चटर्जी की पश्चिमी जोनल पीठ ने मुंबई के बिल्डर को पुनर्बहाली के लिए लोनावला नगर परिषद के पास 40 लाख रपये जमा करने को कहा।

पीठ ने डेवलपर पर पेड़ों और पहाड़ों के काटने पर भी रोक लगा दी।

पीठ ने नगर परिषद से पुणे से लगे खंडाला में विकास वैली हाउसिंग सोसाइटी में नष्ट हुए उद्यान एवं पहाड़ी क्षेत्र को उसका पहले जैसा रूप देने को कहा।

एनजीटी ने 28 फरवरी को सुनाए गए अपने फैसले में डेवलपर को याचिकाकर्ताओं – नानिक रूपाणी और आशीष वैध को मुकदमे पर किए गए खर्च के लिए एक लाख रपये देने का भी आदेश दिया। दोनों ने इलाके में ‘‘पर्यावरण को पहुंची क्षति’’ का आरोप लगाते हुए एनजीटी का रूख किया था।

अधिकरण ने आदेश दिया कि विकास डेवलपर्स एवं विकास गुप्ता मिलकर इलाके के पुनरूद्धार पर होने वाला खर्च वहन करेंगे और एक महीने के अंदर लोनावला नगर परिषद में 40 लाख रपये जमा करेंगे।

याचिका के अनुसार बिल्डर ने लोनावला नगर परिषद से मंजूरी लिए बिना एक अवैध एवं अनधिकृत सड़क के निर्माण की खातिर पहाड़ी क्षेत्र की अवैध कटाई की और पेड़ गिराए।

( Source – PTI )

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