गोरखालैंड की मांग पर किसी समिति का गठन नहीं : केन्द्र सरकार

गोरखालैंड की मांग पर किसी समिति का गठन नहीं : केन्द्र सरकार
गोरखालैंड की मांग पर किसी समिति का गठन नहीं : केन्द्र सरकार

केन्द्र सरकार ने पश्चिम बंगाल से पृथक राज्य के रूप में गोरखालैंड के गठन की मांग पर किसी समिति के गठन का सरकार को कोई प्रस्ताव मिलने से इंकार किया है। केन्द्रीय गृह राज्य मंत्री हंसराज अहीर ने लोकसभा में एक सवाल के लिखित जवाब में यह जानकारी दी।

अहीर ने कहा कि इस मांग को लेकर दार्जिलिंग में आंदोलन कर रहे गोरखा, आदिवासी एवं अन्य समूहों की पृथक राज्य के गठन की मांग के गुण दोषों का पता लगाने के लिये किसी समिति के गठन का फिलहाल कोई प्रस्ताव नहीं है। गोरखा जनमुक्ति मोर्चा की अगुवाई में अलग राज्य की मांग को लेकर विभिन्न संगठन दार्जिलिंग में गत 12 जून से बेमिंयादी हड़ताल पर हैं। उन्होंने कहा कि आंदोलन के दौरान हिंसा और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान की घटनायें हुई हैं। इसके मद्देनजर राज्य सरकार के अनुरोध पर केन्द्र की ओर से अर्धसैनिक बलों की टुकड़ियां हिंसा प्रभावित इलाकों में भेजी गयी हैं।

एक अन्य सवाल के जवाब में अहीर ने सदन में बताया कि आतंकी संगठन आपसी संवाद के लिये सोशल मीडिया का इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि आतंकवादी गतिविधियों को रोकने के लिये केन्द्र और राज्य सरकार की सुरक्षा एवं खुफिया एजेंसियों के बीच प्रभावी समन्वय कायम किया गया है। इसके तहत साइबर स्पेस में सोशल मीडिया के माध्यम से आतंकवादियों की सक्रियता पर पैनी नजर रखी जा रही है।

अहीर ने सदन को एक अन्य सवाल के जवाब में बताया कि आतंकवादी संगठन हिजबुल मुजाहिद्दीन के सरगना सैयद सलाहुद्दीन ने कथित तौर पर उसके संगठन द्वारा भारत में कहीं भी आतंकी हमला करने में सक्षम होने का दावा किया है। उन्होंने हाल ही में सलाहुद्दीन द्वारा मीडिया में किये गये इस दावे का जिक्र करते हुये कहा कि आतंकवादी संगठनों को पाकिस्तान से हथियार और गोला बारूद सहित अन्य सहूलियतें मुहैया करायी जा रही हैं। इसका सबूत मुठभेड़ स्थलों से बरामद किये गये विदेशी हथियार है। अहीर ने कहा कि इस साल जुलाई तक जम्मू कश्मीर में आतंकवादियों के साथ हुईं मुठभेड़ों में 104 आतंकवादी मारे गये हैं। नक्सली हिंसा से जुड़े एक सवाल के लिखित जवाब में अहीर ने बताया कि देश के नक्सली हिंसा प्रभावित राज्यों में नक्सली हिंसा के दौरान पिछले दो दशकों में सुरक्षा बलों के 2753 जवान मारे गये। उन्होंने कहा कि इस समस्या के समाधान के लिये केन्द्र और संबद्ध राज्य सरकारों के बीच आपसी सामंजस्य से नक्सल विरोधी अभियानों को प्रभावी तौर पर अंजाम दिया जा रहे हैं।

( Source – PTI )

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