रेल मंत्री श्री सुरेश प्रभाकर प्रभु ने विभिन्न समर्पित पहलों की शुरूआत की

रेल मंत्री श्री सुरेश प्रभाकर प्रभु ने विभिन्न समर्पित पहलों की शुरूआत की जो अधिकतर झारखंड के लिए हैं
श्री जो अधिकतर के लिए हैं

रेल यात्रा को और अधिक आरामदायक और उल्लेखनीय बनाने के लिए विभिन्न सेवाएं और परियोजनाएं शुरू कर रही है। रेल मंत्री श्री सुरेश प्रभाकर प्रभु ने  निम्नलिखित पहलों की आज रेलभवन में आयोजित कार्यक्रम में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से शुरूआत की, अधिकांश परियोजनाएं झारखंड से संबंधित हैं : –

  1. रांची रोड-पट्राटू रेललाइन के दोहरीकरण के कार्य की शुरूआत। (पट्राटू में)
  2. गढ़वा रोड पर आरओआर फ्लाईओवर के लिए आधारशिला रखना। (गढ़वा रोड पर)
  3. रांची-बोंदामुंडा रेललाइन के दोहरीकरण के कार्य की शुरूआत। (हथिया स्टेशन पर)
  4. आदित्यपुर-खरगापुर-तीसरी लाइन आधारशिला रखना। (टाटानगर स्टेशन पर) (आरवीएनएल प्रोजेक्ट)
  5. सिनी-आदित्यपुर खंड की गमहरिया-आदित्यपुर तीसरी लाइन परियोजना (टाटानगर स्टेशन पर) का देश को समर्पण।
  6. चक्रधरपुर-गोयलकेरा तीसरी लाइन के काम की शुरूआत। (चक्रधरपुर स्टेशन पर)
  7. आसनसोल डिवीजन के ग्रीन कॉरिडोर-मधुपुर-गिरिदीह खंड का देश को समर्पण।

 

नागर विमानन राज्य मंत्री श्री जयंत सिन्हा की इस अवसर पर गरिमामयी उपस्थिति रही।  रेलवे बोर्ड के इंजीनियरिंग सदस्य, श्री आदित्य कुमार मित्तल, रेलवे बोर्ड के अन्य सदस्य और वरिष्ठ अधिकारी भी इस अवसर पर उपस्थित थे।

इस अवसर पर रेल मंत्री श्री सुरेश प्रभाकर प्रभु ने कहा कि रेल बुनियादी ढांचे के चलते झारखण्ड की प्रगति नहीं हुई। झारखंड में रेलवे बुनियादी ढांचे की स्थिति सुधारने के लिए राज्य में रेल परियोजनाओं के निष्पादन और परियोजनाओं तेजी से लागू करने के लिए बजट में महत्वपूर्ण बढ़ोत्तरी की गयी है। झारखंड राज्य सरकार और रेल मंत्रालय ने परियोजनाओं को लागू करने के लिए संयुक्त उद्यम का गठन किया है। राज्य संयुक्त उद्यम सहकारी संघवाद में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

 

परियोजनाओं की मुख्य विशेषताएं

  1. रांची रोड-पट्राटू दोहरीकरण के काम की शुरूआत

 लाभ:

झारखंड की कोबाल्ट बेल्ट से भारत के उत्तरी और पश्चिमी भाग के लिए खनिजों की छोटे मार्गों से तेजी से ढुलाई में मदद मिलेगी।

  1. गढ़वा रोड पर आरओआर फ्लाईओवर की आधारशिला रखना

लाभ:

गढ़वा रोड स्टेशन व्यावहारिक रूप से स्टेशन से होकर गुजरेगा इससे अधिकांश रेलों के लिए भीड़-भाड़ कम करने में मदद मिलेगी।

  1. रांची-बोंदामुंड दोहरीकरण के काम की शुरुआत (हाथिया स्टेशन पर)

लाभ:

हतिया-बोंदामुंड राँची-मुरी होते हुए राउरकेला-गोमोह मार्ग का एक हिस्सा है। यह वर्तमान में एकल लाइन का है। यह खंड कच्चे माल के साथ-साथ परिस्कृत इस्पात की बोकारो और राउरकेला स्टील प्लांटों के लिए ढुलाई करने में बहुत व्यस्त रहता है। औद्योगिक और यात्री यातायात की बढती हुई मांग के कारण इस मार्ग की क्षमता में वृद्धि करना बहुत आवश्यक हो गया है।

  1. आदित्यपुर-खरगापुर-तीसरी लाइन आधारशिला रखना। (टाटानगर स्टेशन पर) (आरवीएनएल प्रोजेक्ट)

लाभ:

खड़गपुर-आदित्यपुर हावड़ा-मुंबई ट्रंक मार्ग का एक हिस्सा है। यह उद्योगों के लिए कच्चे माल और तैयार उत्पादों के लिए बहुत व्यस्त खंड है। अन्य महत्वपूर्ण यातायात में स्टील प्लांट के लिए आयातित कोयले सहित हल्दिया बंदरगाह आने जाने के लिए यातायात और भारत के विभिन्न हिस्सों से खाद्यान्न और उवर्रकों की ढुलाई भी इसी मार्ग से होती है। इस क्षेत्र की परिवहन की बढती हुई जरूरतों को पूरा करने के लिए तीसरी लाइन परियोजना स्वीकृत की गयी है।

  1. सिनी-आदित्यपुर खंड की गमहरिया-आदित्यपुर तीसरी लाइन परियोजना (टाटानगर स्टेशन पर) का देश को समर्पण।

लाभ:

टाटानगर-चक्रधरपुर खंड के बढ़ते हुए यात्रियों और माल यातायात को संभालने के लिए सिनी-आदित्यपुर के मध्य तीसरी लाइन को मंजूरी दी गई है।

सिनी-गम्हरिया (16 किलोमीटर) : 19.7.16 से काम शुरू।

अब, गम्हरिया-आदित्यपुर (6.5 किमी) राष्ट्र को समर्पित की गयी है।

इस 6.5 किमी तीसरे लाइन के काम शुरू होने से पूरी परियोजना की शुरूआत हुई है।

  1. चक्रधरपुर-गोयलकेरा तीसरी लाइन के काम की शुरूआत। (चक्रधरपुर स्टेशन पर)

लाभ:

यह खंड हावड़ा-मुंबई ट्रंक मार्ग का एक हिस्सा है।

इस खंड की क्षमता बढ़ाने की जरूरत थी क्योंकि इस मार्ग पर अनेक परियोजना औऱ संयंत्र लगाए जा रहे हैं। यह मार्ग इस्पात,विद्युत और सीमेंट संयंत्रों के लिए फीडर मार्ग है और यह उन्हें खानों तथा देश के प्रमुख बंदरगाहों से जोड़ता है।

लाइन क्षमता उपयोग पहले ही 100% को पार कर चुका है, इसलिए इस खंड पर 34 किलोमीटर लंबी तीसरी लाइन आवश्यक हो गयी है।

 

  1. आसनसोल डिवीजन के ग्रीन कॉरिडोर-मधुपुर-गिरिदीह खंड का देश को समर्पण।

जैव शौचालय के लाभ:

पटरियों पर गिरने वाले मानव अपशिष्ट से मुक्ति

डिब्बों और ट्रेक की बेहतर साफ-सफाई।

( Source – PIB )

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