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एसबीआई ने निलंबित खातों में रखी धनराशि की जानकारी देने से किया इनकार

एसबीआई ने निलंबित खातों में रखी धनराशि की जानकारी देने से किया इनकार

देश के प्रमुख बैंक भारतीय स्टेट बैंक :एसबीआई: ने उन निलंबित बैंक खातों में रखे धन के बारे में जानकारी देने से इनकार किया है जिनमें धार्मिक कारणों के चलते ब्याज नहीं लेने वाले ग्राहकों की ब्याज राशि को रखा जाता है।

एसबीआई ने सूचना के अधिकार (आरटीआई) कानून के तहत इस संबंध में मांगी गई जानकारी में कहा कि वह सामान्य कामकाज करते हुये अपने डेटा बेस में इस तरह की जानकारी अलग से नहीं रखता इसलिये ‘ऐसी सूचना बड़ी मात्रा में है और इसे निकालने में काफी समय लगेगा।’ एसबीआई ने पीटीआई भाषा द्वारा इस बारे में भेजे गए आरटीआई आवेदन का जवाब देते हुये कहा, ‘‘इसलिये हम आरटीआई कानून की धारा 7 :9: के तहत आपके आवेदन में मांगी गई जानकारी देने से इनकार करते हैं, क्योंकि इसके लिये काफी बैंक संसाधन को इसमें लगाना होगा।’’ आरटीआई कानून की यह धारा ऐसी जानकारी देने पर रोक लगाती है जिसके लिये किसी सार्वजनिक प्राधिकरण के काफी संसाधनों को इसमें लगाना पड़े अथवा उस रिकार्ड की सुरक्षा अथवा रखरखाव के लिये नुकसानदायक हो।

बैंक से उसके निलंबित खातों की जानकारी देने को कहा गया था। ऐसे खातों की कुल संख्या व उनमें पड़ी राशि का ब्यौरा मांगा गया था। बैंक से ऐसी ब्याज राशि से निपटने के दिशा निर्देश के बारे में भी जानकारी मांगी गयी थी।

उल्लेखनीय है कि कुछ लोग धार्मिक कारणों के चलते ब्याज राशि स्वीकार नहीं करते हैं। इस ब्याज राशि को निलंबित बैंक खातों में रखा जाता है। भारतीय रिजर्व बैंक के 2005 के जर्नल में प्रकाशित एक आलेख के अनुसार भारत में ब्याज मद में कमाई गई हजारों करोड़ रपये की राशि निलंबित खातों में रखी जाती है।

आलेख के अनुसार-अनुसंधानों से पता चलता है कि इस तरह की एक अच्छी खासी रकम बेकार पड़ी है जिसका उचित निवेश व इस्तेमाल किया जाए तो उसका भारतीय अर्थव्यवस्था पर बड़ा असर हो सकता है।’

( Source – PTI )

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