संकट की घडी में जनजातीय क्षेत्रों के लिए उम्मीद की किरण संघ

जनजातीय क्षेत्रों में सेवा को आगे आया संघ

छोटा सा कमरा है, कमरे में खिड़की से एक कोने में आती रोशनी से दिख रहा है कि वर्षा के पैर लगातार सिलाई मशीन पर चलते जा रहे हैं।  सिलाई मशीन के आसपास कपड़े के छोटे-छोटे टुकड़ों का अंबार लगा है थोड़ी थोड़ी देर में लोग आते हैं और सिलाई मशीन से बने मास्क उठाकर ले जाते हैं। वर्षा मध्य प्रदेश के रायसेन जिले के गांव ठीकरी में एक सिलाई केंद्र चलाती हैं इस सिलाई केंद्र के लिए उन्हें प्रशिक्षण वनवासी कल्याण परिषद की ओर चलाए जाने वाले सिलाई केंद्र पर मिला है मगर किसी और सिलाई केंद्र की तरह यहां पर सिर्फ सिलाई मशीन चलाना नहीं सिखाया जाता यहां समाज सेवा और देश सेवा का संस्कार भी सिखाया जाता है। इसी संस्कार ने वर्षा को समाज के प्रति इतना जागरूक बनाया है कि कोरूणा के संकट काल में वह वनवासियों के लिए मास्क बना रही हैं। अभी तक कुमारी वर्षा ने सैंकड़ों मास्क बना कर गांव में निशुल्क वितरित किये हैं। गांव वाले अपनी इस बेटी के सेवाभाव/सेवाकार्य को देखकर न केवल प्रसन्न हैं, बल्कि आश्वस्त भी हैं कि हम कोरोना को हरा देंगे और अपने लोगों को बचा लेंगे।

कोरोना की त्रासदी ने जहां एक तरफ विश्व के कई बड़े देशों को घुटने पर ला दिया है, वहां सरकारें नागरिकों के लिए खाद्यान्न एवं आवश्यक वस्तुओं की व्यवस्था करने में असमर्थ साबित हो रही है। वहीं भारत में कोरोना ने समाज के मूल चरित्र को जागृत किया है। भारतीय अपने घरों से बाहर निकले हैं मगर इस चिंता में कि उनके पड़ोसी कहीं भूखे तो नहीं रह गए, हर व्यक्ति उस गरीब की चिंता कर रहा है जो दो जून की रोटियां नहीं जुटा सकता और मानवता के सेवा के इस मिशन में कदम आगे बढ़ाकर चल रहा है राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ। देश के विभिन्न हिस्सों में संघ के स्वयंसेवक अलग-अलग स्तरों पर सेवा कार्यों में सक्रिय लोगों के लिए भोजन की व्यवस्था की जा रही है, तो कहीं अगले पंक्ति में कोरोना से झूझ रहे डॉक्टरों एवं सफाई कर्मियों के लिए मास्क और सैनिटाइजर की।

जनजातीय क्षेत्रों में सक्रिय है विद्या भारती

विद्याभारती के जनजाति शिक्षा के अखिल भारतीय सहसंयोजक बुधपाल सिंह सिंह ठाकुर ने बताया कि जनजाति ग्रामों में जनजाति क्षेत्र की शिक्षा के सरस्वती शिशु मंदिर एवं एकल विद्यालय इस मुश्किल समय में समाज की सेवा में कार्य कर रहे हैं। विद्याभारती के प्रांत संगठन मंत्री हितानंद शर्मा ने बताया कि सभी सेवा कार्य समाज के सहयोग से संचालित किए जा रहे हैं। हमारा दायित्व है कि इस कठिन समय में सभी जरूरतमंद लोगों को भोजन उपलब्ध करा सकें। इसके साथ ही समाज का संगठन होने के नाते हम उनकी समस्याएं दूर करने में सहायक सिद्ध हो सकें।

88 स्थानों पर संचालित किए जा रहे सेवा केंद्र

जिले में जनजाति बहुल 88 गांव में सेवा कार्य संचालित किए जा रहे हैं। जनजाति क्षेत्र के 105 कार्यकर्ता प्रमुख रूप से इन केंद्रों का कार्य संभाल रहे हैं। इनके अतिरिक्त अन्य कार्यकर्ता भी लगातार सहयोग कर रहे हैं।

जनजाति क्षेत्र में 15 स्थानों पर संचालित किए जा रहे भोजन वितरण केंद्र

इन दिनों गांव में बड़ी संख्या में खेतिहर मजदूर वापस लौट कर आए हैं। इनके सामने रोजी रोटी का संकट भी है। ऐसे में इनकी सहायता करने के लिए विद्या भारती की जनजाति क्षेत्र के विद्यालय 15 स्थानों पर भोजन वितरण केंद्र संचालित कर रहे हैं। भोजन बनाने का यह कार्य समाज, अभिभावकों, पूर्व छात्रों एवं विद्यालय की सहायता से चल रहा है।

24 जनजाति केंद्रों पर बनाए जा रहे मास्क 

जनजाति क्षेत्र के 24 केंद्रों पर विद्यालयों के आचार्य एवं दीदी मास्क सिलने का कार्य कर रहे हैं। ऐसे गांव हैं जिनमें से अधिकांश में दवाई की दुकान भी नहीं है। ऐसे में मास्क मिल पाना संभव नहीं है। इस समस्या को देखते हुए विद्यालय की आचार्य एवं दीदी मास्क बनाकर जनजाति क्षेत्र के लोगों को वितरित कर रहे हैं।

Leave a Reply

%d bloggers like this: