पांच दिनों के त्याग से अदालत का बोझ घटा सकते हैं जज: न्यायमूर्ति जेएस खेहर

पांच दिनों के त्याग से अदालत का बोझ घटा सकते हैं जज: न्यायमूर्ति जेएस खेहर
पांच दिनों के त्याग से अदालत का बोझ घटा सकते हैं जज:

के प्रधान न्यायधीश न्यायमूर्ति जेएस खेहर ने आज यहां कहा कि एक जज सप्ताह में सिर्फ पांच दिन अवकाश पीठ में बैठे तो वह प्रतिदिन छोटे-मोटे 20-25 मामले निपटा लेगा और उसके इस त्याग से अदालत का बोझ काफी घटेगा।

की स्थापना के 150 वर्ष पूरे होने पर साल भर से चल रहे कार्यक्रमों के आज समापन समारोह में न्यायमूर्ति खेहर ने कहा, ‘‘हमें सलाह दी गई कि आप छोटे-छोटे मामलों जैसे जमानत, अग्रिम जमानत, किराए के मामले, दुर्घटना के दावे आदि 10-10 मामलों को एक एक पीठ में लगाने शुरू करें। इस पर हर पीठ तकरीबन 10 मामले सुबह एक घंटे में खत्म करती है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘मैं विचार कर रहा था कि अगर एक जज सिर्फ पांच दिन अवकाश पीठ में बैठे और ऐसे मामले ले जिसमें बहुत विचार करने की जरूरत नहीं है, लेकिन बहुत राहत मिलने की बात है, तो हर जज एक सवा घंटे में 20-25 मामले निपटा लेगा।’’ के जजों के संदर्भ में उन्होंने कहा, ‘‘एक दिन में एक जज 20 मामले निपटाता है तो पांच दिनों में सौ-सवा सौ मामले निपटा लेगा। अगर सभी 84-85 जज बैठें तो 20-30 हजार मामले निपटा सकते हैं। इसमें सबका सहयोग जरूरी होगा। यह त्याग केवल पांच दिनों का है। आप मुख्य न्यायधीश को बता सकते हैं कि आप किन विषयों में सहज हैं।’’ उल्लेखनीय है कि में 31 जनवरी, 2017 तक 7 लाख मामले लंबित थे, जबकि इसकी लखनउ पीठ में करीब दो लाख मामले लंबित हैं। इस उच्च न्यायालय में 85 जज हैं, जबकि मंजूर पदों की संख्या 160 है।

न्यायमूर्ति खेहर ने कहा, ‘‘हमने उच्चतम न्यायालय में तीन विशेष पीठें गठित की हैं जो लंबित मामलों का बोझ घटाने के उद्देश्य के लिए अतिरिक्त घंटे काम करेंगी और अवकाश के दौरान बैठेंगी।

( Source – PTI )

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