राजनीति जब न्याय बिकने लगे और सेवक राजा बनने लगें — खतरे में है लोकतंत्र का संतुलन May 6, 2025 / May 6, 2025 | Leave a Comment अशोक कुमार झा भारतीय लोकतंत्र का ढांचा तीन मज़बूत स्तंभों—विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका—पर खड़ा है। ये तीनों मिलकर देश को चलाते हैं, संविधान की आत्मा को ज़िंदा रखते हैं और आम नागरिक को न्याय, सुरक्षा व समृद्धि का भरोसा दिलाते हैं लेकिन आज यही स्तंभ एक-दूसरे से टकरा रहे हैं, खींचतान के हालात पैदा कर रहे हैं और इस […] Read more » खतरे में है लोकतंत्र का संतुलन
राजनीति जब व्यक्तिगत संबंध बन जाएं राष्ट्रीय सुरक्षा का प्रश्न May 5, 2025 / May 5, 2025 | Leave a Comment अशोक कुमार झा पहलगाम में हुए अमानवीय आतंकी हमले ने देश को हिला दिया। 26 निर्दोष लोगों की हत्या केवल आंकड़ा नहीं, बल्कि आतंकवाद के उस चेहरों की याद है जो बार-बार हमारी धरती पर खून बहाते हैं। इस हमले के तुरंत बाद, भारत सरकार ने पाकिस्तानी नागरिकों को देश छोड़ने का निर्देश जारी किया—और इसी बीच एक ऐसा […] Read more » राष्ट्रीय सुरक्षा का प्रश्न