तेल के दाम का खेल

Posted On by & filed under आर्थिकी

प्रमोद भार्गव अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार इजाफा हो रहा है। नतीजतन पेट्रोल, डीजल और घरेलू गैस के दाम घटने की बजाय बढ़ने की नौबत आ गई है। वैश्विक बाजार में कच्चे तेल का भाव 80 डाॅलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गया है, जो 2014 के बाद अब तक का… Read more »

कर संग्रह व घरेलू क्षमताओं के विकास की राह पर भारत

Posted On by & filed under आर्थिकी

सुनील अमर – संयुक्त राष्ट्र संघ यानी यूएनओ का लक्ष्य संख्या 17 दुनिया के देशों से सतत तरक्की के लिए अपने संसाधनों के विकास और उनके समुचित उपयोग की बात करता है। यूएनओ का मानना है कि वैश्विक संगठनों द्वारा विकासशील देशों को दी जाने वाली आर्थिक सहायता तब तक कारगर नहीं होगी जब तक ये देश… Read more »

शुभ सुकून का अहसास कराती टीसीएस 

Posted On by & filed under आर्थिकी

– ललित गर्ग- भारत और यहां की संस्कृति, समाज, तकनीक, शिक्षा एवं व्यवसाय एक नये मोड़ पर खड़े हैं। सूचना, ज्ञान, तकनीक एवं शक्ति का एक नया तालमेल, एक नया संतुलन, एक नया समीकरण पूरी दुनिया को आश्चर्य में डाल रहा है। व्यवसाय एवं तकनीक के तालमेल से टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेस (टीसीएस) ने एक नया… Read more »

बदलते वैश्विक परिदृश्य मे भारत की चुनौतियाँ

Posted On by & filed under आर्थिकी

दुलीचन्द रमन कभी विश्व में थानेदार की भूमिका निभाने वाला अमेरिका आज कई मोर्चो पर एक साथ लड़ रहा है। ये अमेरिका की फितरत है कि वह कभी शांत नहीं बैठ सकता। चाहे वियतनाम, जापान, अफगानिस्तान, अरब देशों के साथ युद्व का इतिहास रहा हो या सोवियत संघ से लंबा शीत युद्व। अमेरिका अमुमन हर… Read more »

वैश्विक अर्थव्यवस्था में तेल की भूमिका

Posted On by & filed under आर्थिकी

वैश्विक  अर्थव्यवस्था में तेल की भूमिका प्रमोद भार्गव अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार इजाफा हो रहा है। नतीजतन पेट्रोल, डीजल और घरेलू गैस के दाम घटने की बजाय बढ़ने की नौबत आ गई है। वैश्विक  बाजार में कअंतरराष्ट्रीय बाजार, च्चे तेल का भाव 71 डाॅलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गया है, जो 2014… Read more »

भारतीय अर्थव्यवस्था और उसके अंर्तद्वंद्व

Posted On by & filed under आर्थिकी, विविधा

दूलीचन्द रमन 1991 में भारत मे जब नई आर्थिक नीति अपनाई गई तो उसमें उदारीकरण, निजीकरण, वैश्वीकरण महत्त्वपूर्ण बिन्दु थे। इन्ही के आधार पर उस समय की भारत की 84 करोड़ जनसंख्या के जीवन में महत्त्वपूर्ण बदलाव लाने के उद्देश्य से तत्कालीन वित्तमंत्री डा. मनमोहन सिंह ने उस समय भुगतान संतुलन के गंभीर संकट से… Read more »

किसान हितैशी बजट में लागत गणना का पेंच ?

Posted On by & filed under आर्थिकी, समाज

इसमें कोई दो राय नही कि नरेंद्र मोदी सरकार यह पहला और अंतिम ऐसा पूर्ण बजट है, जो गांव किसान, किसानी और गरीब पर ध्यान केंद्रित करता है। इसमें सबसे अधिक घोषणाएं कृषि और किसान पर हैं। साथ ही 2019 के आम चुनाव और इसी साल होने वाले आठ राज्यों के विधानसभा चुनाव को भी… Read more »

गांव, गरीब और किसान की सुुध लेता बजट

Posted On by & filed under आर्थिकी, राजनीति

– ललित गर्ग – बजट हर वर्ष आता है। अनेक विचारधाराओं वाले वित्तमंत्रियों ने विगत में कई बजट प्रस्तुत किए। पर हर बजट लोगों की मुसीबतें बढ़ाकर ही जाता है। लेकिन इस बार बजट ने नयी परम्परा के साथ राहत की सांसें दी है तो नया भारत- सशक्त भारत के निर्माण का संकल्प भी व्यक्त… Read more »

 तमन्नाओं में उलझाया गया हूं….खिलौने दे कर बहलाया गया हूं

Posted On by & filed under आर्थिकी, राजनीति

 वित्त मंत्री अरुण जेटली द्वारा आख़िरी पूर्ण बजट पेश करने के बाद शाद अजीमाबादी की ये पंक्तियां याद आ रही हैं – तमन्नाओं में उलझाया गया हूं….खिलौने दे कर बहलाया गया हूं। वित्त मंत्री के बजट भाषण के दौरान सबसे ज्यादा तालियां उस समय बजी जब राष्ट्रपति, उप राष्ट्रपति, राज्यपाल और सांसदों के वेतन की… Read more »

आसियान के माध्यम से चीन को चुनौती

Posted On by & filed under आर्थिकी, राजनीति

दुलीचन्द रमन इस बार का गणतंत्र दिवस समारोह कुछ खास रहा क्योंकि इस वर्ष 69वें गणतंत्र दिवस की परेड के दौरान आसियान के दस देशों (म्यांमार, थाईलैंड, वियतनाम, इंडोनेशिया, मलेशिया, फिलिपिन्स, सिंगापुर, कंबोडिया, लाओस और बु्रनेई) के सर्वोच्च नेता मुख्य अतिथि के रूप में नई-दिल्ली में उपस्थित रहे। यह गणतंत्र दिवस के इतिहास मे पहला… Read more »