तेल की बढ़ती कीमतों पर मंत्री का बेतुका बयान

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संदर्भः-पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों पर केंन्द्रीय मंत्री अल्फोंस का बेतुका बयान प्रमोद भार्गव एक ओर जहां पेट्रोल एवं डीजल की रोज-रोज बढ़ती कीमतों को लेकर जनता परेशान है, वहीं केंद्रीय पर्यटन राज्य मंत्री केजे अल्फोंस ने तेल की कीमतों को लेकर चोंकाने वाला बयान देकर राजनीतिक हलचल को गरमा दिया है। उन्होंने कहा कि जिनके… Read more »

देश पर कम होता ऋण भार

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डॉ. मयंक चतुर्वेदी ऋण को विकास के लिए जितना अधिक अपरिहार्य माना गया है, उतना ही लगातार इससे डूबे रहने को जनमानस में घोर विपत्‍ति‍कारक स्‍वीकार्य किया गया है। भारत पर आज दुनियाभर का कितना कर्ज है, यह जानकर जितनी अधिक चिंता होती है, वहीं इन दिनों इससे भी सतुष्‍टी का भाग जाग्रत होता है कि कम से… Read more »

पेट्रोल दामों पर सरकार की नीयत

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डॉ. मयंक चतुर्वेदी देखते ही देखते मोदी सरकार में पेट्रोल के दाम 3 साल में सर्वाधिक हो गए,  इस दौरान क्रूड 45 फीसदी सस्ता रहा, किंतु भारतीय उपभोक्‍ताओं से पेट्रोल की कीमत कम होने के स्‍थान पर बढ़ोत्‍तरी के साथ ली गई। यह जो कीमतों का विरोधाभास है, जिसमें की एक ओर अंतर्राष्‍ट्रीय स्‍तर पर कीमते कम हो… Read more »

अर्थ एवं विकास के असन्तुलन से उपजी समस्याएं

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ललित गर्ग- पैसे के बढ़ते प्रवाह में दो तरह की स्थितियां देखने को मिल रही है। एक स्थिति में अर्थ के सर्वोच्च शिखरों पर पहुंचे कुछ लोगों ने जनसेवा एवं जन-कल्याण के लिये अपनी तिजोरियां खोल रहे हैं तो दूसरी स्थिति में जरूरत से ज्यादा अर्जित धन का बेहूदा एवं भोंडा प्रदर्शन कर रहे हैं।… Read more »

पंजाब सरकार के गले की फांस बनी कृषि ऋण माफ़ी योजना

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पंजाब विधान सभा चुनावों में सभी पार्टियों ने अपने अपने लुभावने वायदे जनता के बीच परोसे थे ,परन्तु कामयाबी कांग्रेस को ही मिली,  चाहे इसके लिए उसे कोई भी घोषणा क्यों ना करनी पड़ी हो . उसने किसानों की कर्जा माफ़ी की घोषणा करी , तो युवाओं के लिए फ्री स्मार्ट फ़ोन देने का वायदा… Read more »

मोदी सरकार में आर्थिक विकास से सामाजिक विकास

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ऐसे ही स्वीडन की कंपनियाँ मानती हैं कि भारत में भारतीय जनता पार्टी की केंद्र में सरकार आने तथा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बनने के बाद से लगातार यहाँ का व्‍यापारिक माहौल अच्‍छा हुआ है। यही कारण है कि पिछले साल में स्वीडिश कंपनियों और निवेशकों के रोजगार में 20 प्रतिशत तक वृद्धि हुई है। स्वीडिश चैंबर ऑफ कामर्स का भारत-स्‍वीडन व्यावसायिक माहौल सर्वे जिसमें कि कुल 170 कंपनियों में से 160 ने भाग लिया, सभी एक स्‍वर में कहती हैं कि प्रधानमंत्री मोदी बहुत अच्‍छा कार्य कर रहे हैं। स्वीडन को भारत में उर्जा, पर्यावरण, स्मार्ट सिटी, दूरसंचार, सूचना प्रौद्योगिकी और डिजिटाइजेशन, स्वास्थ्य और जीव विज्ञान के क्षेत्र में काम रही कंपनियों के लिये काफी संभावनाएं दिखाई देतीं हैं। दूसरी तरफ नीति आयोग के अपने आंकड़े हैं, जो आज यह बता रहे हैं कि भारतीय अर्थव्यवस्था 2030 तक 7 हजार 250 अरब डॉलर या कहें कि 469 लाख करोड़ रुपए की हो जाएगी। यह आंकलन उसने देश में 8 प्रतिशत सालाना वृद्धि दर के हिसाब से किया है।

आरक्षण के लिए मराठा समाज में फिर उबाल

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संदर्भःमहाराष्ट्र में मराठों को आरक्षण और कोपर्डी दुष्कर्मी को फांसी की मांग महाराष्ट्र में मराठा समाज का गुस्सा फिर से उबाल पर है, लेकिन इस गुस्से की अहमियत इस बात में है कि इसमें शोर-शराबा, नारे-बाजी और तोड़-फोड़ नहीं है। इस दृष्टि से यह अहिंसक और मूक आंदोलन, आरक्षण आंदोलन से जुड़े उन लोगों के… Read more »

सीमा पर सेना और बाज़ार में चीनी सामग्री की घुसपैठ?

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तनवीर जाफ़री – भारत द्वारा चीन के साथ रिश्ते सुधारने के लिए उठाए गए अनेक कूटनीतिक कदमों के बावजूद चीन अपनी पारंपरिक विस्तारवादी नीति पर आगे बढ़ता जा रहा है। भारत-चीन व भूटान के त्रिकोणीय सीमा क्षेत्र पर स्थित सिक्किम सेक्टर के डोकलाम इलाके में पिछले जून महीने से तनाव की खबरें आ रही हैं।… Read more »

जीएसटी: एक सार्थक पहल

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विगत कुछ समय से जीएसटी पर जारी अनवरत चर्चा की गहराई में जाने पर व्यापारी वर्ग की मायूसी का पता चलता है । हैरानी इस बात की है कि व्यापारियों को टैक्स की रकम, ग्राहकों को विक्रय की गई वस्तु के बदले में मिले दाम के एक हिस्से से ही चुकाना है फिर इतनी हायतौबा… Read more »

एक देश: एक टैक्स जीएसटी

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वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के लागू होने से केन्द्र और राज्यों के स्तर पर लगने वाले एक दर्जन से अधिक कर समाप्त हो जायेंगे और उनके स्थान में केवल जीएसटी लगेगा। मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस इस कार्यक्रम से दूर रही। कांग्रेस ने जीएसटी की शुरुआत के मौके पर आयोजित इस कार्यक्रम को तमाशा करार दिया। कांग्रेस के इसी बहिष्कार के चलते पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह भी इस कार्यक्रम से दूर रहे। तृणमूल कांग्रेस, राष्ट्रीय जनता दल, डीएमके और वामपंथी दलों ने कार्यक्रम का बहिष्कार किया। जीएसटी से देश की 2,000 अरब की अर्थव्यवस्था और 1.3 अरब लोग सभी एक साथ जुड़ जायेंगे और पूरा देश एक साझा बाजार बन जायेगा।