पुस्तक समीक्षा

राष्ट्रवाद से जुड़े विमर्शों को रेखांकित करती ” राष्ट्रवाद, भारतीयता और पत्रकारिता” किताब 

पुस्तक समीक्षा राष्ट्रवाद से जुड़े विमर्शों को रेखांकित करती एक किताब :  राष्ट्रवाद, भारतीयता और पत्रकारिता लोकेन्द्र

सजग पत्रकार की दृष्टि में मोदी-युग

   संजय द्विवेदी के जन्म से पूर्व के एक तथ्य को मैं अपनी तरफ से जोड़ना चाहता हूं, जब भारत विभाजन के पश्चात पश्चिमी पंजाब से लाखों की संख्या में हिंदू पूर्वी पंजाब पहुंचे तो संघ के स्वयंसेवकों ने बड़ी संख्या में उनके आतिथ्य, त्वरित पुर्नवास और उनके संबंधियों तक उन्हें पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उस समय बड़ी तादाद में अनेक व्यक्ति घायल और अंग-भंग के शिकार होकर विभाजित भारत में पहुंचे थे। उन्हें यथा संभव उपचार उपलब्ध कराने में संघ के स्वयंसेवकों ने शासन-प्रशासन तंत्र को मुक्त सहयोग दिया था। उसके साथ ही स्वतंत्र भारत ने अनेक प्राकृतिक आपदाओं के दौरान भी संघ के अनुषांगिक संगठनों से जुडे़ समाज सेवियों को स्वतःस्फूर्त सक्रिय पाया जाता रहा। 

अपना आसमान तराशना

जीवन में वृद्धि प्रतिबद्धता पर निर्भर करती है, निश्चित पराजय के सामने रहते हुए भी वृद्धि में अवरोध नहीं आता। । अपनी पसन्द और नापसन्दी के कारण हम चीजों को उनके सही परिप्रेक्ष्य में नहीं देख पाते, क्योंकि हमारी समझ हमेशा लगाव और विमुखता से रंजित रहती है। सम्यक सफाई की जाने की जरूरत होती है ताकि चीजें वैसी ही नजर आएँ जैसी वे होती हैं।

‘सेक्युलर्टाइटिस’- एक ऐसा उपन्यास, . जिसकी पूरी कहानी हो गई घटित

धारा ३७० को आधार बना कर लिखे गये इस उपन्यास में धर्मनिरपेक्षता पर व्यापक विमर्श हुआ है और देश के तमाम धर्मनिरपेक्ष दलों की भिन्न-भिन्न धर्मनिरपेक्षी नीतियों-करतुतों को उजागर करते हुए उन्हें तरह-तरह की व्यंग्यात्मक संज्ञा देकर चूभनेवाले विशेषण प्रदान किये गये है । मसलन- कांगेस की जजिया, हजिया, सफेद, रंगीन, दुधारु, गोधरी, निर्माणकारी व तीन सौ सतरी धर्मनिरपेक्षता, तो जदयू के नीतीश की

“शतपथ ब्राह्मण का महत्वपूर्ण लघु परिचयात्मक ग्रन्थ शतपथ सुभाषित”

  मनमोहन कुमार आर्य शतपथ ब्राह्मण पर स्मृति-शेष प्रतिष्ठित आर्य विद्वान पं. वेदपाल जी ने