हमारे बारे में

स्‍वतंत्रता आंदोलन के दौरान पत्रकारिता ने जन-जागरण में अहम भूमिका निभाई थी लेकिन आज यह जनसरोकारों की बजाय पूंजी व सत्ता का उपक्रम बनकर रह गई है। मीडिया दिन-प्रतिदिन जनता से दूर हो रहा है। ऐसे में मीडिया की विश्वसनीयता पर सवाल उठना लाजिमी है। आज पूंजीवादी मीडिया के बरक्‍स वैकल्पिक मीडिया की जरूरत रेखांकित हो रही है, जो दबावों और प्रभावों से मुक्‍त हो। प्रवक्‍ता डॉट कॉम इसी दिशा में एक सक्रिय पहल है।

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  1. आज जब हम स्वंय को विश्व का सबसे बड़ा लोकतन्त्र होने पर गर्व करते हैँ , मीडिया के नाम पर समाचार चैनलोँ के चमकते चेहरेँ और अपने संस्कारोँ को तिलांजलि देते कार्यक्रम और अखबारोँ मेँ नेताओँ के बड़े-बड़े विज्ञापन देखते हैँ तो क्या हमेँ सोचना नहीँ चाहिये कि क्या इसी आज़ादी के लिये हजारोँ लाखोँ ने अपना सर्वस्व त्यागा था ? आज मीडिया मिशन से मार्केट हो चुका हैँ जहाँ पूँजी आम आदमी के सरोकारोँ से बड़ी हो गयी है । वर्तमान परिस्थितियोँ मेँ किसी ऐसे मंच की नितांत आवश्यकता है जो आम आदमी की आवाज़ को संबल दे और समाज को जगाने की दिशा मेँ अपना योगदान अपने निजी स्वार्थोँ से उपर उठकर देँ । आज जब भारत एक वास्तविक लोकतंत्र बनने को तड़प रहा हैँ जहाँ ” जनता का जनता के लिये शासन ” हो प्रवक्ता की उपस्थिति आशा जगाती है । सफलता की नये पड़ावो पर पहुँचते प्रवक्ता के विचारकोँ को ह्रदय से बधाई ।

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