स्विस बैंकों के रहस्य

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   विजय कुमार,  शर्मा जी बड़े आदमी हैं। इसलिए वे दूसरों के यहां नहीं जाते। उनकी मान्यता है कि बड़ा आदमी कहीं क्यों जाए ? अगर वो हर किसी के पास जाने लगा, तो फिर वह भी अरविंद केजरीवाल की तरह आम आदमी हो जाएगा। इसलिए वे सुबह दस बजे खा-पीकर लोगों से मिलने के… Read more »

आज आया लाँघता मैं ! आज की अभी की

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गोपाल बघेल ‘मधु’ आज आया लाँघता मैं, ज़िन्दगी में कुछ दीवारें ; खोलता मैं कुछ किबाड़ें, झाँकता जग की कगारें ! मिले थे कितने नज़ारे, पास कितने आए द्वारे; डोलती नैया किनारे, बैठ पाते कुछ ही प्यारे ! खोजते सब हैं सहारे, रहे हैं जगती निहारे; देख पर कब पा रहे हैं, वे खड़े द्रष्टि पसारे ! क्षुब्ध क्यों हैं रुद्ध क्यों हैं, व्यर्थ ही उद्विग्न क्यों हैं; प्रणेता की प्रीति पावन, परश क्यों ना पा रहे हैं ! जा रहे औ आ रहे हैं, जन्म ले भरमा रहे हैं; ‘मधु’ घृत पी पा रहे हैं, नयन उनके खो रहे हैं ! ’

स्व-प्रेरणा की मिसालों से बनता समाज

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 ललित गर्ग  कहते हैं कि जिसके सिर पर कुछ कर गुजरने का जुनून सवार होता है तो फिर वो हर मुश्किल हालात का सामना करते हुए अपनी मंजिल को हासिल कर ही लेता है। ऐसे लोग अपने किसी भी काम के लिए दूसरों पर निर्भर नहीं होते बल्कि वो आत्मनिर्भर होकर अपने सभी कामों को… Read more »

अपमान

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डॉ मनोज चतुर्वेदी आकांक्षा को शाम से ही एक सौ तीन डिग्री बुखार था .उसके पापा जैसे ही घर आए, तो दादी ने उन्हें उसकी हालत के बारे में बताया. तब वह डॉ. सुधाकर शर्मा से बुखार की दवा ले आए. दो दिन तक आकांक्षा को बुखार चढ़ता- उतरता रहा. फिर उसके पापा शिवचरण सिंह… Read more »

साहित्य, राजनीति और पत्रकारिता के एक सूर्य का अस्त होना 

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मनोज कुमार मन आज व्याकुल है। ऐसा लग रहा है कि एक बुर्जुग का साया मेरे सिर से उठ गया है। मेरे जीवन में दो लोग हैं। एक दादा बैरागी और एक मेरे घर से जिनका नाम इस वक्त नहीं लेना चाहूंगा। दोनों की विशेषता यह है कि उनसे मेरा संवाद नहीं होता है लेकिन… Read more »

संन्यासी लेखक

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  गंगानन्द झा वह शाम खास थी। राजशेखर अपने शिक्षक और गुरु रामकृष्ण महाराज के साथ हमारे घर पर आया था। वे रामकृष्ण मिशन के संन्यासी हैं और रामकृष्ण मिशन विद्यापीठ, देवघर में वे राजशेखर के प्रिंसिपल रह चुके थे। राजशेखर पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट में एडवोकेट हैं.। पर अपने विद्यालय के महाराजजी से… Read more »

वेद एवं वैदिक साहित्य के वैदुष्य से सम्पन्न पं. राजवीर शास्त्री

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वेद एवं वैदिक साहित्य के वैदुष्य से सम्पन्न पं. राजवीर शास्त्री की शिक्षा-दीक्षा एवं शिक्षण आदि कार्य कार्य” मनमोहन कुमार आर्य पं. राजवीर शास्त्री आर्य पिता की संस्कारित एवं प्रतिभा सम्पन्न सन्तान थे। आपकी माता पौराणिक वैष्णव परिवार से थी। आपका जन्म 4 अप्रैल, 1938 को उत्तरप्रदेश के जनपद मेरठ निवासी श्री शिवचरण दास आर्य तथा… Read more »

नथुनी बाबू

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बात का सिलसिला सन 1971 ई से शुरु होता है। मेरा बड़ा बेटा हाई स्कूल का छात्र था। उसकी पढ़ाई के बारे में अपने मित्र श्री महेन्द्र कुमार से चर्चा हो रही थी। उन्होंने नथुनी बाबू के पास ट्यूशन के लिए भेजने का सुझाव दिया। नथुनी बाबू वी.एम. हाई स्कूल में महेंन्द्र बाबू के शिक्षक… Read more »

वह सब की सुनता है ओर सबकी मदद करता है

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एक मेजर के नेतृत्व में 15 जवानो की एक टुकड़ी हिमालय पर्वत में अपने रास्ते पर थी उन्हे ऊपर कही तीन महीने के लिए दूसरी टुकड़ी के लिए तैनात होना था | दुर्गम स्थान,ठण्ड और बर्फवारी ने चढ़ाई की कठिनाई और बढ़ा थी|बेतहासा ठण्ड में मेजर ने सोचा कि अगर उन्हें यहाँ एक कप चाय… Read more »

उस बुजुर्ग की एक छोटी सी सीख ने बदल दी मेरी सोच  

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तब मैं 11वीं का छात्र था और हास्टल में रहा करता था। मेरा हास्टल और इंटर कालेज मेरे गांव से 30 से 35 किमी ही दूर था और वह सरकारी था। इसलिए वहां मेश आदि की कोई सुविधा नहीं थी। लिहाजा खाना आदि हम लोग स्वयं बनाते थे और उसके लिए राशन पानी यहां तक… Read more »