आखिर कब तक यूँ ही बंद होता रहेगा भारत ?

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सुप्रीम कोर्ट द्वारा एस.सी.-एसटी एक्ट में बदलाब के विरोध मंे जनता का एक वर्ग आक्रोशित हो रहा है। दलितों के सवाल पर राजनीतिक दल रोटियाँ सेकनें में जुट गये हैं। वर्ग विशेष उग्र आंदोलन कर रहा है। उच्चतम न्यायालय ने अनुसूचित जाति व जनजाति अत्याचार अधिनियम में नया दिशा-निर्देश जारी किया है। दलितों के उत्पीड़न… Read more »

पुराने कानूनों से मुक्ति के साथ संशोधन भी जरूरी

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पुराने कानूनों से मुक्ति के साथ संशोधन भी जरूरी प्रमोद भार्गव यह अच्छी बात है कि केंद्र सरकार कुछ उपनिवेशिक कानूनों को खत्म करने के बाद  अवशेष  रह गए कानूनों को भी समाप्त करने की भी तैयारी  में हैं । नरेंद्र मोदी सरकार ने नई पहल करते हुए अंग्रेजों के जमाने के अप्रासंगिक हो चुके… Read more »

ऐट्रोसिटी कानून के दुरूपयोग पर सुप्रीम कोर्ट की मुहर

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संजीव खुदशाह विगत दिनों सुप्रीम कोर्ट ने एक आदेश पारित किया जिसमें इस बात का जिक्र किया गया कि भारत में एट्रोसिटी कानून का दुरुपयोग बड़ी मात्रा में किया जा रहा है। इसलिए अब लोक सेवकों पर सीधे FIR नहीं किया जा सकता ना ही गिरफ्तारी हो सकेगी। ध्यान रखिए यह बंदिश केवल लोक सेवकों… Read more »

बौनी बगावत!

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बीता शुक्रवार आजाद न्यायपालिका के ७० साला इतिहास में एक ऐसी बगावत का साक्षी बनने को मजबूर किया गया  जिसकी न ही देश को उम्मीद थी और न ही जरूरत। सर्वोच्च न्यायालय के दूसरे वरिष्ठतम न्यायाधीश चेलमेश्वर ने न्यायमूर्ति रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति मदन बी लोकुर और न्यायमूर्ति कुरियन जोसेफ  के साथ शुक्रवार की सुबह अपने… Read more »

उ. प्र. में न्याय पंचायतों का खात्मा एक अनुचित निर्णय

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स्वयं को भारतीय संस्कृति और परम्पराओं का पोषक दल बताने वाले भारतीय जनता पार्टी के विचारकों के लिए यह आइना देखने की बात है कि उत्तर प्रदेश की योगी केबिनेट ने समाज और संविधान की मान्यता प्राप्त न्याय पंचायत सरीखे एक परम्परागत संस्थान को खत्म करने का निर्णय लिया। उत्तर प्रदेश के पंचायत प्रतिनिधियों तथा ग्रामसभाओं… Read more »

तीन तलाक विधयेक : निहितार्थ ‘कसक के!

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शिव शरण त्रिपाठी लोकसभा में तीन तलाक विधयेक पास होने के बाद कानून बनने की राह पर ज्यों-ज्यों अग्रसर है त्यों-त्यों मुस्लिम वोटों के सौदागरों की चिंतायें बढ़ती जा रही है। सर्वाधिक बुरी स्थिति में तो कांग्रेस फसती नजर आ रही है। जिसके ही एक प्रधानमंत्री की ऐतिहासिक भूल से आज यह स्थिति पैदा हुई… Read more »

तो क्या ट्रायल कोर्ट सर्वोच्च न्यायालय से बड़ा है

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वीरेन्द्र सिंह परिहार 2 जी स्पेक्ट्रम मामले में सी.बी.आई. की विशेष अदालत का फैसला जिसमे ए. राजा और काणिमोझी समेत अन्य आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया गया, एक बहुत ही आश्चर्यजनक फैसला है। इतना आश्चर्य जनक कि देश के बहुत से लोग इस फैसले को लेकर सन्न हैं। ऐसा इसलिये कि सर्वोच्च न्यायालय ने इसे… Read more »

मुस्लिम महिला विधेयक

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हिन्दुओं में सती प्रथा के उन्मूलन के बाद सामाजिक बुराइयों को दूर करने के लिए किसी भी सरकार द्वारा पहली बार कल एक अत्यन्त साहसिक और क्रान्तिकारी विधेयक लोकसभा में पास हुआ। विवाह के बाद मुस्लिम महिला के अधिकारों की रक्षा के लिए यह विधेयक लाना और इसे कानून का रूप देना केन्द्र सरकार का… Read more »

…तो फिर 2जी घोटाले का दोषी कौन?

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देश में संप्रग सरकार के समय हुए 2जी घोटाले में न्यायालय के निर्णय के साथ ही भाजपा और कांग्रेस में राजनीतिक बयानबाजी प्रारंभ हो गई है। कांग्रेस जहां इस घोटाले को पूरी तरह से झूठा प्रमाणित करने की कवायद कर रही है, वहीं भाजपा की तरफ से अभी भी इसे घोटाले का रुप ही देने… Read more »

न्याय की धीमी गति पर खड़े हुए सवाल 

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 ललित गर्ग देश में कानून प्रक्रिया की धीमी एवं सुस्त गति एक ऐसी त्रासदी बनती जा रही है, जिसमें न्यायालयों में न्याय के बजाय तारीखों का मिलना, केवल पीड़ित व्यक्ति को ही नहीं, बल्कि समूची व्यवस्था को घायल कर देती है। इससे देश के हर नागरिक के मौलिक अधिकारों का न केवल हनन होता है… Read more »