“ईश्वरीय ज्ञान वेद की मान्यतायें ही विज्ञान की भांति सार्वभौमिक व सार्वकालिक मनुष्यमात्र का धर्म”

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मनमोहन कुमार आर्य, हमारी इस सृष्टि की रचना सर्वव्यापक ईश्वर ने की है जो सच्चिदानन्दस्वरूप, अनादि, अमर, निराकार, सर्वशक्तिमान, सर्वज्ञ व सर्वव्यापक है। उसके गुण, कर्म, स्वभाव व अन्य सभी नियम सत्य हैं व सर्वव्यापक भी हैं। ऐसा नहीं है कि ईश्वर के नियम भारत में कुछ और हों और अमेरिका व किसी अन्य देश… Read more »

“शरीर से ही नहीं, गुण-कर्म-स्वभाव से भी हमें मनुष्य बनना है”

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मनमोहन कुमार आर्य, जिस किसी प्राणी के पास दो हाथ, दो पैर और मनुष्याकृति होने सहित मन, बुद्धि आदि ज्ञानियों, योगियों व ऋषियों के समान हो, उसे वास्वविक व आदर्श मनुष्य कहते हैं। मनुष्याकृति वाले सभी प्राणी मनुष्य अवश्य हैं परन्तु वह आकृति से ही मनुष्य हैं। आकृति के आधार पर उन्हें उत्तम व आदर्श… Read more »

“धन और विद्या में विद्यार्जन अधिक महत्वपूर्ण है”

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मनमोहन कुमार आर्य, मनुष्य को अपने जीवन का निर्वाह करने के धन की आवश्यकता होती है। यदि किसी के पास धन नहीं है तो वह अपना भोजन, वस्त्र, निवास व घर तथा मान सम्मान को सुरक्षित रखते हुए इन सभी पदार्थों को प्राप्त नहीं कर सकता। इसके विपरीत यदि किसी के पास विद्या नहीं है… Read more »

“क्या बिना ईश्वर सृष्टि का बनना व संचालन सम्भव है?”

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मनमोहन कुमार आर्य, हम जिस सृष्टि में रहते हैं वह विशाल ब्रह्माण्ड का एक सौर्य-मण्डल है। इस सौर्यमण्डल में मुख्यतः एक सूर्य, हमारी पृथ्वी और ऐसे व इससे भी बड़े अनेक ग्रह तथा हमारी पृथ्वी का एक चन्द्र व अन्य ग्रहों के चन्द्र के समान अनेक छोटे व बड़े उपग्रह हैं। वैदिक गणना के अनुसार… Read more »

“सत्य को मानना व मनवाना हमारा कर्तव्य, धर्म एवं यज्ञ है

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मनमोहन कुमार आर्य, ऋषि दयानन्द (1825-1883) ने वेद व उसकी मान्यताओं और सिद्धान्तों पर आधारित धर्म के प्रचार व प्रसार के लिए 10 अप्रैल, सन् 1875 को ‘आर्यसमाज’ की स्थापना की थी। ऐसा उन्होंने इस लिये किया था कि वेद ही सृष्टि विषयक मान्यताओं एवं सत्य गुणों पर आधारित मानवीय कर्तव्यों से संबंधित ईश्वर प्रदत्त… Read more »

“ऋषि दयानन्द का उद्देश्य सद्ज्ञान देकर आत्माओं को परमात्मा से मिलाना था”

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मनमोहन कुमार आर्य, महाभारत के बाद ऋषि दयानन्द ने भारत ही नहीं अपितु विश्व के इतिहास में वह कार्य किया है जो संसार में अन्य किसी महापुरुष ने नहीं किया। अन्य महापुरुषों ने कौन सा कार्य नहीं किया जो ऋषि ने किया? इसका उत्तर है कि ऋषि दयानन्द ने अपने कठोर तप व पुरुषार्थ से… Read more »

“वेद और ऋषियों ने दिया पूरे विश्व को आत्मा के अविनाशी होने व पुनर्जन्म का सिद्धान्त”

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मनमोहन कुमार आर्य, मनुष्य जीवन का उद्देश्य ज्ञान की प्राप्ति कर सत्य व असत्य को जानना, असत्य को छोड़ना, सत्य को स्वीकार करना व उसे अपने आचरण में लाना है। सबसे पहला कार्य जो मनुष्य को करना है वह स्वयं को व इस संसार को अधिक सूक्ष्मता से न सही, सार रूप में जानना तो… Read more »

“जीवात्मा के बाहर भीतर व्यापक परमात्मा को जानना मनुष्य का मुख्य कर्तव्य”

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मनमोहन कुमार आर्य,  संसार में अनेक आश्चर्य हैं। कोई ताजमहल को आश्चर्य कहता है तो कोई लोगों को मरते हुए देख कर भी विचलित न होने और यह समझने कि वह कभी नहीं मरेगा, इस प्रकार के विचारों को आश्चर्य मानते हैं। हमें इनसे भी बड़ा आश्चर्य यह प्रतीत होता है कि मनुष्य स्वयं को… Read more »

“ऋषि दयानन्द की कृपा से ही हमें वेदों पर कुछ कहने और सुनने का अवसर प्राप्त हो रहा हैः डा. महावीर अग्रवाल”

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मनमोहन कुमार आर्य,  श्रीमदद्यानन्द ज्योतिर्मठ आर्ष गुरुकुल, देहरादून का तीन दिवसीय 18वां वार्षिकोत्सव 3 जून, 2018 को समाप्त हो चुका है। दिनांक 2 जून, 2018 को उत्सव के दूसरे दिन सायंकालीन सत्र में उत्तराखण्ड संस्कृत विश्वविद्यालय के पूर्व उपकुलपति डा. महावीर अग्रवाल सहित अन्य कुछ विद्वानों के उपदेश हुए। हम यहां वह उपदेश प्रस्तुत कर… Read more »

“समस्त पृथिवी पर एक दयानन्द ही पूर्ण ब्रह्मचारी, पूर्ण योगी और पूर्ण ऋषि थाः आचार्य वेदप्रकाश श्रोत्रिय”

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  मनमोहन कुमार आर्य,  श्रीमद्दयानन्द ज्यातिर्मठ आर्ष गुरुकुल, पौन्धा-देहरादून के तीन दिवसीय वार्षिकोत्सव के दूसरे दिन 2 जून, 2018 के सायंकालीन  सत्र में आर्यसमाज के प्रसिद्ध विद्वान पं. वेदप्रकाश श्रोत्रिय का प्रभावशाली सम्बोधन हुआ। हम यहां उनका सम्बोधन प्रस्तुत कर रहे हैं।अपने सम्बोधन के आरम्भ आचार्य वेदप्रकाश श्रोत्रिय ने कहा कि विद्या ऐसी चीज है… Read more »