मनुष्यों की सन्तानों को श्रेष्ठ मनुष्य बनाना ही वेदोत्पत्ति का प्रयोजन

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  -मनमोहन कुमार आर्य संसार में आज जितना भी ज्ञान उपलब्ध है उसका एकमात्र उद्देश्य मनुष्य के जीवन को सुखी व श्रेष्ठ बनाना है। सद्ज्ञान ही वह पदार्थ, ज्ञान व धन है जिससे मनुष्य श्रेष्ठ बन सकता है। हमारे पास आज एक ओर मत-मतान्तरों के ग्रन्थ व पुस्तकें हैं तो दूसरी ओर ज्ञान व विज्ञान… Read more »

घर के मंदिर में भूलकर भी नहीं करें ये गलतियां वरना हो सकता हैं तनाव या टेंशन…

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( अनजाने में घर के मंदिर में की गयी ये गलतियाँ बन सकती है तनाव का कारण) भगवान् की पूजा हर घर में की जाती है, लोग अपने घर में भगवान् को एक खास जगह देते है और उसी जगह पर रोज़ाना उनकी पूजा पाठ की जाती है,एक तरह से माना जाये तो ये स्थान… Read more »

वर्ष 2017 की शारदीय नवरात्री —

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इस वर्ष की शारदीय नवरात्रि आज दिनांक 21 सितंबर 2017  (गुरूवार ) से आरम्भ होने वाला है। नवरात्रि में दुर्गा माता की नौ दिनों में 9 स्वरूपों की पूजा-अर्चना की जाती है। माता दुर्गा हिन्दू धर्म में आद्यशक्ति के रूप में सुप्रतिष्ठित है तथा माता शीघ्र फल प्रदान करनेवाली देवी के रूप में लोक में… Read more »

नौ देवियों को पूजा के दौरान क्या क्या भोग लगाएं ??

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देश भर में नवरात्र 21 सितंबर से आरंभ हो रहे हैं और भक्त जन देवी मां के स्वागत की तैयारियों में लगे हैं। नौ दिनों में जिस तरह देवी के नौ रूपों की पूजा होती है ठीक उसी प्रकार नौ देवियों को अलग अलग प्रसाद अर्पित किया जाता है। हर देवी को प्रसन्न करने के… Read more »

मृतकों के चित्रों पर पुष्पमाला व पुष्प चढ़ाना अवैदिक कृत्य

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मनमोहन कुमार आर्य एक आर्य विद्वान ने हमारा ध्यान आर्यजनों द्वारा अपने प्रिय परिवारजनों की मृत्यु आदि के बाद आयोजित श्रद्धांजलि आदि कार्यक्रमों में उनका चित्र रखने, उस पर पुष्पमाला डालने व पुष्प चढ़ाने की अवैदिक परम्परा की ओर आकर्षित किया है। उन्होंने हमसे हमारा पक्ष पूछा था जो हमने उन्हें अवगत करा दिया है… Read more »

मृतकों का श्राद्ध अशास्त्रीय एवं वेद विरुद्ध होने से त्याज्य कर्म

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-मनमोहन कुमार आर्य आश्विन मास का कृष्ण पक्ष मृत पितरों का श्राद्ध कर्म करने के लिए प्रसिद्ध सा हो गया है। इन दिनों पौराणिक नाना प्रकार के नियमों का पालन करते हैं। अनेक पुरुष दाढ़ी नहीं काटते, बाल नहीं कटाते, नये कपड़े नहीं खरीदते व सिलाते, यहां तक की विवाह आदि का कोई भी शुभ… Read more »

आर्यसमाज का मुख्य उद्देश्य

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सबकी शारीरिक सामाजिक आत्मिक उन्नति सहित संसार का उपकार करना आर्यसमाज का मुख्य उद्देश्य मनमोहन कुमार आर्य ऋषि दयानन्द जी ने आर्यसमाज की स्थापना सर्वविद्यामय ईश्वरीय ज्ञान वेदों के प्रचार के लिए की थी। ज्ञान से बढ़कर संसार में दूसरा कोई धन या महत्वपूर्ण पदार्थ नहीं है। शरीर व आत्मा की उन्नति के लिए विद्या वा… Read more »

सत्य का मार्ग ही जीवन की सफलता का मार्ग है

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मनुष्य जीवन का उद्देश्य क्या है? इसके उत्तर में कह सकते हैं कि सत्य को जानना, समझना, उस पर गहनता से विचार करना, ऋषि दयानन्द सरस्वती आदि महापुरुषों के जीवन चरितों व उपदेशों का अध्ययन करना, ईश्वर, जीवात्मा व प्रकृति का सत्य ज्ञान कराने वाले वेद एवं सत्यार्थाप्रकाशादि ग्रन्थों को प्राप्त करना व उनका अध्ययन… Read more »

वेद ईश्वरीय ज्ञान और सृष्टि के आरम्भ और बाद में उसकी आवश्यकता

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मनमोहन कुमार आर्य ईश्वरीय ज्ञान की चर्चा से पूर्व यह जानना आवश्यक है कि ईश्वर क्या है वा ईश्वर किसे कहते हैं। ईश्वर एक सत्य-चित्त-आनन्द युक्त सत्ता का नाम है। यह सत्ता निराकार एवं सर्वव्यापक है। यह सर्वज्ञ है एवं इसी ने सत्व, रजस व तम गुणों वाली त्रिगुणात्मक सूक्ष्म प्रकृति से इस संसार की… Read more »

विश्व में सत्य की प्रचारक धार्मिक एवं सामाजिक संस्था आर्य समाज

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मनमोहन कुमार आर्य    सत्य को मानना व उसका प्रचार करना ही धर्म है और जो असत्य है उसे जानना व उसका त्याग करना व कराना भी धर्म ही है। आजकल हम देखते हैं कि संसार अनेक मत-मतान्तर व पंथों से भरा हुआ है। सबकी परस्पर कुछ समान व कुछ असमान मान्यतायें हैं। सबके अपने… Read more »