वेद सृष्टिकर्ता ईश्वर से ही उत्पन्न हुए हैं

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मनमोहन कुमार आर्य संसार में दो प्रकार की रचनायें हैं। प्रथम अपौरुषेय कहलाती हैं जिन्हें कि मनुष्य व मनुष्य समूह मिलकर भी निर्मित नहीं कर सकते। दूसरी रचनायें मनुष्यों द्वारा अपनी बुद्धि में निहित ज्ञान व शारीरिक बल व सामर्थ्य का प्रयोग करके की जाती हैं। सूर्य, चन्द्र, पृथिवी एवं पृथिवीस्थ सभी पदार्थ तथा यह… Read more »

संसार का उपकार और मनुष्यों की शारीरिक-आत्मिक-सामाजिक उन्नति

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मनमोहन कुमार आर्य मनुष्य व अन्य प्राणियों का जीवन प्रकृति प्रदत्त संसाधनों एवं दूसरों के उपकार के कार्यों पर निर्भर है। प्रकृति से हमें वायु, जल, अग्नि और अन्नादि पदार्थों सहित निवास वा आश्रय मिलता है। इसी प्रकार संसार में अन्य मनुष्य आदि प्राणियों से भी हम सब उपकृत होते हैं। माता-पिता से तो मनुष्य… Read more »

मूर्तिपूजा पर ऋषि दयानन्द का अकेले काशी के 40 दिग्गज विद्वानों से सफल शास्त्रार्थ

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-काशी शास्त्रार्थ की १४८ वी वर्षगांठ-    -मनमोहन कुमार आर्य ऋषि दयानन्द ने अपने जीवन में जो महान् कार्य किए उनमें से एक काशी के दुर्गाकुण्ड स्थित आनन्द बाग में लगभग 50-60 हजार लोगों की उपस्थिति में ‘मूर्तिपूजा वेदसम्मत नहीं है’,  विषय पर उनका शास्त्रार्थ भी था जिसमें स्वामी जी विजयी हुए थे। यह शास्त्रार्थ… Read more »

भारतवर्ष की आत्मा धर्ममय

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डा. राधेश्याम द्विवेदी स्वयं के लिए जीवन जीना पशुता है और दूसरों को भी जीने देना ही मानव धर्म है। धर्म-परायण, सभ्य मानवों ने दूसरों को भी ‘जीने दो’ का लक्ष्य रख कर स्वेच्छा से कुछ नियम और प्रतिबन्ध अपने ऊपर लागू कर लिये हैं। मानव भोजन के लिये किसी जीव की हत्या करने के… Read more »

जन्म व मृत्यु से जुड़े कुछ प्रश्नों पर विचार

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मनमोहन कुमार आर्य मनुष्य एक शरीरधारी जीवात्मा को कहते हैं जो मनुष्यों के समान आकृति सहित मननशील प्राणी होता है। जीवात्मा एक चेतन तत्व है जो सत्य, एकदेशी, ससीम, अल्पज्ञ, अल्प सामर्थ्य, जन्म-मरण धर्मा, कर्मों को करने वाला व ईश्वरीय व्यवस्था से उनके फल भोगने वाला है। मनुष्यों को मनुष्य-जन्म उसके पूर्व जन्मों के कर्मों… Read more »

शनिचरी अमावस्या 18  नवंबर 2017 —-

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हम सभी जानते हैं की मार्गशीर्ष अमावस्या का एक अन्य नाम अगहन अमावस्या भी है. इस अमावस्या का महत्व कार्तिक अमावस्या से कम नहीं है. जिस प्रकार कार्तिक मास की अमावस्या को लक्ष्मी पूजन कर दिपावली बनाई जाती है. इस दिन भी श्री लक्ष्मी का पूजन करना शुभ होता है. इसके अतिरिक्त अमावस्या होने के… Read more »

प्रज्ञाचक्षु स्वामी विरजानन्द सरस्वती मूर्तिपूजा का मौखिक खण्डन करते थे

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मनमोहन कुमार आर्य स्वामी दयानन्द जी देश भर घूमकर वेदों का प्रचार करते थे। वेद प्रचार के अन्तर्गत वह ईश्वर की स्तुति, प्रार्थना व उपासना का प्रचार करते हुए वेद विरुद्ध मूर्तिपूजा का खण्डन भी करते थे। मूर्तिपूजा से जुड़ा हम उनका एक संस्मरण प्रस्तुत कर रहे हैं जिसमें उन्होंने बताया है कि उन्हें मूर्तिपूजा… Read more »

वीर सावरकर जी के नाटक प्रतिशोध में अंग्रेजों के इतिहास की कुछ प्रमुख घटनाओं का अनावरण

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मनमोहन कुमार आर्य भारतमाता के वीरसपूत अमर व अजेय वीर सावरकर का नाम लेकर भारतीय आर्य हिन्दू गौरव का अनुभव करते हैं। देश की आजादी के लिए उन्होंने जो कार्य व बलिदान किया है, वह स्वर्णाक्षरों में अंकित है। सावरकर जी स्वतन्त्रता के अग्रणीय योद्धा व समाज सुधारक सहित एक सफल लेखक व इतिहासकार भी… Read more »

देश एवं आर्यसमाज के इतिहास में स्वामी श्रद्धानन्द जी का गौरवपूर्ण स्थान

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-मनमोहन कुमार आर्य 23 दिसम्बर, 2017 को ऋषिभक्त स्वामी श्रद्धानन्द जी का 91 वां बलिदान दिवस है।  इसी दिन दिल्ली में एक विधर्मी जुनूनी हत्यारे अब्दुल रसीद ने रुग्णावस्था में स्वामी जी को गोली मारकर शहीद कर दिया था। देश के इतिहास में के हिन्दू बन्धुओं को विदेशी यवन विधर्मियों ने देश पर आक्रमण कर… Read more »

वेद ईश्वरीय ज्ञान है

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-मनमोहन कुमार आर्य, वेद ईश्वरीय ज्ञान है। इसका तात्पर्य है कि वेदों का ज्ञान ईश्वर प्रदत्त है। ज्ञान दो ही चेतन सत्ताओं के द्वारा दिया जाता है और मनुष्य आदि द्वारा ग्रहण किया जाता है। वेदों के सभी मन्त्र व उनके शब्द, अर्थ और सम्बन्ध ईश्वर द्वारा सृष्टि के आरम्भ में चार आदि ऋषियों अग्नि,… Read more »