उपास्य-देव सर्वव्यापक ईश्वर की सन्ध्या करने से लाभ

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मनमोहन कुमार आर्य ऋषि दयानन्द ने 10 अप्रैल, सन् 1875 को आर्यसमाज की स्थापना की थी। आर्यसमाज वेद प्रचार आन्दोलन है। वेद ईश्वरीय ज्ञान है और वेद में सभी सत्य विद्यायें बीज रूप में उपस्थित हैं। सब सत्य विद्या और जो पदार्थ विद्या से जाने जाते हैं उनका आदि मूल परमेश्वर है। परमेश्वर से विद्या… Read more »

अग्निहोत्र के लाभ

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-मनमोहन कुमार आर्य यज्ञ के विषय में हमारे ऋषि कहते हैं कि यज्ञ श्रेष्ठतम कर्म है। यज्ञ को सर्वश्रेष्ठ व सबसे श्रेष्ठ कर्म बताया गया है। वेदों में यज्ञ को ब्रह्माण्ड वा भुवन की नाभि बताया गया है। इससे यज्ञ का महत्व निर्विवाद है। अग्निहोत्र भी एक यज्ञ है और यह श्रेष्ठतम कर्म भी है।… Read more »

ऋषि दयानन्द के जीवनकाल में लिखित व प्रकाशित उनकी प्रथम जीवनी दयानन्द दिग्विजयार्क

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-दयानन्द दिग्विजयार्क ग्रन्थ का महत्व एवं उसके प्रकाशन की आवश्यकता- -मनमोहन कुमार आर्य, आर्यसमाज के संस्थापक ऋषि दयानन्द के अनेक जीवन चरित्र उपलब्ध हैं जो अनेक ऋषिभक्त उच्च कोटि के विद्वानों ने समय-समय पर लिखे हैं व प्रकाशित हुए हैं। इन जीवन चरितों में एक जीवन चरित ऐसा भी है कि जो उनके जीवन काल… Read more »

वेदों की रक्षा और स्वाध्याय क्यों करें?

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मनमोहन कुमार आर्य मनुष्य उसी वस्तु की रक्षा करता है जिसका उसके लिए कोई उपयोग हो व जिससे उसे लाभ होता है। वेद सृष्टि की प्राचीनतम ज्ञान की पुस्तकें हैं। इसमें मनुष्य जीवन के लिए उपयोगी, तृण से लेकर ईश्वर पर्यन्त, सभी पदार्थों का ज्ञान उपलब्ध है। वेदों की भाषा भी संसार की आदि भाषा… Read more »

ईश्वर को कौन प्राप्त कर सकता है?

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-मनमोहन कुमार आर्य, आज का संसार प्रायः भोगवादी है। संसार के लोगों की इस संसार के रचयिता को जानने में कोई विशेष रूचि दिखाई नहीं देती। सब सुख चाहते हैं और सुख का पर्याय धन बन गया है। इस धन का प्रयोग मनुष्य भोजन, वस्त्र, आवास, वाहन, यात्रा व बैंक बैलेंस में वृद्धि आदि कार्यों… Read more »

सामान्य भारतीय जन के प्रतीक हैं– शिव

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त्याग और तपस्या के  प्रतिरुप भगवान शिव लोक-कल्याण के अधिष्ठाता देवता हैं। वे संसार की समस्त विलासिताओं और ऐश्वर्य प्रदर्शन की प्रवृत्तियों से दूर हैं। सर्वशक्ति सम्पन्न होकर भी अहंकार से मुक्त रह पाने का आत्मसंयम उन्हें देवाधिदेव महादेव – पद प्रदान करता है। शास्त्रों में शिव को तमोगुण का देवता कहा गया है, किन्तु… Read more »

 वेदज्ञ महान ऋषि दयानन्द जन्म दिवस एक पावन पर्व

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मनमोहन कुमार आर्य, वेदों के पुनरुद्धारक महर्षि दयानन्द जी का जन्म गुजरात के टंकारा नामक स्थान पर फाल्गुन कृष्णा दशमी के दिन हुआ था। इस वर्ष यह दिवस 10 फरवरी, 2018 को है। महर्षि दयानन्द का जन्म उनसे पूर्व व पश्चात उत्पन्न व जन्में किसी महापुरुष से कम महत्व का नहीं है अपितु हमारी दृष्टि… Read more »

ईश्वर के मुख्य काम सहित मनुष्यों के कुछ प्रमुख कर्तव्य

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मनमोहन कुमार आर्य इस संसार को बनाने वाला व हमारी आत्मा को माता-पिता के माध्यम से शरीर से युक्त करने व जन्म देने वाली सत्ता का नाम ईश्वर है। समस्त जड़ चेतन जगत का रचयिता व पालक एक ईश्वर ही है। ईश्वर सच्चिदानन्दस्वरूप, निराकार, सर्वशक्तिमान, सर्वज्ञ, सर्वव्यापक, सर्वातिसूक्ष्म, सर्वान्तर्यामी, कर्म-फल प्रदाता, मोक्षदाता, ज्ञान व सुख… Read more »

ऋषि दयानन्द ने आर्यसमाज की स्थापना क्यों की?

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मनमोहन कुमार आर्य आर्यसमाज एक सामाजिक एवं धार्मिक आन्दोलन है। यह वैदिक सिद्धान्तों से देश की राजनीति को भी दिशा देने में समर्थ है। वेद, मनुस्मृति, रामायण एवं महाभारत आदि ग्रन्थों में राजा के कर्तव्यों सहित एवं समाज एवं देश की सुव्यवस्था संबंधी वैदिक विधानों की भी चर्चा है। आर्यसमाज की सभी गतिविधियों का मुख्य… Read more »

सत्संग का उत्तम साधन वेद, सत्यार्थप्रकाश आदि का स्वाध्याय

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-मनमोहन कुमार आर्य    मनुष्य को अपने जीवन को सुचारू रूप से चलाने के लिए सत्संग की आवश्यकता होती है। सत्संग का अभिप्राय है कि हम जीवन को सुख, समृद्धि व सफलता आदि प्राप्त करने के लिए सत्य को जानें। यदि हमें सत्य का ज्ञान नहीं होगा तो हम सही निर्णय नहीं ले सकेंगे। हो… Read more »