गायत्री महामंत्र का महत्व

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मनमोहन कुमार आर्य वेदों में गायत्री  मंत्र के नाम से एक मंत्र आता है जो निम्न है। इसे गायत्री मंत्र इस लिये कहते हैं कि इसे गाया जाता है और यह मंत्र गायत्री छन्द निबद्ध है। इसे गुरू मंत्र भी कहते हैं। इस कारण कि गुरुकुल में प्रवेश करते समय आचार्य अपने ब्रह्मचारी को प्रथम… Read more »

“सच्ची आध्यात्मिकता के उन्नायक व पुरस्कर्ता ऋषि दयानन्द”

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“सच्ची आध्यात्मिकता के उन्नायक व पुरस्कर्ता ऋषि दयानन्द” –मनमोहन कुमार आर्य, ऋषि दयानन्द (1825-1883) को सारा संसार जानता है। सभी मत-मतान्तरों के आचार्य भी उन्हें व उनके बनाये सत्यार्थप्रकाश ग्रन्थ को जानते हैं। उन्होंने धार्मिक जगत में ऐसी क्रान्ति की जिसने सभी मत-मतान्तरों की अविद्या की पोल खोल दी। उनके आने से पूर्व सभी मत-मतान्तरों… Read more »

‘संसार में अनादि पदार्थ कितने व कौन कौन से हैं?’

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‘संसार में अनादि पदार्थ कितने व कौन कौन से हैं?’ -मनमोहन कुमार आर्य, हम जब आंखे बन्द करते हैं तो हमें कुछ दिखाई नहीं देता और जब आंखों को खोलते हैं तो हमें यह संसार दिखाई देता है। इस संसार में सूर्य, चन्द्र, पृथिवी, नक्षत्र, लोक लोकान्तर आदि अनेक ग्रह व उपग्रह हैं। इनकी संख्या… Read more »

संसार में अनादि पदार्थ कितने व कौन कौन से हैं?”

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“संसार में अनादि पदार्थ कितने व कौन कौन से हैं?” –मनमोहन कुमार आर्य हम जब आंखे बन्द करते हैं तो हमें कुछ दिखाई नहीं देता और जब आंखों को खोलते हैं तो हमें यह संसार दिखाई देता है। इस संसार में सूर्य, चन्द्र, पृथिवी, नक्षत्र, लोक लोकान्तर आदि अनेक ग्रह व उपग्रह हैं। इनकी संख्या… Read more »

गीता का कर्मयोग और आज

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गीता का कर्मयोग और आज राकेश कुमार आर्य  गीता का अठारहवां अध्याय अधर्म को धर्म समझ लेना घोर अज्ञानता का प्रतीक है। मध्यकाल में बड़े-बड़े राजा महाराजाओं ने और सुल्तानों ने अधर्म को धर्म समझकर महान नरसंहारों को अंजाम दिया। ये ऐसे नरसंहार थे -जिनसे मानवता सिहर उठी थी। वास्तव में ये कार्य तामसी… Read more »

शूद्रों को ब्राह्मण बनाने वाले परशुराम

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शूद्रों को ब्राह्मण बनाने वाले परशुराम प्रमोद भार्गव समाज को बनाने की जिम्मेदारी  उस समाज के ऊपर होती है, जिसके हाथ में सत्ता के तंत्र होते हैं। इसीलिए जब परशुराम के हाथ सत्ता के सूत्र आए तो उन्होंने समाजिक उत्पीड़न झेल रहे शूद्र और वंचितों को मुख्यधारा में लाकर पहले तो उनका यज्ञोपवीत संस्कार कराकर… Read more »

गीता का कर्मयोग और आज का विश्व, भाग-91

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राकेश कुमार आर्य   गीता का अठारहवां अध्याय योगीराज श्रीकृष्णजी अर्जुन को बताते हैं कि किसी भी देहधारी के लिए कर्मों का पूर्ण त्याग सम्भव नहीं है। ऐसा हो ही नहीं सकता कि कोई व्यक्ति कर्मों का पूर्ण त्याग कर दे। कर्म तो लगा रहता है, चलता रहता है। गीता की एक ही शर्त… Read more »

गीता का कर्मयोग और आज का विश्व, भाग-92

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राकेश कुमार आर्य गीता का अठारहवां अध्याय अंग्रेजों के कानून ने किसी ‘डायर’ को फांसी न देकर और हर किसी ‘भगतसिंह’ को फांसी देकर मानवता के विरुद्ध  अपराध किया। यह न्याय नहीं अन्याय था। यद्यपि अंग्रेज अपने आपको न्यायप्रिय जाति सिद्घ करने का एड़ी चोटी का प्रयास आज भी करते हैं। इसके विपरीत गीता दुष्ट… Read more »

आदर्श गुरु स्वामी विरजानन्द और आदर्श शिष्य स्वामी दयानन्द

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मनमोहन कुमार आर्य            आदर्श मनुष्य का निर्माण आदर्श माता, पिता और आचार्य करते हैं। ऋषि दयानन्द ने लिखा है कि वह सन्तान भाग्यशाली होती है जिसके माता, पिता और आचार्य धार्मिक होते हैं।  धार्मिक होने का अर्थ है कि जिन्हें वेद व वेद परम्पराओं का ज्ञान होता है। ऋषि दयानन्द भाग्यशाली थे कि उन्हें… Read more »

वेद और सत्यार्थप्रकाश के स्वाध्याय को जीवन का अंग बनायें

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मनमोहन कुमार आर्य मनुष्य का जीवात्मा अल्पज्ञ होता है। अल्पज्ञ होने के कारण इसे ज्ञान अर्जित करना होता है। ज्ञान माता-पिता व आचार्यों सहित पुस्तकों वा ग्रन्थों से प्राप्त होता है। माता-पिता का ज्ञान तो सीमित होता है अतः उनसे जितना सम्भव हो वह ज्ञान तो लेना ही चाहिये। इसके अतिरिक्त विद्यालय जाकर आचार्यों से… Read more »