राष्ट्रीय चुनौतियों के मूल में बौद्धिक कारण

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साहित्य से ही निवारण मनोज ज्वाला आज अपने देश में जितनी भी तरह की समस्यायें और चुनैतियां विद्यमान हैं, उन सबका मूल कारण वस्तुतः बौद्धिक संभ्रम है , जो या तो अज्ञानतावश कायम है या अंग्रेजी मैकाले शिक्षा-पद्धति से निर्मित औपनिवेशिक सोच का परिणाम है अथवा वैश्विक महाशक्तियों के भारत-विरोधी साम्राज्यवादी षड्यंत्र का अंजाम ।… Read more »

रोहिंग्याई मुसलमान : खतरों को आमंत्रण

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रोहिंग्या मुसलमान के बारे में अब यह स्पष्ट हो रहा है कि आतंकी गतिविधियों में शामिल रहे हैं। इन्होंने म्यांमार में अशांति फैलाने का काम किया है। इस प्रकार की गतिविधियों में संलिप्त रहकर काम करने वाले रोहिंग्याई मुसलमान के पक्ष में भारत में वातावरण बनाना निश्चित रुप से एक भीषण खतरे का संकेत है।… Read more »

मध्यप्रदेश- बच्चों के साथ त्रासदियों का पुराना सिलसिला

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जावेद अनीस दुर्भाग्य से गोरखपुर की घटना कोई इकलौती घटना नहीं है इससे पहले भी देश के अनेक हिस्सों में इस तरह की घटनायें होती रही हैं . पूर्व में हुई घटनाओं से हम सीख हासिल सकते थे लेकिन हमने  कभी भी ऐसा नहीं किया है. हमने तो  जवाबदेही को एक दुसरे पर थोपने और… Read more »

शक्ति की उपासना और कन्याओं पर बढ़ते जुल्म

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ललित गर्ग – शताब्दियों से हम साल में दो बार नवरात्र महोत्सव मनाते हुए कन्याओं को पूजते हैं। पूरे नौ दिन शक्ति की उपासना होती है। दुर्गा के अलग-अलग रूपों की पूजा-अर्चना करके लोग उनसे अपने घर पधारने का अनुरोध करते हैं। लेकिन विडम्बना देखिये कि सदियों की पूजा के बाद भी हमने कन्याओं को… Read more »

क्यों जिन्दगी का सच नहीं ढूंढ़ पाये? 

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ललित गर्ग जिन्दगी के सवालों से घिरा वक्त जीवन के सच को ढूंढ़ने की कोशिश कर रहा है। यह कोशिश अतीत से वर्तमान तक होती रही है। अनेक महापुरुषों ने इसके लिये अपना जीवन होम कर दिया। इसी जीवन के सच की सांसों की बांसुरी में सिमटे हैं कितने ही अनजाने-अनसुने सुर जो बुला रहे… Read more »

ऋषि दयानन्द ने अपने विद्या गुरू स्वामी विरजानन्द सरस्वती की शिक्षा एवं प्रेरणा से देश में धार्मिक एवं सामाजिक क्रान्ति की

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आज स्वामी विरजानन्द सरस्वती जी की पुण्य तिथि पर मनमोहन कुमार आर्य आज ऋषि दयानन्द के विद्या गुरु प्रज्ञाचक्षु दण्डी स्वामी विरजानन्द सरस्वती जी की पुण्य तिथि है। 14 सितम्बर, सन् 1868 (सोमवार) को मथुरा में उनका देहान्त हुआ था। उस दिन हिन्दी तिथि आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी थी। विक्रमी संवत् 1925… Read more »

विश्वगुरू के रूप में भारत-26

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 राकेश कुमार आर्य यदि अस्पृश्यता आदि विकृतियां भारत की संस्कृति होतीं तो अलग-अलग कालखण्डों में आये अनेकों समाज सुधारकों को उनके विरूद्घ आवाज उठाने की ही आवश्यकता नहीं पड़ती, और ना ही उनके सत्कार्यों का इतिहास वन्दन करता। राष्ट्र सर्वप्रथम भारत में विद्यार्थियों के भीतर राष्ट्र सेवा का भाव जागृत करने के लिए राजा और… Read more »

अर्थ एवं विकास के असन्तुलन से उपजी समस्याएं

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ललित गर्ग- पैसे के बढ़ते प्रवाह में दो तरह की स्थितियां देखने को मिल रही है। एक स्थिति में अर्थ के सर्वोच्च शिखरों पर पहुंचे कुछ लोगों ने जनसेवा एवं जन-कल्याण के लिये अपनी तिजोरियां खोल रहे हैं तो दूसरी स्थिति में जरूरत से ज्यादा अर्जित धन का बेहूदा एवं भोंडा प्रदर्शन कर रहे हैं।… Read more »

मोटी-मोटी फीस के नाम पर बच्चों की ‘हत्या’

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आशीष रावत आप सभी को याद होगा कि 5 सितम्बर, 2017 की रात्रि बेंगलुरु में गौरी लंकेश की हत्या कर दी गई थी। हत्या किसने की ये अभी किसी को पता नहीं चला लेकिन दिल्ली के प्रेस क्लब आॅफ इंडिया में जवाहरलाल नेहरु विश्वविद्यालय के कन्हैया कुमार, शेहला रशीद और कम्युनिस्ट पार्टी के नेता डी…. Read more »

राष्ट्र निर्माण के काम आएं साधु

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संदर्भ :  अखाड़ा द्वारा संत घोषित करने से पूर्व होगी जांच। प्रमोद भार्गव अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद् ने शायद आजादी के बाद पहली बार यह कठोर निर्णय लिया है कि किसी व्यक्ति को साधु या संत घोषित करने से पहले उसके आध्यात्मिक ज्ञान की जांच पड़ताल होगी। साथ ही उसके संन्यासी के रूप में किए… Read more »