घटनाओं की ताक पर “विकास की सड़क”: मेरा गाँव मेरी सड़क

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प्रदीप रावत- गुप्तकाशी से अगर आप सल्या तुलंगा ल्वाणी के लिए सल्या- तुलंगा मोटर मार्ग से आप गुजर रहे हैं, तो सावधान हो जाइए, आप कभी भी हादसे का शिकार हो सकते हैं. यह सड़क कहने को तो वर्ल्ड बैंक के अधीन है और पिछले चार वर्षों से लगातार सड़क के पक्कीकरण व डामरीकरण के… Read more »

खतरे में है भारत की सांस्कृतिक अखंडता और विरासत

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  डॉ अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत देश एक बहु-सांस्कृतिक परिदृश्य के साथ बना एक ऐसा राष्ट्र है जो दो महान नदी प्रणालियों, सिंधु तथा गंगा, की घाटियों में विकसित हुई सभ्यता है, यद्यपि हमारी संस्कृति हिमालय की वजह से अति विशिष्ट भौगोलीय क्षेत्र में अवस्थित, जटिल तथा बहुआयामी है, लेकिन किसी भी दृष्टि से अलग-थलग… Read more »

जल संरक्षण की दिशा में जनमैत्री की अनोखी पहल

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पंकज सिंह बिष्ट   कुदरत ने पृथ्वी को कई अनमोल नेमतों से नवाज़ा है। इसमें सबसे बड़ी नेमत पानी को ही माना जाता है। पानी के बिना आप कितने दिन खुद का बजूद बनाये रख सकते हैं? जरा कल्पना करके देखिए। कल्पना मात्र से ही गला सूखने लगता है। लेकिन जल्द ये डरावना ख़्वाब हक़ीक़त में बदलने वाला… Read more »

आधुनिक विचारों में हमारे कुछ मौलिक विचार कहीं खो गए

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डॉ नीलम महेंद्र नारी, स्त्री, महिला वनिता,चाहे जिस नाम से पुकारो नारी तो एक ही है। ईश्वर की वो रचना जिसे उसने सृजन की शक्ति दी है, ईश्वर की वो कल्पना जिसमें प्रेम त्याग सहनशीलता सेवा और करुणा जैसे भावों  से भरा ह्रदय  है। जो  शरीर से भले ही कोमल हो लेकिन इरादों से फौलाद… Read more »

सेल्फी का  बढ़ता उत्साह अथवा लत 

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एस के बरनी वर्तमान में  मोबाइल फोन इस्तेमाल करने वाले  लोगों में शायद ही कोई ऐसा होगा जिसने सेल्फी का नाम ना सुना हो। आज ऐसा कोई शख्स नहीं जिसे सेल्फी से नफरत हो। पिछले कुछ सालों से सेल्फी का उत्साह निरंतर  बढ़  रहा है। बच्चे हों  या  युवा हों  या  बुजुर्गों  सेल्फी  के प्रति… Read more »

आर्यसमाज के सभी अनुयायियों को एक मन व हृदय वाला होकर पूरी निष्ठा से नियमों का पालन करना चाहिये

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मनमोहन कुमार आर्य आर्यसमाज संसार के सभी मनुष्यों को उनके कर्तव्यों का बोध कराने के साथ जीवनयापन में आवश्यक सभी विषयों का सत्य व यथार्थ ज्ञान कराने वाली आन्दोलनात्मक संस्था है जिसका आधार ईश्वरीय ज्ञान वेद है। वेद सृष्टि की आदि में उत्पन्न हुए थे। महर्षि दयानन्द ने वेदोत्पत्ति का पूरा प्रकरण अपने विख्यात ग्रन्थ… Read more »

गोल्डन गर्ल की गोल्डन जीत से महका भारत 

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 ललित गर्ग देश का एक भी व्यक्ति अगर दृढ़ संकल्प से आगे बढ़ने की ठान ले तो वह शिखर पर पहुंच सकता है। विश्व को बौना बना सकता है। पूरे देश के निवासियों का सिर ऊंचा कर सकता है। भारत की नई ‘उड़नपरी’ 18 वर्षीय असमिया एथलीट हिमा दास ने ऐसा ही करके दिखाया है,… Read more »

कचरा बनी दिल्ली में टूटती जीवन सांसें

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 ललित गर्ग  प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के स्वच्छता अभियान एवं उनके कथन कि “एक स्वच्छ भारत के द्वारा ही देश 2019 में महात्मा गांधी की 150वीं जयंती पर अपनी सर्वोत्तम श्रद्धांजलि दे सकते हैं।क्या हश्र हो रहा है, दिल्ली में स्वच्छता की स्थिति पर दिल्ली हाई कोर्ट की ताजा टिप्पणी से सहज ही अनुमान लगाया जा… Read more »

‘‘ समाज में उजालें कम क्यों हो रहे हैं? ’

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ललित गर्ग  स्वार्थ चेतना अनेक बुराइयों को आमंत्रण है। क्योंकि व्यक्ति सिर्फ व्यक्ति नहीं है, वह परिवार, समाज और देश के निजी दायित्वों से जुड़ा है। अपने लिए जीने का अर्थ है अपने सुख की तलाश और इसी सुख की तलाश ने अनेक समस्याएं पैदा की हैं।  सामाजिक जीवन का एक आधारभूत सूत्र है सापेक्षता।… Read more »

 यह लड़ाई है अच्छाई और बुराई की

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  डॉ नीलम महेंद्र उच्चतम न्यायालय ने 9 जुलाई 2018 के अपने ताजा फैसले में 16 दिसंबर 2012 के निर्भया कांड के दोषियों की फाँसी की सजा को बरकरार रखते हुए उसे उम्र कैद में बदलने की उनकी अपील ठुकरा दी है। दिल्ली का निर्भया कांड देश का वो कांड था जिसने पूरे देश को… Read more »