अंतिम जन के हितचिंतक पं. दीनदयाल उपाध्याय

Posted On by & filed under शख्सियत, समाज

मनोज कुमार नव-भारत के निर्माण की बात चल पड़ी है और इस दिशा में सकरात्मक प्रयास भी आरंभ हैै। यह पहल एक समय के बाद अपना आकार लेगी लेकिन इस महादेश में बड़ी संख्या में ऐसे लोग निवास करते हैं जिन तक विकास की रोशनी भी नहीं पहुंच पाती हैै। सौ साल पहले भी वे… Read more »

भारत में अंत्योदय के सिद्धांत के चमत्कारी परिणाम

Posted On by & filed under समाज

अशोक बजाज असाधारण प्रतिभा के धनी एवं महान आर्थिक चिंतक पं. दीनदयाल उपाध्याय ने पूंजीवाद, साम्यवाद और समाजवाद के मुकाबले एकात्म मानव दर्शन के माध्यम से अंत्योदय के सिद्धांत को प्रतिपादित कर देश में समग्र विकास की दिशा तय की थी । उन्होने कहा कि यहां अमीरी व गरीबी के बीच की खाई दिनों दिन… Read more »

रक्षक बने भक्षक

Posted On by & filed under समाज

आज समाचार पत्रों में मुख्य समाचार है कि लखनऊ के प्राइवेट मेडिकल कालेज में दाखिले से संबन्धित मामलों को रफ़ादफ़ा करने की साज़िश में हाई कोर्ट के पूर्व जज समेत छः लोग गिरफ़्तार। यह डील एक करोड़ की थी। हाई कोर्ट के पूर्व जज हैं — उड़ीसा हाई कोर्ट के पूर्व जज इसरत मसरूर कुद्दुसी।… Read more »

हे देवि! अब मृजया रक्ष्यते को लेकर हमारी शर्मिंदगी भी स्‍वीकार करें

Posted On by & filed under समाज

अतिवाद कोई भी हो, वह सदैव संबंधित विषय की उत्‍सुकता को नष्‍ट कर देता है। अति  की घृणा, प्रमाद, सुंदरता, वैमनस्‍य, भोजन, भूख, जिस तरह जीवन को प्रभावित करती  हैं और स्‍वाभाविक प्रेम, त्‍याग, कर्तव्‍य को खा जाती हैं उसी प्रकार आजकल ”अति  धार्मिकता” अपने कुछ ऐसे ही दुष्‍प्रभावों को हमारे सामने ला रही है।… Read more »

ये क्या कह रहा है अमेरिकी विदेश मंत्रालय 

Posted On by & filed under समाज

शैलेंद्र सिंह भारत में 90 के दशक में शुरू हुए आर्थिक उदारवाद और भूमंडलीकरण के प्रभाव में एक नव्य राजनीतिक धारा का अद्भुत अभिभूतीकरण हुआ. जीडीपी को चमकाने की हड़बड़ी में उदारवाद की खुशफहमियां, अंततः अपने ही लोगों पर अलग अलग ढंग से टूटीं, बेरोजगारी, गरीबी, बेदखली, पलायन, अपराध, अशांति और हिंसा के रूप में…. Read more »

क्यों ना हम पहले अपने अन्दर के रावण को मारें

Posted On by & filed under समाज

“रावण को हराने के लिए  पहले खुद राम बनना पड़ता है ।“ विजयादशमी यानी अश्विन मास के शुक्ल पक्ष की दसवीं तिथि जो कि विजय का प्रतीक है। वो विजय जो श्रीराम ने पाई थी रावण पर, वो रावण जो पर्याय   है बुराई का, अधर्म का ,अहम् का, अहंकार का और पाप का, वो जीत… Read more »

राष्ट्रीय चुनौतियों के मूल में बौद्धिक कारण

Posted On by & filed under समाज

साहित्य से ही निवारण मनोज ज्वाला आज अपने देश में जितनी भी तरह की समस्यायें और चुनैतियां विद्यमान हैं, उन सबका मूल कारण वस्तुतः बौद्धिक संभ्रम है , जो या तो अज्ञानतावश कायम है या अंग्रेजी मैकाले शिक्षा-पद्धति से निर्मित औपनिवेशिक सोच का परिणाम है अथवा वैश्विक महाशक्तियों के भारत-विरोधी साम्राज्यवादी षड्यंत्र का अंजाम ।… Read more »

रोहिंग्याई मुसलमान : खतरों को आमंत्रण

Posted On by & filed under समाज

रोहिंग्या मुसलमान के बारे में अब यह स्पष्ट हो रहा है कि आतंकी गतिविधियों में शामिल रहे हैं। इन्होंने म्यांमार में अशांति फैलाने का काम किया है। इस प्रकार की गतिविधियों में संलिप्त रहकर काम करने वाले रोहिंग्याई मुसलमान के पक्ष में भारत में वातावरण बनाना निश्चित रुप से एक भीषण खतरे का संकेत है।… Read more »

मध्यप्रदेश- बच्चों के साथ त्रासदियों का पुराना सिलसिला

Posted On by & filed under समाज

जावेद अनीस दुर्भाग्य से गोरखपुर की घटना कोई इकलौती घटना नहीं है इससे पहले भी देश के अनेक हिस्सों में इस तरह की घटनायें होती रही हैं . पूर्व में हुई घटनाओं से हम सीख हासिल सकते थे लेकिन हमने  कभी भी ऐसा नहीं किया है. हमने तो  जवाबदेही को एक दुसरे पर थोपने और… Read more »

शक्ति की उपासना और कन्याओं पर बढ़ते जुल्म

Posted On by & filed under समाज

ललित गर्ग – शताब्दियों से हम साल में दो बार नवरात्र महोत्सव मनाते हुए कन्याओं को पूजते हैं। पूरे नौ दिन शक्ति की उपासना होती है। दुर्गा के अलग-अलग रूपों की पूजा-अर्चना करके लोग उनसे अपने घर पधारने का अनुरोध करते हैं। लेकिन विडम्बना देखिये कि सदियों की पूजा के बाद भी हमने कन्याओं को… Read more »