खुशियों का पैमाना बनती जा रही शराब

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वैसे तो हमारे देश में अनेक समस्याएँ हैं जैसे गरीबी बेरोजगारी भ्रष्टाचार आदि लेकिन एक समस्या जो हमारे समाज को दीमक की तरह खाए जा रही है,वो है शराब। दरअसल आज इसने हमारे समाज में जाति, उम्र, लिंग, स्टेटस, अमीर, गरीब,हर प्रकार के बन्धनों को तोड़ कर अपना एक ख़ास मुकाम बना लिया है। समाज… Read more »

चर्चा से बाहर होते जा रहे बाल श्रमिक बच्चे

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स्वतंत्रता के 70 वर्षों के बाद भी हम अपने बालक बालिकाओं के लिए ऐसा कुछ उल्लेखनीय कर पाने में विफल रहे हैं जिस पर गर्व किया जा सके। इंडियन लेबर आर्गेनाइजेशन की रिपोर्ट बताती है कि देश में 1 करोड़ 30 लाख बाल श्रमिक हैं। इनमें से सत्तर प्रतिशत लड़कियाँ हैं। यह आंकड़े शर्मनाक और… Read more »

खबर आई है कि उनका दम घुट रहा है…

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सुना है कि धुंध ने दिल्‍ली में डेरा जमा लिया है। ये कैसी धुंध है जो  एक कसमसाती ठंड के आगमन की सूचना लेकर नहीं आती बल्‍कि  एक ज़हर की चादर हमारे अस्‍तित्‍व पर जमा करती चली आती है। इस धुंध ने आदमी की उस ख्‍वाइश को तिनका-तिनका कर दिया है  जो अपने हर काम… Read more »

महिलाओं की सुरक्षा एवं स्वास्थ्य की बदहाली क्यों?

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-ललित गर्ग- देश में अस्तित्व एवं अस्मिता की दृष्टि से ही नहीं बल्कि स्वास्थ्य की दृष्टि से महिलाओं के हालात बदतर एवं चिन्तनीय है। देखा जा रहा है कि किसी भी क्षेत्र में तमाम महिला जागृति के कार्यक्रमों एवं सरकार की योजनाओं के बावजूद महिलाओं का शोषण होता है, उनके अधिकारों का हनन होता है,… Read more »

भोजन करते समय यह ध्यान रहे कि हम जो पदार्थ खा रहे हैं, क्या वह परमात्मा ने खाने के लिए ही बनाये हैं?

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मनमोहन कुमार आर्य आजकल मनुष्य अपने घरों व होटलों आदि में जो भोजन करते हैं वह या तो उन्हें माता-पिता द्वारा दिये संस्कारों के अनुसार होता है या फिर वह दूसरे लोगों से संगति के कारण भी ऐसा करते हैं। भोजन करते समय शायद ही कोई मनुष्य विचार करता हो कि वह जो भोजन कर… Read more »

असम रत्न – लोक गायक भूपेन हजारिका

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– ओंकारेश्वर पांडेय डॉ. भूपेन हजारिका किसी परिचय के मोहताज नहीं है। स्वर साम्राज्ञी लता मंगेशकर ने गुवाहाटी के एक कार्यक्रम में कहा था – ‘हम असम को भूपेन हजारिका के नाम से जानते हैं।’ भारत के सुप्रसिद्ध लोक गायक भूपेन दा का व्यक्तित्व बहुआयामी था। भूपेन दा अद्भुत आवाज के धनी जन जन में… Read more »

बच्चों की मौत से जुड़े सवाल 

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-ललित गर्ग- गुजरात में विधानसभा चुनावों की गहमागहमी के बीच अहमदाबाद के सिविल अस्पताल में 24 घंटों के बीच आईसीयू में 9 नवजात शिशुओं की मौत पर हड़कम्प मच गया है। बदइंतजामी की वजह से अगस्त में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गृहनगर गोरखपुर के बीआरडी चिकित्सालय में तीन-चार दिनों के अंदर तीस… Read more »

गुरुनानक देव : महान धर्म प्रवर्तक

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गुरुनानक देव जयन्ती- 4 नवम्बर 2017 के उपलक्ष्य में  -ललित गर्ग –   विश्व मंे अनेक धर्म-सम्प्रदाय प्रचलित हैं। सभी धर्मों ने मानव जीवन का जो अंतिम लक्ष्य स्वीकार किया है, वह है परम सत्ता या संपूर्ण चेतन सत्ता के साथ तादात्म्य स्थापित करना। यही वह सार्वभौम तत्व है, जो मानव समुदाय को ही नहीं,… Read more »

मितव्ययिता है भारतीय संस्कृति का प्रमुख आदर्श 

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विश्व मितव्ययिता दिवस 30 अक्टूबर 2017 पर विशेष -ललित गर्ग- प्रत्येक वर्ष 30 अक्टूबर को पूरी दुनिया में विश्व मितव्ययिता दिवस मनाया जाता है। वर्ष 1924 में इटली के मिलान में पहला अंतर्राष्ट्रीय मितव्ययिता सम्मेलन आयोजित किया गया था और उसी में एकमत से एक प्रस्ताव पारित कर विश्व मितव्ययिता दिवस मनाये जाने का निर्णय… Read more »

“कैसे कम हो इस्लामिक कट्टरवाद” 

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यह कैसी विचारधारा हैं कि हिन्दू घर्मनिरपेक्ष रहकर प्यार-मोहब्बत फैलाये पर मुसलमान धार्मिक कट्टरता की संकीर्णता से उपजी घृणा व वैमनस्यता के जंजाल से बाहर ही न निकले ? ऐसे में एक तरफ़ा केवल हिन्दू समाज से ही यह उपेक्षा क्यों की जाती है कि वह ही आगे बढ़ कर हिन्दू-मुस्लिम मतभेद और विरोध  दूर… Read more »