व्यंग्य “हम ही हैं राष्ट्र, हमसे ही है राष्ट्र” May 14, 2026 / May 14, 2026 by डॉ. शैलेश शुक्ला | Leave a Comment प्रशिक्षण के समय हमें सिखाया गया कि “आप राष्ट्र की रीढ़ हैं।” मैंने इस वाक्य को बहुत गंभीरता से लिया। फिर मैंने सोचा कि जब पूरी व्यवस्था मेरी पीठ पर टिकी है, तो थोड़ा भार व्यवस्था को भी उठाना चाहिए—जैसे मेरा घर, मेरी गाड़ी, मेरे फार्महाउस और मेरे निवेश। Read more » “हम ही हैं राष्ट्र हमसे ही है राष्ट्र
व्यंग्य जरूरी है उद्घाटन April 8, 2026 / April 8, 2026 by डा. विनोद बब्बर | Leave a Comment जरूरी है उद्घाटन Read more » जरूरी है उद्घाटन
व्यंग्य अप्रैल फ़ूल बनाया, बड़ा मज़ा आया ! March 30, 2026 / March 30, 2026 by डॉ घनश्याम बादल | Leave a Comment इतिहास के पन्नों में झांकें तो इस दिन की उत्पत्ति कई तरीके से पता चलती है। 16वीं शताब्दी के फ्रांस में जब कैलेंडर बदला और नववर्ष एक जनवरी को मनाया जाने लगा, लेकिन कुछ लोग एक अप्रैल को ही नया साल मानते रहे। उन्हें मज़ाक का पात्र बनाया गया और यहीं से “एप्रिल फूल” की परंपरा शुरू हुई। Read more » had a lot of fun! Made an April Fool अप्रैल फ़ूल
व्यंग्य साहित्य फाइटर योद्धा संग ऑपरेशन सिंदूर प्रदेश की होली के काव्य बम्बगुल्ले February 25, 2026 / February 25, 2026 by प्रवक्ता ब्यूरो | Leave a Comment डॉ. आलोक सक्सेना होली है…, आइए, आप भी इस बार की होली-2026 पर जम जाइए काव्य रंग में और तन कर व अपने जांबाज राष्ट्ररक्षक वायु योद्धाओं पर पूरा भरोसा रख कर मजा लीजिए ‘फाइटर योद्धा संग ऑपरेशन सिंदूर प्रदेश की होली के काव्य बम्बगुल्ले’ का। साहब, होली है, पिछली होली की तरह से इस […] Read more »
राजनीति व्यंग्य नंबर वन का ‘अमृत’ और नरक का ड्रेनेज January 16, 2026 / January 16, 2026 by विवेक रंजन श्रीवास्तव | Leave a Comment विवेक रंजन श्रीवास्तव इंदौर में इन दिनों गजब का द्वंद्व चल रहा है। एक तरफ आसमान से टपकती स्वच्छता की ‘नंबर वन’ की ट्राफियां हैं और दूसरी तरफ जमीन फाड़कर निकलता ‘भागीरथपुरा’ का सच। सूचना मिली है कि प्रशासन ने अपनी चिर-परिचित फुर्ती दिखाते हुए कुछ अधिकारियों का ‘स्थानांतरण’ कर दिया है। वाह! क्या गजब […] Read more » नरक का ड्रेनेज
व्यंग्य कुत्तों की गिनती January 6, 2026 / January 6, 2026 by प्रवक्ता ब्यूरो | Leave a Comment दरअसल कुत्तों को लेकर हमारा समाज दो धड़ों में बंटा हुआ है। पहली श्रेणी वाले लोग किसी भी तरह के कुत्तों से बचना चाहते हैं जबकि दूसरी श्रेणी में आने वाले लोग आवारा कुत्तों तक को बचाने के लिए उनके प्रवक्ता बनकर आंदोलन पर उतर आते हैं। कुछ लोगों के लिए उनका कुत्ता ब्रूनो, टॉमी या शेरु होता है - क्यूट, लविंग, केयरिंग और इंटेलीजेंट। Read more » कुत्तों की गिनती
व्यंग्य सबसे बड़ा आलराउंडर ! December 16, 2025 / December 16, 2025 by प्रवक्ता ब्यूरो | Leave a Comment सबसे बड़ा आलराउंडर Read more » सबसे बड़ा आलराउंडर
व्यंग्य बिंदिया के बहाने, कुछ अनकहे अफसाने December 15, 2025 / December 15, 2025 by जगत मोहन | Leave a Comment बिंदिया Read more » बिंदिया
व्यंग्य जेन जी November 17, 2025 / November 17, 2025 by दिलीप कुमार सिंह | Leave a Comment दुनिया हिला दूंगा,सब कुछ जला दूंगा टाइप का एटीट्यूड रखने वाले जेन जी एक तबका नेपाल में सरकार पलट देने से बहुत उत्साहित है। उसी टाइप के एक जेन जी के पास एक हिंदी के Read more »
व्यंग्य आया चुनाव का मौसम ! November 16, 2025 / November 18, 2025 by प्रवक्ता ब्यूरो | Leave a Comment मौसम बदलने के पहले पूर्वाभास होने लगता है ! बारिश का मौसम आने वाला हो तो आकाश में काले-काले बादल उमड़ने-घुमड़ने लगते हैं |ठंडी बयार बहने लगती है | Read more »
व्यंग्य वाहन प्रदूषण सीमा के भीतर है November 13, 2025 / November 13, 2025 by विवेक रंजन श्रीवास्तव | Leave a Comment मध्यप्रदेश की हवा में अब सिर्फ धूल नहीं, प्रदूषण प्रमाणपत्र भी तैर रहे हैं। ये डिजिटल कागज़, प्रदूषण नियंत्रण के वे पवित्र सर्टिफिकेट हैं जिनके दम पर राज्य की सड़कों पर चल रही हर Read more » pollution certificate वाहन प्रदूषण
व्यंग्य जरा हटके ,जरा बचके September 2, 2025 / September 2, 2025 by दिलीप कुमार सिंह | Leave a Comment कई दशकों पूर्व एक गाना बड़ा मशहूर हुआ था “ए दिल है मुश्किल है जीना यहाँ, जरा हटके जरा बचके ये है बॉम्बे मेरी जां ”। तब भारत की आर्थिक राजधानी के दो नाम हुआ करते थे । बंबई और बॉम्बे। बम्बई आम जन की जुबान में शहर को बोला जाता जबकि इलीट क्लास के […] Read more » जरा बचके जरा हटके