लानत की होम डिलीवरी

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बत्रा जी , भौगोलिक और गणितीय दृष्टि से हमारे पड़ौसी है। उनसे हमारे संबंध उतने ही अच्छे है जितने भारत के संबंध पाकिस्तान से है। पाकिस्तान की तरह, बत्रा जी भी आए दिन सीज़फायर का उल्लंघन करते रहते है जिसका ज़वाब समय-असमय पर सर्जिकल स्ट्राइक के रूप में उन्हें मिलता रहता है। पूरे मौहल्ले में… Read more »

साथी हाथ छुड़ाना रे।

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अमित शर्मा (CA) हर कार्यालय की लय,वहाँ कार्य से फ़र्ज़ी एनकाउंटर करने वाले कर्मचारियों की कुशलता में लीन रहकर अंततोगत्वा अपने प्रारब्ध में ही विलीन हो जाती है। कार्यालय में कार्य करने वाले आपके सहकर्मी, कार्यस्थल को घटनास्थल बनाने के लिए दिल और जान को उचित मात्रा में मिलाकर मास्टरशेफ के रूप में अपनी महत्वपूर्ण… Read more »

मोबाइल न छूटे…

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आजकल तो देश के कई भागों में पानी की किल्लत होने लगी है; पर सौ साल पहले चेरापूंजी सबसे अधिक और राजस्थान सबसे कम वर्षा वाला क्षेत्र था। इसीलिए राजस्थान में पानी पर सैकड़ों लोकगीत, कहानियां और कहावतें बनी हैं। उन दिनों पानी भरने तथा कपड़े धोने का काम महिलाएं ही करती थीं। इस बहाने… Read more »

 चंद्र धरा दिनकर का लुकाछिपी महोत्सव 

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एल आर गाँधी आज विश्व के अर्वाचीन अलौकिक प्रेमियों का क्षितिज में लुकाछिपी महोत्सव है   …….. अनंतकाल से धरा  अपने प्रेमी दिनकर की परिक्रमा में नृत्य निमंगम  …..  दिन रात अपने प्रियतम की ग्रीषम किरणों से ऊर्जा प्राप्त कर उसे नुहारती और निहारती है  ….दिनकर भी अपनी इस अलौकिक प्रेमिका को अपनी किरणों के  बाहुपाश में जकड कर… Read more »

ग्रीन शासन, क्लीन प्रशासन

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 अबके दीवाली को जब कसौली के साथ लगते गांव का गंगा कुम्हार अपने गोरू गधे की पीठ पर दीवाली के दीए लाद कालका के बाजार में बेचने गया था तो दीए आढ़ती को बेचने के बाद खुद कालका का बाजार घूमने, घर का जरूरी सामान लेने गधे ये यह कह बाजार हो लिया  कि वह… Read more »

  थानेदार मुर्गा

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इस शीर्षक को पढ़कर मुर्गा नाराज होगा या थानेदार, ये कहना कठिन है; पर कुछ घटनाएं पढ़ और सुनकर लग रहा है कि भविष्य में ऐसे दृश्य भी दिखायी दे सकते हैं। असल में पिछले दिनों म.प्र. के बैतूल नगर में एक अजीब घटना हुई। वहां दो लोग मुर्गे लड़ा रहे थे। भीड़ देखकर पुलिस… Read more »

वाकई ! कुछ सवालों के जवाब नहीं होते … !!

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तारकेश कुमार ओझा वाकई इस दुनिया में पग – पग पर कंफ्यूजन है।  कुछ सवाल ऐसे होते हैं जिनके जवाब तो मिलते नहीं अलबत्ता वे मानवीय कौतूहल को और बढ़ाते रहते हैं।हैरानी होती है जब चुनावी सभाओं में राजनेता हर उस स्थान से अपनापन जाहिर करते हैं जहां चुनाव हो रहा होता है। चुनावी मौसम… Read more »

अभी थोड़ा बिजी हूँ!

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अमित शर्मा (CA) मैं अक्सर व्यस्त रहता हूँ। यह मेरी आसाधारण प्रतिभा ही है कि व्यस्त रहते हुए भी मैं फेसबुक, वाट्सएप और कई लोगो के दिल में बिना किराए और रेंट एग्रीमेंट के रह लेता हूँ। व्यस्तता के प्रकोप से पीड़ित होने के बावजूद भी,  मैं एक अच्छे सेवक की तरह भोजन और नींद… Read more »

राजनीति के ये ब्वायज क्लब  …!!

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तारकेश कुमार ओझा कहीं जन्म – कहीं मृत्यु की तर्ज पर देश के दक्षिण में जब एक बूढ़े अभिनेता की राजनैतिक महात्वाकांक्षा हिलोरे मार रही थी, उसी दौरान देश की राजधानी के एक राजनैतिक दल में राज्यसभा की सदस्यता को लेकर महाभारत ही छिड़ा हुआ था।  विभिन्न तरह के आंदोलनों में ओजस्वी भाषण देने वाले… Read more »

भ्रष्टाचार, हमारा मूलभूत अधिकार

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बुजुर्गों का कहना है कि बेटे कब बड़े और बेटियां कब जवान हो जाती हैं, इसका पता ही नहीं लगता। यही हाल हमारे महान भारत देश का है। कब, किस दिशा में हम कितना आगे बढ़ जाएंगे, कहना कठिन है। भारत में आजादी के बाद से ही उच्च शिक्षा पर बहुत जोर दिया गया है।… Read more »