पंछियों के मंत्र पाठ से प्रभात, मंगल-प्रभात होता:

Posted On by & filed under कविता

डॉ. मधुसूदन   (एक) एक चुनौती भरी  कठिन प्रस्तुति: कवि की कल्पना कविकल्पना ही कहलाती है. कवि जो देखता है वो रवि भी नहीं देख सकता. एक ऐसी ही  थोडी कठिन कविता प्रस्तुत करता हूँ.  कुछ बौद्धिक व्यायाम होगा. पर बिना बौद्धिक व्यायाम वास्तव में मनोरंजन भी संभव  नहीं होता. कुछ पाठक तो लाभान्वित होंगे… Read more »

कर्नाटक का नाटक खत्म नहीं हुआ,अभी और देखना बाकी है 

Posted On by & filed under कविता

कर्नाटक का नाटक खत्म नहीं हुआ,अभी और देखना बाकी है अभी तो ट्रेलर देखा है तुमने,पूरी फिल्म अभी देखना बाकी है येदुरप्पा ने अभी शपथ ली है,औरो को शपथ दिलाना बाकी है येदुरप्पा को अभी सदन में,अपना बहुमत सिद्ध करना बाकी है राजनीति में जोड़-तोड़ की हवा चली है,खरीद-फरोख्त बाकी है कुछ एम एल ऐ… Read more »

मिले न जब मन का मीत,मनमीत तुम किसे बनाओगी ?

Posted On by & filed under कविता

मिले न जब मन का मीत,मनमीत तुम किसे बनाओगी ? मै मीरा बनकर अपने मनमोहन को मनमीत बनाऊँगी जब तोड़ दे कोई ह्रदय तुम्हारा,फिर किसके द्वार तुम जाओगी ? जब तोड़ेगा कोई ह्रदय मेरा,अपने द्वारकाधीश के द्वार जाऊंगी जब मिले न कोई संग-साथ,फिर किसको संगीत सुनाओगी ? जब मिलेगा न कोई संग-साथ,मीरा बनकर भजन सुनाऊंगी… Read more »

माँ ने पूछा,मै आई किसके हिस्से में ?

Posted On by & filed under कविता

सन्नाटा छा गया बटवारे के किस्से में माँ ने पूछा,मै आई किसके हिस्से में ? कहते है सभी लोग आज माँ का दिन है मै कहता हूँ,कौन सा दिन माँ के बिन है एक अच्छी माँ होती है सभी के पास होती नहीं अच्छी औलाद सभी के पास माँ तो एक सबसे बड़ी नियामत हे… Read more »

‘फिर जुल्फ लहराए’

Posted On by & filed under कविता

‘फिर जुल्फ लहराए’ फिजा ठंडी हैं कुछ पल बाद ये माहौल गरमाए। कहीं चालाकियाँ ये इश्क में भारी न पड़ जाए। ज़रा सी गुफ्तगू कर लें, बड़े दिन बाद लौटे हो, नज़ाकत हुस्न वालों के ज़रा हालात फरमाए। अहा! क्या खूबसूरत आपने यह रंग पाया हैं, निशा का चाँद गर देखे तो खुद में ही… Read more »

आपस के रिश्ते जब से व्यापार हुए

Posted On by & filed under कविता

कुलदीप विद्यार्थी आपस के रिश्ते जब से व्यापार हुए। बन्द सभी आशा वाले दरबार हुए। जिसको इज्ज़त बख्सी सिर का ताज कहा उनसे ही हम जिल्लत के हकदार हुए। मंदिर, मस्ज़िद, गुरुद्वारों में उलझे हम वो  शातिर  सत्ता   के  पहरेदार  हुए। जिस-जिसने बस्ती में आग लगाई थी देखा  है  वो  ही  अगली सरकार हुए। आसान … Read more »

कर्नाटक का मतलब है,कर नाटक इस चुनाव में 

Posted On by & filed under कविता

कर्नाटक का मतलब है,कर नाटक इस चुनाव में इसलिए सब पार्टी कर रही है,नाटक इस चुनाव में बीजेपी हो या कांग्रेस, कर रही नाटक चुनाव में इसलिए हर वोटर कर रहा है,नाटक इस चुनाव में रंग मंच बना हुआ है, कर्नाटक,इस चुनाव मे सारे नेता नाटक के पात्र बने हुए है,चनाव में सी.एम.पद के लिए… Read more »

कर्नाटक का चुनाव जिता दो 

Posted On by & filed under कविता

वोटर भैया,अबकी बार कर्नाटक का चुनाव जिता दो अबकी बार,अपनी मैया बुला ली,उसकी लाज रखा दो मै तो धर्म निर्पेक्ष हूँ,मंदिर मस्जिद गुरुद्वारा भी जाता मै तो कभी पंडित,कभी मौलवी कभी पादरी बन जाता कभी जनेऊ धारण करता ,कभी टोपी पहन कर आता कभी तिलक लगा कर,मंदिरों में पूजा करने भी जाता देखो ये कर्नाटक… Read more »

क्यों आते हैं तूफ़ान जिन्दगी में

Posted On by & filed under कविता

आये हो जब से तुम मेरी जिन्दगी में एक तूफ़ान आ गया मेरी जिन्दगी में लगता है ये मौसम बेईमान हो गया शायद ये दिल मेरा परेशान हो गया लगता है ये तूफ़ान आगे बढ़ने लगा मेरी रातो की नींद को ये चुराने लगा न दिन में है चैन,न रात को है चैन कयू करता… Read more »

सोनम की शादी पर बोनी के मन के उदगार

Posted On by & filed under कविता

सोनम के पवित्र गटबंधन पर काश!आज तुम जीवित होती इस घर की खुशियों में अब अपार चार गुणी वृधि होती तुम सोनम के हाथ पकड कर उसके हाथो में मेहँदी रचाती ऐसी मेहँदी  तुम लगाती जो कभी छूट नहीं पाती अनिल,तुम्हे भाभी कह पुकारता वह तुम्हारे दोनों चरणों को छूता तुम उसको खूब आशीर्वाद देती… Read more »