कविता बंगाल के जवान को वसुंधरा पुकारती May 12, 2026 / May 12, 2026 by राकेश कुमार आर्य | Leave a Comment विषधरों को शांत कर सुन पुकार देश की, शत्रु न कोई बच सके मिटाइए अवशेष भी। बन शूरवीर सनातनी- हो धन्य मां भारती, Read more » बंगाल के जवान को वसुंधरा पुकारती
कविता नन्हे कदम, बड़ी उड़ान May 4, 2026 / May 4, 2026 by डॉ. सत्यवान सौरभ | Leave a Comment नन्हे हाथों में हरियाली,जैसे धरती का उपहार,छोटा-सा मन, बड़ी खुशी,आँखों में सारा संसार। कदम-कदम पर चलता जाए,सपनों की है राह,कभी कद्दू, कभी साइकिल,हर दिन नई चाह। नन्हा साथी साथ में,साइकिल भी मुस्काए,टोकरी में खुशियाँ भरकर,आगे-आगे जाए। धूप खिली है गालों पर,हँसी खिले जैसे फूल,मस्ती में ये बचपन प्यारा,सबसे सुंदर उसूल। डगमग-डगम चलना सीखे,गिरकर फिर उठ […] Read more » नन्हे कदम
कविता छोटे प्राणी बड़े काम के April 21, 2026 / April 21, 2026 by प्रभुदयाल श्रीवास्तव | Leave a Comment गई एक दिन चुनमुन चींटी, नदी किनारे पानी पीने | Read more » छोटे प्राणी बड़े काम के
कविता घर अब भी जाता हूँ… April 21, 2026 / April 21, 2026 by डॉ. सत्यवान सौरभ | Leave a Comment घर अब भी जाता हूँ, वही आँगन, वही दरवाज़ा— बस फ़र्क इतना है, Read more » घर अब भी जाता हूँ…
कविता गधों पर दाँव April 7, 2026 / April 7, 2026 by डॉ. सत्यवान सौरभ | Leave a Comment गधों पर दाँव Read more » गधों पर दाँव
कविता बच्चों का पन्ना संत और चूहा April 6, 2026 / April 6, 2026 by प्रभुदयाल श्रीवास्तव | Leave a Comment संत और चूहा Read more » संत और चूहा
कविता शख्सियत इंकलाब लिख दिया जिसने अपने खून से…” March 23, 2026 / March 23, 2026 by प्रवक्ता ब्यूरो | Leave a Comment इंकलाब लिख दिया जिसने अपने खून से..." दहक उठी थी ज्वाला मन में Read more » इंकलाब
कविता भय-निःशब्दता का स्वप्न-विस्फोट March 18, 2026 / March 18, 2026 by प्रवक्ता ब्यूरो | Leave a Comment भय मुट्ठी बाँध, उन्मेष जगाता यह काल; क्षोभ स्वयं को भूल, निःशब्द हुआ है संसार। प्रेम और विरक्ति मिलकर लय हो जाते, Read more » भय-निःशब्दता का स्वप्न-विस्फोट
कविता नन्हा मैकेनिक March 18, 2026 / March 18, 2026 by डॉ. सत्यवान सौरभ | Leave a Comment नन्हे-नन्हे हाथों में, पकड़ी पानी की धार, गाड़ी धोने निकला देखो, मेरा छोटा होशियार। Read more » नन्हा मैकेनिक
कविता नारी : एक करुण पुकार March 8, 2026 / March 8, 2026 by मुनीष भाटिया | Leave a Comment सदियों से मानव की कमजोरीनारी को समझा गया हर बार,विजय चिन्ह समझ लूट लियाजैसे कोई युद्ध का उपहार। कभी अपनों की बेरुखी झेली,कभी दुश्मनों की तलवार,युद्धभूमि की आग में जलकरसहती रही अस्मिता पर प्रहार। आज बदल गया रूप समय का,पर चाल वही, व्यवहार वही,क्षद्म प्रेम का जाल बिछाकरभटकाया जाता बार-बार। अब जागे समाज, बढ़े चेतना,पहचाने […] Read more » Woman: A sad cry नारी दिवस
कविता बहिर-बधिर March 5, 2026 / March 5, 2026 by प्रवक्ता ब्यूरो | Leave a Comment “सूर्यअपने तपते आदर्शों कानिरंतर प्रवचन करता है—आकाश के ऊँचे मंच से। काले बादलअपनी गरम चुप्पियों मेंबिजली की भाषा लिखते हैं,और बारिशधरती की जड़ों तकधीरे-धीरे उतरती है। पर एक मनुष्य है—जो केवल इन्हीं को सुनने के लिएअपने कान खुले रखता है,मानो संसार की बाकी आवाज़ेंउसके लिएमूक हो चुकी हों। समयरेत-घड़ी की छाया मेंउँगलियों से फिसलतीक्षणिक रेत […] Read more » deaf and dumb बहिर-बधिर
कविता व्यर्थ नहीं बहती कविता February 19, 2026 / February 19, 2026 by प्रवक्ता ब्यूरो | Leave a Comment “कविताएँअब भी फूटती हैं भीतर से—जैसे चट्टानों के बीचअदृश्य जलस्रोत। पर जीवन,ओह जीवन!तुम क्यों सूखी नदी की तरहमेरे सामने पसरे पड़े हो? शब्दों में हरियाली है,दिनों में बंजरपन।स्वप्नों में उजाला है,जागती आँखों में धूल। मैंने चाहा थाएक साधारण प्रसन्नता—रोटी की गर्म भाप,कंधे पर रखा भरोसे का हाथ,और सांझ में लौटती थकान की शांति। पर मिला—अधूरे […] Read more » व्यर्थ नहीं बहती कविता