समय के दो पाट: कहां ये और कहां वो

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समय के दो पाटों में से एक पाट पर हैं शास्‍त्रीय संगीत की पुरोधा गिरिजा देवी की प्रस्‍तुतियां और दूसरे पाट  पर हैं ढिंचक पूजा जैसी रैपर की अतुकबंदी वाली रैपर-शो’ज (जिसे प्रस्‍तुति नहीं कहा जा सकता)। समय बदला है, नई पीढ़ी हमारे सामने नए नए प्रयोग कर रही है, अच्‍छे भी और वाहियात भी,… Read more »

अगर आप समाधान ढूंढेगे तो हर समस्या का समाधान है : ए.आर.रहमान

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अनिल अनूप सुरों के बादशाह ए.आर रहमान ने दुनियाभर में भारतीय संगीत को पहचान दी है। ए.आर रहमान बेशक दुनिया का सबसे प्रतिष्ठित ऑस्कर अवॉर्ड जीत चुके हैं और भारतीय संगीत को अंतराष्ट्रीय स्तर पर विशेष पहचान दिला चुके हैं, लेकिन इस पहचान को बनाने के लिए उन्हें जिंदगी के कई थपेड़े भी झेलने पड़े।… Read more »

बेमिशाल बेजोड़ पंचम वापस आओ..

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-अनिल अनूप 27 जून 1939 को कलकक्ता में जन्मे आर.डी.बर्मन के पिता एस.डी.बर्मन जाने माने संगीतकार थे | घर में फ़िल्मी माहौल के कारण उनका भी रुझान संगीत की ओर हो गया और वह अपने पिता से संगीत की शिक्षा लेने लगे | उन्होंने उस्ताद अली अकबर खान से सरोद वादन की भी शिक्षा ली… Read more »

संगीत की सार्थकता से दुनियां को रू ब रू कराया नौशाद ने

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अनिल अनूप नौशाद अली भारतीय फिल्म जगत के जाने-माने संगीतकार और संगीत निर्देशक थे. नौशाद को विशेष रूप से पारम्परिक गानों के लिये जाना जाता है. नौशाद का जन्म 26 दिसंबर 1919 को लखनऊ के एक मुस्लिम परिवार में हुआ था. नौशाद के पिता का नाम वाहिद अली था और वह क्लर्क थे. नौशाद ने… Read more »

सुननेवालों के दिल मे उतरने वाले थे सुर सम्राट मोहम्मद रफी

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अनिल अनूप मोहम्मद रफी की आवाज के बिना हिंदी सिने संगीत की कल्पना भी नहीं की जा सकती। उनके शास्त्रीय संगीत पर आधारित गीतों की भी अद्भुत दुनिया है। 24 दिसंबर 1924 को रफी साहब का जन्म पंजाब के एक गांव कोटला सुल्तान सिंह में हुआ था। उनका पहला गीत एक पंजाबी फिल्म’गुल बलोच’में था,जबकि… Read more »

पद्मभूषण मिल गया,लेकिन तानसेन सम्मान के लायक नहीं है पंडित जसराज

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देश में संगीत सम्राट तानसेन के नाम पर बूते ३५ साल से दिए जा रहे राष्ट्रीय तानसेन सम्मान के लिए अब तक देश के अनेक मूर्धन्य और कुछ अन्य संगीतज्ञों को तानसेन सम्मान से विभूषित किया जा चुका है किन्तु मेवाती घराने के सुस्थापित संगीतज्ञ पंडित जसराज को अब तक जाने-अनजाने इस सम्मान के लायक… Read more »

यादों में रचे भारतीय संगीत के कुछ क्षण

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बी एन गोयल मन बहुत चंचल होता है। डॉ० मधु सूदन जी ने संगीत की चर्चा चलायी तो बहुत सी बातें मन में आने लगती हैं। यादों के पृष्ठ खुलते जाते हैं. थिरकवा जी तो बहुत ही सीधे और सरल व्यक्ति थे। उन से जुड़े और भी पृष्ठ खुल गए . इन का जन्म उत्तर… Read more »

अतुलनीय मुकेश – न भूतो न भविष्यति

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(पुण्य-तिथि २५-२६ अगस्त पर विशेष) अमर गायक मुकेश उन सौभाग्यशाली कुछ गायकों में एक हैं, जिन्हें फिल्म-जगत में सफलता प्राप्त करने के लिए कोई संघर्ष नहीं करना पड़ा। शहद मिश्रित स्वर के बेताज बादशाह मुकेश को जब संगीतकार अनिल विश्वास ने पहली बार सुना, तो आश्चर्य से उनकी आँखें फटी की फटी रह गईं। उन्हें… Read more »

रेत की धार में बहती आवाज

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अनिल अनूप आवाजों को सरहदों के पार जाने से रोका नहीं जा सकता। शायद इसीलिए राजस्थान के लूणा गांव की आवाज रेत के धोरों में बहती हुई पाकिस्तान में मेहदी हसन तक पहुंच जाती है और वे यहां आने के लिए छटपटाने लगते हैं। पाकिस्तान से खबर है कि अस्वस्थ होने के बावजूद वे एक… Read more »

अजनबी तुम जाने पहचाने से लगते हो……….

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किशोर कुमार (पुण्यतिथि 13 अक्तूबर पर) शादाब जफर ‘‘शादाब’’ फिल्म उपकार के लिए किशोर कुमार को गाना गाने के लिए आमंत्रित किया तो वह यह कहकर भाग खड़े हुए कि वे तो फिल्म के हीरो के लिए ही गाने गाते हैं, किसी खलनायक पर फिल्माया जाने वाला गाना नहीं गा सकते। लेकिन उपकार का यह… Read more »