भोजन करते समय यह ध्यान रहे कि हम जो पदार्थ खा रहे हैं, क्या वह परमात्मा ने खाने के लिए ही बनाये हैं?

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मनमोहन कुमार आर्य आजकल मनुष्य अपने घरों व होटलों आदि में जो भोजन करते हैं वह या तो उन्हें माता-पिता द्वारा दिये संस्कारों के अनुसार होता है या फिर वह दूसरे लोगों से संगति के कारण भी ऐसा करते हैं। भोजन करते समय शायद ही कोई मनुष्य विचार करता हो कि वह जो भोजन कर… Read more »

परंपरागत खेती से दूर होते लद्दाख के किसान

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अंज़ारा अंजुम खान लद्दाख याक की तरह ही गाय की नस्लों में से एक डज़ो लद्दाख जैसे संवेदनशील क्षेत्र में कृषि के लिए हमेशा से उपयुक्त माना जाता था। यह 9800 फीट की उंचाई तक और ठंड में आसानी से खेत जोत सकता है। यही कारण है कि इसे खेती के लिए सस्ता और सुविधाजनक विकल्प माना… Read more »

शुद्ध पियो शुद्ध जियो

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सरस्वती अग्रवाल “शद्ध पियो- शुद्ध जियो” ये लाईन किसी उत्पाद के विज्ञापन की नही बल्कि ये वाक्य है उत्तराखण्ड के राज्य जनपद चमोली के गडोरा गांव के 38 वर्षिय निवासी लक्ष्मण सिंह का। जो फलो का जूस बेचकर परिवार चला रहे हैं। इन्होने 12वीं तक पढ़ाई की है। 3 बेटियों- एक बेटे तथा पत्नी को मिलाकर परिवार… Read more »

कृषि संकट की जड़ें

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जावेद अनीस आज भारत के किसान खेती में अपना कोई भविष्य नहीं देखते हैं, उनके लिये खेती-किसानी बोझ बन गया है हालात यह हैं कि देश का हर दूसरा किसान कर्जदार है. 2013 में जारी किए गए राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण के आंकड़े बताते है कि यदि कुल कर्ज का औसत निकाला जाये देश के प्रत्येक… Read more »

साहिब,वक्त बदल रहा है

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वोट बैंक की राजनीति के लिये मुआवजा का लॉलीपाप न पकड़ा कर सरकार को कृषि के क्षेत्र में मौजूद समस्याओं के प्रति गम्भीरता से योजनाबद्ध तरीके से कार्य कर समस्याओं के निस्तारण कराने की जरूरत है साथ ही किसानों को मुआवजा का लत लगाने के वजह उन्हें आत्मनिर्भर बनाना भी सरकार, समाजिक संगठनों एवं संस्थाओं का नैतिक कर्तव्य है

उत्तराखंड का ग्रामीण परिवेश :समस्याए और समाधान

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    लोग कहते है उत्तराखंड बदल रहा है लेकिन गाँवो में जाकर देखो तो बदला हुवा कही भी नज़र नही आता । आज भी गाँवो में  शिक्षा,मेडिकल सुविधा व सड़क  आदि विकाश के मानको का बुरा हाल है । उत्तराखंड बनने के बाद से ही पलायन को रोकना व  ,गाँवो का विकाश दो महत्वपूर्ण… Read more »

असली खाद के पहचान की घरेलू विधि

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राजमणि यूरिया किसान भाइयों यूरिया की असली पहचान है इसके सफेद चमकदार लगभग समान आकार के कड़े दाने इसका पानी में पूर्णतया घुल जाना तथा इसके घोल को छूने पर शीतल अनुभूति होना ही इसकी असली पहचान है। किसान भाइयों यूरिया को तवे पर गर्म करने से इसके दाने पिघल जाते है यदि हम आंच… Read more »

हवा की शुद्वता के लिए प्रदूषण के खिलाफ जनान्दोलन छेड़ने की जरूरत

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खेती और किसानों के लिए अहम पराली को संरक्षित करने के बाबत बनाई गई राष्ट्रीय पराली नीति भी राज्य सरकारों के ठेंगा पर दिख रही है। गेहूं, धान और गन्ने की पत्तियां सबसे ज्यादा जलाई जाती है। अधिकृत रिपोर्ट के अनुसार देश के सभी राज्यों को मिलाकर सालाना 50 करोड़ टन से अधिक पराली निकलती है उम्मीदों से भरे प्रदेश उत्तर प्रदेश मे छह करोड़ टन पराली में से 2.2 करोड़ टन पराली जलाई जाती है।

कहीं आपकी जन्म कुंडली में व्यभिचारी जीवनसाथी मिलने के योग तो नहीं?

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यदि जन्म कुंड़ली मे सप्तम भाव में राहु होने पर जीवनसाथी धोखा देने वाला कई स्त्री-पुरुष से संबंध रखने वाला व्यभिचारी होता हैं व विवाह के बाद अवैध संबंध बनाता है। उक्त ग्रह दोष के कारण ऐसा जीवनसाथी मिलता हैं जिसके कई स्त्री-पुरुष के साथ अवैध संबंध होते हैं। जो अपने दांपत्य जीवन के प्रति अत्यंत लापरवाह होते हैं।

फसल की अनिश्चिन्तताओं को दूर करता प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना

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सुवर्णा सुषमेश्वरी कृषि प्रधान अर्थव्यवस्था पर आधारित होने के कारण कृषि के विकास के लिए विभाजित भारत में भारत सरकार के द्वारा समय –समय पर अनेक कार्यक्रमों , योजनाओं का प्रारम्भ किया गया , लेकिन भारतीय कृषि के विकास के लिए ये योजनायें ढाक का पात ही साबित हुई हैं । विभाजन के पश्चात कृषि… Read more »