कृषि के लिए मानसूनी बारिश के शुभ संकेत

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सुरेश हिन्दुस्थानी यह बात शत प्रतिशत सही है कि भारत कृषि आधारित देश है, कृषि ही 130 करोड़ जनता का पेट भरती है। वास्तव में वर्तमान में कृषि का क्षेत्रफल संकुचित होता जा रहा है, लेकिन जनसंख्या अबाध गति से बढ़ती जा रही है। क्या किसी ने इस बात पर चिंतन किया है कि स्वतंत्रता… Read more »

कीटनाशक यानी ज़हरीली खेती : प्रतिबंध बेहतर या अनुदान ?

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अरुण तिवारी कीटनाशकों को लेकर एक फैसला, पंजाब के कृषि एवम् कल्याण विभाग ने बीती 30 जनवरी को लिया; दूसरा फैसला, 06 फरवरी को उत्तर प्रदेश की कैबिनेट ने। उत्तर प्रदेश कैबिनेट ने कीट रोग नियंत्रण योजना को मंजूरी देते हुए जैविक कीटनाशकों और बीज शोधक रसायनों के उपयोग के खर्च का 75 प्रतिशत तथा… Read more »

भारतीय कृषि में महिलाओं की दयनीय स्थिति

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डॉ. मयंक चतुर्वेदी भारत अपने अस्तित्वकाल से ही कृषि प्रधान देश रहा है। यहां जिस तरह से पुरुष और महिलाओं के बीच श्रम का विकेंद्रीकरण किया गया है, उसमें महिलाओं के जिम्मे जो कार्य है, वह तुलनात्मक रूप में समग्रता के साथ पुरुषों के मुकाबले स्त्रियों के पास अधिक है। इसमें शहरों की तुलना में… Read more »

भोजन करते समय यह ध्यान रहे कि हम जो पदार्थ खा रहे हैं, क्या वह परमात्मा ने खाने के लिए ही बनाये हैं?

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मनमोहन कुमार आर्य आजकल मनुष्य अपने घरों व होटलों आदि में जो भोजन करते हैं वह या तो उन्हें माता-पिता द्वारा दिये संस्कारों के अनुसार होता है या फिर वह दूसरे लोगों से संगति के कारण भी ऐसा करते हैं। भोजन करते समय शायद ही कोई मनुष्य विचार करता हो कि वह जो भोजन कर… Read more »

परंपरागत खेती से दूर होते लद्दाख के किसान

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अंज़ारा अंजुम खान लद्दाख याक की तरह ही गाय की नस्लों में से एक डज़ो लद्दाख जैसे संवेदनशील क्षेत्र में कृषि के लिए हमेशा से उपयुक्त माना जाता था। यह 9800 फीट की उंचाई तक और ठंड में आसानी से खेत जोत सकता है। यही कारण है कि इसे खेती के लिए सस्ता और सुविधाजनक विकल्प माना… Read more »

शुद्ध पियो शुद्ध जियो

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सरस्वती अग्रवाल “शद्ध पियो- शुद्ध जियो” ये लाईन किसी उत्पाद के विज्ञापन की नही बल्कि ये वाक्य है उत्तराखण्ड के राज्य जनपद चमोली के गडोरा गांव के 38 वर्षिय निवासी लक्ष्मण सिंह का। जो फलो का जूस बेचकर परिवार चला रहे हैं। इन्होने 12वीं तक पढ़ाई की है। 3 बेटियों- एक बेटे तथा पत्नी को मिलाकर परिवार… Read more »

कृषि संकट की जड़ें

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जावेद अनीस आज भारत के किसान खेती में अपना कोई भविष्य नहीं देखते हैं, उनके लिये खेती-किसानी बोझ बन गया है हालात यह हैं कि देश का हर दूसरा किसान कर्जदार है. 2013 में जारी किए गए राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण के आंकड़े बताते है कि यदि कुल कर्ज का औसत निकाला जाये देश के प्रत्येक… Read more »

साहिब,वक्त बदल रहा है

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वोट बैंक की राजनीति के लिये मुआवजा का लॉलीपाप न पकड़ा कर सरकार को कृषि के क्षेत्र में मौजूद समस्याओं के प्रति गम्भीरता से योजनाबद्ध तरीके से कार्य कर समस्याओं के निस्तारण कराने की जरूरत है साथ ही किसानों को मुआवजा का लत लगाने के वजह उन्हें आत्मनिर्भर बनाना भी सरकार, समाजिक संगठनों एवं संस्थाओं का नैतिक कर्तव्य है

उत्तराखंड का ग्रामीण परिवेश :समस्याए और समाधान

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    लोग कहते है उत्तराखंड बदल रहा है लेकिन गाँवो में जाकर देखो तो बदला हुवा कही भी नज़र नही आता । आज भी गाँवो में  शिक्षा,मेडिकल सुविधा व सड़क  आदि विकाश के मानको का बुरा हाल है । उत्तराखंड बनने के बाद से ही पलायन को रोकना व  ,गाँवो का विकाश दो महत्वपूर्ण… Read more »

असली खाद के पहचान की घरेलू विधि

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राजमणि यूरिया किसान भाइयों यूरिया की असली पहचान है इसके सफेद चमकदार लगभग समान आकार के कड़े दाने इसका पानी में पूर्णतया घुल जाना तथा इसके घोल को छूने पर शीतल अनुभूति होना ही इसकी असली पहचान है। किसान भाइयों यूरिया को तवे पर गर्म करने से इसके दाने पिघल जाते है यदि हम आंच… Read more »