कला-संस्कृति धर्म-अध्यात्म प्रकृति, चेतना और आत्म जागरण का उत्सव January 21, 2026 / January 21, 2026 | Leave a Comment बसंत पंचमी विशेष : डॉ घनश्याम बादल भारतीय परंपरा और श्रीमद् भागवत गीता में वसंत को ऋतुराज कहा गया है,’ऋतूनां कुसुमाकरः अर्थात् ऋतुओं में मैं वसंत हूँ, जहाँ सृजन, सौंदर्य और चेतना अपने चरम पर होती है। बसंत का सौंदर्य एवं महत्व देखकर ही इसे ऋतुराज की संज्ञा दी गई है। वसंत पंचमी भारतीय जीवन-दर्शन का सजीव प्रतीक है- जहाँ धर्म, विज्ञान, मनोविज्ञान और प्रकृति एक-दूसरे से अलग नहीं, बल्कि एक ही चेतना के विविध रूप हैं। तिथि मात्र नहीं बसंत वसंत पंचमी केवल पंचांग में अंकित एक तिथि मात्र नहीं, अपितु भारतीय चेतना का वह क्षण है जब जड़ता के लंबे शीतकाल के बाद जीवन पुनः मुस्कुराने लगता है। यह ऋतु परिवर्तन का संकेत भर नहीं, बल्कि आत्मा, प्रकृति और समाज तीनों के नवजागरण का पर्व है। श्वेत शीत के बाद पीत वसंत का आगमन जैसे कहता है-अब भीतर और बाहर, दोनों ही स्तरों पर ऊर्जा को जगाने एवं सृजन का समय है। धार्मिक और आध्यात्मिक संदर्भ वसंत पंचमी को माँ सरस्वती का प्राकट्य दिवस माना जाता है। सरस्वती केवल विद्या की देवी नहीं, बल्कि चेतना की धारा हैं। वह चेतना जो अज्ञान के तम को चीरकर विवेक का प्रकाश फैलाती है। इसीलिए इस दिन पुस्तकों, वाद्ययंत्रों और लेखन-कार्य का पूजन होता है। या कुन्देन्दु तुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना श्लोक हमें स्मरण कराता है कि ज्ञान का स्वरूप शुद्ध, शांत और उज्ज्वल होता है, ठीक उसी तरह जैसे वसंत का प्रकाश। आध्यात्मिक दृष्टि से वसंत पंचमी आंतरिक ऋतु परिवर्तन का प्रतीक है। जैसे धरती के भीतर बीज फूटते हैं, वैसे ही साधक के भीतर सुप्त चेतना जागती है। योग और तंत्र परंपरा में इस काल को साधना के लिए सर्वश्रेष्ठ माना गया है । प्रकृति और विज्ञान का संगम वैज्ञानिक दृष्टि से वसंत पंचमी के आसपास पृथ्वी के उत्तरी गोलार्द्ध में दिनों की अवधि बढ़ने लगती है, सूर्य की किरणें अधिक सीधी और ऊर्जा-समृद्ध हो जाती हैं। इसका प्रभाव सीधे मानव शरीर और मस्तिष्क पर पड़ता है। मौसम विज्ञान के अनुसार भी वसंत ऋतु में सेरोटोनिन और डोपामिन जैसे “प्रसन्नता दायक हार्मोन” का स्तर बढ़ता है अवसाद, जड़ता और आलस्य में कमी आती है। सृजनात्मकता और सीखने की क्षमता तीव्र होती है । इसीलिए प्राचीन भारत में गुरुकुलों में नए अध्ययन सत्र, संगीत-नाट्य अभ्यास और शास्त्रार्थ इसी काल में प्रारंभ होते थे। मनोविज्ञान और आत्मिक चेतना मनोवैज्ञानिक रूप से वसंत पंचमी आशा का पर्व है। शीतकाल मानव मन में एक प्रकार की संकुचनशीलता ले आता है। कम प्रकाश, कम ऊर्जा, अधिक अंतर्मुखता। वसंत इस संकुचन को तोड़ता है। पीला रंग, जो वसंत पंचमी का प्रतीक है, ऊर्जा, ऊष्मा,आशावाद, बौद्धिक स्पष्टता और आत्मविश्वास का रंग माना जाता है। इस दिन पीले वस्त्र, पीले पुष्प और पीले पकवान (केसरिया खीर, बेसन के लड्डू) परंपरा में शामिल हैं। यह रंग मन को संदेश देता है- संकुचन एवं आलस का समय यानी शीतकाल अब चला गया इसलिए आगे बढ़ो,सीखो और रचो।” भौगोलिक परिवर्तन और जीवन भौगोलिक दृष्टि से वसंत पंचमी कृषि चक्र का महत्वपूर्ण पड़ाव है। रबी की फसलें पकने लगती हैं, सरसों के खेत पीले फूलों से भर जाते हैं। यह दृश्य केवल सौंदर्य नहीं, बल्कि अन्न, समृद्धि और जीवन की निरंतरता का संकेत है। उत्तर भारत से लेकर पूर्वी भारत तक लोकजीवन में वसंत का स्वागत गीतों के माध्यम से होता है- फागुन आयो रे, रंग बरसाओ रे, सरसों फूली,धरती बोली,जीवन गुनगुनाओ रे जैसे लोकगीतों में किसान की आशा, प्रकृति से उसका संवाद और जीवन के प्रति उसका उल्लास समाहित होता है। वसंत और भारतीय सांस्कृतिक परंपरा वसंत पंचमी के साथ ही फाग, होली, रास और प्रेम-उत्सवों की श्रृंखला आरंभ होती है। कालिदास ने ‘ऋतुसंहार’ में वसंत को प्रेम और सृजन की ऋतु कहा है। यह प्रेम केवल दैहिक नहीं, बल्कि आत्मा का प्रकृति से, मनुष्य का मनुष्य से और साधक का ब्रह्म से प्रेम है। आधुनिक संदर्भ में वसंत पंचमी आज के यांत्रिक और तनावग्रस्त जीवन में वसंत पंचमी हमें रुककर देखने, महसूस करने और स्वयं से जुड़ने का अवसर देती है। यह पर्व याद दिलाता है कि ज्ञान केवल डिग्रियों में नहीं, बल्कि संवेदनशीलता, संतुलन और प्रकृति-संगति में भी निहित है। यदि हम वसंत पंचमी को केवल रस्म न बनाकर, आत्मचिंतन का दिन नई सीख शुरू करने का संकल्प, भीतर की नकारात्मकता त्यागने का अवसर बना लें, तो यह पर्व वास्तव में आत्मिक पुनर्जन्म का उत्सव बन सकता है। यह पर्व संदेश देता है कि जैसे प्रकृति हर वर्ष स्वयं को नया करती है, वैसे ही मनुष्य भी अपने भीतर नवीनता, विवेक और करुणा का वसंत ला सकता है। वसंत पंचमी शाश्वत संदेश है- तम से प्रकाश की ओर, जड़ता से चेतना की ओर, और अस्तित्व से आत्मबोध की ओर बढ़ना , दुखों के पुराने पत्तों को त्याग कर प्रसन्नता एवं नवीनता के नए अंकुरण को धारण करना। डॉ घनश्याम बादल Read more » बसंत पंचमी
खान-पान धर्म-अध्यात्म नच्च वे जट्टा लोहड़ी आई वे … January 12, 2026 / January 12, 2026 | Leave a Comment उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल में खिचड़वार और दक्षिण भारत के पोंगल पर भी--बेटियों को भेंट जाती है। कभी लोहड़ी से कई दिन पहले ही लोहड़ी के लोकगीत गाकर लकड़ी और उपले इकट्ठे किए जाते थे । इससे चौराहे या मुहल्ले Read more » लोहड़ी
राजनीति विश्ववार्ता वेनेजुएला घटनाक्रम : हतप्रभ दुनिया, बेलगाम ट्रंप January 5, 2026 / January 5, 2026 | Leave a Comment डॉ घनश्याम बादल लोकतंत्र के स्वयं भू ठेकेदार और दुनियाभर में थानेदारी करने वाले अमेरिका ने जिस तरीके से वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को उनकी पत्नी सिलविया फ्लोरेस के साथ बेडरूम से घसीट कर, बंधक बनाकर हाथों में हथकड़ियां और पैरों में बेड़ियां डालकर डिटेंशन सेंटर में रखा है, वह एक तानाशाह, वैध या […] Read more » Trump unbridled Venezuelan events: World stunned वेनेजुएला घटनाक्रम
राजनीति पुनरावलोकन 2025 : पांच की कसौटी पर ’25’ December 30, 2025 / December 30, 2025 | Leave a Comment अपने तीसरे कार्यकाल मेंएनडीए की सरकार ने 2025 में साफ कर दिया कि सत्ता में निरंतरता केवल उपलब्धि नहीं, बल्कि जिम्मेदारी भी है। नीतियों की रफ्तार तेज रही, लेकिन उनके सामाजिक असर पर सवाल भी उतनी ही मुखरता से उठे। विपक्ष की नजर में यह सरकार मनमानी करने वाली है धर्मी सरकार रही तो पक्ष ने इसे दृढ़ इरादों की सरकार बताया। Read more » Review 2025
लेख अलविदा 2025 : बदलाव,बहस और उम्मीदों का साल ! December 23, 2025 / December 23, 2025 | Leave a Comment इसी वर्ष लाल सागर और फारस की खाड़ी में समुद्री मार्गों पर अस्थिरता के कारण कई देशों को अपने व्यापारिक रास्ते बदलने पड़े। ऊर्जा आपूर्ति बाधित होने से कच्चे तेल की कीमतों में उतार–चढ़ाव देखा गया। Read more » अलविदा 2025
राजनीति नाम, नीति, नीयत और राजनीति December 22, 2025 / December 22, 2025 | Leave a Comment महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार योजना एक्ट यानी ‘मनरेगा’ का नाम बदलकर ‘विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन ग्रामीण यानी संक्षेप में ‘जी राम जी’ कर देने के साथ ही एक बार फिर से विभिन्न योजनाओं के नाम Read more » नाम नीति नीयत और राजनीति
विश्ववार्ता भारतीय कूटनीति की अग्नि परीक्षा November 18, 2025 / November 18, 2025 | Leave a Comment भारत के सबसे निकट पड़ोसी बांग्लादेश में एक बार फिर उठा पटक की आहट सुनाई देने लगी है । वैसे तो पिछले वर्ष जुलाई में वहां जिस तरीके से शेख हसीना की सरकार को छात्र आंदोलन Read more » The acid test of Indian diplomacy शेख हसीना को मौत की सजा
राजनीति बिहार में उड़े ‘गर्दे’ के गूढ़ार्थ ! November 17, 2025 / November 17, 2025 | Leave a Comment इस विधानसभा चुनाव में बिहार ने सारे पूर्वानुमानों को झुठलाते हुए नीतीश कुमार और भाजपा नीत एनडीए को प्रचंड जीत दिलवाते हुए राजनीति का एक नया मिथ रच Read more » बिहार में उड़े ‘गर्दे’
खेल जगत मनोरंजन उपेक्षित रात की स्वर्णिम सुबह ! November 7, 2025 / November 7, 2025 | Leave a Comment अवसर लेकर आई है ‘हर मन’ की जीत ! यह जीत बदल सकती है लड़कियों की दुनिया ! डॉ घनश्याम बादल 2 नवंबर 2025 की तारीख की रोशन रात भारतीय खेल जगत की एक ऐतिहासिक एवं स्वर्णिम घटना के रूप में याद की जाएगी जो भारत और भारत की लड़कियों तथा महिला खिलाड़ियों के लिए एक स्वर्णिम सुबह लेकर आई। यदि इस जीत को हमने देश के महिला जगत एवं खेल जगत के लिए […] Read more »
राजनीति शख्सियत नरेंद्र मोदी मतलब नैति नैति September 16, 2025 / September 16, 2025 | Leave a Comment डॉ घनश्याम बादल नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री के रूप में इंदिरा गांधी के कार्यकाल को पीछे छोड़कर नेहरू के बाद सबसे ज्यादा समय तक लगातार प्रधानमंत्री पद रहने वाली उसे शख्सियत का नाम है जिसे उनके समर्थक भारत को विश्वगुरु बनाने एक विकसित देश बनाने और बनाना स्टेट से सॉलिड स्टेट तक ले जाने का श्रेय देते हैं. […] Read more » 75th birthday of narendra modi Narendra Modi means morality
राजनीति शांति नहीं तो क्रांति से आता है लोकतंत्र September 15, 2025 / September 15, 2025 | Leave a Comment डॉ घनश्याम बादल आज दुनिया में कई तरह की शासन प्रणालियां है जिनमें तानाशाही से लेकर राजवंश और व्यक्ति या विचारधारा केंद्रित शासन भी शामिल है लेकिन दुनिया की सर्वोत्तम शासन शैली का नाम है लोकतंत्र। लोकतंत्र एक ऐसी शासन शैली है, जिसमें जनता की इच्छा सर्वोपरि होती है। यह “जनता के द्वारा, जनता के […] Read more » Democracy comes from revolution if not peace शांति नहीं तो क्रांति से आता है लोकतंत्र
राजनीति विश्ववार्ता आखिरकार जाना पड़ा भ्रष्ट एवं काहिल सरकार को September 10, 2025 / September 10, 2025 | Leave a Comment नेपाल: एक बार फिर लोक की सर्वोच्चता सिद्ध डॉ घनश्याम बादल आखिरकार वही हुआ जिसकी आशंका थी। जेन जी के कार्यकर्ताओं के आगे लाठी, गोली,प्रतिबंध और सरकार की ताकत सब ध्वस्त हो गई और अंतत सरकार को जाना पड़ा । नेपाल सरकार का पतन तो तब ही शुरू हो गया था जब तीन मंत्रियों ने […] Read more » unrest in nepal नेपाल सरकार का पतन