डॉ.वेदप्रकाश

डॉ.वेदप्रकाश

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असिस्टेंट प्रोफेसर,
किरोड़ीमल कालेज,दिल्ली विश्वविद्यालय

लेखक - डॉ.वेदप्रकाश - के पोस्ट :

राजनीति

वोटर अधिकार यात्रा बनाम एजेंडा यात्रा

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डॉ.वेदप्रकाश  महात्मा गांधी का जीवन राष्ट्रीय और वैश्विक फलक पर शांति और सद्भाव के लिए समर्पित रहा लेकिन उनके नाम के गैरवारिस राहुल गांधी जो विपक्ष के नेता भी हैं,  आज राष्ट्रीय और वैश्विक फलक पर अशांति फैलाने और वैमनस्य को समर्पित दिखाई दे रहे हैं। अपने राजनीतिक जीवन के आरंभ से ही वे तथ्यहीन और उल्टी सीधी बातों के लिए प्रसिद्ध रहे हैं। न उन्हें देश के सामाजिक, सांस्कृतिक, आर्थिक और धार्मिक वातावरण की जानकारी है और न ही राजनीति की जानकारी क्योंकि राजनीति में आने के लिए उन्होंने कोई पुरुषार्थ नहीं किया। वह उन्हें पैतृक संपत्ति के रूप में प्राप्त हो गई और इस देश को जानने के लिए वे कभी घर से निकले नहीं।        सर्वविदित है कि स्वतंत्रता के बाद से लगातार कई दशकों तक सत्ता में रहने के बाद वर्ष 2014 से कांग्रेस पार्टी सत्ता से बाहर है। वर्ष 2014 में जनता ने भारी बहुमत के साथ भारतीय जनता पार्टी को अपना समर्थन दिया और नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बने। यह भी सर्वविदित है कि वर्ष 2014 से ही भिन्न-भिन्न रूपों में सामान्य व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आ रहे हैं। जनकल्याण की विभिन्न योजनाएं पंक्ति में खड़े अंतिम व्यक्ति तक पहुंच रही हैं।  राष्ट्रीय और वैश्विक फलक पर भारत लगातार मजबूत होता जा रहा है। देश में कार्य-व्यवसाय, उद्योग एवं आर्थिक क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रगति हुई है। करोड़ों लोग गरीबी रेखा से बाहर निकले हैं और यह भी सर्वविदित है कि कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस यानी आईएनडीआईए का समूचा विपक्षी गठबंधन लगातार नकारात्मक राजनीति कर रहा है। राहुल गांधी और विपक्ष आज एजेंडेवादी बन चुके हैं। ये सभी नकारात्मकता फैलाने का इकोसिस्टम बनाते हैं और फिर लगातार झूठे प्रचार से उसे सच्चा दिखाने का प्रयास करते हैं।        हम सभी जानते हैं कि जब किसी झूठ को भी बार-बार अलग-अलग ढंग से अलग-अलग लोगों के द्वारा कहा जाता है तो सामान्य व्यक्ति को एक समय के बाद वह सच जैसा दिखने लगता है। वर्ष 2014 में चुनाव हारने के बाद राहुल गांधी ने सबसे पहले ईवीएम मशीन पर दोष मढ़ना शुरू किया। मशीन खराब हैं, उनमें बटन कोई भी दबाओ, वोट भाजपा को ही जाती है आदि । यह नैरेटिव काफी चला, फिर असफल होने पर- प्रधानमंत्री चोर है ऐसे असंवैधानिक नारे शुरू किए गए। इसके बाद संविधान खतरे में है। संविधान बदल दिया जाएगा। लोकतंत्र खतरे में है। आने वाले वर्षों में चुनाव नहीं होंगे, सीधे मोदी का ही शासन चलता रहेगा जैसे नैरेटिव  भी खूब चलाए गए। कृषि कानून, नागरिकता संशोधन कानून और धारा 370 जैसे महत्वपूर्ण और संसद में पास हुए गंभीर कानूनों पर भी तरह-तरह का दुष्प्रचार भ्रम और भय फैलाया गया। समूचे विपक्ष ने राहुल गांधी के नेतृत्व में कभी किसानों को भड़काने का काम किया तो कभी मुसलमानों को भी। यह भी नैरेटिव  बनाया गया कि सरकार किसानों की जमीन छीन लेगी, सरकार मुसलमानों की नागरिकता छीन लेगी आदि। कुछ समय बाद इस प्रकार के झूठे नॉरेटिव से देश में बड़ा आर्थिक और सामाजिक नुकसान हुआ।  हम सभी इस बात से भी परिचित हैं कि राहुल गांधी और विपक्ष के कई नेता संसद में चर्चा में ठीक से हिस्सा नहीं लेते। वे संविधान विरोधी अभद्र भाषा का प्रयोग  हमेशा करते हैं। संसद को बाधित करते हुए शोर शराबा करते हुए बाहर धरने-प्रदर्शन करते हैं। इससे यह भी स्पष्ट है कि वे सवाल जवाब करने में अथवा बहस करने में सक्षम नहीं है। पिछले कई महीनों से राहुल गांधी नए एजेंडे को लेकर पूरे इकोसिस्टम में काम कर रहे हैं। इस बार उन्होंने चुनाव आयोग पर जो संविधान सम्मत संस्था है, भारतीय जनता पार्टी के पक्ष में वोट चोरी करने का आरोप लगाया है। आरोप की पुष्टि हेतु वह चुनाव आयोग के बार-बार कहने पर भी तथ्य प्रस्तुत करने में असमर्थ रहे हैं।          पिछले कुछ दिन राहुल गांधी और तेजस्वी यादव बिहार में विधानसभा चुनाव के मद्देनजर वोटर अधिकार यात्रा पर हैं। तेजस्वी यादव के दो मतदाता पत्र मिल चुके हैं। अपनी यात्रा में भी वे नैतिकता की सीमाओं के पार जाकर अनर्गल टीका-टिप्पणी कर रहे हैं। तात्पर्य यह है कि वोटर अधिकार यात्रा अथवा वोट चोरी के आरोप भी उनके एजेंट एवं इकोसिस्टम के अंतर्गत चलाया जा रहा अभियान है। विगत में भी सेना  द्वारा आतंकवाद के जवाब में बालाकोट स्ट्राइक एवं ऑपरेशन सिंदूर जैसी साहसिक कार्रवाई पर राहुल गांधी नकारात्मक टिप्पणी करने के साथ-साथ सेना के शौर्य पर भी प्रश्न उठाते रहे हैं। यह उनकी राजनीतिक अपरिपक्वता को दिखाता है। सभी जानते हैं कि राहुल गांधी, सोनिया गांधी, लालू यादव, तेजस्वी यादव आदि विपक्ष के बड़े कहे जाने वाले कई नेताओं पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप हैं। अभी ये जमानत पर हैं। चुनाव आयोग द्वारा हाल ही में बिहार में मतदाता सूची शोधन हेतु विशेष सघन पुनरीक्षण अभियान (एफआईआर) के दौरान लाखों मतदाताओं को अपात्र पाया गया। इस प्रक्रिया में बंगाल में भी सघन पुनरीक्षण आरंभ होना है। इसको लेकर भी राहुल गांधी, बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, सपा प्रमुख अखिलेश यादव एवं विपक्ष के अन्य नेता झूठ फैला रहे हैं।     आज यह आवश्यक है कि नेता विपक्ष और सभी विपक्षी दल संसद में अपनी भूमिका के महत्व को समझें। जन कल्याण के लिए योजनाओं हेतु सरकार को सुझाव दें और जनहित में संसद में मुद्दों पर बहस करें। संसद के बाहर झूठे एजेंट चलाने मात्र से राजनीतिक हितों और स्वार्थों की पूर्ति संभव नहीं है। डॉ.वेदप्रकाश

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राजनीति

सिंदूर का पौधारोपण के निहितार्थ

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डॉ.वेदप्रकाश प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी संकल्प से सिद्धि के नायक के रूप में जाने जाते हैं। वे एक ऐसे राष्ट्रीय और वैश्विक व्यक्तित्व हैं जो जब किसी कार्य का संकल्प लेते हैं तो उसे समुचित योजना बनाकर सिद्धि तक भी पहुंचाते हैं। वे आरंभ से ही विभिन्न चुनौतियों को दूर करते हुए भारतवर्ष की शक्ति व शौर्य के जागरण और विकसित भारत के संकल्प को लेकर चल रहे हैं।      विगत दिनों पहलगाम में हुए आतंकी हमले में सुनियोजित ढंग से पुरुषों को निशाना बनाया गया। निहत्थे पर्यटकों का धर्म पूछकर उन्हें मौत के घाट उतारा गया। अनेक महिलाओं की मांग से सिंदूर मिटाया गया। आतंकियों के इस दुष्कृत्य ने समूचे देश और विश्व को झकझोर दिया। तब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यह संकल्प लिया  कि जिन लोगों ने भारत की माताओं- बहनों की मांग से सिंदूर मिटाया है, हम उन्हें ही मिटा देंगे। परिणामस्वरूप ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया गया और कुछ ही समय में सैकड़ों आतंकवादियों को मौत के घाट उतारते हुए उनके ढांचे और अड्डों को भी मिट्टी में मिलाया गया।  प्रधानमंत्री अपने विभिन्न उद्बोधनों में बार-बार कह चुके हैं कि आतंकवाद किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा। अब यदि सीमा पार से गोली चली तो भारत उसका जवाब गोले से देगा। ऑपरेशन सिंदूर ने उनके इस संकल्प को स्पष्ट कर दिया। ध्यातव्य है कि ऑपरेशन सिंदूर में भारतीय सेना का पराक्रम और उसका प्रदर्शन उत्कृष्ट रहा। देशभर में सामान्य जनता ने विभिन्न कार्यक्रमों से सेना के इस उत्कृष्ट प्रदर्शन की न केवल प्रशंसा की अपितु हर परिस्थिति में देश सेना के साथ है, यह भरोसा भी दिया।       हाल ही में 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने आवास पर सिंदूर का पौधा रोपा है। यह पौधा विगत दिनों उन्हें गुजरात की उन वीरांगना महिलाओं ने भेंट किया था, जिन्होंने 1971 के भारत-पाक युद्ध के दौरान नष्ट हुई  एयरस्ट्रिप को रातों-रात तैयार करने में असाधारण साहस और देशभक्ति का परिचय दिया था। पौधारोपण के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया पर लिखा- यह पौधा देश की नारी शक्ति के शौर्य और प्रेरणा का प्रतीक बनेगा। वे पहले भी विभिन्न अवसरों पर देश की नारी शक्ति के शौर्य,प्रेरणा एवं उनके सम्मान की रक्षा हेतु प्रतिबद्धता व्यक्त कर चुके हैं।        पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद को गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित श्रीरामचरितमानस के संदर्भ से भी समझने की आवश्यकता है। वहां वर्णन है कि वनवास के लिए निकले श्रीराम ने अगस्त्य मुनि के आश्रम में पहुंचकर उनसे अपने वनवास की अवधि के लिए शांत और एकांत स्थान पूछा। मुनि ने उन्हें निवास हेतु गोदावरी नदी के निकट दंडक वन में पंचवटी नामक स्थान बताया। पंचवटी ऐसा स्थान है जहां अनेक प्रकार के फल-फूल वाले पेड़ और वनस्पतियां हैं। इस रमणीय स्थान पर निवास करते हुए जब श्रीराम का वनवास बीत रहा था, तभी वहां खर दूषन आदि राक्षस उत्पात मचाते हैं, जिनमें से कई श्रीराम के हाथों मारे जाते हैं और फिर  लंकापति राक्षस राज रावण छल से माता सीता का हरण कर लेता है। फिर कुछ समय बाद नारी शक्ति के सम्मान की रक्षा और आसुरी प्रवृत्ति की समाप्ति हेतु समूची लंका का विध्वंस सर्वविदित है। कुछ इसी प्रकार का कृत्य पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवादियों के पहलगाम हमले में भी सामने आया,जिसके विध्वंस हेतु ऑपरेशन सिंदूर चला और अभी भी जारी है।       विगत वर्ष भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर एक पेड़ मां के नाम इस अभियान को शुरू किया था,जिसके अंतर्गत देशभर में जगह-जगह वृक्षारोपण हुआ और अब तक लगभग 109 करोड़ पौधे रोपे जा चुके हैं। इस बार विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 5 जून को विश्व की सबसे प्राचीन पर्वतमालाओं में से एक अरावली पर्वत श्रृंखला के संरक्षण और उसे हरित बनाने के लिए 700 किलोमीटर लंबे अरावली ग्रीन वॉल प्रोजेक्ट का शुभारंभ किया है। सर्वाधिक है कि अरावली पर्वत श्रंखला में खनन, सूखा, अतिक्रमण, जलवायु परिवर्तन और विकास कार्यों के चलते पर्वत क्षेत्र और हरियाली लुप्त होती जा रही है। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में सभी पर्यावरणीय चुनौतियों के समाधान को लेकर सरकार प्रतिबद्ध है। यह एक बहुत बड़ी योजना और संकल्प है जिसे दिल्ली, हरियाणा,राजस्थान और गुजरात को अपने अपने क्षेत्र में बड़े प्रयास करते हुए सिद्धि तक पहुंचाना होगा।       प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा अपने आवास पर रोपा सिंदूर का पौधा पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ  नारी शक्ति, सांस्कृतिक परंपरा और उनके सम्मान की रक्षा का संकल्प एवं प्रतीक भी है। आज हमें यह भी समझने की आवश्यकता है कि भारत की लड़ाई जितनी प्रदूषण के विरुद्ध और प्रकृति पर्यावरण की रक्षा के लिए है। उतनी ही भारत विरोधी ताकतों और आतंकवाद जैसी मानसिकता के विरुद्ध भी है। प्रधानमंत्री द्वारा सिंदूर के पौधे का रोपण यह संदेश देता है कि जब तक आतंकवाद एवं भारत विरोधी ताकतें भारत को कमजोर करने का प्रयास करेंगे, नारी शक्ति के सिंदूर को मिटाने का प्रयास करेंगे। तब तब भारत पूरी ताकत के साथ जवाब देगा। प्रधानमंत्री मोदी द्वारा रोपा गया सिंदूर का पौधा जन सामान्य के लिए भी प्रेरणा का सूचक है। इस पौधे से प्रेरणा लेकर जन-जन भी नारी शक्ति के सम्मान एवं उसकी रक्षा के लिए एक एक पौधे का रोपण अवश्य करें।  ऋषिकेश स्थित परमार्थ निकेतन पूज्य स्वामी चिदानंद सरस्वती जी के नेतृत्व में विभिन्न अवसरों पर प्रेरक गतिविधियों का केंद्र बन चुका है। विश्व पर्यावरण दिवस की पूर्व संध्या पर पूज्य स्वामी जी ने पर्यावरण वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव की उपस्थिति में यह घोषणा की कि देशभर में पांच ‘सिटी- पंचवटी’ सिंदूर वाटिकाएं तैयार की जाएंगी। उन्होंने कहा कि इस कार्य के लिए ऋषिकेश, गंगोत्री-यमुनोत्री, प्रयागराज, अयोध्या आदि शहरों में जन भागीदारी से पंचवटी सिंदूर वाटिका तैयार करने का उद्देश्य जन मन में ऑपरेशन सिंदूर की स्मृति, सेना के शौर्य एवं नारी शक्ति के सम्मान का भाव निहित रहेगा। ध्यान रहे जलवायु परिवर्तन आज एक राष्ट्रीय और वैश्विक चुनौती बनती जा रही है। वृक्षों की अंधाधुंध कटाई और बढ़ता प्रदूषण मानवता के लिए संकट बनता जा रहा है। अनेक नदियां मर चुकी है अथवा करने के कगार पर हैं। ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं। जल स्रोत भयंकर प्रदूषण की गिरफ्त में हैं। वायु प्रदूषण भी तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में वृक्षारोपण एक बड़ा समाधान सिद्ध हो सकता है। आज आवश्यक है देश के छोटे बड़े प्रत्येक शहर में पंचवटी वाटिकाएं बनें। सरकार के साथ-साथ संत समाज और जन भागीदारी से यह काम आसान हो सकता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा किया गया पौधारोपण हमें प्रकृति पर्यावरण के संरक्षण-संवर्धन का भी संदेश देता है। आइए हम सभी अपने-अपने ढंग से प्रकृति पर्यावरण के संरक्षण- संवर्धन हेतु प्रयास करें। डॉ.वेदप्रकाश

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