राजनीति भारत-अरब लीग के विदेश मंत्रियों की बैठक के सियासी व कूटनीतिक मायने February 3, 2026 / February 3, 2026 | Leave a Comment कमलेश पांडेय भारत की सियासत में भले ही हिन्दू-मुसलमान एक-दूसरे के विपरीत ध्रुव समझे जाते हों लेकिन वैश्विक दुनियादारी में वे परस्पर पूरक बनते जा रहे हैं। ऐसा इसलिए कि अरब जगत पर कसते अमेरिकी-चीनी शिकंजे के दृष्टिगत पश्चिम और मध्य एशियाई देशों की भलाई इसी में निहित है कि वे सभी 22 देश भारत-रूस […] Read more » भारत-अरब लीग
आर्थिकी युवा बजट 2026-27 के आर्थिक मायने विशिष्ट, विकसित भारत 2047 के सपने होंगे पूरे February 2, 2026 / February 2, 2026 | Leave a Comment कमलेश पांडेय भारत सरकार का 2026-27 का केंद्रीय बजट विकास, रोजगार सृजन और राजकोषीय अनुशासन पर केंद्रित है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार की वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण ने 1 फरवरी 2026, दिन रविवार को इसे संसद की पटल पर प्रस्तुत करके एक नया रिकॉर्ड कायम किया। लिहाजा इसके आर्थिक मायने और राजनीतिक प्रभाव महत्वपूर्ण है। इसपर बहस तेज हो गई, जो कई कारणों से अभिप्रेरित है। जहां सत्ता पक्ष ने इसे युवा शक्ति का प्रतीक बजट ठहराया, वहीं विपक्ष ने इसे अदृश्य बजट करार देते हुए जमकर आलोचना की। जहां तक कुल बजट आकार की बात है तो यह 53.5 लाख करोड़ रुपये है, जिसमें पूंजीगत व्यय 12.2 लाख करोड़ रुपये तक बढ़ाया गया। भले ही राजकोषीय घाटा जीडीपी (GDP) का 4.3% रखा गया, जो पिछले साल के 4.4% की तुलना में कुछ कम है। वहीं, जहां तक कर सुधार की बात है तो आयकर दरों में कोई बदलाव नहीं आया; जबकि नया आयकर अधिनियम 2026 अप्रैल से लागू होगा। वहीं, एफ एंड ओ (F&O) पर एसटीटी (STT) बढ़ाकर 0.05-0.15% किया गया, विदेशी पर्यटन/शिक्षा हेतु टीसीएस (TCS) 2% किया गया। जहां तक बजट में क्षेत्रीय प्रावधान किये जाने की बात है तो रोजगार-एमएसएमई के लिए 10,000 करोड़ का वृद्धि कोष प्रस्तावित है, जबकि क्रेडिट गारंटी दोगुनी की गई। वहीं, बुनियादी ढांचा हेतु 7 हाईस्पीड रेल कॉरिडोर का विकास, शहरी विकास के लिए 5,000 करोड़ प्रति वर्ष का प्रस्ताव और स्वास्थ्य-कृषि क्षेत्र में 17 कैंसर दवाएं सस्ती किये जाने की घोषणा, बायोफार्मा को 10,000 करोड़ दिए जाने का प्रस्ताव और मखाना बोर्ड मजबूत किये जाने का प्रस्ताव शामिल है। वहीं, अन्य महत्वपूर्ण बजट घोषणाओं में नवीकरणीय ऊर्जा, इलेक्ट्रॉनिक्स और निर्यात प्रोत्साहन पर फोकस प्रदान करते हुए सुधारों का ‘रिफॉर्म एक्सप्रेस’ जारी रखा गया। लिहाजा यह विकसित भारत 2047 का रोडमैप है। इन बजट प्रस्तावों के आर्थिक मायने दूरगामी महत्व वाले हैं, क्योंकि बजट में पूंजीगत व्यय (कैपेक्स) को 12.2 लाख करोड़ रुपये तक बढ़ाया गया है, जो बुनियादी ढांचे, विनिर्माण और हरित ऊर्जा को बढ़ावा देगा। वहीं, राजकोषीय घाटा 4.3% जीडीपी (GDP) पर लक्षित है, जबकि ऋण-जीडीपी अनुपात 55.6% तक सुधरेगा, जो वित्तीय स्थिरता सुनिश्चित करेगा। वहीं, कर राहत जैसे टीसीएस (TCS)/टैक्स सीमा बढ़ाना, एमएसएमई (MSME) क्रेडिट गारंटी दोगुनी करना और स्टार्टअप फंड कंज्यूमर (consumer) खर्च व निवेश को प्रोत्साहित करेगा। जहां तक बजट प्रस्तावों के राजनीतिक प्रभाव की बात है तो निश्चय ही सरकार ने रोजगार (जैसे चमड़ा क्षेत्र में 22 लाख नौकरियां), किसान योजनाएं (मखाना बोर्ड) और स्वास्थ्य (10,000 मेडिकल सीटें) पर फोकस कर एनडीए (NDA) सहयोगियों व ग्रामीण मतदाताओं को मजबूत संदेश दिया है। जबकि विपक्ष ने इसे ‘राजनीतिक बजट’ करार दिया है, खासकर राज्य-विशिष्ट घोषणाओं पर, लेकिन विकास लक्ष्य (विकसित भारत 2047) बीजेपी की छवि को मजबूत करेंगे। कुल मिलाकर, यह गठबंधन स्थिरता और 2029 के आम चुनाव सहित 2026, 27 और 28 की विधानसभा चुनाव की तैयारी को स्पष्ट रूप से दर्शाता है। लिहाजा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बजट 2026-27 को 140 करोड़ भारतीयों की आकांक्षाओं का प्रतीक बताया। उन्होंने इसे सुधारों को मजबूत करने और विकसित भारत के लिए स्पष्ट रोडमैप करार दिया। मोदी ने कहा कि यह बजट नारी शक्ति का सशक्त प्रतिबिंब है और अपार अवसर प्रदान करता है। युवाओं के लिए नया आयाम तथा हर घर लक्ष्मी का आगमन सुनिश्चित करने वाला बताया। विकास फोकस करते हुए उन्होंने इसे आत्मनिर्भरता, रोजगार सृजन और समावेशी विकास का माध्यम माना, जो देश को 2047 के विकसित भारत के लक्ष्य की ओर ले जाएगा। विपक्ष की आलोचना के बीच सरकार की सकारात्मक छवि मजबूत करने वाला कदम है। हालांकि, भारत के 2026-27 बजट पर विपक्ष ने कड़ी आलोचना की है। विभिन्न दलों ने इसे निराशाजनक, फीका और अपेक्षाओं से कम बताया। जहां कांग्रेस के वरिष्ठ नेता व पूर्व केंद्रीय मंत्री जयराम रमेश ने इसे “पूरी तरह फीका” कहा, जिसमें भारी माहौल के बावजूद कोई स्पष्ट आवंटन या पारदर्शिता नहीं है। जबकि कांग्रेस नेता सुरेंद्र राजपूत ने आरोप लगाया कि सरकार अर्थव्यवस्था को गर्त में डुबो रही है। वहीं कांग्रेस नेता जेबी माथेर ने केरल के लिए इसे निराशाजनक बताया है। वहीं, समाजवादी पार्टी की सांसद डिंपल यादव ने कहा कि इस बजट में महिलाओं, युवाओं, शिक्षा, स्वास्थ्य व कृषि के लिए कुछ नहीं है। जबकि सपा नेता और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने इसे गरीब-किसान-युवा विरोधी बजट बताया। जबकि सपा सांसद राम गोपाल यादव ने कहा कि “मोदी सरकार से ही उन्हें कोई उम्मीद नहीं है।” वहीं, टीएमसी नेत्री और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मौजूदा बजट में भी बंगाल की उपेक्षा का आरोप लगाते हुए इसे “दिशाहीन” बजट कहा। जबकि तृणमूल कांग्रेस के सांसद शत्रुघ्न सिन्हा ने कहा कि यह बजट उनकी समझ में नहीं आया, इसलिए कोई नंबर नहीं देंगे। कुल मिलाकर विपक्ष ने राज्य-विशिष्ट घोषणाओं की कमी, मध्यम वर्ग व किसानों की अनदेखी तथा राजनीतिक बजट करार दिया। हालांकि, भारत के 2026-27 बजट पर विपक्ष की आलोचना के जवाब में भाजपा सरकार ने इसे ऐतिहासिक, समावेशी और विकासोन्मुखी बजट बताया। बीजेपी नेताओं ने आरोप लगाते हुए कहा कि विपक्ष नकारात्मक राजनीति कर रहा है। जहां केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बजट को सराहते हुए विपक्ष पर तंज कसा कि वे अर्थव्यवस्था की मजबूती को नहीं देख पा रहे। वहीं, उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसे विकसित भारत के संकल्प में मील का पत्थर करार देते हुए कहा कि यह बजट हर वर्ग के लिए कल्याणकारी है। जबकि यूपी के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने इसे विकसित भारत का रोडमैप करार दिया, और कहा कि इसके विभिन्न प्रस्तावों से सामाजिक-आर्थिक विकास का स्वर्णिम अध्याय पूरा होगा। कुलमिलाकर सरकार ने जोर दिया कि कैपेक्स, रोजगार और किसान योजनाएं विपक्ष की ‘फीका’ टिप्पणी को गलत साबित करेंगी। इस प्रकार यह बजट एनडीए की एकजुटता को भी दिखाता है। कमलेश पांडेय Read more » बजट 2026-27
राजनीति विधि-कानून सनातन विरोधी भारतीय संविधान में संशोधन की अपेक्षाएं January 30, 2026 / January 30, 2026 | Leave a Comment कमलेश पांडेय भारतीय संविधान के कुछ प्रावधानों को यदि सनातन विरोधी षडयंत्र समझा जाता है तो यह अनायास नहीं है क्योंकि इसके कई निर्माताओं का सार्वजनिक चरित्र संदिग्ध और हिंदुत्व विरोधी माना जाता रहा है। तत्कालीन नौकरशाहों, न्यायविदों, व उद्योगपतियों में भी ऐसे ही तत्वों की बहुतायत थी जिससे आजादी के मौलिक उद्देश्य बता आजतक […] Read more » सनातन विरोधी भारतीय संविधान
विश्ववार्ता वैश्विक समस्याओं का समाधान सहयोग से संभव है, टकराव से तो कतई नहीं! January 29, 2026 / January 29, 2026 | Leave a Comment कमलेश पांडेय दुनिया का थानेदार अमेरिका और उसका विकल्प बनने की चाहत रखने वाले चीन समेत अन्य विघ्नसंतोषी देशों को शांतिप्रिय व गुटनिरपेक्ष देश भारत ने एक नहीं बल्कि कई बार स्पष्ट कूटनीतिक संदेश दिए हैं कि वैश्विक समस्याओं का समाधान पारस्परिक सहयोग से ही संभव है, टकराव से कतई नहीं लेकिन उनकी शहंशाही प्रवृत्ति […] Read more » eu and india trade deal वैश्विक समस्याओं का समाधान
राजनीति ‘एक भारत, एक कानून’ की नीतिगत कसौटी के सियासी निहितार्थ January 27, 2026 / January 27, 2026 | Leave a Comment कमलेश पांडेय विभिन्न तरह के पारस्परिक विरोधाभासों से जूझ रहे भारतीय गणतंत्र के लिए ‘एक भारत, एक कानून’ की अवधारणा बदलते वक्त की मांग है। इसलिए इसको सरजमीं पर उतरना बेहद जरूरी है। सवाल है कि जब एक मतदाता, एक वोट का विधान सफल हो सकता है तो फिर एक भारत, एक कानून का विधान क्यों […] Read more » One India One Law एक भारत संविधान सिर्फ एक कानूनी का ग्रंथ
विश्ववार्ता गाजा बोर्ड ऑफ पीस पर वैश्विक कशमकश के मायने January 24, 2026 / January 24, 2026 | Leave a Comment गाजा बोर्ड ऑफ पीस अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की एक महत्वाकांक्षी पहल है जो गाजा संघर्ष को सुलझाने के साथ-साथ वैश्विक स्तर पर शांति स्थापना का एक नया मॉडल प्रस्तुत करती है। Read more » गाजा बोर्ड ऑफ पीस
आर्थिकी विश्व आर्थिक मंच पर भारतीय ट्रेड कूटनीति के मायने January 23, 2026 / January 23, 2026 | Leave a Comment कमलेश पांडेय दावोस में चली विश्व आर्थिक मंच (WEF) की बैठक में भारत ने अपनी मजबूत कूटनीतिक और आर्थिक उपस्थिति दर्ज कराई है। यहां पर भारतीय ट्रेड कूटनीति ने जो पॉलिसी नैरेटिव सेट किए और ग्लोबल इमेज विकसित किया, वह यहां कई मायने में अहम है। सबसे बड़ी बात तो यह कि यहां पर भारत ने वैश्विक निवेशकों के सामने खुद को चीन का वैकल्पिक हब के रूप में प्रस्तुत किया और विकसित भारत होने का स्थायी नजरिया पेश किया। दरअसल, इस अंतर्राष्ट्रीय मंच पर भारत ने जिस आर्थिक स्थिरता, वैश्विक लोकतंत्र और ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की भावना पर बल दिया, उससे वैश्विक नीति-निर्धारण में इंडिया की भूमिका और अधिक मजबूत हुई। जब संयुक्त राष्ट्र संघ की कीमत पर अमेरिका नई विश्व व्यवस्था को बढ़ावा देने हेतु एक से बढ़कर एक जोखिम भरे दांव चल रहा हो, उस दौर में भी भारत की यह अहम उपस्थिति बहुत कुछ चुगली करती है क्योंकि अंतर्राष्ट्रीय मंच पर भारत को उभरती हुई वैश्विक शक्ति के रूप में स्थापित करने के मोदी सरकार के इरादे स्पष्ट हैं जिसे भरपूर दुनियावी समर्थन भी मिल रहा है। इसके अहम आर्थिक व कूटनीतिक मायने हैं। देखा जाए तो इस महत्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय बैठक में भारत के विभिन्न केंद्रीय मंत्रियों, कई राज्यों के मुख्यमंत्रियों और प्रमुख उद्योगपतियों के बड़े प्रतिनिधिमंडल ने जिस तैयारी के साथ शिरकत की और निजी वैश्विक निवेश आकर्षित करने पर जोर दिया, उसका रणनीतिक महत्व है। इस दौरान देखा गया कि दावोस में भारत का प्रतिनिधिमंडल रेल, आईटी, ऊर्जा और उद्योग जैसे मंत्रालयों के मंत्रियों के साथ महाराष्ट्र, गुजरात, आंध्र प्रदेश, असम, मध्य प्रदेश, तेलंगाना और झारखंड जैसे राज्यों के मुख्यमंत्रियों तक फैला हुआ था जबकि रिलायंस, टाटा, महिंद्रा, इंफोसिस जैसे अंतर्राष्ट्रीय कॉरपोरेट दिग्गजों की भागीदारी ने निजी क्षेत्र में भारत की अहम ताकत दिखाई। इससे नानाविध लाभ मिला और निवेश समझौते हुए, जैसे महाराष्ट्र के लिए हजारों करोड़ के एमओयू पर हस्ताक्षर होना। इससे दावोस में भारत पर चर्चा का केंद्र बना रहा। चर्चा भी वह कि क्या भारत मैन्युफैक्चरिंग और निवेश का नया हब बन सकता है, खासकर दिन ब दिन बदलते भू-राजनीतिक तनावों के बीच। सबसे खास बात यह कि वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) के अध्यक्ष ने भारत को सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था बताते हुए पीएम मोदी के सुधारों और ग्लोबल साउथ की आवाज की भरपूर सराहना की। इससे भारत-ईयू व्यापार समझौते पर भी सकारात्मक इनपुट के संकेत मिले। इस तरह से देखा जाए तो दावोस (WEF 2026) की मौजूदा बैठक से भारत को सीधे‑सीधे दो तरह के बड़े फायदे मिलते दिखाई दे रहे हैं– पहला, निवेश व व्यापार के ठोस मौके, और दूसरा, भारत की छवि व कूटनीतिक प्रभाव में बढ़त। वहीं, निवेश और जॉब के बेशुमार मौके मिलने की बात अलग है। कहना न होगा कि भारत का पवेलियन और अलग‑अलग राज्य (खासतौर पर उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र आदि) दावोस में निवेश आकर्षित करने के लिए आक्रामक तरीके से रोडशो, मीटिंग और एमओयू साइन कर रहे हैं, जिनका फोकस मैन्युफैक्चरिंग, हरित ऊर्जा, डेटा सेंटर व डिजिटल इकोनॉमी पर है। दरअसल पिछले सालों के ट्रेंड के आधार पर दावोस प्लेटफॉर्म से भारत को अरबों डॉलर के निवेश आश्वासन मिलते रहे हैं, जो बाद में प्लांट, इंफ्रास्ट्रक्चर और स्टार्टअप फंडिंग के रूप में नौकरियां और उत्पादन क्षमता बढ़ाते हैं। वहीं इस बार की खास बात यह है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप दावोस में भारतीय बड़े उद्योगपतियों और कॉरपोरेट लीडर्स के साथ विशेष बैठक कर रहे हैं, जिसे संभावित भारत‑अमेरिका व्यापार समझौते की दिशा में सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। यदि यहां किसी प्रकार की रूपरेखा या राजनीतिक सहमति बनती है तो आगे चलकर टैरिफ, मार्केट एक्सेस और टेक्नोलॉजी/डिफेंस कोऑपरेशन में भारत के लिए बेहतर शर्तें निकल सकती हैं। विश्व आर्थिक मंच (WEF) पर भारत को “सबसे तेज़ी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था”, ग्लोबल ग्रोथ में लगभग 20 प्रतिशत योगदान देने की क्षमता वाला देश और ग्लोबल साउथ की मजबूत आवाज़ के रूप में प्रोजेक्ट किया जा रहा है। इससे भारत की पॉलिसी नैरेटिव मजबूत हुई है और देश के ग्लोबल इमेज में उत्तरोत्तर सुधार होते रहने के संकेत मिले हैं। ऐसा इसलिए कि अश्विनी वैष्णव जैसे नरेंद्र मोदी के कुशल मंत्री वहाँ अगले 5 साल के लिए 6–8% ग्रोथ, 2047 तक प्रति व्यक्ति आय 5 गुना करने, ईज ऑफ डूइंग बिज़नेस, लेबर रिफॉर्म और डिजिटल पब्लिक इंफ्रा (UPI आदि) जैसे एजेंडा को सफलता पूर्वक पेश कर रहे हैं, जिससे विदेशी निवेशकों का भारत पर भरोसा बढ़ता है। उनकी कोशिशों से भारत के राज्यों को भी भरपूर लाभ मिलने वाले हैं। उदाहरण के तौर पर प्रधानमंत्री के निर्वाचन क्षेत्र राज्य उत्तर प्रदेश जैसे राज्य अपने इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट, डिफेंस कॉरिडोर, डेटा सेंटर व मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर को ग्लोबल प्लेयर्स के सामने रख कर अलग से निवेश आकर्षित कर रहे हैं, जिससे क्षेत्रीय स्तर पर इंडस्ट्रियलाइजेशन की संभावनाएं बढ़ती हैं। वहां देखा गया कि दावोस का “इंडिया पवेलियन” अब डील‑मेकिंग का हब बन चुका है, जहाँ राज्य सरकारें और केंद्र सरकार संयुक्त रूप से “टीम इंडिया” के रूप में प्रेज़ेंट हो रही हैं। इससे दुनिया को स्पष्ट संदेश जाता है कि भारत में नीतिगत स्थिरता और कोऑर्डिनेशन की स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर है। आर्थिक विश्लेषकों का कहना है कि भले ही दावोस से सीधे सीधे किसी को सब्सिडी या स्कीम नहीं मिलती है, लेकिन वहां तय हुए निवेश, व्यापार समझौते, और पॉलिसी भरोसे का असर मीडियम टर्म में नौकरियों, इंडस्ट्रियल प्रोजेक्ट, बेहतर इन्फ्रास्ट्रक्चर और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर के रूप में स्पष्ट दिखता है। यहां पर यदि भारत निवेश का भरोसेमंद सेंटर बनता प्रतीत होता है तो मैन्युफैक्चरिंग/ग्रीन एनर्जी/डिजिटल सेक्टर में बड़े प्रोजेक्ट आते हैं, जिसका असर वेतन, लोकल इकोनॉमी, टैक्स रेवेन्यू और कल्याणकारी व्यय पर पड़ेगा, जो अंततः आम नागरिक तक पहुँचेगा। यही वजह है कि दावोस की हालिया विश्व आर्थिक मंच (WEF) 2026 बैठक में भारत ने निवेश आकर्षण और आत्मनिर्भरता पर केंद्रित प्रमुख पहलों की घोषणा की, जिसमें निजी क्षेत्र की बड़ी योजनाएं शामिल रहीं। ये घोषणाएं महाराष्ट्र, असम और झारखंड जैसे राज्यों में ऊर्जा, मैन्युफैक्चरिंग और डिजिटल इंफ्रा पर फोकस करती हैं। यदि उपलब्धियों की बात करें तो अडानी ग्रुप ने एविएशन, क्लीन एनर्जी, डिजिटल इंफ्रा और एडवांस मैन्युफैक्चरिंग में 6 लाख करोड़ रुपये (लगभग 6.6 बिलियन डॉलर) के निवेश का ऐलान किया। इसमें असम में 2700 मेगावाट सौर क्षमता, महाराष्ट्र में धारावी पुनर्विकास, नवी मुंबई एयरपोर्ट लॉजिस्टिक्स, 3000 मेगावाट ग्रीन डेटा सेंटर, 8700 मेगावाट पंप्ड स्टोरेज और सेमीकंडक्टर फैब शामिल हैं। यह 7-10 वर्षों का प्लान रोजगार सृजन और ऊर्जा संक्रमण को बढ़ावा देगा। वहीं, झारखंड में टाटा स्टील ने ग्रीन स्टील प्रोजेक्ट्स के लिए 11,000 करोड़ रुपये निवेश की प्रतिबद्धता जताई जबकि महाराष्ट्र ने रायगढ़-पेण ग्रोथ सेंटर की घोषणा की, जो 1 लाख करोड़ के निवेश का केंद्र बनेगा। देखा जाए तो दावोस में वैश्विक साझेदारियां मजबूत हुईं हैं। यहीं पर भारत-यूरोपीय संघ के बीच व्यापार समझौते पर सकारात्मक प्रगति हुई, जिसे ईयू प्रमुख ने “मदर ऑफ ऑल डील्स” कहा। वहीं, केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने एआई (AI) समिट होस्ट करने की घोषणा की जो भारत के वैश्विक तकनीकी नेतृत्व को मजबूत करेगी। वहीं ये पहलें भारत को मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में स्थापित करने पर जोर देती हैं। कुलमिलाकर दावोस बैठक से भारत को प्राप्त निवेश प्रतिबद्धताएँ निम्नलिखित हैं जो मुख्य रूप से मैन्युफैक्चरिंग, हरित ऊर्जा, डेटा सेंटर और डिजिटल इकोनॉमी पर केंद्रित हैं, जो लाखों नौकरियाँ पैदा करने की क्षमता रखती हैं। इनसे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के माध्यम से 5-10 लाख नौकरियाँ बनने का अनुमान है, खासकर उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र जैसे बड़े व अहम राज्यों में। पिछले दावोस चक्रों के आधार पर 20 लाख करोड़ रुपये के निवेश से औसतन 5-8 लाख प्रत्यक्ष नौकरियाँ (फैक्ट्री वर्कर, इंजीनियर) और दोगुने अप्रत्यक्ष रोजगार (लॉजिस्टिक्स, सर्विसेज) उत्पन्न होते हैं। हरित ऊर्जा व डेटा सेंटर प्रोजेक्ट्स से विशेष रूप से 2-3 लाख हाई-स्किल्ड जॉब्स (टेक्नीशियन, एनालिस्ट) बनेंगी। पहला, मैन्युफैक्चरिंग: फैक्ट्री ऑपरेटर, स्किल्ड वेल्डर, क्वालिटी कंट्रोलर- 3 लाख+ जॉब्स, मुख्यतः स्किल्ड/सेमी-स्किल्ड श्रमिक। दूसरा, हरित ऊर्जा: सोलर इंस्टॉलर, विंड टरबाइन टेक्नीशियन, प्रोजेक्ट मैनेजर – 1-2 लाख जॉब्स, फोकस इंजीनियरिंग व सस्टेनेबिलिटी स्किल्स पर। तीसरा, डेटा सेंटर/डिजिटल: सर्वर एडमिन, डेटा एनालिस्ट, साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट– 1 लाख+ हाई-पे जॉब्स, आईटी/सॉफ्टवेयर बैकग्राउंड वालों के लिए। जहां तक इसके क्षेत्रीय प्रभाव की बात है तो उत्तर प्रदेश के डिफेंस कॉरिडोर व डेटा सेंटर से स्थानीय स्तर पर 2 लाख+ जॉब्स, जिसमें 40% महिलाओं/युवाओं के लिए आरक्षित हो सकती हैं। वहीं, महाराष्ट्र व गुजरात जैसे राज्य इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग से अतिरिक्त 1-2 लाख रोजगार जोड़ेंगे। इन जॉब्स में 60% स्किल्ड (ITI/डिप्लोमा) की जरूरत होगी, इसलिए ITI व अप्रेंटिसशिप ट्रेनिंग पर फोकस बढ़ेगा। देरी से बचने के लिए एमओयू लागू करने पर सबकुछ निर्भर करेगा अन्यथा सिर्फ 50-70% ही मटेरियलाइज होंगी। कमलेश पांडेय Read more » भारतीय ट्रेड कूटनीति
लेख विश्ववार्ता अमेरिकी चक्रव्यूह में फंसे ईरान को तारणहार की तलाश! January 16, 2026 / January 16, 2026 | Leave a Comment कमलेश पांडेय खाड़ी देश ईरान में बढ़ते जनअसंतोष से अमेरिका-इजरायल के पौ बारह हो चुके हैं। जिस तरह से अमेरिका ने इस जनअसंतोष को हवा दी, उससे तो यही प्रतीत होता है कि देर सबेर ईरान को घुटने टेकने ही पड़ेंगे या फिर चीन-रूस-तुर्किये के अलावा इस्लामिक देशों का साथ लेकर उसे अपने अस्तित्व की […] Read more » ईरान को तारणहार की तलाश
लेख भारत रत्न के बनते ‘खुदरा बाजार’ से उठते सियासी सवाल? January 14, 2026 / January 14, 2026 | Leave a Comment बता दें कि 1980 में कांग्रेस सरकार ने पुनः इस सर्वोच्च नागरिक सम्मान को प्रारम्भ किया। आमतौर पर इसे गणतंत्र दिवस (26 जनवरी) पर राष्ट्रपति द्वारा प्रदान किया जाता है जिसमें पदक और प्रमाण पत्र दिए जाते हैं। प्रति वर्ष अधिकतम तीन व्यक्तियों तक सीमित रहता है हालांकि कभी-कभी इससे अधिक घोषित होते हैं। Read more » 'भारत रत्न' दिलवाने की होड़
विश्ववार्ता अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप की कथनी व करनी से बचकर रहें विकासशील देश, समझें वैश्विक मायने January 7, 2026 / January 7, 2026 | Leave a Comment ट्रंप की कथनी और करनी के कुछ प्रमुख उदाहरण इस प्रकार हैं- पहला, ट्रंप ने वेनेजुएला पर बड़े पैमाने पर हमले का दावा किया और राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को पकड़ने की बात कही जो सोशल मीडिया पर साझा की गई। दूसरा, ईरान में विरोध प्रदर्शनों पर उन्होंने "लॉक एंड लोडेड" चेतावनी दी, जो आर्थिक संकट पर केंद्रित था। अब वह कम्बोडिया और ग्रीनलैंड पर कार्रवाई करेंगे। Read more » ट्रंप की कथनी व करनी से बचकर रहें विकासशील देश डॉनल्ड ट्रंप की कथनी व करनी
विश्ववार्ता क्या अयातुल्लाह खुमैनी सरकार ईरान में सुलग रही जेन जेड क्रांति से कुछ सबक लेगी या शहादत देगी? January 2, 2026 / January 2, 2026 | Leave a Comment शिया मुस्लिम बहुल देश ईरान में 'तानाशाह तेरी कब्र खुदेगी' और 'मुल्लाओं को देश छोड़ना होगा' जैसे नारे लगना हैरत की बात है, क्योंकि कोई सच्चा मुसलमान अयातुल्लाह खुमैनी जैसे मुल्ला शासकों और उनके वतन परस्त हमकदम मुल्लाओं का विरोध क्यों करेगा? खासकर उस अयातुल्लाह खुमैनी का जो पूरी दुनिया में इस्लामिक बादशाहत स्थापित करने का स्वप्नद्रष्टा समझे जाते हैं। Read more » Will Ayatollah Khomeini's government learn some lessons from the Gen Z revolution simmering in Iran or will it sacrifice itself for martyrdom अयातुल्लाह खुमैनी
राजनीति कांग्रेस की कमियों को छिपाने के लिए आरएसएस को अलकायदा जैसा बताना सिर्फ अनर्गल प्रलाप! December 30, 2025 / December 30, 2025 | Leave a Comment स्पष्ट है कि अपने ही दिग्गज नेता द्वारा कांग्रेस की कमियों को दुरुस्त करने की जरूरत बताने के बाद उसे छिपाने के लिए आरएसएस को अलकायदा जैसा बताना मानसिक व सियासी दिवालियापन तो है ही, एक अनर्गल प्रलाप भी है। Read more » calling RSS like Al Qaeda is just baseless nonsense To hide the shortcomings of Congress आरएसएस अलकायदा जैसा