धर्म-अध्यात्म धर्म का स्वरूप: सेवा या स्वार्थ? January 2, 2026 / January 2, 2026 | Leave a Comment आज का यथार्थ यह है कि धार्मिक परंपराओं का एक बड़ा हिस्सा अपने मूल उद्देश्य से भटक चुका है। जिन कर्मकांडों का उद्देश्य मनुष्य को आत्मिक संतुलन देना था, वे अब आर्थिक लेन-देन और दिखावे से जुड़ गए हैं। तीर्थस्थल, जो कभी तप, त्याग और साधना के केंद्र हुआ करते थे, आज कई बार बाजार का रूप धारण कर चुके हैं। श्रद्धालु की भावना से अधिक उसकी आर्थिक स्थिति को महत्व दिया जाने लगा है। Read more » धर्म का स्वरूप
कविता बेक़द्र December 22, 2025 / December 22, 2025 | Leave a Comment बेक़द्रों के हाथ अगर चाँद भी लग जाए, वो उसको भी ग्रहण लगाने का हुनर रखते हैं। Read more » बेक़द्र
राजनीति संसद का अवरुद्ध स्वर और लोकतंत्र की कसौटी December 18, 2025 / December 18, 2025 | Leave a Comment संसद में व्यवधान कोई नया विषय नहीं है। विरोध, असहमति और सरकार को जवाबदेह ठहराने के लिए प्रतिपक्ष की भूमिका लोकतंत्र में अनिवार्य है। किंतु जब विरोध का प्रमुख औजार निरंतर हंगामा, नारेबाजी और कार्यवाही ठप करना बन जाए, तब यह प्रश्न उठता है कि क्या संसद अपने मूल उद्देश्य को पूरा कर पा रही है। Read more » लोकतंत्र की कसौटी
लेख हांसी : इतिहास के केंद्र से हाशिये तक और फिर जिले की दहलीज़ पर December 18, 2025 / December 18, 2025 | Leave a Comment अंग्रेजों के भारत आगमन से बहुत पहले हांसी का गौरव अपने चरम पर था। जॉर्ज थॉमस के दौर में हांसी हरियाणा क्षेत्र की राजधानी के रूप में स्थापित थी। उस समय यह नगर दिल्ली परगना के अधीन उत्तरी भारत के प्रमुख व्यापारिक केंद्रों में शामिल था। Read more » Hansi Hansi: From the centre of history to the margins and then to the district's threshold
विधि-कानून समाज आतंक पर निर्णायक सख़्ती ज़रूरी December 18, 2025 / December 18, 2025 | Leave a Comment यह स्वीकार करना होगा कि आतंकवाद अब पुरानी सीमाओं से निकलकर नई तकनीकी दुनिया में प्रवेश कर चुका है। पहले जहाँ उसका संबंध बंदूक, प्रशिक्षण शिविर और सीमा पार से आने वाले गुरिल्ला नेटवर्क से होता था, वहीं अब उसका संचालन सोशल मीडिया, डार्क वेब, एन्क्रिप्टेड चैट, क्रिप्टो करेंसी और फर्जी पहचान के माध्यम से हो रहा है। Read more » Decisive action against terrorism is necessary आतंक पर निर्णायक सख़्ती
मनोरंजन बाल-सुरक्षा और तकनीकी समाधानवाद : डिजिटल युग में सामाजिक माध्यमों पर प्रतिबंध का विमर्श December 16, 2025 / December 16, 2025 | Leave a Comment डिजिटल युग में बच्चों और किशोरों का जीवन केवल भौतिक संसार तक सीमित नहीं रह गया है। सामाजिक माध्यम, ऑनलाइन मंच और आभासी समुदाय आज उनके सीखने, Read more » डिजिटल माध्यमों पर प्रतिबंध डिजिटल माध्यमों पर प्रतिबंध का विमर्श
समाज बाहरी दुनिया की चकाचौंध के बीच भीतरी संसार को सँभालना ही जीवन का सबसे बड़ा संतुलन December 14, 2025 / December 17, 2025 | Leave a Comment जीवन की दिशा तभी स्पष्ट होती है जब मन के भीतर शांति हो। लक्ष्यहीन भटकाव केवल थकाता है, प्रेरित नहीं करता। आत्मिक यात्रा के लिए एकांत वह दीपक है जो मन की गहराइयों को रोशन करता है। Read more » जीवन का सबसे बड़ा संतुलन
लेख समाज सार्थक पहल राइट टू डिसकनेक्ट बिल 2025: ‘हमेशा उपलब्ध रहने’ की संस्कृति पर एक जरूरी बहस December 8, 2025 / December 8, 2025 | Leave a Comment सांसद सुप्रिया सुले द्वारा लोकसभा में पेश किया गया ‘राइट टू डिसकनेक्ट बिल 2025’ देश के करोड़ों कर्मचारियों के लिए आशा की किरण लेकर आया है। यह बिल कहता है कि ऑफिस समय के बाद कोई भी कर्मचारी अपने बॉस, मैनेजर या संस्थान के कॉल, ईमेल, मैसेज या किसी डिजिटल निर्देश का जवाब देने के लिए बाध्य नहीं होगा। Read more » Parliament and the Right to Disconnect Bill 2025: A wall of noise amidst an urgent debate on fatigue राइट टू डिसकनेक्ट बिल 2025
कविता उसूलों के लिए मर जाना…. December 1, 2025 / December 1, 2025 | Leave a Comment धन-दौलत क्या दे पाएगी, जब अंतर्मन ही हार जाए। उसूलों पर जो खड़ा रहे, वो हर तूफ़ाँ पार जाए। Read more » उसूलों के लिए मर जाना….
समाज आईएएस अधिकारी के बच्चे आईएएस नहीं बनना चाहते? November 26, 2025 / November 26, 2025 | Leave a Comment भारत में प्रशासनिक सेवा को लंबे समय से शक्ति, प्रतिष्ठा और राष्ट्र-निर्माण के सर्वोच्च प्रतीकों में गिना जाता रहा है। समाज में आज भी “भारतीय प्रशासनिक सेवा” एक ऐसा नाम है जो सम्मान, Read more »
समाज जब कानून और समाज आमने–सामने खड़े हों November 24, 2025 / November 24, 2025 | Leave a Comment स्वतंत्रता और परंपरा—दोनों अपने-अपने स्थान पर सही, पर जब टकराते हैं तो सबसे पहले टूटता है एक सामान्य परिवार। कानून अपना काम करता है, समाज अपनी जिद पर अड़ा रहता है, और बीच में पिस Read more » कानून और समाज
आर्थिकी स्थानीय मुद्रा निपटान प्रणाली और भारतीय रिज़र्व बैंक की नई पहलें November 21, 2025 / November 24, 2025 | Leave a Comment रुपये का अंतरराष्ट्रीयकरण भारत को आर्थिक स्वायत्तता, भुगतान सुरक्षा और रणनीतिक स्वतंत्रता प्रदान करता है। इससे डॉलर पर निर्भरता घटती है, भुगतान बाधाएँ कम होती हैं और विदेशी मुद्रा भंडार पर Read more » — Local Currency Settlement System and New Initiatives of Reserve Bank of India Local Currency Settlement System स्थानीय मुद्रा निपटान प्रणाली