लेख जनरेशन-जी से लेकर जनरेशन अल्फा तक : बदलती दुनिया, बदलते बच्चे September 15, 2025 / September 15, 2025 | Leave a Comment “समय के साथ बदलती पीढ़ियाँ और उनका समाज पर असर” समय और समाज के बदलते माहौल के साथ हर पीढ़ी की सोच, जीवनशैली और चुनौतियाँ बदलती हैं। ग्रेटेस्ट जनरेशन और साइलेंट जनरेशन ने युद्ध और कठिनाई का सामना किया। बेबी बूमर्स ने औद्योगिकीकरण देखा, जेन-एक्स ने तकनीकी शुरुआत अनुभव की, और मिलेनियल्स ने इंटरनेट और […] Read more » जनरेशन-जी से लेकर जनरेशन अल्फा तक जनरेशन-जी से लेकर जनरेशन अल्फा तक : बदलती दुनिया जनरेशन-जी से लेकर जनरेशन अल्फा तकबदलते बच्चे
मनोरंजन विश्ववार्ता नेपाल का ऑनलाइन लॉकडाउन: आज़ादी पर सवाल September 9, 2025 / September 9, 2025 | Leave a Comment सोशल मीडिया पर नेपाल का बड़ा ताला: लोगों की आवाज़ पर रोक या नियमों की ज़रूरत? नेपाल सरकार ने 26 बड़े सोशल मीडिया और संदेश भेजने वाले मंच—जिनमें फेसबुक, व्हाट्सएप, इंस्टाग्राम, यूट्यूब और एक्स (पहले ट्विटर) शामिल हैं—को देश में बंद करने का आदेश दिया है। सरकार का तर्क है कि कंपनियों ने स्थानीय कार्यालय […] Read more » A question mark on freedom in Nepal by banning of social media Nepal's online lockdown
लेख किताबों से स्क्रीन तक: बदलते समय में गुरु का असली अर्थ September 4, 2025 / September 4, 2025 | Leave a Comment शिक्षक दिवस विशेष (ज्ञान के साथ संस्कार और संवेदनशीलता ही शिक्षक की सबसे बड़ी पहचान है) डिजिटल युग में शिक्षा का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। किताब से लेकर स्क्रीन तक की यह यात्रा ज्ञान तो दे रही है, लेकिन संस्कार और मानवीय मूल्य पीछे छूटते जा रहे हैं। ऐसे समय में शिक्षक का […] Read more » From books to screens: The true meaning of Guru in changing times किताबों से स्क्रीन तक
लेख पंजाब में बाढ़ आखिर क्यों – क्या प्रकृति रुष्ट है? September 1, 2025 / September 1, 2025 | Leave a Comment “प्रकृति चेतावनी देती है, रुष्ट नहीं होती – असली वजह इंसानी लापरवाही और असंतुलित विकास” पंजाब में बाढ़ को केवल प्राकृतिक आपदा कहना सही नहीं होगा। नदियों का स्वरूप, असामान्य बारिश और जलवायु परिवर्तन तो कारण हैं ही, लेकिन असली दोषी अनियोजित निर्माण, अवैध खनन, ड्रेनेज की उपेक्षा और धान-प्रधान कृषि पद्धति भी है। प्रकृति […] Read more » Why is there flood in Punjab – पंजाब में बाढ़ आखिर क्यों
लेख अर्धनग्न मुजरे के दौर में गुम होती साहित्यिक स्त्रियाँ August 27, 2025 / August 28, 2025 | Leave a Comment “सोशल मीडिया की चमक-दमक के शोर में किताबों का स्वर कहीं खो गया है।” इंस्टाग्राम और डिजिटल मीडिया का दौर है। यहाँ आकर्षण और तमाशा सबसे ज्यादा बिकते हैं। लेकिन समाज की आत्मा को बचाए रखने के लिए जरूरी है कि स्त्रियाँ फिर से साहित्य की ओर लौटें। इंस्टाग्राम का शोर कुछ समय बाद थम […] Read more » सोशल मीडिया की चमक-दमक के शोर में किताबों का स्वर
राजनीति समर्पण, सेवा और संगठन की सौ वर्षीय यात्रा से विश्वगुरु भारत की ओर August 27, 2025 / August 28, 2025 | Leave a Comment राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के 100 वर्ष : उपलब्धियाँ और नये क्षितिज” राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के 100 वर्ष केवल इतिहास की उपलब्धियाँ नहीं, बल्कि भविष्य की दिशा का संकल्प हैं। संघ का उद्देश्य है परिवार को सुदृढ़ करना, पर्यावरण का संरक्षण करना, समाज में समरसता लाना, स्वदेशी और आत्मनिर्भरता को अपनाना तथा नागरिक कर्तव्यों का पालन […] Read more » राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के 100 वर्ष
महिला-जगत लेख लड़की की मौत और हमारी घातक धारणाएँ August 27, 2025 / August 27, 2025 | Leave a Comment “हर लापता बेटी के साथ हमारी सोच की परीक्षा होती है — अफ़वाह नहीं, संवेदनशीलता ज़रूरी है” हर लापता लड़की के साथ हमारी संवेदनशीलता और सिस्टम की परीक्षा होती है। अफ़वाहें, ताने और लापरवाह पुलिस जाँच अपराधियों के लिए सबसे बड़ी मददगार बन जाती हैं। जब तक पुलिस हर गुमशुदगी को गंभीर अपराध मानकर तुरंत […] Read more » लड़की की मौत और हमारी घातक धारणाएँ
लेख छात्र किस दिशा में जा रहे हैं? August 25, 2025 / August 25, 2025 | Leave a Comment “शिक्षा, संस्कार और समाज की जिम्मेदारी : बदलते छात्र-शिक्षक संबंध और सही दिशा की तलाश” आज शिक्षा केवल अंक और नौकरी तक सीमित हो गई है। नैतिक मूल्य और संस्कार बच्चों की प्राथमिकता से गायब होते जा रहे हैं। परिणामस्वरूप शिक्षक-छात्र संबंधों में खटास बढ़ रही है और अनुशासनहीनता सामने आ रही है। यदि परिवार, […] Read more » बदलते छात्र-शिक्षक संबंध
मनोरंजन इतिहास की सीख छोड़ फ्रेम में उलझा युवा वर्ग August 23, 2025 / August 23, 2025 | Leave a Comment (संघर्ष की गाथा भूली, तस्वीरों की दुनिया में खोया युवा) आज की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि युवा वर्ग केवल फ्रेम और क्लिक की दुनिया में सिमटकर न रह जाए। क्षणभंगुर छवियाँ उसे आकर्षित करती हैं, परंतु इतिहास और साहित्य ही स्थायी आत्मबल देते हैं। फ्रेम से मिली चमक पल भर की है, लेकिन […] Read more » युवा वर्ग केवल फ्रेम और क्लिक की दुनिया में सिमटकर न रह जाए
लेख विधि-कानून जब न्याय के प्रहरी ही अपराधी बन जाएँ, तो कानून की आस्था कैसे बचे? August 23, 2025 / August 23, 2025 | Leave a Comment झूठे मुकदमे केवल निर्दोषों को पीड़ा नहीं देते, बल्कि न्याय तंत्र की नींव को भी हिला देते हैं। जब वकील ही इस व्यापार में शामिल होते हैं तो वकालत की गरिमा और न्यायपालिका की विश्वसनीयता दोनों पर गहरा आघात होता है। ऐसे वकीलों पर आपराधिक मुकदमे चलना अनिवार्य है ताकि कानून का दुरुपयोग रोका जा […] Read more » झूठे मुकदमे
लेख शहर, कुत्ते और हमारी ज़िम्मेदारी August 16, 2025 / August 16, 2025 | Leave a Comment “पॉटी उठाना शर्म नहीं, संस्कार है, शहर की सड़कों पर पॉटी नहीं, जिम्मेदारी चाहिए” भारत में पालतू कुत्तों की संख्या 2023 में लगभग 3.2 करोड़ आंकी गई, और यह हर साल 12-15% की दर से बढ़ रही है। लेकिन साफ़-सफ़ाई और सार्वजनिक शिष्टाचार पर आधारित पालतू नीति केवल गिने-चुने शहरों में ही लागू है। विश्व […] Read more » Cities dogs and our responsibility कुत्ते और हमारी ज़िम्मेदारी
लेख स्वतंत्रता का अधूरा आलाप August 12, 2025 / August 12, 2025 | Leave a Comment “आज़ादी केवल तिथि नहीं, एक निरंतर संघर्ष है। यह सिर्फ़ झंडा फहराने का अधिकार नहीं, बल्कि हर नागरिक को समान अवसर और सम्मान देने की जिम्मेदारी है। जब तक यह जिम्मेदारी पूरी नहीं होती, हमारी स्वतंत्रता अधूरी है।” — डॉ. प्रियंका सौरभ 15 अगस्त 1947 को हमने विदेशी शासन की बेड़ियों को तोड़ दिया था। […] Read more » Incomplete dialogue of freedom स्वतंत्रता