आर्थिकी भारत में एक नए उत्तरदायी राष्ट्र सूचकांक का निर्माण हुआ है January 27, 2026 / January 27, 2026 | Leave a Comment हिंदू सनातन संस्कृति के संस्कारों में समाज के प्रति अपने उत्तरदायित्व के निर्वहन के लिए नागरिकों को जागरूक किए जाने का प्रयास लगातार किया जाता रहा है और पश्चिमी सभ्यता के आधार पर केवल अधिकार के भाव को बढ़ावा नहीं दिया जाता है। हिंदू वेदों एवं पुराणों के अनुसार प्रत्येक राजा का यह प्रथम कर्तव्य है कि वह अपने राज्य में निवास कर रहे नागरिकों की समस्याओं को दूर करने का भरसक प्रयास करे ताकि उसके राज्य में नागरिक सुख शांति से प्रसन्नता पूर्वक निवास कर सकें। पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी ने “एकात्म मानववाद” के सिद्धांत को विकसित किया था। यह एक ऐसा सिद्धांत है जो व्यक्ति एवं समाज के बीच एक संतुलित सम्बंध स्थापित करने पर जोर देता है। एकात्म मानववाद का उद्देश्य प्रत्येक मानव को गरिमापूर्ण जीवन प्रदान करना है एवं अंत्योदय अर्थात समाज के निचले स्तर पर स्थित व्यक्ति के जीवन में सुधार करना है। विशेष रूप से भारत में आज के परिप्रेक्ष्य में इस सिद्धांत का आश्य यह भी है कि सरकारी योजनाओं का लाभ समाज में अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति तक पहुंचाने का लक्ष्य प्रत्येक राजनीतिक दल का होना चाहिए। परंतु, आज की पश्चिमी सभ्यता, जो पूंजीवाद पर आधारित नीतियों पर चलती हुई दिखाई देती है, के अनुसरण में मानव केवल अपने हितों का ध्यान रखता हुआ दिखाई देता हैं एवं अपना केवल भौतिक (आर्थिक) विकास करने हेतु प्रयासरत रहता है और उसमें अपने परिवार एवं समाज के प्रति जिम्मेदारी के भाव का पूर्णत: अभाव दिखाई देता है। अतः विश्व के समस्त देशों द्वारा अपने नागरिकों एवं समाज के प्रति उत्तरदायित्व के निर्वहन को आंकने के उद्देश्य से भारत में उत्तरदायी राष्ट्र सूचकांक का निर्माण किया गया है। नई दिल्ली में दिनांक 20 जनवरी 2026 को उत्तरदायी राष्ट्र सूचकांक (Responsible Nations Index) का लोकार्पण किया गया। यह पहल देशों का मूल्यांकन केवल शक्ति अथवा समृद्धि से नहीं, बल्कि नागरिकों, पर्यावरण एवं वैश्विक समुदाय के प्रति उनके उत्तरदायित्व के निर्वहन के आधार पर करने का एक महत्वपूर्ण प्रयास है। 21वीं सदी के लिए यह विमर्श समयोचित और आवश्यक है। उत्तरदायी राष्ट्र सूचकांक को पूर्व राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविंद ने डॉक्टर अम्बेडकर अंतरराष्ट्रीय केंद्र, नई दिल्ली में आयोजित एक भव्य कार्यक्रम में राष्ट्र को समर्पित किया। वैश्विक स्तर पर इस प्रकार का सूचकांक पहली बार बनाया गया है और इसे बनाने में भारत के ही विभिन्न संस्थानों ने अपना योगदान दिया है। इस सूचकांक के माध्यम से यह आंकने का प्रयास किया गया है कि विभिन्न देशों द्वारा अपने नागरिकों के हित में अपने अधिकारों का उत्तरदायित्वपूर्ण प्रयोग किस प्रकार किया जा रहा है (आंतरिक उत्तरदायित्व का निर्वहन), वैश्विक समुदाय के प्रति अपने उत्तरदायित्व का निर्वहन किस प्रकार किया जा रहा है (बाह्य उत्तरदायित्व का निर्वहन) एवं पर्यावरण को बचाने के लिए अपने उत्तरदायित्व का निर्वहन किस प्रकार किया जा रहा है (पर्यावरण उत्तरदायित्व का निर्वहन)। उत्तरदायी राष्ट्र सूचकांक 7 आयाम, 15 दृष्टिकोण एवं 58 संकेतकों को शामिल करते हुए निर्मित किया गया है। विश्व के 154 देशों का इस सूचकांक के आधार पर मूल्यांकन किया गया है। सिंगापुर को इस सूचकांक की रैकिंग में प्रथम स्थान प्राप्त हुआ है, इसके बाद स्विजरलैंड द्वितीय स्थान पर, डेनमार्क तृतीय स्थान पर, साइप्रस चौथे स्थान पर रहे हैं। भारत को 16वां स्थान प्राप्त हुआ है। विश्व के शक्तिशाली देशों का स्थान उत्तरदायी राष्ट्र सूचकांक की सूची में बहुत निचले स्तर पर पाया गया है। अमेरिका 66वें स्थान पर रहा है, जो लिबिया से भी एक पायदान नीचे है। जापान 38वें स्थान पर रहा है। पाकिस्तान 90वें स्थान पर, चीन 68वें स्थान पर एवं अफगानिस्तान 145वें स्थान पर रहा है। उत्तरदायी राष्ट्र सूचकांक का निर्माण मुख्य रूप से भारतीय प्रबंधन संस्थान (IIM), मुंबई एवं जवाहरलाल नेहरु विश्वविद्यालय, दिल्ली ने मिलकर किया है। इस सूचकांक के निर्माण में 3 वर्षों तक लगातार कार्य किया गया है एवं उत्तरदायी राष्ट्र सूचकांक के निर्माण में विश्व बुद्धिजीवी प्रतिष्ठान का भी सहयोग लिया गया है। उक्त सूचकांक के निर्माण के लिए कुल 154 देशों से विभिन्न मापदंडों पर आधारित वर्ष 2023 तक के सम्बंधित आंकडें इक्ट्ठे किये गए है एवं इन आंकड़ों एवं जानकारी का विश्लेषण करने के उपरांत इस सूचकांक का निर्माण किया गया है। यह आंकड़े एवं जानकारी विश्व बैंक, संयुक्त राष्ट्र संघ, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष, विश्व स्वास्थ्य संगठन एवं खाद्य एवं कृषि संस्थान जैसे अंतरराष्ट्रीय संस्थानों से लिए गए है। आज पूरे विश्व में विभिन्न देशों की आर्थिक प्रगति को सकल घरेलू उत्पाद में वृद्धि दर से आंका जाता है, यह मॉडल पूंजीवाद पर आधारित है एवं इस मॉडल के अनुसार देश में कृषि, उद्योग एवं सेवा क्षेत्रों में हुए उत्पादन को जोड़कर सकल घरेलू उत्पाद का आंकलन किया जाता है। इस मॉडल में कई प्रकार की कमियां पाई जा रही है। किसी भी देश में पनप रही आर्थिक असमानता, गरीबी रेखा से नीचे जीवन जी रहे नागरिकों की आर्थिक प्रगति, मुद्रा स्फीति, बेरोजगारी एवं वित्तीय समावेशन जैसे विषयों पर उक्त मॉडल के अंतर्गत विचार ही नहीं किया जाता है। अमेरिका सहित विश्व के कई देशों में अब यह मांग की जा रही है कि आर्थिक प्रगति को आंकने के लिए सकल घरेलू उत्पाद में वृद्धि सम्बंधी मॉडल के स्थान पर एक नए मॉडल का निर्माण किया जाना चाहिए। भारतीय सनातन संस्कृति के अनुसार, किसी भी राष्ट्र में आर्थिक प्रगति तभी सफल मानी जाएगी जब पंक्ति में अंतिम पायदान पर खड़े नागरिक को भी समाज हित में बनाई जा रही आर्थिक नीतियों का लाभ पहुंचे। वर्तमान में, सकल घरेलू उत्पाद के अनुसार आर्थिक प्रगति आंकने के मॉडल में इस प्रकार की व्यवस्था नहीं है इसीलिए कई देशों में गरीब और अधिक गरीब हो रहे है तथा अमीर और अधिक अमीर हो रहे है। नए विकसित किए गए उत्तरदायी राष्ट्र सूचकांक में यह आंकने का प्रयास किया गया है कि शासन प्रणाली किस प्रकार से नैतिक धारणाओं को ध्यान में रखकर अपनी आर्थिक नीतियों का निर्माण कर रही है, राष्ट्र में समावेशी विकास हो रहा है अथवा नहीं एवं राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपने दायित्वों के निर्वहन के संदर्भ में सरकार द्वारा किस प्रकार की नीतियां बनाई जा रही हैं। साथ ही, धर्म आधारित सदाचार सम्बंधी भारतीय सभ्यता एवं वैश्विक सुख शांति स्थापित करने के सम्बंध में किस प्रकार देश की नीतियां निर्धारित की जा रही हैं, इस विषय को भी उत्तरदायी राष्ट्र सूचकांक के निर्माण में स्थान दिया गया है। पश्चिमी देशों की अर्थव्यवस्थाएं आर्थिक प्रगति तो तेज गति से करती दिखाई देती हैं और कई पश्चिमी देश आज विकसित देशों की श्रेणी में शामिल भी हो गए हैं। परंतु, इन देशों में मानवतावादी दृष्टिकोण का पूर्णत: अभाव है। पूंजीवाद पर आधारित अर्थव्यवस्थाओं में केवल “मैं” के भाव को स्थान प्राप्त है। “मैं” किस प्रकार आर्थिक प्रगति करुं, इस “मैं” के भाव में परिवार एवं समाज कहीं पीछे छूट जाता है। इससे पश्चिमी देशों में सामाजिक तानाबाना पूर्णत: छिन्न भिन्न हो रहा है। युवा वर्ग अपने माना पिता की देखभाल करने के लिए तैयार ही नहीं हैं। आज अमेरिका में लगभग 6 लाख बुजुर्ग खुले आसमान के नीचे अपना जीवन यापन करने को मजबूर हैं क्योंकि उनके बच्चे उन्हें अकेला छोड़कर केवल अपना आर्थिक विकास करने में संलग्न हैं। इसी प्रकार की कई सामाजिक कुरीतियों ने पश्चिमी देशों में अपने पैर पसार लिए हैं। पश्चिमी सभ्यता के ठीक विपरीत, भारतीय संस्कृति में “मैं” के स्थान पर “हम” के भाव को प्रभावशाली स्थान प्राप्त है। भारतीय सनातन संस्कृति पर आधारित संस्कारों को ध्यान में रखकर ही विभिन्न देशों द्वारा अपने नागरिकों के प्रति उनके उत्तरदायित्व को आंकने का प्रयास उत्तरदायी राष्ट्र सूचकांक के माध्यम से किया गया है। संक्षेप में एक बार पुनः यह बात दोहराई जा सकती है कि उत्तरदायी राष्ट्र सूचकांक विविध देशों का आंकलन पारम्परिक शक्ति अथवा सकल घरेलू उत्पाद केंद्रित मानकों के बजाय उत्तरदायी शासन के आधार पर करता है। यह सूचकांक तीन मूल आयामों पर आधारित है – (1) आंतरिक उत्तरदायित्व अर्थात गरिमा, न्याय और नागरिक कल्याण का आंकलन करता है। (2) पर्यावरणीय उत्तरदायित्व अर्थात प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और जलवायु कार्यवाही का मूल्यांकन करता है। (3) बाह्य अत्तरदायित्व अर्थात शांति, बहुपक्षीय सहयोग और वैश्विक स्थिरता में किसी देश के योगदान को मापता है। यह सूचकांक वैश्विक आंकलन को आर्थिक एवं सैन्य शक्ति के पारम्परिक मानकों से पृथक कर नैतिक शासन, सामाजिक कल्याण, पर्यावरणीय संरक्षण और अंतरराष्ट्रीय उत्तरदायित्व पर केंद्रित करता है। यह सूचकांक मूल्य आधारित और मानव केंद्रित ढांचे को बढ़ावा देता है, जो नैतिक नेतृत्व, सतत विकास और वैश्विक शासन में सुधार सम्बंधी भारत की दृष्टि के अनुरूप है। इस प्रकार भारत ने वैश्विक स्तर पर संभवत: प्रथम सूचकांक जारी किया है। यदि वैश्विक स्तर पर कई देश इस सूचकांक के आधार पर अपने देश के नागरिकों के प्रति अपने उत्तरदायित्व के निर्वहन के आंकलन पर ध्यान देने का प्रयास करेंगे तो निश्चित ही उत्तरदायी राष्ट्र सूचकांक पूरे विश्व में एक क्रांतिकारी सूचकांक के रूप में स्थापित होगा। प्रहलाद सबनानी Read more » उत्तरदायी राष्ट्र सूचकांक
आर्थिकी विश्ववार्ता वैश्विक स्तर पर युद्ध के बदलते स्वरूप January 23, 2026 / January 23, 2026 | Leave a Comment 21वीं सदी में शक्ति संघर्ष का स्वरूप बहुत तेजी से बदल रहा है। अब विभिन्न देशों के बीच संघर्ष, तोप, मिसाईल एवं सेनाओं के माध्यम से नहीं लड़े जा रहे हैं बल्कि तकनीकि उपलब्धता, मुद्रा नियंत्रण, पूंजी प्रवाह, खाद्य सुरक्षा, आकड़ों (डेटा) का संग्रहण, नियम निर्माण को प्रभावित करने की क्षमता एवं वैश्विक आपूर्ति शृंखला को प्रभावित करना, आदि में माध्यम से लड़ा जा रहा है। Read more » The changing nature of warfare globally
राजनीति अमेरिका की साम्राज्यवादी सोच के विरुद्ध बन रहे नए समीकरण January 21, 2026 / January 21, 2026 | Leave a Comment अमेरिकी ट्रम्प प्रशासन द्वारा वेनेजुएला के राष्ट्रपति श्री निकोलस मदुरो को रात्रि के समय में गिरफ्तार कर अमेरिका लाकर उन पर मुकदमा चलाया जाना एवं वेनेजुएला के तेल भंडार पर अप्रत्यक्ष रूप से अमेरिका का कब्जा स्थापित करने का प्रयास करना, अमेरिका की साम्राज्यवादी सोच को ही दर्शाता है। Read more »
आर्थिकी अमेरिका की साम्राज्यवादी नीतियां तीसरे विश्वयुद्ध की नींव रख रही हैं January 14, 2026 / January 14, 2026 | Leave a Comment संभवत: अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा अपना निर्णय दिनांक 9 जनवरी 2025 को दिया जा सकता है। यदि अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट का निर्णय ट्रम्प के खिलाफ आता है तो Read more » अमेरिका की साम्राज्यवादी नीतियां
राजनीति सनातन संस्कृति, भारत एवं संघ के विरुद्ध गढ़े जा रहे हैं झूठे विमर्श December 31, 2025 / December 31, 2025 | Leave a Comment भारत पर आक्रांताओं एवं अंग्रेजो के शासनकाल में भी सनातन हिंदू संस्कृति एवं भारतीय संस्कारों पर जो विचार गढ़े गए थे, वे पूर्णत: गलत पाए गए थे। जैसे, सनातन संस्कृति के संस्कार रूढ़िवादी हैं एवं यह विज्ञान के धरातल पर खरे नहीं उतरते हैं, आदि, आदि। उनके द्वारा सनातन संस्कृति के बारे में गढ़े गए विचार पूर्णत: उनके आधे अधूरे ज्ञान पर ही आधारित थे। Read more » भारत एवं संघ के विरुद्ध झूठे विमर्श
राजनीति हिन्दू सम्मेलन भारतीय समाज में दे रहे हैं समरसता के भाव को मजबूती December 30, 2025 / December 30, 2025 | Leave a Comment आज राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने अपनी स्थापना के 100 वर्ष पूर्ण कर लिए हैं और यदि हम संघ की 100 वर्षों की यात्रा पर दृष्टि डालें, तो ध्यान में आता है कि संघ के स्वयसेवकों ने जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में विचार और क्रियाशीलता के स्तर पर सक्रिय योगदान दिया है। वे अनेक क्षेत्रों में परिवर्तन के वाहक भी बने हैं। Read more » हिन्दू सम्मेलन
कला-संस्कृति धर्म-अध्यात्म विश्व में शांति स्थापित करने हेतु भारतीय संस्कृति का उत्थान आवश्यक है December 22, 2025 / December 22, 2025 | Leave a Comment कहा जाता है कि सतयुग में समाज पूर्णत: एकरस था और उस समय के समाज में भारतीय संस्कृति की झलक स्पष्टत: दिखाई देती थी। एक कहानी के माध्यम से इस बात को बहुत आसानी से समझा जा सकता है। सतयुग के खंडकाल में एक किसान ने अपनी जमीन बेची। जिस व्यक्ति ने वह जमीन खरीदी थी Read more » भारतीय संस्कृति का उत्थान
आर्थिकी विकसित देशों के सम्पन्न नागरिक भारत में बसने के बारे में कर रहे हैं गम्भीर विचार December 17, 2025 / December 17, 2025 | Leave a Comment भारत की तेज गति से आगे बढ़ती अर्थव्यवस्था, भारत में तुलनात्मक रूप से सस्ती दरों पर विभिन्न उत्पादों की पर्याप्त उपलब्धता, अति सस्ती दरों पर सेवा भावना के साथ उच्च स्तर की स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता एवं भारत की महान संस्कृति Read more » Affluent citizens of developed countries are seriously considering settling in India भारत में बसने के बारे में गम्भीरता से विचार
आर्थिकी क्यों हो रहा है भारतीय रुपए का अवमूल्यन December 8, 2025 / December 8, 2025 | Leave a Comment माह जनवरी 2025 में भारतीय रुपए का अंतरराष्ट्रीय बाजार में मूल्य 85.79 रुपया प्रति अमेरिकी डॉलर था। 3 दिसम्बर 2025 को रुपए का बाजार मूल्य लगभग 5 प्रतिशत घटकर 90.19 रुपया प्रति डॉलर हो गया। Read more » Why is the Indian Rupee devaluing भारतीय रुपए का अवमूल्यन
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आर्थिकी भारत की आर्थिक विकास दर ने पूरे विश्व को चौंकाया December 2, 2025 / December 2, 2025 | Leave a Comment 26 की द्वितीय तिमाही में भारत के सकल घरेलू उत्पाद में 8.2 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है, जो पिछले वर्ष इसी अवधि में 5.6 प्रतिशत रही थी। विशेष रूप से विनिर्माण एवं सेवा के क्षेत्र में वृद्धि दर अतुलनीय रही है। Read more » India's economic growth rate surprised the entire world. भारत की आर्थिक विकास
आर्थिकी भारत का आर्थिक विकास – सहकारिता से समृद्धि की ओर December 1, 2025 / December 1, 2025 | Leave a Comment भारत एक कृषि प्रधान देश रहा है और हिंदू सनातन संस्कृति के संस्कारों का अनुपालन करते हुए ग्रामीण इलाकों में निवास कर रहे नागरिक आपस में भाई-चारे के साथ मिलजुलकर रहते आए हैं। Read more » सहकारिता से समृद्धि