विश्ववार्ता अमेरिका की नई रक्षा नीति हथियारों की होड़ बढ़ाएगी January 27, 2026 / January 27, 2026 | Leave a Comment डोनाल्ड ट्रंप जब से अमेरिका के राष्ट्रपति बने हैं, वो लगातार अमेरिकी नीतियों में बड़े बदलाव करते जा रहे हैं। ये बदलाव इतने बड़े हैं कि उनके जाने Read more » अमेरिका की नई रक्षा नीति
आर्थिकी मनरेगा में सुधार का विरोध अनावश्यक है January 23, 2026 / January 23, 2026 | Leave a Comment राजेश कुमार पासी मोदी सरकार ने जब से मनरेगा का नाम बदलकर जी रामजी किया है, तब से कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल इसका विरोध कर रहे हैं। इसके विरोध में कांग्रेस ने 45 दिन का विरोध आंदोलन शुरू किया था जो कि अभी भी चल रहा है। तेलंगाना, पंजाब और कर्नाटक की विधानसभा में इसके खिलाफ प्रस्ताव भी पास किया गया है। केरल, बंगाल और तमिलनाडु में भी इसका जबरदस्त विरोध किया जा रहा है। विपक्षी दलों का सबसे पहला विरोध तो मनरेगा का नाम बदलने को लेकर ही है। उनका कहना है कि इस योजना से गाँधीजी का नाम क्यों हटाया गया है। इसके अलावा योजना के स्वरूप में बदलाव का भी विरोध किया जा रहा है जिसमें मोदी सरकार ने योजना को मांग आधारित से बदलकर आपूर्ति आधारित बना दिया है। अब इस योजना पर केंद्र सरकार का नियंत्रण ज्यादा हो गया है. इसके अलावा राज्यों पर भी वित्तीय बोझ डाला गया है। विपक्षी दल इसे राज्यों की स्वायत्तता पर हमला बता रहे हैं और उनका कहना है कि सरकार ने राज्यों पर वित्तीय बोझ लाद दिया है। कुछ राज्यों द्वारा इस योजना को अदालत में भी चुनौती देने की तैयारी की जा रही है। दूसरी तरफ केंद्र सरकार का कहना है कि उसने रोजगार गारंटी को 100 से 125 दिन कर दिया है। पहले इस योजना का सारा खर्च केंद्र सरकार द्वारा वहन किया जाता था, लेकिन अब राज्यों को भी 10-40 फीसदी बोझ सहन करना होगा। केंद्र सरकार का कहना है कि उसने ऐसा इसलिए किया है क्योंकि वो राज्यों की जवाबदेही तय करना चाहती है। केंद्र द्वारा सारा पैसा देने के कारण राज्य योजना पर ध्यान नहीं देते थे। सरकार ने बुवाई/कटाई के 60 दिनों के दौरान रोजगार पर रोक लगा दी है ताकि खेती के लिए मजदूर कम न पड़े। अब इस योजना में हर ग्रामीण परिवार को 125 दिन की वेतन आधारित गारंटी दी गयी है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इस योजना को समग्र ग्रामीण विकास के साथ जोड़ा गया है। अब ये योजना सिर्फ पैसा बांटने तक सीमित नहीं रह गई है बल्कि इससे ग्रामीण इलाकों के विकास कार्यों को जोड़ा गया है। इस योजना के बारे में यह आम धारणा है कि इस योजना में सारे काम कागजों में किए जाते हैं, केंद्र सरकार इस धारणा को तोड़ना चाहती है। केंद्र सरकार चाहती है कि इस योजना के अंतर्गत किये गए कार्य धरातल पर दिखने चाहिए। सच तो यह है कि कागजों में काम होने की धारणा इसलिए बनी है क्योंकि इस योजना में किये गए काम धरातल पर दिखाई नहीं देते हैं । जब से मोदी सरकार सत्ता में आई है, उसकी हर योजना और कार्यो का विरोध करना विपक्षी दलों की आदत हो गई है। अगर मोदी सरकार ने सिर्फ योजना का नाम बदला होता तो कांग्रेस का विरोध जायज ठहराया जा सकता था लेकिन सरकार ने इस योजना में बड़े बदलाव किए हैं । ऐसा लगता है कि सरकार ने जानबूझकर कर योजना के नाम में बदलाव किया है, ताकि योजना की पहचान उसके साथ जुड़ जाए। कांग्रेस यह तो देख रही है कि केंद्र सरकार ने योजना से गांधी जी का नाम हटा दिया है लेकिन वो यह नहीं देख पा रही है कि अब योजना के साथ भगवान राम का नाम जोड़ दिया गया है। सच तो यह है कि भगवान राम ग्रामीण भारत के रग-रग में बसे हुए हैं, इसलिए मोदी सरकार ने इस योजना में राम का नाम जोड़ा है। कांग्रेस और दूसरे विपक्षी दलों को बताना चाहिए कि मोदी सरकार ने जो बदलाव किए हैं, क्या वो नहीं किये जाने चाहिए थे । ये योजना यूपीए सरकार द्वारा शुरू की गई थी, क्या आज कांग्रेस इस योजना में हुए भ्रष्टाचार की जिम्मेदारी ले सकती है। क्या कांग्रेस बता सकती है कि हज़ारो करोड़ रुपये खर्च होने के बावजूद इस योजना में किये गए विकास कार्य धरातल पर क्यों दिखाई नहीं देते। यूपीए सरकार के दौरान इस योजना के कार्यान्वयन में इतनी खामियां थी कि इसमें सुधार जरूरी हो गए थे। मोदी सरकार ने सत्ता में आने के बाद इस योजना में बड़े बदलाव किए थे, क्योंकि भ्रष्टाचार के कारण जनता के पैसे की बर्बादी हो रही थी। इस योजना के बारे में कहा जाता था कि पहले गड्ढे किये जाते हैं और फिर उन्हें भरा जाता है। कुछ समय पहले 55 जिलों में की जांच में 300 करोड़ के घोटाले इस योजना में सामने आए हैं। इससे पता चलता है कि इस योजना का पैसा अनावश्यक कार्यो पर खर्च किया जा रहा था। ग्रामीण विकास मंत्रालय का कहना है कि इस योजना का संचालन ही ऐसा है कि इसमें भ्रष्टाचार होता है। यही कारण है कि इस योजना में किये जाने वाले काम किसी को दिखाई नहीं देते। इस योजना के अंतर्गत किये जाने वाले कामों के निरीक्षण की कोई व्यवस्था नहीं है, जिसके कारण पैसों की बंदरबांट होती है। मोदी सरकार का तो कहना है कि इस योजना में सुधार बहुत पहले किया जाना चाहिए था। इससे सवाल तो मोदी सरकार पर भी उठता है कि उसने इस सुधार के लिए इतना वक्त क्यों लिया । कांग्रेस को बताना चाहिए कि उसने इस योजना में निरीक्षण की व्यवस्था क्यों नहीं की थी जिसके कारण जनता के लाखों करोड़ रुपये खर्च होने के बावजूद किसी की कोई जवाबदेही नहीं है। ये योजना गरीबों के साथ जुड़ी हुई है, क्योंकि इससे उन्हें रोजगार दिया जाता है जिससे उनका घर चलता है। इस योजना का विरोध करने वालों को गरीब विरोधी करार दिया जाता है, शायद इसलिए इसमें सुधार करने में इतनी देर लगाई गई है। कांग्रेस भी यही विमर्श चला रही है कि मोदी सरकार गरीब विरोधी है, इसलिए योजना में बदलाव किया गया है। इस योजना में फर्जीवाड़े की एक खबर सामने आई है कि इस योजना में पंजीकृत पांच लाख मजदूरों की उम्र 80 साल से ज्यादा थी । मनरेगा में इन श्रमिकों से कठिन परिश्रम वाले काम कराए गए थे, जिसमें गड्ढे खोदना, तालाबों, पोखरों और कच्ची सड़कों का निर्माण करना शामिल हैं। 80 साल से ज्यादा उम्र वाले लोगों के लिए फावड़ा उठाकर ये काम करना असम्भव है । इससे साबित होता है कि इन श्रमिकों के नाम पर सरकारी पैसे की लूट की गई है। ग्रामीण विकास मंत्रालय की जांच में सामने आया है कि इनमें से कई लोगों की कार्य क्षमता खत्म हो चुकी थी और कुछ लोगों की तो मृत्यु भी हो चुकी है। देशभर में मनरेगा योजना के अंतर्गत 6.5 करोड़ लोग पंजीकृत है जिसमें से एक करोड़ लोगों की उम्र 61 साल से ज्यादा है। इसका मतलब है कि लगभग 15 प्रतिशत लोग इस लायक नहीं हैं कि उनसे कठिन परिश्रम का काम कराया जा सके । आंध्रप्रदेश, तमिलनाडु, पंजाब, गोआ, पुडुचेरी, लद्धाख,मणिपुर जैसे राज्यों में 61 से 80 साल वाले श्रमिकों की संख्या 20 प्रतिशत से अधिक है। जहां तक 80 साल से ज्यादा उम्र वाले श्रमिकों की बात है तो इसमें आंध्रप्रदेश में 1,22,902, तेलंगाना में 1,22,121, तमिलनाडु में 58,976 और राजस्थान में 36,119 श्रमिक पंजीकृत हैं। वैसे इसमें हैरानी नहीं होनी चाहिये क्योंकि जब इस योजना में मरे हुए लोग काम कर सकते हैं तो 80 साल वाले क्यों नहीं कर सकते। ये हालत तब है, जब मोदी सरकार ने भुगतान को बैंक खातों और आधार से जोड़ दिया है। ऐसे में सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है, जब सारा भुगतान नकद में किया जा रहा था, तब इस योजना की क्या हालत होगी । सच तो यह है कि इस योजना में काम करने के लिए युवा अपनी बारी का इंतजार करते थे तो योजना का बड़ा हिस्सा बुजुर्गों के नाम पर हजम कर लिया जाता था। गरीबों के नाम पर देश के पैसे की बर्बादी का इससे बड़ा उदाहरण क्या हो सकता है। देखा जाए तो कांग्रेस का दूसरा नाम ही भ्रष्टाचार है, जिसकी हर योजना देश का पैसा लूटने का साधन थी । इस योजना में जबरदस्त लूट मचाई गयी है । कांग्रेस को योजना में बदलाव का विरोध करने की जगह ये बताना चाहिए कि इस लूट में उसकी जेब में कितना पैसा गया है । जब योजना का कार्यान्यवन करने की क्षमता कांग्रेस सरकार के पास नहीं थी तो उसने ऐसी योजना लागू ही क्यों की थी। क्या यह माना जाए कि ये योजना सरकारी धन को लूटने के लिए ही लायी गयी थी। मोदी सरकार ने योजना का नाम बदलने के साथ-साथ जो बदलाव किए हैं, वो बहुत जरूरी हैं। हज़ारो करोड़ रुपये खर्च होने के बाद जमीन पर कोई काम न दिखना ही भ्रष्टाचार का सबूत है। जनता ने देश चलाने की जिम्मेदारी मोदी सरकार को दी हुई है और ये सरकार पिछले 11 सालों से लगातार काम कर रही है। 11 सालों के शासन के बावजूद मोदी की लोकप्रियता घटने की जगह बढ़ रही है, इसका मतलब है कि जनता मोदी पर विश्वास करती है और उनके काम से खुश है। जनता यूपीए सरकार के भ्रष्टाचार और नाकामियों को अभी तक नहीं भूली है, इसलिए कांग्रेस केंद्र के साथ-साथ राज्यों की सत्ता से भी बाहर हो गई है। विपक्ष होने के नाते कांग्रेस द्वारा सरकार का विरोध करना सही है लेकिन विरोध के लिए विरोध नहीं होना चाहिए। मनरेगा में बदलाव के विरोध के कारण इसकी खामियां उजागर हो रही हैं। जहां कांग्रेस इस योजना में बदलाव के विरोध से सरकार को घेरना चाहती है तो दूसरी तरफ इस योजना की खामियां सामने आने से कांग्रेस खुद कठघरे में खड़ी हो गई है। जनता को रोजगार देना सरकार की जिम्मेदारी है, लेकिन इसके साथ-साथ सरकार की जिम्मेदारी यह भी है कि पैसे का इस्तेमाल सही तरीके से हो। कांग्रेस को विरोध करने के लिए सही मुद्दे चुनने चाहिए ताकि जनता में उसकी विश्वसनीयता बढ़े । राजेश कुमार पासी Read more » Opposition to reforms in MNREGA is unnecessary
राजनीति महाराष्ट्र चुनाव ने क्या संदेश दिया है January 21, 2026 / January 21, 2026 | Leave a Comment राजेश कुमार पासी 2014 के बाद से मोदी की राजनीति देश के सिर पर चढ़कर बोल रही है। 2024 लोकसभा चुनाव में जब भाजपा बहुमत से दूर रह गई तो राजनीतिक विश्लेषकों ने कहा कि अब मोदी की राजनीति का उतराव शुरू हो गया है । विपक्षी दल भी काफी खुश थे कि अब जनता […] Read more » महाराष्ट्र चुनाव
विश्ववार्ता ट्रम्प की लाठी, ट्रम्प की भैंस January 12, 2026 / January 12, 2026 | Leave a Comment ट्रम्प की लाठी, ट्रम्प की भैंस Read more » ट्रम्प की भैंस ट्रम्प की लाठी
समाज आरक्षण का वास्तविक लक्ष्य क्या है December 27, 2025 / December 27, 2025 | Leave a Comment अगर आप आज के दलित संगठनों की गतिविधियों का आकलन करेंगे तो पाएंगे कि वो किसी एक लक्ष्य को लेकर चल रहे है और हर संगठन किसी विशेष जाति या वर्ग से जुड़ा होता है । सम्पूर्ण समाज की लड़ाई कोई नहीं लड़ रहा है, सबके अपने-अपने स्वार्थ हैं । आजकल सभी राजनीतिक दल सबसे गरीब आदमी की बात करके अपनी राजनीतिक रोटियाँ सेंकते है । Read more » What is the real aim of reservation आरक्षण का वास्तविक लक्ष्य
समाज ईश्वर के अस्तित्व पर बहस निरर्थक है December 23, 2025 / December 23, 2025 | Leave a Comment वास्तव में सच तो यह है कि कोई भी ईश्वर के अस्तित्व को सिद्ध नहीं कर सकता, तो दूसरी तरफ कोई भी ईश्वर का अस्तित्व न होने को भी सिद्ध नहीं कर सकता । जावेद अख्तर ने तर्क दिया है कि जो ईश्वर के होने का दावा करते हैं, उन्हें ही Read more » ईश्वर के अस्तित्व ईश्वर के अस्तित्व पर बहस निरर्थक
राजनीति बाबरी मस्जिद बंगाल में भाजपा का खेल बिगाड़ सकती है December 22, 2025 / December 22, 2025 | Leave a Comment 6 दिसम्बर को बाबरी मस्जिद की नींव रख दी गई है और हर जुमे पर नमाज पढ़ने के लिए वहां लाखों की भीड़ इकट्ठा हो रही है। लोग अपने सिर पर मस्जिद निर्माण के लिए ईंटें उठाकर निर्माण स्थल पर आ रहे हैं। इसमें सिर्फ बंगाल के मुस्लिम शामिल नहीं हैं बल्कि दूसरे राज्यों से भी लोगों की भीड़ आ रही है। Read more » Babri Masjid could spoil BJP's game in Bengal बंगाल में भाजपा का खेल
राजनीति कांग्रेस का सेना पर हमला आत्मघाती कदम है December 19, 2025 / December 19, 2025 | Leave a Comment राहुल गांधी शोर मचाते हैं कि वोट चोरी के कारण कांग्रेस चुनाव हार रही है। उनका कहना है कि भाजपा चुनाव नहीं जीत रही है बल्कि कांग्रेस को हराया जा रहा है। Read more » कांग्रेस का सेना पर हमला आत्मघाती कदम
राजनीति क्या वामपंथ का आखिरी किला भी ढहने वाला है ? December 18, 2025 / December 18, 2025 | Leave a Comment क्षिण भारत के दो राज्य तमिलनाडु और केरल भाजपा के लिए समस्या बने हुए हैं लेकिन धीरे-धीरे भाजपा ने इन राज्यों में भी अपनी पकड़ बनानी शुरू कर दी है । हाल ही में संपन्न हुए केरल स्थानीय निकाय के चुनावों में कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट(यूडीएफ) ने बड़ी जीत के साथ अपनी वापिसी की है । Read more » Is the last bastion of the Left also about to collapse वामपंथ का आखिरी किला
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राजनीति कमजोर विपक्ष के लिए कौन जिम्मेदार है ? December 9, 2025 / December 9, 2025 | Leave a Comment संसदीय लोकतांत्रिक व्यवस्था में विपक्ष उतना ही जरूरी है जितना कि सत्तापक्ष जरूरी है। अगर विपक्ष नहीं है तो लोकतंत्र भी नहीं है। अगर किसी लोकतांत्रिक व्यवस्था में विपक्ष ज्यादा कमजोर हो जाता है तो सत्तापक्ष के तानाशाह बनने का डर पैदा हो जाता है। जब से मोदी सत्ता में आये हैं, विपक्ष और मीडिया का एक वर्ग उन पर तानाशाही का आरोप लगाता रहता है। Read more » कमजोर विपक्ष
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