राजनीति अपने ही घर में घिरते जा रहे डोनाल्ड ट्रंप September 3, 2025 / September 3, 2025 | Leave a Comment डोनाल्ड ट्रं राजेश कुमार पासी डोनाल्ड ट्रंप एक व्यापारी हैं और अपनी इस मानसिकता से बाहर नहीं निकल पाए हैं । सिर्फ सात महीनों के कार्यकाल में ही अपने फैसलों से वो न केवल विदेशों में बल्कि अपने ही देश में घिरते जा रहे हैं । बेशक वो एक व्यापारी हैं लेकिन वहां भी कोई […] Read more » Donald Trump is getting trapped in his own house डोनाल्ड ट्रंप
राजनीति चुनाव आयोग नहीं, जनादेश का अपमान हो रहा है August 23, 2025 / August 23, 2025 | Leave a Comment राजेश कुमार पासी इंडिया गठबंधन के नेताओं ने 11 अगस्त को संसद से लेकर चुनाव आयोग मुख्यालय तक विरोध मार्च निकालकर हंगामा किया जबकि चुनाव आयोग ने 30 नेताओं को अपनी बात रखने के लिए बुलाया था । वास्तव में विपक्ष यह दिखाना चाहता था कि उसके विरोध को दबाया जा रहा है, इसलिए ऐसा […] Read more » चुनाव आयोग
राजनीति विश्ववार्ता भारत और अमेरिका की मुश्किलें बढ़ा रहे ट्रंप August 8, 2025 / September 29, 2025 | Leave a Comment राजेश कुमार पासी डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका को फिर से महान देश बनाने का नारा दिया था और आते ही उन्होंने अपने एजेंडे पर काम शुरू कर दिया। उन्होंने सरकारी खर्च कम करने की कोशिश की और अवैध घुसपैठियों को देश से बाहर निकालने का काम शुरू किया। Read more » Trump is increasing the problems between India and America ट्रंप
राजनीति चुनाव आयोग पर हमला गंभीर रूप ले चुका है August 5, 2025 / August 5, 2025 | Leave a Comment राजेश कुमार पासी राहुल गांधी और विपक्ष के दूसरे नेताओं का चुनाव आयोग पर हमला अब बहुत गंभीर हो चुका है क्योंकि अब ये लोकतंत्र और संविधान पर सवाल खड़े करने तक पहुँच गया है। कुछ लोग कह सकते हैं कि विपक्ष तो संविधान और लोकतंत्र बचाने की जंग लड़ रहा है तो फिर चुनाव […] Read more » The attack on the Election Commission has taken a serious turn चुनाव आयोग पर हमला
राजनीति देश में हीन भावना पैदा कर रहा विपक्ष August 4, 2025 / August 4, 2025 | Leave a Comment राजेश कुमार पासी हीनभावना एक ऐसी मानसिक स्थिति है जिसमें व्यक्ति अपनी शक्ति पर भरोसा खो देता है। वो जो काम आसानी से कर सकता है वो भी उसे असम्भव नजर आने लगता है । हीनभावना से ग्रस्त व्यक्ति अपने आपको बहुत कमजोर मानने लगता है । हमारे विपक्षी नेता विशेष तौर पर राहुल गांधी […] Read more » देश में हीन भावना पैदा कर रहा विपक्ष
राजनीति ट्रम्प भारत और मोदी से नाराज क्यों है August 4, 2025 / August 4, 2025 | Leave a Comment राजेश कुमार पासी डोनाल्ड ट्रंप जब चुनाव लड़ रहे थे तो भारत का एक बड़ा वर्ग उनकी जीत की कामना कर रहा था । डोनाल्ड ट्रंप के पिछले कार्यकाल के कारण उन्हें भारत समर्थक माना जा रहा था इसलिए उनकी जीत पर भारत में जश्न मनाया गया । डोनाल्ड ट्रंप ने सत्ता में आने के बाद […] Read more » Why is Trump angry with India and Modi ट्रम्प भारत और मोदी से नाराज
राजनीति मोदी में दम नहीं लेकिन विपक्ष बेदम क्यों July 31, 2025 / July 31, 2025 | Leave a Comment राजेश कुमार पासी इस लेख का शीर्षक एक सवाल है और यह सवाल इसलिए पूछना पड़ रहा है क्योंकि कांग्रेस के नेता राहुल गांधी ने अपनी पार्टी के एक बड़े समारोह में बोलते हुए कहा है कि मैं मोदी जी से कई बार मिला हूं, उनमें कोई दम नहीं है । उनकी बात को न काटते हुए […] Read more » Modi has no strength but why is the opposition breathless विपक्ष बेदम क्यों
आलोचना क्या देश की व्यवस्था जनता के लिए है ? July 30, 2025 / July 30, 2025 | Leave a Comment राजेश कुमार पासी किसी भी देश को चलाने के लिए एक व्यवस्था की जरूरत होती है ताकि वो देश सुचारू रूप से चलता रहे । यह व्यवस्था उस देश की जनता की सेवा के लिए होती है लेकिन हमारे देश की व्यवस्था कुछ अलग है । हमारे देश की व्यवस्था जनता के लिए नहीं है […] Read more » Is the system of the country for the people? देश की व्यवस्था जनता के लिए
राजनीति ब्रिटेन के समझौते से किसको संदेश दे रहे मोदी July 24, 2025 / July 24, 2025 | Leave a Comment राजेश कुमार पासी प्रधानमंत्री मोदी ब्रिटेन की विदेश यात्रा पर हैं, जहां भारत ब्रिटेन के साथ मुक्त व्यापार समझौता करने वाला है। 2022 से इसके लिए भारत सरकार और ब्रिटिश सरकार के बीच बातचीत चल रही थी और अब इस समझौते पर हस्ताक्षर होने जा रहे हैं। बेशक ये समझौता भारत और ब्रिटेन के बीच होने जा रहा है लेकिन इस समझौते से मोदी पूरी दुनिया को एक संदेश देने जा रहे हैं। विशेष तौर पर मोदी इस समझौते के जरिये अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को एक बड़ा संदेश देने जा रहे हैं। जब से भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध विराम हुआ है तब से डोनाल्ड ट्रंप यह राग अलाप रहे हैं कि उन्होंने दोनों देशों के युद्ध विराम करवाया था । भारत सरकार द्वारा अधिकारिक रूप से नकार दिये जाने के बावजूद उनका राग अलापना बंद नहीं हुआ है । उनका कहना है कि उन्होंने दोनों देशों को ट्रेड डील करने की बात कहकर मनाया था । सवाल यह है कि पाकिस्तान ऐसा क्या बनाता है जिससे वो अमेरिका के साथ व्यापार करने जा रहा है । दूसरा सवाल यह है कि अमेरिका की कई धमकियों के बावजूद भारत ने अमेरिका के साथ व्यापार समझौते की तरफ कदम नहीं बढ़ाए हैं । जो समझौता हुआ ही नहीं, उसके कारण कैसे भारत पाकिस्तान अमेरिकी प्रभाव में युद्ध रोकने के लिए सहमत हो गए । जहां भारत का अमेरिका के साथ अभी तक व्यापार समझौता नहीं हो पाया है तो वहीं दूसरी तरफ तीन वर्षों की मेहनत के बाद ब्रिटेन के साथ भारत का समझौता होने जा रहा है । भारत इस समझौते के जरिये अमेरिका को संदेश दे रहा है कि वो अपने हितों के साथ कोई समझौता नहीं करने वाला है । इस समझौते के जरिये भारत ने सुनिश्चित किया है कि उसके 99 प्रतिशत निर्यात उत्पादों को ब्रिटेन में जीरो डयूटी श्रेणी में रखा जाएगा । भारत पर अमेरिका द्वारा लगातार डेडलाइन देकर समझौता करने का दबाव बनाया जा रहा है लेकिन भारत ने स्पष्ट रूप से कह दिया है कि वो किसी डेडलाइन के डर से समझौता नहीं करने वाला है । भारत अपने हितों को देखते हुए ही अमेरिका के साथ समझौता करेगा । वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने अमेरिका को कहा था कि हम समझौता जरूर करेंगे लेकिन बिना किसी डेडलाइन के करेंगे । उन्होंने कहा था कि इस तरीके से बातचीत की जाएगी तो हमें कोई ट्रेड डील नहीं करनी है । पहले अमेरिका ने 9 जुलाई की डेडलाइन दी थी और अब इसे बढ़ाकर 31 जुलाई कर दिया गया है । अमेरिकी दबाव का नतीजा ये निकला है कि भारत सरकार ने अन्य देशों के साथ व्यापार करने के लिए जो शर्ते तय की थी, उनके अनुसार अमेरिका के साथ बातचीत नहीं होने जा रही है बल्कि भारत का कहना है कि जैसे अमेरिका बात करेगा, उससे वैसे ही बात की जाएगी । भारत का अमेरिका को सीधा संदेश है कि वो किसी दबाव में व्यापार समझौता करने वाला नहीं है । भारत और ब्रिटेन के बीच फ्री ट्रेड डील की बातचीत के दौरान ब्रिटेन के तीन प्रधानमंत्री बदल गए लेकिन बातचीत चलती रही । इससे यह भी संदेश जाता है कि ट्रेड डील किन्हीं दो लोगों के बीच नहीं होती बल्कि दो देशों के बीच होती है । बिट्रिश प्रधानमंत्री स्ट्रार्मर ने कहा है कि ब्रेग्जिट के बाद ये उनके देश की सबसे बड़ी ट्रेड डील होने वाली है । उनका कहना है कि इससे दोनों देशों को बड़ा फायदा होने वाला है । इस समझौते से भारत में 50 लाख नौकरियां पैदा होने की संभावना है और मेक इन इंडिया को इससे फायदा होने की संभावना जताई जा रही है । भारत इससे यह संदेश दे रहा है कि अमेरिका भारत को कमजोर देश न समझे. हो सकता है कि उसकी दबाव बनाकर समझौता करने की रणनीति कुछ देशों के साथ सफल हो गई हो लेकिन भारत के मामले में ऐसा होने वाला नहीं है । अमेरिका को समझना होगा कि उसकी भारत के साथ इस मामले की कई बैठकें हो चुकी हैं लेकिन अभी तक कोई परिणाम नहीं निकला है । यहां तक कि कोई छोटी डील भी नहीं हो सकी है । अमेरिका की दबाव बनाने की रणनीति का ये परिणाम निकला है कि भारत ने कई ऐसे क्षेत्रों को बातचीत से बाहर निकाल दिया है जिन्हें पहले वो अमेरिका के लिए खोलने की बात करने वाला था । भारत दूसरे देशों को उन क्षेत्रों में आने के लिए बात करने के लिए तैयार है लेकिन अमेरिका से अब उन क्षेत्रों के बारे में कोई बात नहीं होगी । भारत ने अमेरिका को बता दिया है कि बिना किसी दबाव के भी दूसरे देशों के साथ समझौता किया जा सकता है । जहां तक भारत और ब्रिटेन के बीच होने वाले समझौते की बात है तो दोनों देशों ने इसके लिए चौदह दौर की बातचीत की है और इसके बाद ही दोनों देशों के बीच सहमति बनी है । मोदी जी की उपस्थिति में इस पर हस्ताक्षर होने वाले हैं । इस समझौते का लक्ष्य है कि दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार को 2030 तक दोगुना करके 120 अरब डॉलर तक पहुंचा दिया जाए । इस समझौते से भारत के वस्त्र उद्योग, इंजीनियरिंग उत्पाद, दवाएं और अन्य कई प्रमुख क्षेत्रों के लिए ब्रिटेन का बाजार शून्य शुल्क या कम शुल्क में उपलब्ध हो जाएगा । इसके अलावा भारत के कामगारों और प्रोफेशनल को ब्रिटेन में काम करने में आसानी होगी और उनको सामाजिक सुरक्षा प्रदान की जाएगी और उन्हें ब्रिटेन की पेंशन योजना के लिए कोई पैसा नहीं देना होगा। ब्रिटेन को भी इस समझौते से बड़ा फायदा होने जा रहा है। ब्रिटेन के अल्कोहल और यात्री कारों को भारत के बाजार में जगह मिलेगी. इन्हें शुल्कमुक्त नहीं किया जा रहा है लेकिन दूसरे देशों के मुकाबले बहुत कम शुल्क पर भारत में इनकी बिक्री हो सकेगी। इसके अलावा कई अन्य क्षेत्रों में ब्रिटिश सामानों को भारत में सस्ते में बेचा जा सकेगा। इससे ब्रिटिश सामान दूसरे देशों की तुलना में भारत में काफी सस्ते हो जाएंगे। ब्रिटिश प्रधानमंत्री ब्रिटेन की बिगड़ती अर्थव्यवस्था को संभालने के लिए यूरोपियन यूनियन के साथ दोबारा जुड़ना चाहते हैं लेकिन ब्रिटेन को यह भी समझ आ रहा है कि यूरोपियन यूनियन की अर्थव्यवस्था खुद ही डूब रही है तो उसके साथ जुड़कर ब्रिटिश अर्थव्यवस्था कैसे ऊपर उठ सकती है। यही कारण है कि ब्रिटेन दूसरे देशों की तरफ देख रहा है। ब्रिटेन को चीन से भी बड़ी उम्मीद है लेकिन चीन की विश्वसनीयता सवालों के घेरे में है और चीन की अर्थव्यवस्था भी नीचे की ओर जा रही है। ऐसे हालात में ब्रिटेन भारत की अनदेखी नहीं कर सका है और उसका भारत के साथ मुक्त व्यापार समझौता होने जा रहा है। भारत के लिए अब यूरोपियन यूनियन का रास्ता भी खुलने जा रहा है। पीएम मोदी इस समझौते के जरिये दुनिया को संदेश दे रहे हैं कि अब भारत की अनदेखी कोई देश नहीं कर सकता हालांकि यह भी सच है कि अमेरिका के साथ भारत के व्यापार को देखते हुए ब्रिटेन के साथ हुआ समझौता ज्यादा महत्वपूर्ण नजर नहीं आता है। लेकिन सच यह भी है कि ऐसे कई समझौते मिलकर बड़ा असर दिखा सकते हैं। अमेरिका को समझना होगा कि जैसे भारत को अमेरिका की जरूरत है वैसे ही अमेरिका को भारत की जरूरत है। अमेरिका भारत को धमकी देना बंद करके आपसी समझ के साथ आगे बढ़े ताकि दोनों देशों के बीच सहमति से व्यापार समझौता हो जाये । इससे दोनों देशों को ही फायदा होगा। डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों और बयानों के कारण भारत और अमेरिका के बीच अविश्वास बढ़ता जा रहा है और दूसरी तरफ रूस और चीन भारत को अपनी तरफ खींचने की कोशिश कर रहे हैं। अमेरिका की गलती के कारण रूस पहले ही चीन के साथ जुड़ चुका है, अगर अमेरिका नहीं संभला तो भारत का रूस और चीन के साथ ऐसा गठजोड़ बन सकता है जो अमेरिका के वैश्विक प्रभाव को बहुत कम कर देगा । अमेरिका की खुशकिस्मती यह है कि भारत चीन पर भरोसा नहीं करता है इसलिए इस संभावित गठजोड़ से दूरी बनाए हुए है । मोदी इस समझौते के जरिये देश को भी संदेश दे रहे हैं कि वो किसी के दबाव में नहीं आते हैं । मोदी के लिए देशहित से ऊपर कुछ भी नहीं है और अमेरिका के सामने भी वो झुकने वाले नहीं हैं । राजेश कुमार पासी Read more » ब्रिटेन के समझौते से किसको संदेश दे रहे मोदी
राजनीति धर्मांतरण राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा है July 18, 2025 / July 18, 2025 | Leave a Comment राजेश कुमार पासी सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि जो व्यक्ति अपना धर्म बदलता है वो केवल अपना धर्म नहीं बदलता बल्कि वो अपने समाज और देश से भी कट जाता है । यही कारण है कि सुप्रीम कोर्ट ने धर्मांतरण को देश के लिए बड़ा खतरा बताया था और सरकारों को इसके खिलाफ कदम उठाने को कहा था । धर्मांतरण के बाद व्यक्ति अपना परिवार और अपनी संस्कृति छोड़ देता है, अपना खानपान और पहनावा बदल लेता है । धर्मांतरित मुस्लिम इस्लाम के प्रति अपनी वफादारी साबित करने के लिए आतंकी संगठनों के साथ भी चले जाते हैं । यही कारण है कि धर्मांतरण देश की सुरक्षा के लिए भी बड़ा खतरा बनता जा रहा है । दुनिया में कई देश हैं, जहां धर्मांतरण के कारण डेमोग्राफी बदलने से दंगों की आग में जलना पड़ रहा है । बाबा साहब अम्बेडकर ने कहा था कि हिन्दू-मुस्लिम के बीच तनाव के कई कारण हैं जिनके कारण दंगे भी होते हैं । उन्होंने इस्लाम को एक बंद समाज कहा था क्योंकि उनका कहना था कि मुस्लिमों का भाईचारा आपसी होता है. दूसरों को वो काफिर मानते हैं । उन्होंने गौमांस, धर्मांतरण और मस्जिदों के आगे संगीत बजाने को दंगों का बड़ा कारण बताया था । उन्होंने कहा था कि जब दोनों समुदाय मिलते हैं तो धर्मांतरण एकतरफा होता है. हिन्दू कभी धर्म परिवर्तन का प्रयास नहीं करते । यही कारण है कि किसी भी मुस्लिम देश में धर्मांतरण विरोधी कानून नहीं है क्योंकि मुस्लिमों की उसकी जरूरत ही नहीं है लेकिन गैर-मुस्लिम देशों की इसकी जरूरत इसलिए पड़ती है क्योंकि मुस्लिम समुदाय पूरी आक्रामकता के साथ धर्मांतरण की कोशिश करता है । ये अजीब बात है कि मुस्लिम बहुल देशों में सभी नागरिकों को धीरे-धीरे मुस्लिम बना दिया जाता है लेकिन जहां मुस्लिम अल्पसंख्यक होते हैं, वहां भी वो धीरे-धीरे बहुसंख्यक समाज को इस्लाम में शामिल कर लेते हैं । इस तरीके से कई देशों को इस्लामिक मुल्क बना दिया गया है और भारत को भी 2047 तक मुस्लिम संगठन इस्लामिक मुल्क बनाने का संकल्प लेकर धर्मांतरण के अभियान में जुटे हुए हैं । ज्यादातर मुस्लिम संगठन दावा करते हैं कि वो धर्मांतरण नहीं करवाते हैं बल्कि लोग अपनी खुशी से इस्लाम धर्म अपनाते हैं । सवाल यह है कि अगर लोगों को अपनी खुशी से इस्लाम अपनाना है तो वो खुद मस्जिद में जायेंगे न कि उनका धर्मांतरण करवाने के लिए करोड़ों रुपये की फंडिंग लानी पड़ेगी और गैंग बनाने पड़ेंगे । वास्तव में धर्मांतरण करवाने के लिए लालच, भय और धोखे का सहारा लिया जाता है । हमारा संविधान अपने धर्म का प्रचार करने का अधिकार देता है और व्यक्ति को अपनी मर्जी से धर्म बदलने का भी अधिकार देता है । दूसरी तरफ यही संविधान कहता है कि किसी भी व्यक्ति को लालच, भय और धोखे से धर्मांतरित नहीं किया जा सकता । वास्तव में हमारे देश में लोगों को धोखा भय और लालच देकर ही धर्मांतरित किया जा रहा है । हमारे देश का सेकुलर गैंग यह चिल्लाता है कि देश में भाईचारा बढ़ाने की जरूरत है, इसे खतरे में नहीं डालना चाहिए लेकिन सच्चाई यह है कि अगर आपको मुस्लिमों और ईसाइयों के साथ भाईचारा निभाना है तो उनके धर्म को अपनाना होगा । जब तक आप ऐसा नहीं करते हैं वो आपसे भाईचारा नहीं निभा सकते क्योंकि ये दोनों धर्म दूसरे धर्म को बर्दाश्त नहीं कर सकते । यही कारण था कि मुस्लिम आक्रांताओं ने हिन्दुओं के सामने तीन विकल्प रखे थे । पहला उन्हें धर्म परिवर्तन करके मुस्लिम बनना होगा, दूसरा अगर इस्लाम नहीं अपनाना है तो जजिया कर देना होगा और अगर ये दोनों विकल्प नहीं लिए तो मौत ही आखिरी विकल्प होगा । सेकुलर गैंग कहता है कि अगर मुस्लिम शासकों ने जबरदस्ती धर्म परिवर्तन करवाया था तो हिन्दू कैसे बचे रह गए । वास्तव में हिन्दुओं ने अपना धर्म परिवर्तन करने की जगह जजिया कर चुकाना ज्यादा पसंद किया था । बेइंतहा जुल्म, उत्पीड़न और शोषण के बावजूद हिन्दू अपने धर्म पर अडिग रहे । इसके बावजूद करोड़ों लोगों ने भय और लालच के कारण धर्म परिवर्तन कर लिया और भारत में मुस्लिमों की आबादी इतनी बढ़ गई कि देश का विभाजन करना पड़ा । समस्या यह है कि इसके बाद भी यह जारी है और ये तब तक रुक नहीं सकता जब तक कि पूरे देश को धर्मांतरित न कर दिया जाए । विभाजन के बाद इसको रोका जा सकता था लेकिन हमारे नेताओं पर सेक्युलरिज्म का ऐसा भूत सवार था कि इसको रोकने की कोशिश नहीं की गई । अब ये तब रुकेगा जब देश का एक और विभाजन हो जाएगा । इससे पहले इसके रुकने की उम्मीद दिखाई नहीं देती है। धर्मांतरण करने वाले संगठनों के पास विदेशों से अथाह पैसा आता है जिसका इस्तेमाल ये लोग पुलिस और प्रशासन में बैठे लोगों को खरीदने के लिए करते हैं । इसके कारण पुलिस और प्रशासन न केवल इनके कारनामों की अनदेखी करने लगता है बल्कि इनके खिलाफ उठने वाली आवाजों को दबाने की हर संभव कोशिश करता है । छांगुर बाबा के खिलाफ जिन लोगों ने भी शिकायत की थी पुलिस ने उनके ही खिलाफ फर्जी मुकदमें ठोक दिये । सरकार किसी की भी हो लेकिन इको सिस्टम अभी भी पुराना ही चल रहा है । इस्लाम धर्म के अनुसार हर मुस्लिम का प्रथम कर्तव्य है कि वो गैर मुस्लिम को अपने धर्म में लेकर आये क्योंकि एक दिन पूरी दुनिया को इस्लामिक बनाना है। जब तक पूरी दुनिया मुस्लिम नहीं बन जाती तब तक मुस्लिम समुदाय चैन से नहीं बैठ सकता। इस सच को हम माने या न माने लेकिन इससे भाग नहीं सकते । मुस्लिम संगठनों को हिंदुओं और अन्य धर्म के लोगों को मुसलमान बनाने के लिए अरबों रुपये की फंडिंग मिल रही है। यही कारण है कि मुस्लिम युवा लव जिहाद की आड़ में हिंदू लड़कियों को पहले धोखे से बहला उनसे फुसलाकर कर शादी कर लेते हैं और इसके बाद उनका धर्मांतरण करवा देते हैं। इसके बदले उन्हें लाखों रुपये मिलते हैं. दूसरी तरफ अपना धार्मिक कर्तव्य पूरा करने की खुशी भी मिलती है। धर्म परिवर्तन के बाद लड़कियों को गौमांस खिलाया जाता है और कहा जाता है कि इसके बाद ही तुम्हारा धर्मांतरण पूरा होगा । उन्हें मुस्लिम पहनावे और खानपान के लिए मजबूर किया जाता है । छांगुर बाबा के बारे में दावा किया जा रहा है कि उसने 5000 लोगों का धर्मांतरण करवाया था और उसमें से 1500 हिन्दू लड़कियां थी । उसके नेटवर्क को देखते हुए कहा जा सकता है कि वास्तविक संख्या इससे कहीं ज्यादा हो सकती है क्योंकि कई जिलों की बदलती डेमोग्राफी इसकी गवाही देती है। ये और इसके परिवार के सदस्यों ने सेकड़ो अमीर मुस्लिम देशों की यात्रा की थी। धर्मांतरण के काम मे इसके मुख्य सहयोगी वो लोग थे जिनका इसने धर्म परिवर्तन करवाया था। इसने धर्मांतरण के लिए लोगों को ट्रेनिंग देने का बड़ा इंतज़ाम किया हुआ था, इसके लिए कोठियों और बड़े भवनों के तहख़ानों का इस्तेमाल किया जाता था। दुबई और दूसरे मुस्लिम देशों से ये जेहादी ट्रेनर और मौलाना को बुलाता था । इसका पूरा नेटवर्क मिलकर गैर मुस्लिमों का ब्रेनवाश करके मुस्लिम बनाने का धंधा करता था । गरीब, दलित, आदिवासी और युवा लड़कियों को विशेष तौर पर निशाने पर रखा जाता था। ईसाई संगठनों का तरीका अलग है, वो धर्म परिवर्तन के बाद कुछ नहीं बदलने देते और किसी को पता भी नहीं चलता कि इस व्यक्ति ने अपना धर्म बदल लिया है । पंजाब में कई संगठनों ने दावा किया है कि ईसाई आबादी 15 प्रतिशत को पार कर गई है जबकि 2011 में यह आबादी सिर्फ डेढ़ प्रतिशत थी । ज्यादातर दलित समाज के लोग पंजाब में धर्मांतरण कर रहे हैं क्योंकि वहां जातिवाद के कारण इनके साथ उत्पीड़न अभी भी जारी है और भेदभाव किया जा रहा है । ईसाई संगठन दलितों की कई तरह से मदद करके उनको अपने धर्म में लेकर जा रहे हैं । दलितों में अंधविश्वास बहुत ज्यादा है और ईसाई संगठन इस कमजोरी का फायदा उठाकर तथाकथित चमत्कारों के जरिये उनको बहला फुसलाकर अपने धर्म में ले जा रहे हैं । धर्मांतरण देश के लिए बड़ा खतरा बनता जा रहा है क्योंकि इसके कारण कई राज्यों की डेमोग्राफी बदल चुकी है । इसके कारण कई जगहों पर सामाजिक, धार्मिक, राजनीतिक और आर्थिक परेशानियां खड़ी हो रही हैं । धर्मांतरण को छोटी समस्या नहीं समझना चाहिए, अगर इस पर लगाम नहीं लगाई गई तो देश दंगों की आग में ऐसा जलेगा कि एक और विभाजन की जरूरत पड़ सकती है । इसके अलावा विदेशी शक्तियां इन लोगों का देश के खिलाफ इस्तेमाल कर सकती हैं । सुप्रीम कोर्ट और बाबा साहब की चेतावनी को याद रखना चाहिए और धर्मांतरण पर सख्ती से रोक लगनी चाहिए । सैकड़ों छांगुर बाबा धर्मांतरण का गैंग चलाकर करोड़पति बन रहे हैं और देश को खतरे में डाल रहे हैं । राजेश कुमार पासी Read more » Conversion is a big threat to national security धर्मांतरण
राजनीति लेख छांगुर बाबा के साम्राज्य का अंत लेकिन कितने बाकी July 14, 2025 / July 14, 2025 | Leave a Comment राजेश कुमार पासी अकसर हिन्दू संगठन लव जिहाद का मुद्दा उठाते रहते हैं लेकिन सभी उनका मजाक उड़ाते हैं कि ये उनकी साम्प्रदायिक सोच है, ऐसा कुछ नहीं है । विडम्बना यह है कि बार-बार लव जिहाद के मामले सामने आते रहते हैं लेकिन उनकी अनदेखी कर दी जाती है । लव जैहाद कुछ और नहीं है बल्कि हिन्दू लड़कियों का धर्म परिवर्तन करवाने का एक तरीका है । यह भी बार-बार सुनने में आता है कि लव जैहाद के लिए मुस्लिम लड़को को पैसा दिया जाता है ताकि वो हिन्दू लड़कियों को अपने प्यार के जाल में फंसाकर उनसे शादी करें और इसके बाद उन्हें इस्लाम कबूल करवायें । यूपी के बलरामपुर के उतरौला के छांगुर बाबा के मामले ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि इस देश में सुनियोजित तरीके से धर्म परिवर्तन का धंधा चल रहा है । मुस्लिम देशों से इसके लिए बेइंतहा पैसा आ रहा है इसलिए इस धंधे के लिए पैसे की कोई कमी नहीं है । मुस्लिम लड़कों के लिए ये दोगुने फायदे का काम है । एक तो उन्हें इस काम के लिए मोटी रकम मिलती है तो दूसरी तरफ उन्हें इस काम से धर्म की सेवा का मौका भी मिलता है । मौलाना उन्हें इस काम के बदले जन्नत का लालच देते हैं । उतरौला में पैदा होने वाला छांगुर बाबा कभी भीख मांग कर गुजारा करता था और इसके बाद उसने नकली अंगूठी बेचने का धंधा शुरू किया लेकिन जब उसने धर्म परिवर्तन का धंधा शुरू किया तो वो सैकड़ों करोड़ का स्वामी बन गया । आसपास के इलाकों में उसका इतना दबदबा हो गया कि उसके खिलाफ मुंह खोलना किसी के लिए संभव नहीं था । वास्तव में उसने अपने इलाके में पुलिस-प्रशासन और अदालत में इतनी पकड़ बना रखी थी कि उसके खिलाफ आवाज उठाने वाले के ऊपर फर्जी मुकदमें ठोक दिये जाते थे । हैरानी की बात है कि कई एकड़ की सरकारी भूमि पर उसने कब्जा करके बड़ी इमारत बनाकर अपना साम्राज्य स्थापित कर लिया था लेकिन वहां का प्रशासन आँखे बंद करके बैठा रहा । सवाल यह है कि पिछले 15-16 सालों से बलरामपुर में गैरकानूनी धंधे कर रहे छांगुर बाबा पर पुलिस और प्रशासन इतने मेहरबान क्यों थे । मैं सरकारी सेवा में 27 साल रहा हूं, अच्छी तरह जानता हूं कि अफसर सब कुछ देखकर अनदेखा क्यों करते हैं । इस सच को भी जानता हूं कि इस अनदेखी के लिए पैसा ऊपर से नीचे तक जाता है । मतलब साफ है कि स्थानीय प्रशासन में बैठे लोगों को सब कुछ पता था लेकिन उन्हें अनजान बने रहने के लिए छांगुर बाबा नियमित रूप से मोटा पैसा दे रहा होगा । मुख्यमंत्री योगी कितने भी सख्त प्रशासक हों लेकिन अभी भी पुराना इको सिस्टम काम कर रहा है । सच यह भी है कि अगर योगी मुख्यमंत्री नहीं होते तो यह बाबा कभी पकड़ में नहीं आता । ये योगी ही हैं जिनके कारण प्रशासन उसके खिलाफ कार्यवाही करने को मजबूर हुआ अन्यथा ये मामला दबा दिया जाता । आज ईडी भी उसके खिलाफ जांच कर रही है लेकिन सवाल यह है कि लगभग 300 करोड़ की फंडिंग जुटा लेने वाले बाबा पर किसी की नजर पहले क्यों नहीं पड़ी । मुझे ऐसा लगता है कि छांगुर पर कार्यवाही के साथ-साथ उन अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ भी कार्यवाही की जानी चाहिए जो उसकी मदद कर रहे थे । मेरा तो मानना है कि बाबा के खिलाफ कार्यवाही से पहले इनके खिलाफ कार्यवाही होनी चाहिए क्योंकि उनके लालच ने ही ऐसा बाबा पैदा किया था । सरकार से वेतन लेने वाले ये लोग देश के खिलाफ जाकर बाबा का काम कर रहे थे । घर का एक छज्जा इन्हें दिखाई दे जाता है लेकिन 70 कमरों वाला महल इन्हें दिखाई नहीं दिया । बैंक खातों में इतने बड़े लेनदेन के बावजूद आरबीआई को इसकी सूचना क्यों नहीं दी गई । उसने अपनी इमारत की दीवार बहुत ऊंची बनाई हुई थी और उन पर बिजली वाली कंटीली तारें लगाई हुई थी । किसी ने यह नहीं सोचा कि इतनी सुरक्षा क्यों की जा रही है और क्या छिपाया जा रहा है । पुलिस को कभी इस इमारत में आने-जाने वालों पर कोई शक नहीं हुआ और उसे किसी खबरी ने कभी नहीं बताया कि वहां क्या चल रहा है । लोकल पुलिस से उसके कारनामे कैसे छुपे रह गए । छांगुर बाबा ने गरीब एवं विधवा हिन्दू लड़कियों और प्रेमजाल में फंसाकर लाई गई गैर-मुस्लिम लड़कियों के धर्मपरिवर्तन और यौन शोषण की पूरी व्यवस्था तैयार की हुई थी । इसके लिए उसने कोडवर्ड बनाए हुए थे, मतांतरण को मिट्टी पलटना कहा जाता था । लड़कियों को प्रोजेक्ट कहा जाता था और उन्हें मानसिक रूप से प्रभावित करने को काजल करना कहा जाता था, दर्शन करना मतलब बाबा से मिलवाना था । बाबा आर्थिक रूप से कमजोर, विधवा और गैर-इस्लामी लड़कियों को बहला-फुसलाकर कर मतांतरण के लिए इस्तेमाल करता था । उसने मतांतरण के लिए जाति-धर्म के अनुसार एक निश्चित रकम तय की हुई थी । इसका नेटवर्क सिर्फ बलरामपुर तक नहीं था बल्कि यूपी के कई इलाकों में फैला हुआ था । यूपी से बाहर भी उसने अपना धंधा फैलाया हुआ था । शिक्षा की आड़ में उसने विदेशी फंडिंग की मदद से बड़ी संख्या में मदरसों का निर्माण किया हुआ था । वो सस्ती और सरकारी जमीनों पर मदरसों को निर्माण करवाता था और फिर उसके नाम पर विदेशी फंडिंग हासिल करता था । कितनी अजीब बात है कि गाजा में मुस्लिम बच्चे भूखे मर रहे हैं लेकिन मुस्लिम देश उनकी मदद को आगे नहीं आ रहे हैं लेकिन धर्म परिवर्तन के लिए ये देश पानी की तरह पैसा बहा रहे हैं । ये मुस्लिम देश गरीब मुस्लिमों की मदद करने की जगह गैर-मुस्लिमों को इस्लाम धर्म अपनाने के लिए खुले दिल से पैसा बांट रहे हैं । गरीब अफ्रीकी देशों में मुस्लिम समाज के लोग भूखे मर रहे हैं और उनकी मदद केवल यूरोपीय देशों द्वारा की जा रही है । अरबी मुस्लिम अपने सोने के महलों में अय्याशी कर रहे हैं लेकिन उनकी तरफ देखने को तैयार नहीं हैं । कितनी अजीब बात है कि जो पहले से मुस्लिम हैं, उनकी चिंता नहीं है लेकिन जो गैर-मुस्लिम हैं, उनको मुस्लिम बनाने के लिए ये लोग अरबों रुपये लुटाने के लिए तैयार हैं । ये सोचना गलत होगा कि इन लोगों के पास केवल एक छांगुर बाबा होगा बल्कि मेरा मानना है कि इन्होंने ऐसे बाबाओं की एक फौज तैयार कर रखी होगी । एक हिन्दू लड़की, जिसका मतांतरण के बाद आयत खान नाम रख दिया गया था, उसने बताया है कि ये लोग कहते थे कि 2047 में भारत को इस्लामिक मुल्क बना देंगे । उसे बताया गया कि तुम मुस्लिम बन गई हो, अब तुम्हें भी जन्नत मिल जाएगी । अभी इस मामले की बहुत पर्ते खुलनी है, लगता है कि ये मामला बहुत बड़ा है । छांगुर बाबा के कई माफिया गिरोह के साथ मिलीभगत सामने आ रही है । वैसे भी इतनी बड़ी मात्रा में सरकारी जमीनों पर कब्जा बिना माफिया की मदद के संभव नहीं लगता । हिन्दू समाज को इस मामले पर नजर रखनी होगी क्योंकि उसे धर्मनिरपेक्षता की भांग पिलाकर मूर्ख बनाया जा रहा है । कई मुस्लिम संगठन भारत को सुनियोजित तरीके से इस्लामिक देश बनाने की कोशिश में लगे हुए हैं । छांगुर बाबा अकेला नहीं हो सकता और न जाने कितने छांगुर बाबा हमारे देश में छुप कर इस काम में लगे हुए होंगे । केन्द्र सरकार को विपक्ष शासित राज्यों पर विशेष नजर रखने की जरूरत है क्योंकि मुस्लिम तुष्टिकरण के कारण विपक्षी दलों की सरकारें ऐसे लोगों के खिलाफ कार्यवाही कभी नहीं करेंगी । हमें समझना होगा कि लव जिहाद हमारे देश की सच्चाई है, इसे अनदेखा करना घातक साबित होगा । सब कुछ सरकार नहीं कर सकती, एक समाज के तौर पर हमें भी सतर्क रहना होगा । हिन्दू संगठनों को भी उन महिलाओं पर नजर रखने की जरूरत है, जो किसी कारण बेसहारा या गरीब हैं क्योंकि छांगुर जैसे गिद्ध मौके की तलाश में घूम रहे हैं । एक सच यह भी सामने आया है कि धर्म परिवर्तन के काम में छांगुर बाबा की मदद वो मुस्लिम कर रहे थे, जिनका धर्म परिवर्तन करवाया गया था । सरकार को उन लोगों पर नजर रखने की जरूरत है जिन्होंने नया-नया धर्म परिवर्तन किया हो । देखा गया है कि धर्म परिवर्तन के काम में ये लोग बढ़ चढ़कर हिस्सा लेते हैं । यही लोग हैं जो अपना धर्म बदलने के बाद अन्य लोगों को धर्म बदलवाने की कोशिश ज्यादा करते हैं और कामयाब भी हो जाते हैं । वास्तव में उनकी हिन्दू समाज में रिश्तेदारी होती है तो ये दूसरों को आसानी से बहला लेते हैं । सवाल यह है कि यह तरीका सिर्फ मुस्लिम संगठनों द्वारा ही इस्तेमाल किया जा रहा है, जवाब नहीं है क्योंकि कुछ ऐसा तरीका ईसाई बनाने के लिए भी अपनाया जाता है। जब रेटलिस्ट बनाकर धर्मपरिवर्तन करवाया जा रहा हो तो बहुत सतर्क रहने की जरूरत है । हिन्दू समाज को खुद से सवाल करना होगा कि वो कब तक धर्मनिरपेक्षता के नशे में डूबा रहेगा । धर्मनिरपेक्षता का ये मतलब नहीं होता कि अपना धर्म बर्बाद होते चुपचाप देखते रहो । छांगुर बाबा मामले से बहुत कुछ सीखने की जरूरत है । एक समाज के रूप में हमें अपनी जिम्मेदारी समझने की जरूरत है क्योंकि इस देश में पैसे के लिए बिकने वाले लोग शासन-प्रशासन में बैठे हुए हैं । अंत में एक भूतपूर्व कर्मचारी होने के नाते कहना चाहूंगा कि पूरी व्यवस्था भ्रष्टाचार में डूबी हुई है, उसके सहारे सब कुछ नहीं छोड़ा जा सकता । राजेश कुमार पासी Read more » The end of Changur Baba's empire but how many are left छांगुर बाबा के साम्राज्य का अंत
राजनीति अवैध घुसपैठियों के साथ क्यों खड़े हुए विपक्षी दल July 10, 2025 / July 10, 2025 | Leave a Comment राजेश कुमार पासी भारत के दूसरे विभाजन की नींव कांग्रेस ने विभाजन के दौरान ही रख दी थी. हम लाख कोशिश कर ले लेकिन हमारी तीसरी पीढ़ी के बाद की कोई एक पीढ़ी इस विभाजन की गवाह बन सकती है । आप कितनी भी सम्पति इकट्ठी कर ले लेकिन एक दिन खाली हाथ देश के एक हिस्से से दूसरे हिस्से में जाना ही होगा जैसा कि 1947 में एक बार हो चुका है। इसकी बड़ी वजह यह है कि आरक्षण के लिए सवर्ण समाज जिस महापुरुष बाबा साहब अम्बेडकर को कोसता है, उनकी एक सलाह को कांग्रेस के नेतृत्व ने मानने से इनकार कर दिया था । बाबा साहब चाहते थे कि विभाजन से पहले दोनों देशों में आबादी की अदलाबदली हो जाए लेकिन कांग्रेस ने उनकी इस सलाह को सिरे से नकार दिया । सरदार पटेल भी ऐसा चाहते थे लेकिन कांग्रेस में उस समय वही होता था जो गांधी और नेहरू चाहते थे । बाबा साहब का कहना था कि भारत से गरीब देशों ने विभाजन से पहले आबादी की अदलाबदली की है क्योंकि ऐसा न करना दूसरे विभाजन को जन्म देना होगा । उनका कहना था कि अगर आबादी की अदलाबदली नहीं होती है तो समस्या वहीं खड़ी रहेगी और देश दंगों की आग में जलता रहेगा । आजादी के बाद हम अपने देश को लगातार दंगों की आग में जलता देख रहे हैं क्योंकि कांग्रेस ने इसका इंतजाम विभाजन के दौरान ही कर दिया था । आजादी के बाद कांग्रेस लगातर ऐसे हालात पैदा कर रही है कि भविष्य में भारत का एक और विभाजन हो जाए । विभाजन के बाद इस देश में मुस्लिमों की बड़ी आबादी भारत में रूक गई और पाकिस्तान में भी बड़ी आबादी हिन्दुओं की रूक गई । पाकिस्तान और बांग्लादेश धीरे-धीरे हिन्दुओं की बड़ी आबादी को खत्म कर चुके हैं और बची खुची को जल्दी ही समाप्त कर देंगे लेकिन भारत में मुस्लिमों की आबादी लगातार बढ़ती जा रही है । इसका पहला कारण तो यह है कि विभाजन के बाद भी भारत में मुस्लिमों का आना जारी रहा है और दूसरी सबसे बड़ी वजह यह है कि मुस्लिमों की जन्मदर हिन्दुओं के मुकाबले बहुत ज्यादा है । इसके अलावा बड़ी मात्रा में हिन्दुओं का धर्मपरिवर्तन आज भी जारी है । भारत ने विभाजन के बाद एक बड़ी समस्या का सामना किया है और वो मुस्लिमों की अवैध घुसपैठ की समस्या है । अवैध घुसपैठ भारत की बड़ी समस्या है. एक अनुमान के अनुसार भारत में लगभग 6 करोड़ बांग्लादेशी, रोहिंग्या और अन्य मुस्लिम देशों से आए अवैध घुसपैठ रह रहे हैं । वास्तव में भारत के विभाजन के लिए मुस्लिम लीग जिम्मेदार थी लेकिन आज तो भारत में कई मुस्लिम लीग हैं । जिन्हें हम सेकुलर पार्टियां बोलते हैं उनमें से ज्यादातर मुस्लिम लीग से भी ज्यादा साम्प्रदायिक सोच वाली पार्टियां हैं । मुस्लिम लीग मुसलमानों के लिए समान अधिकार मांगती थी लेकिन ये पार्टियां तो मुस्लिमों के लिए विशेषाधिकार मांगती हैं । आप सोचिए पाकिस्तान से आए हिन्दुओं की सम्पत्ति को पाकिस्तान की सरकार ने 1948 में ही शत्रु सम्पत्ति कानून बनाकर कब्जे में ले लिया था लेकिन भारत में इस सम्बंध में कांग्रेस ने 1968 तक कोई कानून ही नहीं बनाया । एक तरफ पाकिस्तान ने अपने देश में हिन्दुओं की छोड़ी गई सम्पत्ति को 1948 में ही कब्जे में ले लिया और भारत में आज तक मुकदमें चल रहे हैं । कांग्रेस का कमाल तो यह था कि 1968 में कानून बनाकर उसने पाकिस्तान गए मुस्लिमों की सम्पत्ति को कब्जे में लेने की जगह संरक्षित कर दिया था । पाकिस्तान में विस्थापितों के पुनर्वास की कोई समस्या नहीं आई क्योंकि उसने हिन्दुओं की सम्पत्ति उनके हवाले कर दी थी लेकिन भारत में विस्थापित भटकते रहे क्योंकि यहां उन्हें मुस्लिमों द्वारा छोड़ी सम्पत्ति से दूर रहने को कहा गया था । ये मुस्लिम तुष्टिकरण की समस्या आज भी हमारे देश में बनी हुई है । पहले सिर्फ कांग्रेस ऐसा कर रही थी लेकिन अब भाजपा के अलावा अन्य विपक्षी पार्टिायां भी इस काम में जुट गई हैं । भारत का विभाजन इसलिए नहीं होगा क्योंकि मुस्लिम ऐसा चाहते हैं बल्कि इसलिए होगा क्योंकि विपक्षी दल ऐसा चाहते हैं । विपक्षी दल मुस्लिमों को मुख्यधारा में शामिल होने से रोकने की हर संभव कोशिश कर रहे हैं । ये दल उन्हें विशेष होने का अहसास कराने के लिए देश की मुख्यधारा से जुड़ने नहीं दे रहे हैं । सभी विपक्षी दल एनआरसी का विरोध करते हैं क्योंकि वो नहीं चाहते हैं कि भारत में अवैध रूप से रह रहे मुस्लिमों के खिलाफ कोई कार्यवाही की जा सके । कोई भी देश में अपने देश में किसी को नागरिकता बहुत सोच समझकर देता है लेकिन भारत में करोड़ो लोग अवैध घुसपैठ करके भारतीय नागरिक बनकर रह रहे हैं । ये घुसपैठिए न केवल भारत की अर्थव्यवस्था को चौपट कर रहे हैं बल्कि मतदाता बनकर सरकार भी चुन रहे हैं । ये घुसपैठिए विपक्षी दलों के बड़े वोट बैंक हैं इसलिए विपक्षी दल नहीं चाहते हैं कि इनके खिलाफ कोई कार्यवाही हो । चुनाव आयोग ने बिहार विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची के सत्यापन और पुनरीक्षण का काम शुरू कर दिया है । जब से चुनाव आयोग ने इस काम को शुरू किया है, देश के विपक्षी दल चुनाव आयोग के विरोध में खड़े हो गए हैं । इस काम को रूकवाने के लिए ये लोग सुप्रीम कोर्ट पहुंच गए हैं ताकि अवैध घुपपैठियों का नाम मतदाता सूची से न हटे । सुप्रीम कोर्ट ने इस पर रोक तो नहीं लगाई है लेकिन 10 जुलाई से इस पर विस्तार से सुनवाई करने का फैसला किया है । विपक्ष आरोप लगा रहा है कि सरकार चुनाव आयोग के माध्यम से कुछ लोगों को मताधिकार से वंचित करना चाहती है । इसका इस्तेमाल मतदाता सूचियों के आक्रामक और अपारदर्शी संशोधनों को सही ठहराने के लिए किया जा रहा है, जो मुस्लिम, दलित और गरीब प्रवासी समुदायों को असंगत रूप से लक्षित करते हैं । इसका भी विरोध किया जा रहा है कि इसकी शुरूआत बिहार से क्यों की जा रही है । सवाल यह है कि अगर यह सही है तो बिहार से शुरू करने में क्या बुराई है । कहा जा रहा है कि चुनाव आयोग अपने मनमाने और अनुचित आदेश से राज्य में करोड़ो मतदाताओं को मताधिकार से वंचित करना चाहता है । इसे मौलिक अधिकारों का हनन बताते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की गई है । ममता बनर्जी ने इसे एनआरसी से भी ज्यादा खतरनाक बताया है । अगले साल बंगाल में चुनाव होने वाले हैं इसलिए वो अभी से मोर्चा खोकर बैठ गई हैं क्योंकि बंगाल में अवैध घुसपैठियों के भारी संख्या में होने का अनुमान है। चुनाव आयोग यह कार्यवाही संविधान के अनुच्छेद-326, जन प्रतिनिधित्व अधिनियम और निर्वाचन पंजीकरण नियमावली 1960 के नियमों के अनुरूप कर रहा है । सवाल यह है कि जब चुनाव आयोग अपने संवैधानिक दायित्वों का पालन कर रहा है तो इससे लोकतंत्र की हत्या कैसे हो रही है और कैसे नागरिकों के अधिकार छीने जा रहे हैं । महाराष्ट्र में 40 लाख मतदाता बढ़ गए तो यही विपक्ष शोर मचा रहा था. अब चुनाव आयोग मतदाता सूची में सुधार करना चाहता है तो विपक्ष फिर शोर मचा रहा है । मतदाता सूची का विशेष पुनरीक्षण अब तक नौ बार हो चुका है और इसमें से दो बार को छोड़कर ये काम कांग्रेस के शासन में किया गया है । 58 सालों में जो काम 9 बार किया गया, अब वो काम 22 सालों में एक बार होने जा रहा है तो विपक्ष इतना परेशान क्यों है । जब नौ बार पहले किया गया तो ठीक था लेकिन अब ऐसा क्या हो गया है कि संविधान और लोकतंत्र खतरे में आ गया है । विपक्ष का कहना है कि करोड़ों लोगों के नाम मतदाता सूची से कट सकते हैं । अब सवाल यह है कि जो लोग 22 सालों में दुनिया छोड़ गए या बिहार छोड़कर चले गए, उनका नाम मतदाता सूची से क्यों नहीं हटना चाहिए । चुनाव आयोग ने ऐसे दस्तावेज प्रस्तुत करने का कहा है जिससे कि साबित हो कि आप 2003 के पहले से भारतीय नागरिक हैं । आधार और राशन कार्ड को इससे बाहर रखा गया है क्योंकि ये बड़ी आसानी से फर्जी बनाए जाते हैं । विपक्ष इन्हें ही शामिल करने को कह रहा है । वास्तव में सारा शोरशराबा इसलिए किया जा रहा है क्योंकि विपक्ष जानता है कि चुनाव आयोग की कार्यवाही से भारत में अवैध रूप से रह रहे घुसपैठिए मतदाता सूची से बाहर हो सकते हैं और भारत सरकार उनके खिलाफ आगे भी कार्यवाही कर सकती है । पूरा विपक्ष अवैध घुसपैठियों के बचाने के लिए मैदान में उतर आया है । सवाल फिर वही है कि जो लोग भारत की सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा हैं उनको बचाने की कोशिश क्यों की जा रही है । राजनीतिक फायदे के लिए देशहित की बलि क्यों दी जा रही है । अंत में इतना कहना चाहता हूं कि अवैध घुसपैठ, धर्मपरिवर्तन और तीव्र मुस्लिम जन्म दर एक दिन भारत का दूसरा विभाजन करवा सकती है । आजादी के बाद मुस्लिमों की आबादी नौ प्रतिशत से बढ़कर 16 प्रतिशत हो गई है । इसके लिए सिर्फ तीव्र मुस्लिम जन्मदर जिम्मेदार नहीं है बल्कि अवैध घुसपैठ और धर्मपरिवर्तन भी बड़ी वजह है । मुस्लिमों में कट्टरवाद और अलगाववाद बड़ी तेजी से बढ़ रहा है क्योंकि राजनीतिक दल इसे अपने लिए फायदेमंद मानते हैं। पहले अंग्रेजों ने हिन्दू-मुस्लिम भाईचारे को खत्म करके देश का विभाजन करवाया, अब यही काम हमारे देश के कुछ राजनीतिक दल कर सकते हैं। ये हमारी आदत है कि जब तक खतरा सिर पर नहीं आ जाता तब तक हम उसकी अनदेखी करते हैं। अभी खतरा दूर है लेकिन उसकी आहट महसूस की जा सकती है। राजेश कुमार पासी Read more » Why did the opposition parties stand with illegal intruders? अवैध घुसपैठियों के साथ विपक्षी दल