लेख भारत में गणतंत्र की ढाई हजार वर्ष पुरानी परंपरा January 24, 2026 / January 27, 2026 | Leave a Comment संदीप सृजन आधुनिक भारत ने 26 जनवरी 1950 को गणतंत्र व्यवस्था को स्वीकार कर अपने नीति नियम का लिखित कानून संविधान के रूप में लागू किया लेकिन भारत को दुनिया की सबसे पुरानी सभ्यताओं में से एक माना जाता है, और इसका राजनीतिक इतिहास भी उतना ही समृद्धता और विविधता लिए हुए है। भारत में गणतंत्र की अवधारणा ढाई हजार वर्ष […] Read more » भारत में गणतंत्र भारत में गणतंत्र की ढाई हजार वर्ष पुरानी परंपरा
कला-संस्कृति धर्म-अध्यात्म वसंत पंचमी : सरस्वती तत्व के जागरण का पर्व January 23, 2026 / January 23, 2026 | Leave a Comment संदीप सृजन वसंत पंचमी भारतीय संस्कृति का वह महापर्व है जो केवल ऋतु परिवर्तन का उत्सव नहीं, बल्कि मानव अंतःकरण में सरस्वती तत्व के जागरण का गहन आध्यात्मिक संदेश देता है। माघ मास की शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि पर मनाया जाने वाला यह त्योहार प्रकृति की बहार के साथ-साथ आत्मा की प्रज्ञा, बुद्धि और सृजनात्मक ऊर्जा के उदय का प्रतीक है। जब सर्दी की सुस्ती टूटती है और चारों ओर पीले सरसों के फूल खिल उठते हैं, तब यह पर्व हमें याद दिलाता है कि अज्ञान के अंधकार के बाद ज्ञान की किरणें कैसे फूटती हैं। यह पर्व सरस्वती तत्व के जागरण का उत्सव है, वह तत्व जो हमें मूक से वाग्मी, अंधेरे से प्रकाशित और स्थिर से सृजनशील बनाता है। सरस्वती तत्व केवल विद्या या ज्ञान तक सीमित नहीं है। यह वह दिव्य शक्ति है जो वाणी, बुद्धि, प्रज्ञा, स्मृति, संगीत, कला और सृजन की मूल ऊर्जा है। यह वह चेतना हैं जो सृष्टि की रचना के समय ब्रह्मा जी के मुख से प्रकट हुईं। देवी भागवत पुराण और अन्य ग्रंथों के अनुसार, जब ब्रह्मा जी ने सृष्टि रची तो उन्हें वाणी की आवश्यकता महसूस हुई। उनकी इच्छा से सरस्वती का प्रादुर्भाव हुआ। वे सफेद वस्त्रों में, वीणा लिए, हंस पर सवार होकर प्रकट हुईं। उनका यह रूप बताता है कि सरस्वती तत्व शुद्धता, सरलता और गहन अंतर्दृष्टि का प्रतीक है। हंस उनका वाहन इसलिए है क्योंकि हंस दूध और पानी को अलग कर सकता है, ठीक वैसे ही सरस्वती तत्व सत्य और असत्य, ज्ञान और अज्ञान को अलग करता है। सरस्वती तत्व का जागरण अर्थात् व्यक्ति के भीतर वह क्षमता जागृत होना जब वह केवल जानकारी इकट्ठा करने से आगे बढ़कर समझने, विश्लेषण करने, सृजन करने और अभिव्यक्त करने में सक्षम हो जाता है। यह तत्व जागृत होने पर व्यक्ति की वाणी में मधुरता आती है, बुद्धि में स्पष्टता, हृदय में करुणा और जीवन में सृजनात्मकता। वसंत पंचमी का नामकरण दो भागों से हुआ, वसंत (ऋतु का राजा) और पंचमी (पांचवीं तिथि)। यह वह दिन है जब प्रकृति में नवजीवन का संचार होता है। सर्दी की जड़ता के बाद कोपलें फूटती हैं, फूल खिलते हैं, पक्षी गाते हैं और हवा में मादक सुगंध फैलती है। ठीक इसी प्रकार आध्यात्मिक दृष्टि से यह दिन अंतःकरण में सरस्वती तत्व के जागरण का प्रतीक है। जब सर्दियों की ठंडक में सब कुछ स्थिर और निष्क्रिय हो जाता है, तब वसंत की पहली किरण अज्ञान की उस ठंडक को पिघलाती है। पीला रंग, जो सरसों के फूलों, सूर्य की किरणों और सरस्वती के वस्त्रों का रंग है, प्रकाश, उल्लास और प्रज्ञा का प्रतीक है। इस दिन पीले वस्त्र धारण करना, पीले व्यंजन बनाना और पीले फूल चढ़ाना केवल परंपरा नहीं, बल्कि सरस्वती तत्व को आमंत्रित करने का सूक्ष्म संदेश है। आध्यात्मिक व्याख्या में वसंत पंचमी को विद्या जयंती भी कहा जाता है। यह वह दिन है जब देवी सरस्वती का प्राकट्य हुआ और उन्होंने संसार को अज्ञान के अंधकार से मुक्ति दी। कई विद्वान इसे गुप्त नवरात्रि के पांचवें दिन से जोड़ते हैं, जहां साधना के दौरान प्रज्ञा का अवतरण होता है। पौराणिक कथाओं में वसंत पंचमी का उल्लेख विविध रूपों में मिलता है, जिनमें ब्रह्मा और सरस्वती की कथा के अनुसार सृष्टि रचना के समय ब्रह्मा जी को वाणी की आवश्यकता पड़ी। उनकी इच्छा से सरस्वती प्रकट हुईं। उन्होंने वेदों का उच्चारण किया और संसार को ज्ञान दिया। इसीलिए इस दिन को उनका जन्मदिन माना जाता है। एक और पौराणिक कथा कामदेव की पुनर्जीवन कथा है, जब शिव जी ने क्रोध में कामदेव को भस्म कर दिया था। रति की प्रार्थना पर वसंत पंचमी को कामदेव पुनर्जीवित हुए। यह कथा बताती है कि सरस्वती तत्व केवल बौद्धिक नहीं, बल्कि प्रेम और सृजन की ऊर्जा को भी जागृत करता है। ये कथाएं दर्शाती हैं कि सरस्वती तत्व सृष्टि का आधार है, बिना इसके न रचना संभव है, न अभिव्यक्ति। इस दिन की पूजा विधि स्वयं सरस्वती तत्व के जागरण को प्रेरित करती है, जैसे पीले वस्त्र और फूल, प्रज्ञा के प्रकाश का प्रतीक है। वीणा, पुस्तक और कलम की पूजा, सृजनात्मक अभिव्यक्ति के साधनों का सम्मान है। ज्ञान के प्रति समर्पण का भाव बनाए रखने को प्रेरित करता है। सरस्वती वंदना, भजन, वाणी को शुद्ध और प्रभावशाली बनाने की साधना है। वहीं संगीत, नृत्य और कला कार्यक्रम सरस्वती के विभिन्न रूपों का उत्सव है। बच्चे इस दिन पहली बार अक्षर लिखते हैं (विद्या आरंभ संस्कार), जो उनके भीतर सरस्वती तत्व के प्रथम जागरण का क्षण होता है। वसंत पंचमी हमें याद दिलाती है कि सच्चा विकास बाहरी नहीं, भीतरी है। जब सरस्वती तत्व जागृत होता है, तब व्यक्ति केवल जीवित नहीं रहता, जीवन को सार्थक और सुंदर बनाता है। वसंत पंचमी केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि सरस्वती तत्व के जागरण का महोत्सव है। यह हमें सिखाता है कि हर सर्दी के बाद वसंत आता है, हर अज्ञान के बाद ज्ञान की किरण फूटती है। आइए, इस पावन अवसर पर हम अपने भीतर की उस दिव्य शक्ति को जागृत करें जो हमें अंधकार से प्रकाश, मौन से वाणी और स्थिरता से सृजन की ओर ले जाती है। संदीप सृजन Read more » वसंत पंचमी
आलोचना बिलासपुर घटना: साहित्यिक मंच पर सत्ता का दुरुपयोग January 14, 2026 / January 14, 2026 | Leave a Comment मनोज रूपड़ा एक प्रतिष्ठित हिंदी साहित्यकार हैं जिनके कई कहानी संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं। उनकी रचनाएं अधिकांश भारतीय भाषाओं में अनुवादित हैं, और वे वनमाली कथा सम्मान, इंदु शर्मा कथा सम्मान, पाखी सम्मान जैसे पुरस्कारों से सम्मानित हैं। रूपड़ा छत्तीसगढ़ के दुर्ग-भिलाई क्षेत्र से जुड़े हैं और वर्तमान में चित्रकला में भी सक्रिय हैं। Read more »
राजनीति संगठन, अनुशासन और आत्मविश्वास का प्रतीक – राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ September 30, 2025 / September 30, 2025 | Leave a Comment आरएसएस की स्थापना का बीज 1925 में बोया गया, जब देश ब्रिटिश साम्राज्यवाद की चपेट में था। डॉ. हेडगेवार, एक चिकित्सक होने के साथ-साथ एक दूरदर्शी समाज सुधारक थे जिन्हें विनायक दामोदर सावरकर की हिंदुत्व पुस्तक ने गहराई से प्रभावित किया। उन्होंने महसूस किया कि हिंदू समाज की एकता की कमी ही देश को गुलाम बनाए रखने का कारण है। इसलिए, विजयादशमी के शुभ अवसर पर नागपुर के एक छोटे से मैदान में मात्र 15-20 युवाओं के साथ पहली शाखा शुरू की गई। Read more » अनुशासन और आत्मविश्वास का प्रतीक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ
लेख शख्सियत एकात्मता के जीवंत पर्याय: पंडित दीनदयाल उपाध्याय September 24, 2025 / September 24, 2025 | Leave a Comment -संदीप सृजन भारतीय चिंतन परंपरा में कुछ व्यक्तित्व ऐसे होते हैं जो न केवल एक विचारधारा के प्रणेता होते हैं, बल्कि पूरे समाज को एक नई दिशा प्रदान करते हैं। पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऐसे ही एक महान दार्शनिक, समाजसेवी और राजनीतिज्ञ थे, जिन्हें ‘एकात्मता’ का जीवंत पर्याय कहा जा सकता है। एक साधारण परिवार में जन्मे प. दीनदयाल उपाध्याय ने […] Read more » पंडित दीनदयाल उपाध्याय
लेख डिजिटल युग में शिक्षक की भूमिका हुई और अधिक महत्वपूर्ण September 4, 2025 / September 4, 2025 | Leave a Comment -संदीप सृजन डिजिटल युग ने शिक्षा के परिदृश्य को पूर्णतः परिवर्तित कर दिया है। पहले शिक्षक कक्षा में ब्लैकबोर्ड और पुस्तकों के माध्यम से ज्ञान प्रदान करते थे किन्तु आज वे डिजिटल उपकरणों, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और ऑनलाइन मंचों के साथ मिलकर छात्रों को भविष्य के लिए तैयार कर रहे हैं। आज जब हम डिजिटल परिवर्तन के शिखर […] Read more » डिजिटल युग में शिक्षक की भूमिका
राजनीति मोबाइल पर बजने वाला आरबीआई का संदेश बन रहा परेशानी का कारण June 8, 2025 / June 9, 2025 | Leave a Comment -संदीप सृजन भारतीय रिज़र्व बैंक देश की वित्तीय प्रणाली का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है, जो मौद्रिक नीतियों को लागू करने, मुद्रा प्रबंधन और वित्तीय जागरूकता बढ़ाने जैसे कार्यों के लिए जाना जाता है। हाल के वर्षों में, आरबीआई ने जनता को साइबर धोखाधड़ी और वित्तीय अपराधों के प्रति जागरूक करने के लिए कई अभियान शुरू […] Read more » आरबीआई का संदेश बन रहा परेशानी का कारण
लेख हिंदी पत्रकारिता उद्भव से लेकर डिजिटल युग तक May 31, 2025 / June 2, 2025 | Leave a Comment हिंदी पत्रकारिता दिवस (30 मई)विशेष- -संदीप सृजन हिंदी पत्रकारिता का इतिहास भारत के सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक परिदृश्य का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। यह न केवल सूचना का माध्यम है, बल्कि समाज को जागरूक करने, विचारों को प्रेरित करने और परिवर्तन की दिशा में एक उत्प्रेरक की भूमिका निभाता है। हिंदी पत्रकारिता ने अपने […] Read more » Hindi journalism from its origins to the digital age हिंदी पत्रकारिता
लेख शख्सियत समाज शौर्य, स्वाभिमान और पराक्रम के प्रतीक: महाराणा प्रताप May 28, 2025 / May 28, 2025 | Leave a Comment महाराणा प्रताप जयंती (29 मई) विशेष- संदीप सृजन महाराणा प्रताप का जीवन एक ऐसी प्रेरक गाथा है जो हर भारतीय को गर्व से भर देती है। उन्होंने अपने जीवन में कभी हार नहीं मानी और स्वतंत्रता के लिए अंतिम सांस तक संघर्ष किया। उनकी जयंती हमें न केवल उनके बलिदान को याद करने का अवसर […] Read more » self-respect and valor: Maharana Pratap Symbol of valor महाराणा प्रताप
राजनीति कई ओबीसी जातियों पर होगा क्रीमी लेयर और जाति गणना का प्रभाव May 27, 2025 / May 27, 2025 | Leave a Comment संदीप सृजन भारत में जाति आधारित जनगणना का मुद्दा लंबे समय से राजनीतिक और सामाजिक बहस का केंद्र रहा है। 1931 के बाद, भारत में व्यापक जाति जनगणना नहीं हुई है। 2011 की जनगणना में सामाजिक-आर्थिक और जाति सर्वेक्षण (SECC) किया गया था लेकिन इसके आंकड़े पूरी तरह से सार्वजनिक नहीं किए गए। हाल ही […] Read more » Creamy layer and caste census will have an impact on many OBC castes जाति गणना
राजनीति देश के खिलाफ भ्रामक जानकारी फैलाकर पहुंचा रहे हैं राष्ट्रीय हितों को नुकसान May 24, 2025 / May 26, 2025 | Leave a Comment संदीप सृजन जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुआ आतंकी हमला इस बात को साबित करता है कि कैसे बाहरी ताकतें और आंतरिक सहयोगी मिलकर देश को अस्थिर करने की साजिश रच रहे हैं। यह भारत के इतिहास में सबसे घातक आतंकी हमलों में से एक माना जा रहा है। इस हमले में शामिल दगाबाजों की भूमिका […] Read more » देश के खिलाफ भ्रामक जानकारी
राजनीति सेना की गरिमा को ठेस पहुंचाता डिप्टी सीएम का बयान May 17, 2025 / May 17, 2025 | Leave a Comment संदीप सृजन भारतीय राजनीति में नेताओं के विवादित बयान कोई नई बात नहीं हैं। समय-समय पर विभिन्न दलों के नेता अपनी टिप्पणियों के कारण सुर्खियों में आते हैं जिससे न केवल उनकी पार्टी को असहज स्थिति का सामना करना पड़ता है बल्कि समाज में भी तनाव और बहस का माहौल बनता है। हाल ही में […] Read more » Deputy CM's statement hurts the dignity of the army सेना की गरिमा को ठेस पहुंचाता डिप्टी सीएम का बयान