संदीप सृजन

संदीप सृजन

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राजनीति

पाकिस्तान की शर्मनाक हार और भारत की गौरवपूर्ण जीत

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संदीप सृजन पहलगाम हमले के बाद भारत की ओर से की गई सैन्य कार्रवाई  ने एक बार फिर भारत-पाकिस्तान की तरफ पूरे विश्व का ध्यान आकर्षित किया है। पहलगाम आतंकी हमले ने भारत को आक्रामक जवाबी कार्रवाई के लिए प्रेरित किया। इस हमले में पाकिस्तान समर्थित आतंकवादी संगठनों का हाथ पाया गया, जिसके बाद भारत ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ शुरू किया । इस टकराव में भारत की निर्णायक जीत और पाकिस्तान की शर्मनाक हार ने न केवल क्षेत्रीय शक्ति संतुलन को प्रभावित किया, बल्कि एक नाजुक युद्धविराम के माध्यम से दोनों देशों को शांति की ओर ले जाने का प्रयास भी किया। इस ऑपरेशन के तहत भारत ने पाकिस्तान के सैन्य ठिकानों, विशेष रूप से स्कर्दू, जकोबाबाद, सरगोधा और भुलारी जैसे हवाई अड्डों पर लक्षित हमले किए। भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के हवाई रक्षा तंत्र और रडार सिस्टम को नष्ट कर दिया जिससे पाकिस्तान की सैन्य क्षमता को गंभीर नुकसान पहुंचा। इसके साथ ही, भारत ने अपनी S-400 वायु रक्षा प्रणाली का उपयोग करके पाकिस्तान के ड्रोन और मिसाइल हमलों को नाकाम कर दिया। इस कार्रवाई ने न केवल भारत की सैन्य ताकत को प्रदर्शित किया, बल्कि पाकिस्तान की रणनीतिक कमजोरियों को भी उजागर किया। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ भारत की सैन्य रणनीति का एक उत्कृष्ट उदाहरण था। इस ऑपरेशन में भारतीय सेना ने न केवल पाकिस्तान के सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया बल्कि उनकी वायु रक्षा प्रणाली को भी ध्वस्त कर दिया। भारत ने लाहौर, सियालकोट, फैसलाबाद और मुल्तान जैसे शहरों में पाकिस्तान के रक्षा तंत्र को नष्ट किया, जिससे उनकी जवाबी कार्रवाई की क्षमता लगभग समाप्त हो गई। रहीम यार खान में हवाई अड्डे का रनवे भी भारतीय मिसाइल हमलों से क्षतिग्रस्त हो गया जिसने पाकिस्तान की वायुसेना को और कमजोर कर दिया। भारत ने अपनी ब्रह्मोस मिसाइलों और अन्य उन्नत हथियारों का उपयोग करके सटीक हमले किए। इन हमलों ने पाकिस्तान के सैन्य ढांचे को गंभीर नुकसान पहुंचाया, जबकि नागरिक क्षेत्रों को न्यूनतम क्षति हुई। पाकिस्तान के ड्रोन और मिसाइल हमलों को नाकाम करने में भारत की S-400 प्रणाली ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसने भारत की रक्षा क्षमता को मजबूत किया और पाकिस्तान के हमलों को विफल कर दिया। भारतीय खुफिया एजेंसियों ने पाकिस्तान के सैन्य ठिकानों और आतंकी लॉन्च पैड्स की सटीक जानकारी प्रदान की, जिसके आधार पर भारत ने अपने हमलों को अंजाम दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने न केवल सैन्य कार्रवाई की, बल्कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को अपने पक्ष में करने के लिए प्रभावी कूटनीति का सहारा लिया। अमेरिकी राष्ट्रपति और विदेश मंत्री की मध्यस्थता में युद्धविराम की प्रक्रिया शुरू हुई, जिसमें भारत की स्थिति मजबूत रही। भारतीय सेना की बहादुरी और रणनीतिक कौशल ने न केवल पाकिस्तान को घुटने टेकने पर मजबूर किया, बल्कि भारत की क्षेत्रीय शक्ति के रूप में स्थिति को और मजबूत किया। पाकिस्तान की इस हार ने उसकी सैन्य और रणनीतिक कमजोरियों को पूरी दुनिया के सामने ला दिया। पाकिस्तान के हवाई रक्षा तंत्र और रडार सिस्टम भारतीय हमलों के सामने पूरी तरह विफल रहे। कई सैन्य विश्लेषकों का मानना है कि पाकिस्तान ने अपनी सैन्य क्षमता को बढ़ाने के बजाय आतंकवादी संगठनों पर अधिक ध्यान केंद्रित किया, जिसका खामियाजा उसे इस युद्ध में भुगतना पड़ा। पाकिस्तान पहले से ही गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहा था। इस युद्ध ने उसकी अर्थव्यवस्था को और कमजोर कर दिया। कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार, पाकिस्तान ने भोजन और पानी जैसी बुनियादी जरूरतों के लिए भी अंतरराष्ट्रीय समुदाय से सहायता मांगी। पाकिस्तान ने इस संघर्ष के दौरान कई भ्रामक वीडियो और सूचनाएं फैलाईं जिनका उद्देश्य भारतीय जनता को गुमराह करना था। हालांकि, ये प्रयास असफल रहे और उल्टे पाकिस्तान की विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचा। पाकिस्तान के सांसदों और पत्रकारों के बीच इस हार को लेकर गहरा असंतोष देखा गया। कुछ X पोस्ट्स में दावा किया गया कि पाकिस्तानी नेता और पत्रकार लाइव टीवी पर रो रहे थे, जो उनकी हताशा को दर्शाता है। पाकिस्तान की सेना ने बाद में स्वीकार किया कि उनके एक विमान को मामूली नुकसान हुआ था, और उन्होंने भारतीय पायलट को हिरासत में लेने की खबरों का खंडन किया। यह उनकी हार को स्वीकार करने का एक अप्रत्यक्ष तरीका था। इन कारकों ने मिलकर भारत को इस संघर्ष में एक स्पष्ट विजेता बनाया। 10 मई 2025 को शाम 5 बजे से लागू हुए युद्धविराम ने इस तनावपूर्ण स्थिति को कुछ हद तक शांत किया हालांकि पाकिस्तान ने रात में गोलीबारी करके इस युद्धविराम का उल्लंघन किया, जिसके जवाब में भारत ने सख्त चेतावनी दी कि ऐसी हरकतों को युद्ध की कार्रवाई माना जाएगा। इसके बाद, अमेरिकी मध्यस्थता के तहत दोनों देशों के डीजीएमओ (डायरेक्टर जनरल ऑफ मिलिट्री ऑपरेशंस) के बीच बातचीत हुई, जिसके परिणामस्वरूप 11 मई की सुबह सीमावर्ती क्षेत्रों में स्थिति सामान्य होने लगी। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस युद्धविराम की सराहना करते हुए कहा कि दोनों देशों के नेताओं ने बुद्धिमानी दिखाई हालांकि, भारत ने स्पष्ट किया कि भविष्य में किसी भी आतंकी हमले को युद्ध की कार्रवाई माना जाएगा, जिससे पाकिस्तान पर दबाव बना रहा। जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा, सांबा, पुंछ, जम्मू, अखनूर और राजौरी जैसे क्षेत्रों में युद्धविराम के बाद जनजीवन धीरे-धीरे सामान्य होने लगा है। इस संघर्ष का प्रभाव केवल सैन्य और राजनीतिक क्षेत्र तक सीमित नहीं रहा। भारत में इस जीत ने राष्ट्रीय गौरव की भावना को बढ़ाया। बॉलीवुड और साउथ के सितारों जैसे जेनेलिया डी सूजा, अक्किनेनी नागार्जुन और समय रैना ने सोशल मीडिया पर भारतीय सेना की बहादुरी की सराहना की। X पर कई यूजर्स ने इस जीत को भारत की ताकत और पाकिस्तान की शर्मनाक हार के रूप में प्रचारित किया। दूसरी ओर, पाकिस्तान में इस हार ने आंतरिक असंतोष को बढ़ाया। सोशल मीडिया पर कुछ यूजर्स ने पाकिस्तानी नेतृत्व और सेना की आलोचना की, जबकि कुछ ने भारत की सैन्य शक्ति को स्वीकार किया। इस हार ने पाकिस्तान की जनता में निराशा और हताशा की भावना को जन्म दिया, जो उनकी आर्थिक और सामाजिक समस्याओं को और गहरा सकती है। इस संघर्ष और युद्धविराम के दीर्घकालिक प्रभाव कई स्तरों पर देखे जा सकते हैं जैसे भारत की इस जीत ने दक्षिण एशिया में उसकी स्थिति को और मजबूत किया है। पाकिस्तान की सैन्य कमजोरी उजागर होने से उसकी क्षेत्रीय प्रभावशीलता कम हुई है। भारत ने स्पष्ट किया है कि वह आतंकवाद के खिलाफ शून्य सहिष्णुता की नीति अपनाएगा। यह नीति भविष्य में पाकिस्तान को और दबाव में डाल सकती है। इस हार ने पाकिस्तान के आंतरिक संकट को और गहरा दिया है। यदि पाकिस्तान अपनी सैन्य और आर्थिक नीतियों में सुधार नहीं करता, तो उसकी स्थिरता और खतरे में पड़ सकती है।.इस युद्धविराम में अमेरिका की मध्यस्थता ने वैश्विक शक्तियों की भूमिका को रेखांकित किया। भविष्य में, भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव को कम करने में अंतरराष्ट्रीय समुदाय की भूमिका और महत्वपूर्ण हो सकती है। पहलगाम हमले के बाद हुआ भारत-पाकिस्तान सैन्य टकराव एक ऐतिहासिक घटना है, जिसने भारत की सैन्य और रणनीतिक श्रेष्ठता को प्रदर्शित किया। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के माध्यम से भारत ने न केवल पाकिस्तान के सैन्य ठिकानों को नष्ट किया, बल्कि उसकी रणनीतिक कमजोरियों को भी उजागर किया। पाकिस्तान की शर्मनाक हार ने उसके आंतरिक और बाहरी संकटों को और गहरा दिया जबकि भारत की जीत ने राष्ट्रीय गौरव और आत्मविश्वास को बढ़ाया। संदीप सृजन

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राजनीति

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को क्यों कहा ‘गीदड़’ ?

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संदीप सृजन पहलगाम हमले के बाद शुरु हुए भारत के ऑपरेशन सिंदूर से बोखलाये हुए पाकिस्तान की राजनीति में एक बार फिर से उथल-पुथल मची हुई है। हाल ही में पाकिस्तानी संसद में एक सांसद ने अपने ही देश के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को ‘गीदड़’ कहकर तीखा हमला बोला। यह बयान न केवल पाकिस्तान की आंतरिक राजनीति में अस्थिरता को दर्शाता है, बल्कि यह भी प्रदर्शित करता है कि देश के शीर्ष नेतृत्व पर उनके अपने लोगों का भरोसा डगमगा रहा है। इस घटना ने न केवल पाकिस्तान में, बल्कि भारत और वैश्विक स्तर पर भी चर्चा का विषय बन गया है। शुक्रवार को पाकिस्तानी संसद में एक सांसद, शाहिद अहमद खट्टक, ने प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ पर निशाना साधते हुए उन्हें ‘गीदड़’ कहा। सांसद ने यह भी आरोप लगाया कि शहबाज शरीफ भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नाम लेने से डरते हैं। यह बयान उस समय आया जब पाकिस्तान और भारत के बीच तनावपूर्ण संबंधों की पृष्ठभूमि में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ और ‘इंडिया-पाकिस्तान वॉर’ जैसे हैशटैग सोशल मीडिया पर ट्रेंड कर रहे है। सांसद ने अपने भाषण में कहा, “अगर सरदार गीदड़ हो तो जंग हारते हैं। बुजदिल सरदार सेना को क्या संदेश देगा?” इस बयान ने न केवल संसद में हंगामा मचाया, बल्कि पाकिस्तान की जनता और मीडिया में भी तीखी प्रतिक्रियाओं को जन्म दिया। यह पहली बार नहीं है जब पाकिस्तानी संसद में इस तरह का विवाद हुआ हो। इससे पहले भी, 2019 में बालाकोट हमले के बाद, एक सांसद ने तत्कालीन प्रधानमंत्री इमरान खान और सेना प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा की कथित कमजोरी पर टिप्पणी की थी। उस समय भी सांसद ने दावा किया था कि पाकिस्तानी नेतृत्व भारत के सामने घुटने टेक रहा था। इस बार का विवाद इसलिए और महत्वपूर्ण है क्योंकि यह शहबाज शरीफ के नेतृत्व और उनकी सरकार की विश्वसनीयता पर सीधा सवाल उठाता है।पाकिस्तान की राजनीति हमेशा से अस्थिरता और आंतरिक कलह का शिकार रही है। पाकिस्तान के सांसद का अपनी ही सरकार के प्रति असंतोष है। जो कि पाकिस्तानी सेना और नागरिक सरकार के बीच बढ़ते तनाव का परिणाम  है, क्योंकि सेना लंबे समय से देश की विदेश नीति और रक्षा नीति पर नियंत्रण रखती है।शहबाज शरीफ को पहले से ही एक कमजोर और समझौतावादी नेता के रूप में देखा जाता रहा है। इस बयान ने उनकी छवि को और नुकसान पहुंचाया है। पाकिस्तान जैसे देश में, जहां राष्ट्रवाद और भारत विरोधी भावनाएं राजनीति का एक बड़ा हिस्सा हैं, ‘गीदड़’ जैसे शब्द का इस्तेमाल शहबाज की विश्वसनीयता पर गहरा आघात करता है। यह बयान न केवल उनकी व्यक्तिगत छवि को प्रभावित करता है, बल्कि उनकी पार्टी, पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (पीएमएल-एन), की स्थिति को भी कमजोर करता है। सोशल मीडिया पर इस बयान ने आग में घी का काम किया। कई यूजर्स ने शहबाज शरीफ का मजाक उड़ाया और उनकी सरकार को ‘बुजदिल’ करार दिया। यह घटना पाकिस्तान की पहले से ही अस्थिर राजनीति को और जटिल बना सकती है। शहबाज शरीफ की सरकार पहले ही विपक्ष के लगातार हमलों का सामना कर रही है। इमरान खान और उनकी पार्टी पीटीआई लगातार सरकार पर भ्रष्टाचार, अक्षमता और सेना के सामने घुटने टेकने का आरोप लगाती रही है। इस बयान ने विपक्ष को एक नया हथियार दे दिया है, जिसका इस्तेमाल वे शहबाज सरकार को और कमजोर करने के लिए कर सकते हैं। इसके अलावा, यह बयान सेना और नागरिक सरकार के बीच संबंधों पर भी सवाल उठाता है। पाकिस्तान में सेना का राजनीति पर गहरा प्रभाव रहा है। सेना लंबे समय से भारत के प्रति कड़ा रुख अपनाने की पक्षधर रही है, और अगर शहबाज सरकार इस दिशा में थोड़ी नर्म पड़ती है। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ जैसे चल रहा है, दोनों देशों के बीच सैन्य या कूटनीतिक तनाव की स्थिति है। ऐसे में पाक सांसद के बयान ने इस धारणा को और मजबूत किया है कि पाकिस्तान का नेतृत्व भारत के सामने कमजोर पड़ रहा है। भारत में इस बयान को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कुछ भारतीय नेताओं और सोशल मीडिया यूजर्स ने इसे भारत की कूटनीतिक और सैन्य ताकत का सबूत बताया, जबकि कुछ ने इसे पाकिस्तान की आंतरिक कमजोरी का प्रतीक माना है। वैश्विक स्तर पर, यह घटना पाकिस्तान की छवि को और कमजोर करती है। पहले से ही आर्थिक संकट और आतंकवाद जैसे मुद्दों से जूझ रहा पाकिस्तान अब आंतरिक राजनीतिक अस्थिरता के कारण और चर्चा में है।पाकिस्तानी संसद में शहबाज शरीफ को ‘गीदड़’ कहे जाने की घटना केवल एक बयान नहीं, बल्कि पाकिस्तान की गहरी राजनीतिक और सामाजिक समस्याओं का प्रतीक है। यह बयान शहबाज शरीफ की सरकार की कमजोरी, विपक्ष के आक्रामक रवैये, और सेना-नागरिक सरकार के बीच तनाव को उजागर करता है। संदीप सृजन

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राजनीति

सीजफायर : भारत की कूटनीतिक और राजनयिक जीत

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संदीप सृजन पहलगाम में 22 अप्रैल 2025 को हुए आतंकी हमले में 25 भारतीय और एक नेपाली नागरिक की जान चली गई। इसके बाद भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया। इस हमले के जवाब में भारत ने 7 मई 2025 को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ शुरू किया, जिसके तहत पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में नौ आतंकी ठिकानों पर सटीक हवाई हमले किए गए। इस ऑपरेशन ने पाकिस्तान को हिलाकर रख दिया, इसके बाद भारत की कूटनीतिक और राजनयिक पहल ने पाकिस्तान को घुटनों पर ला दिया । इसी कारण सीजफायर स्थिति बन गई और ऑपरेशन सिंदूर को स्थगित करने का निर्णय भी लिया गया। जिसे पूरा विश्व भारत की बड़ी राजनयिक जीत के रूप में देखा जा रहा है। पहलगाम आतंकी हमले में आतंकियों ने तीर्थयात्रियों और स्थानीय नागरिकों को निशाना बनाया, जिसमें 26 लोग मारे गए। इस हमले की जिम्मेदारी जैश-ए-मोहम्मदऔर लश्कर-ए-तैयबा जैसे आतंकी संगठनों पर डाली गई, जिन्हें पाकिस्तान से समर्थन मिल रहा था। इस घटना ने पूरे भारत में आक्रोश की लहर पैदा कर दी। विशेष रूप से, हमले में कई नवविवाहित जोड़ों के पतियों की हत्या ने भावनात्मक रूप से देश को झकझोर दिया। एक ऐसी तस्वीर, जिसमें एक नवविवाहिता अपने पति की लाश के पास बैठी थी, उसके माथे का सिंदूर मिट चुका था और हाथों में मेहंदी के साथ खून के छींटे थे, ने पूरे देश को भावुक कर दिया। इस हमले के बाद भारत सरकार ने कड़ा रुख अपनाया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्पष्ट किया कि इस हमले के जिम्मेदार लोगों को बख्शा नहीं जाएगा। रक्षा मंत्रालय और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने तत्काल कार्रवाई की योजना बनानी शुरू की। भारत ने इस हमले को न केवल अपनी संप्रभुता पर हमला माना, बल्कि इसे मानवीय मूल्यों के खिलाफ एक कायराना कृत्य के रूप में देखा। 7 मई 2025 की मध्यरात्रि को भारत ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ शुरू किया, जिसका नाम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सुझाया था। इस ऑपरेशन का नाम इसलिए चुना गया क्योंकि पहलगाम हमले में आतंकियों ने कई महिलाओं को विधवा किया था, और सिंदूर भारतीय संस्कृति में सुहाग का प्रतीक है। यह ऑपरेशन भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना के संयुक्त प्रयासों का परिणाम था, जिसमें पाकिस्तान और पीओके में नौ आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया गया। ऑपरेशन सिंदूर के तहत भारत ने सटीक और नियंत्रित हमले किये। भारतीय वायुसेना ने सुखोई-30, राफेल फाइटर जेट्स और ब्रह्मोस तथा स्कैल्प मिसाइलों का उपयोग कर बहावलपुर, कोटली, मुजफ्फराबाद, मुरीदके और अन्य स्थानों पर आतंकी ठिकानों को नष्ट किया। इन हमलों में जैश-ए-मोहम्मद, लश्कर-ए-तैयबा और हिजबुल मुजाहिदीन के ठिकाने शामिल थे। भारत ने अपनी कार्रवाई को गैर-उत्तेजक रखा और किसी भी पाकिस्तानी सैन्य प्रतिष्ठान को निशाना नहीं बनाया। यह सुनिश्चित किया गया कि हमले केवल आतंकी ढांचों तक सीमित रहें। ऑपरेशन केवल 23 मिनट में पूरा हुआ, जो भारतीय सेना की तकनीकी क्षमता और रणनीतिक योजना को दर्शाता है।  रक्षा मंत्रालय ने इसे “केंद्रित, नपी-तुली और गैर-बढ़ावा देने वाली” कार्रवाई बताया। हमले में जैश-ए-मोहम्मद का बहावलपुर स्थित मरकज सुभान अल्लाह, लश्कर-ए-तैयबा का मुरीद के स्थित मरकज तैयबा और अन्य ठिकाने नष्ट किए गए। ये ठिकाने 2001 के संसद हमले, 2008 के मुंबई हमले और 2019 के पुलवामा हमले जैसे आतंकी कृत्यों से जुड़े थे। अनुमानित 80-100 आतंकी इसमें मारे गए, जिसमें जैश और लश्कर के कई वरिष्ठ कमांडर शामिल थे।जिससे पूरे पाकिस्तान में हड़कंप मच गया और पूरे देश में हाई-अलर्ट जारी किया गया। पाकिस्तानी सेना और सरकार में बौखलाहट देखी गई। ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान ने नियंत्रण रेखा पर अंधाधुंध गोलीबारी शुरू की, जिसके परिणामस्वरूप जम्मू-कश्मीर के पुंछ में 10 नागरिकों की मौत हो गई और 33 लोग घायल हुए। इसके अलावा, पाकिस्तान ने भारत के कई शहरों, जैसे श्रीनगर, जम्मू, पठानकोट, और चंडीगढ़ में ड्रोन और मिसाइल हमलों की कोशिश की, लेकिन भारत के S-400 एयर डिफेंस सिस्टम ने इन हमलों को नाकाम कर दिया। पाकिस्तान ने प्रचार युद्ध भी शुरू किया, जिसमें झूठे दावे किए गए, जैसे श्रीनगर एयरबेस पर हमला और भारतीय सैनिकों को बंदी बनाना। हालांकि, ये दावे बाद में झूठे साबित हुए। पाकिस्तानी सेना और ISI ने सोशल मीडिया के जरिए भ्रामक वीडियो और तस्वीरें फैलाईं, लेकिन भारत ने इनका तथ्य-जांच के साथ खंडन किया। ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत ने तुरंत कूटनीतिक मोर्चे पर काम शुरू किया। विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने 13 देशों के राजदूतों को ब्रीफिंग दी, जिसमें उन्होंने ऑपरेशन की आवश्यकता और सटीकता को स्पष्ट किया। भारत ने यह सुनिश्चित किया कि वैश्विक समुदाय को यह संदेश जाए कि यह कार्रवाई आतंकवाद के खिलाफ थी, न कि पाकिस्तान के खिलाफ युद्ध की शुरुआत। NSA अजीत डोभाल ने अमेरिका, रूस और अन्य प्रमुख देशों को स्पष्ट किया कि हमले केवल आतंकी ठिकानों पर किए गए। भारत ने अपनी प्रेस ब्रीफिंग में संयमित और तथ्य-आधारित भाषा का उपयोग किया। कर्नल सोफिया कुरैशी और विंग कमांडर व्योमिका सिंह जैसी महिला अधिकारियों द्वारा ब्रीफिंग देना भारत की संवेदनशीलता और समावेशिता का प्रतीक था।  पहलगाम हमले के बाद भारत ने सिंधु जल संधि को रद्द कर दिया, जिसने पाकिस्तान पर आर्थिक और कूटनीतिक दबाव बढ़ाया। भारत ने देशभर में 244 शहरों में सिविल डिफेंस मॉक ड्रिल आयोजित की, जिसने उसकी रक्षा तैयारियों को प्रदर्शित किया। कई देशों, विशेष रूप से अमेरिका और ब्रिटेन, ने भारत की कार्रवाई को आतंकवाद के खिलाफ उचित कदम माना। चीन ने पाकिस्तान का समर्थन किया, लेकिन भारत की कूटनीतिक सक्रियता ने चीन को खुलकर सामने आने से रोका। तुर्की ने पाकिस्तान को नौसैनिक समर्थन देने की कोशिश की, लेकिन भारत की शक्तिशाली नौसेना के सामने यह प्रभावहीन रहा। ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़े तनाव के बीच, सीजफायर की पहल पाकिस्तान की ओर से की गई। 10 मई 2025 को, दोनों देशों के बीच नियंत्रण रेखा पर गोलीबारी रोकने के लिए एक समझौता हुआ। जिसे भारत ने इसे अपनी शर्तों पर स्वीकार किया। अमेरिका ने इस प्रक्रिया में मध्यस्थ की भूमिका निभाई। विदेश मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, सीजफायर के लिए कोई पूर्व या पश्चात शर्त नहीं रखी गई थी। भारत ने यह भी स्पष्ट किया कि भविष्य में होने वाला कोई भी आतंकी हमला युद्ध का कृत्य माना जाएगा। इसके साथ ही, भारत ने सिंधु जल संधि को अस्थायी रूप से निलंबित रखा है। भारत द्वारा ऑपरेशन सिंदूर को स्थगित करने का निर्णय लिया गया, जिसे कई विशेषज्ञों ने भारत की राजनयिक परिपक्वता और रणनीतिक संयम का उदाहरण माना। संयुक्त राष्ट्र और अन्य वैश्विक शक्तियों ने दोनों देशों से संयम बरतने की अपील की। भारत ने वैश्विक मंच पर अपनी कार्रवाई को आतंकवाद के खिलाफ न्यायोचित ठहराया, जिससे पाकिस्तान अलग-थलग पड़ गया।भारत ने यह स्पष्ट किया कि ऑपरेशन का स्थगन स्थायी नहीं है और यदि आतंकी गतिविधियां दोबारा शुरू हुईं, तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इस निर्णय ने भारत की छवि को एक जिम्मेदार और शांति-प्रिय राष्ट्र के रूप में मजबूत किया। ऑपरेशन सिंदूर और उसके बाद के घटनाक्रम ने भारत की कूटनीतिक और राजनयिक क्षमता को विश्व मंच पर प्रदर्शित किया। आतंकवाद के खिलाफ मजबूत संदेश देते हुए भारत ने स्पष्ट किया कि वह आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति अपनाएगा। भारत की इस सक्रिय कूटनीति ने उसे अंतरराष्ट्रीय समुदाय का समर्थन दिलाया, जबकि पाकिस्तान को झूठे प्रचार के लिए आलोचना झेलनी पड़ी। भारत ने सैन्य ताकत का प्रदर्शन किया, लेकिन साथ ही कूटनीतिक संयम दिखाकर युद्ध की संभावना को टाला। ऑपरेशन सिंदूर और सिंधु जल संधि के रद्द होने से पाकिस्तान आर्थिक और कूटनीतिक रूप से कमजोर हुआ। ऑपरेशन सिंदूर और उसके बाद भारत-पाकिस्तान सीजफायर भारत की रणनीतिक, सैन्य और कूटनीतिक शक्ति का प्रतीक है। पहलगाम हमले का जवाब देने के लिए शुरू किया गया यह ऑपरेशन न केवल आतंकवाद के खिलाफ भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाता है, बल्कि वैश्विक मंच पर उसकी राजनयिक परिपक्वता को भी उजागर करता है। सीजफायर और ऑपरेशन के स्थगन ने भारत को एक जिम्मेदार और शक्तिशाली राष्ट्र के रूप में स्थापित किया, जो न केवल अपनी सुरक्षा के लिए कठोर कदम उठा सकता है, बल्कि शांति और स्थिरता के लिए संयम भी बरत सकता है। यह घटनाक्रम भारत-पाकिस्तान संबंधों में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है, बशर्ते पाकिस्तान आतंकवाद को समर्थन देना बंद करे और क्षेत्रीय शांति के लिए सकारात्मक कदम उठाए। संदीप सृजन

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धर्म-अध्यात्म

अक्षय तृतीया: जीवन को समृद्ध और सार्थक बनाने का पर्व

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–संदीप सृजन वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि जिसे अक्षय तृतीया या आखा तीज कहा जाता है, भारतीय संस्कृति और हिन्दू धर्म में एक अत्यंत महत्वपूर्ण और पवित्र पर्व है। यह अक्षय तृतीया का नाम ‘अक्षय’ शब्द से लिया गया है, जिसका अर्थ है ‘जो कभी नष्ट न हो’ या ‘शाश्वत’। इस दिन किए गए शुभ कार्य, दान, पूजा-पाठ और अन्य धार्मिक कृत्यों को अक्षय फलदायी माना जाता है। यह पर्व न केवल धार्मिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक परम्पराओं में भी इसका विशेष स्थान है। भारत की विभिन्न धार्मिक और सामाजिक परम्पराओं में अक्षय तृतीया का बहुत महत्व है। हिंदू धर्म में अक्षय तृतीया हिन्दू धर्म में अक्षय तृतीया का दिन कई पौराणिक और धार्मिक घटनाओं से जुड़ा हुआ है। इस दिन को सतयुग और त्रेतायुग के प्रारंभ का दिन भी माना जाता है। इसके अतिरिक्त, इस तिथि से जुड़े कई कथानक और मान्यताएँ इसे और भी पवित्र बनाती हैं। अक्षय तृतीया को भगवान विष्णु के छठे अवतार, परशुराम जी के जन्मदिवस के रूप में भी मनाया जाता है। परशुराम, जो अपने पराक्रम और धर्म की रक्षा के लिए जाने जाते हैं। पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान विष्णु के नर-नारायण अवतार की तपस्या भी अक्षय तृतीया के दिन से जुड़ी है। इस दिन बद्रीनाथ मंदिर के कपाट खुलते हैं, जो हिन्दुओं के चार धामों में से एक है। यह घटना इस पर्व को और भी महत्वपूर्ण बनाती है। ऐसा माना जाता है कि महर्षि वेदव्यास ने महाभारत की रचना अक्षय तृतीया के दिन से शुरू की थी। इसके साथ ही, इस दिन गंगा नदी का पृथ्वी पर अवतरण भी हुआ था। इसलिए, इस दिन गंगा स्नान और दान का विशेष महत्व है। एक अन्य कथा के अनुसार, इस दिन भगवान श्रीकृष्ण ने अपने मित्र सुदामा का आतिथ्य स्वीकार किया था। सुदामा ने श्रीकृष्ण को साधारण चावल (अक्षत) भेंट किए, जिसे भगवान ने बड़े प्रेम से ग्रहण किया और सुदामा को अपार धन-समृद्धि प्रदान की। इस कथा के कारण, अक्षय तृतीया को दान और आतिथ्य का विशेष महत्व दिया जाता है। जैन धर्म में अक्षय तृतीया जैन धर्म में अक्षय तृतीया का दिन प्रथम तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव से जुड़ा हुआ है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान ऋषभदेव ने एक वर्ष तक कठोर तपस्या की और इस दिन हस्तिनापुर में राजा श्रेयांस ने उन्हें इक्षु रस (गन्ने का रस) पिलाकर उनका पारणा (उपवास खोलना) कराया। यह घटना जैन समुदाय में ‘वर्षी तप’ के रूप में जानी जाती है। इस दिन जैन तीर्थ पालिताणा (गुजरात) और हस्तिनापुर (मेरठ) में विशेष आयोजन होते है। जैन धर्म के अनुयायी उपवास, दान, और पूजा करते हैं। कई जैन मंदिरों में विशेष आयोजन किए जाते हैं, और भक्त इक्षु रस का दान करते हैं। सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व अक्षय तृतीया का  दिन शुभ कार्यों के लिए अत्यंत मंगलकारी माना जाता है। इस दिन बिना किसी मुहूर्त के विवाह, सगाई, गृह प्रवेश, नए व्यवसाय की शुरुआत, और अन्य महत्वपूर्ण कार्य किए जाते हैं। ऐसा माना जाता है कि इस दिन शुरू किए गए कार्यों का फल स्थायी और शुभ होता है। भारत के कई हिस्सों में, विशेषकर राजस्थान, गुजरात, और उत्तर प्रदेश में, अक्षय तृतीया को विवाह के लिए सबसे शुभ दिन माना जाता है। इस दिन हजारों जोड़े विवाह बंधन में बंधते हैं। सामाजिक स्तर पर, यह दिन परिवारों और समुदायों को एकजुट करने का अवसर प्रदान करता है। व्यापारी वर्ग के लिए अक्षय तृतीया का विशेष महत्व है। इस दिन नए व्यवसाय की शुरुआत, दुकान का उद्घाटन, और निवेश जैसे कार्य किए जाते हैं। सोने और चाँदी की खरीदारी भी इस दिन बहुत लोकप्रिय है, क्योंकि यह धन-समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। अक्षय तृतीया को दान-पुण्य का विशेष महत्व है। इस दिन जल, अन्न, वस्त्र, और धन का दान करने की परम्परा है। सामाजिक दृष्टिकोण से, यह दिन समाज में समानता और सहायता की भावना को बढ़ावा देता है। गरीबों और जरूरतमंदों को भोजन और अन्य आवश्यक वस्तुएँ दान की जाती हैं। कृषि और ग्रामीण परम्पराएँ भारत के ग्रामीण क्षेत्रों में, अक्षय तृतीया का संबंध कृषि और प्रकृति से है। इस दिन किसान अपने खेतों में पूजा करते हैं और अच्छी फसल के लिए प्रार्थना करते हैं। उत्तर भारत में, विशेषकर राजस्थान और मध्य प्रदेश में, इस दिन ‘आखा तीज’ के रूप में खेतों में सामूहिक उत्सव मनाए जाते हैं। किसान अपने बैलों और कृषि उपकरणों की पूजा करते हैं, और सामुदायिक भोज का आयोजन करते हैं। अक्षय तृतीया सामाजिक एकता और उत्सव का प्रतीक भी है। इस दिन लोग अपने परिवार और मित्रों के साथ मिलकर उत्सव मनाते हैं। विभिन्न क्षेत्रों में मेले और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। उदाहरण के लिए, राजस्थान के कुछ हिस्सों में लोक नृत्य और गीतों के साथ उत्सव मनाया जाता है। भारत की विविध सांस्कृतिक और धार्मिक परम्पराओं के कारण, अक्षय तृतीया को अलग-अलग क्षेत्रों में विभिन्न रूपों में मनाया जाता है। अक्षय तृतीया भारतीय संस्कृति का एक ऐसा पर्व है, जो धार्मिक, सामाजिक, और सांस्कृतिक दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह दिन न केवल भक्ति और पूजा का अवसर प्रदान करता है, बल्कि सामाजिक एकता, परोपकार, और शुभ कार्यों की शुरुआत का प्रतीक भी है। हिन्दू, जैन, और अन्य समुदायों में इस पर्व का अलग-अलग रूपों में उत्सव मनाया जाता है, जो भारत की सांस्कृतिक विविधता को दर्शाता है। चाहे वह भगवान परशुराम की पूजा हो, सुदामा-कृष्ण की मित्रता का स्मरण हो, या जैन धर्म में वर्षी तप का आयोजन, अक्षय तृतीया हर रूप में अक्षय फलदायी है। यह पर्व हमें यह सिखाता है कि सच्चे मन से किए गए कार्य और दान कभी नष्ट नहीं होते बल्कि वे हमारे जीवन को समृद्ध और सार्थक बनाते हैं। संदीप सृजन

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