कला-संस्कृति धर्म-अध्यात्म लोकगीतों की रंगभरी होली February 25, 2026 / February 25, 2026 | Leave a Comment शम्भू शरण सत्यार्थी होली केवल एक त्योहार नहीं है। यह भारतीय लोकजीवन का जीवंत महाकाव्य है। यह रंगों का उत्सव अवश्य है पर उससे कहीं अधिक यह सामूहिक स्मृति, सांस्कृतिक निरंतरता और मानवीय संबंधों का पुनर्जागरण है। शहरों में होली एक दिन का आयोजन हो सकती है, पर गाँवों में यह पूरे फागुन का स्पंदन […] Read more » Holi full of folk songs होली
समाज शक की बीमारी : प्रेम से हत्या तक का खौफनाक सफ़र February 19, 2026 / February 19, 2026 | Leave a Comment शम्भू शरण सत्यार्थी एक अख़बार की सुर्ख़ी है— “हफ्ते भर तक काट-काटकर जलाता रहा पत्नी का शव”. यह पंक्ति पढ़ते ही रोंगटे खड़े हो जाते हैं. सोच पाना भी कठिन है कि कोई इंसान, जो कभी किसी औरत को अपनी कहकर दुनिया से लड़ने का दावा करता था, वही इंसान शक की आग में इतना […] Read more » शक की बीमारी
धर्म-अध्यात्म शख्सियत संत रविदास : नैतिक चेतना और आज का भारतीय समाज January 30, 2026 / January 30, 2026 | Leave a Comment रविदास जयंती – 1 फरवरी शम्भू शरण सत्यार्थी जब भारतीय समाज अपने लोकतांत्रिक दावों और सामाजिक यथार्थ के बीच फँसा दिखाई देता है, तब संत रविदास का स्मरण केवल अतीत की ओर देखना नहीं बल्कि वर्तमान की कठोर समीक्षा करना भी है। संत रविदास उस परंपरा के संत नहीं हैं जिन्हें केवल भक्ति के दायरे […] Read more » संत रविदास
मीडिया शख्सियत समाज सच्चे पत्रकार मार्क टली को विनम्र श्रद्धांजलि January 27, 2026 / January 27, 2026 | Leave a Comment शम्भू शरण सत्यार्थी अचानक विलियम मार्क टली का नाम सुनते ही समय जैसे पीछे लौट गया। नई दिल्ली में उनके निधन की खबर आई और उसके साथ ही पत्रकारिता के एक पूरे युग के अंत का एहसास हुआ। यह सिर्फ़ किसी एक वरिष्ठ पत्रकार के जाने की सूचना नहीं थी, बल्कि उस भरोसे, उस नैतिकता और उस […] Read more » विलियम मार्क टली
लेख गणतंत्र के सामने चुनौतियाँ : हमारा दायित्व January 25, 2026 / January 27, 2026 | Leave a Comment शम्भू शरण सत्यार्थी गणतंत्र केवल शासन-प्रणाली का नाम नहीं है, यह एक जीवित चेतना है जो नागरिकों के आचरण, सोच और साहस से जीवित रहती है। 26 जनवरी 1950 को भारत ने स्वयं को गणराज्य घोषित करते हुए यह संकल्प लिया था कि सत्ता किसी व्यक्ति, वंश या वर्ग की बपौती नहीं होगी, बल्कि जनता […] Read more » गणतंत्र के सामने चुनौतियाँ
लेख समाज स्वास्थ्य-योग पैसे के अभाव में दम तोड़ते लोग January 7, 2026 / January 7, 2026 | Leave a Comment आर्थिक तंगी और अधूरा इलाज Read more » People dying due to lack of money आर्थिक तंगी और अधूरा इलाज पैसे के अभाव में दम तोड़ते लोग
लेख स्वास्थ्य-योग पैसे के अभाव में दम तोड़ते लोग December 11, 2025 / December 17, 2025 | Leave a Comment इस देश में स्वास्थ्य सेवाएँ हमेशा से एक बड़ी चुनौती रही है.यहाँ पर करोड़ों लोग गाँवों और कस्बों में रहते हैं, जहाँ बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाएँ तक ठीक से उपलब्ध नहीं हैं. शहरों में आधुनिक अस्पताल तो हैं, लेकिन वहाँ इलाज इतना महँगा है कि Read more » पैसे के अभाव में दम तोड़ते लोग
लेख जल-जंगल-जमीन: हमारे अस्तित्व की अंतिम लड़ाई December 2, 2025 / December 2, 2025 | Leave a Comment मनुष्य ने जब पहली बार धरती का सीना चीरकर खेती शुरू की, जब उसने बीज बोकर जीवन को सम्भालना सीखा. उसने पेड़ों की छाया और नदियों के किनारे सभ्यताएँ बसाईं. Read more » and Land: The Final Battle for Our Survival Forest water जल-जंगल-जमीन
सिनेमा लोककला की ‘अमर ज्योति’ बिजली रानी को भावपूर्ण श्रद्धांजलि November 13, 2025 / November 13, 2025 | Leave a Comment बिहार के गाँव-देहात से लेकर कस्बों और नगरों तक जब रात ढलने लगती थी और गाँव के चौपाल, हाट या स्कूल के मैदान में रंग-बिरंगी रोशनी के बीच मंच सजा होता था Read more » बिजली रानी
राजनीति बिहार में चुनावी भाषणों का स्तर — उठेगा या और गिरेगा ? October 17, 2025 / October 17, 2025 | Leave a Comment शम्भू शरण सत्यार्थी कभी राजनीति विचारों का उत्सव हुआ करती थी। नेताओं के भाषणों में न केवल मत मांगने की भाषा होती थी बल्कि जनता को सोचने, समझने और जागरूक होने का निमंत्रण भी होता था। वो दौर था जब एक नेता का भाषण लोकशिक्षा का माध्यम होता था जहाँ नारे नहीं, तर्क गूँजते थे; […] Read more » The level of election speeches in Bihar
लेख गाँव और शहर का रिश्ता कैसा हो September 19, 2025 / September 20, 2025 | Leave a Comment शम्भू शरण सत्यार्थी मनुष्य का जीवन केवल उसके व्यक्तिगत अस्तित्व तक सीमित नहीं है. वह अपने आसपास के समाज, संस्कृति और वातावरण से गहराई से जुड़ा हुआ है। मानव सभ्यता की यात्रा आरम्भ से लेकर आज तक एक लम्बा और संघर्षपूर्ण इतिहास समेटे हुए है। इस यात्रा में गाँव और शहर दोनों की अपनी-अपनी भूमिका […] Read more »
राजनीति निवेश का नया दौर : भारत और चीन के बीच संभावनाओं की दिशा September 9, 2025 / September 9, 2025 | Leave a Comment शम्भू शरण सत्यार्थी आज की दुनिया उस मोड़ पर खड़ी है जहाँ कोई भी देश अपने दम पर लंबे समय तक आर्थिक विकास नहीं कर सकता। संसाधन कहीं और हैं, तकनीक कहीं और है और बाजार कहीं और। इस आपसी निर्भरता ने वैश्विक निवेश और साझेदारी को मजबूरी ही नहीं बल्कि आवश्यकता भी बना दिया […] Read more » A new era of investment: The direction of possibilities between India and China भारत और चीन के बीच संभावनाओं की दिशा