रोहित पाण्डेय

स्वतंत्र लेखक

क्या वाकई खुश है बांग्लादेश ?

क्या वाकई खुश है बांग्लादेश ? – रोहित पाण्डेय – पूर्णतः घटना एक सामाजिक प्रतिबिम्ब है जो यह दिखाता है कि समाज किस दिशा में अग्रसर है । धर्म से बढ़ कर धर्म की रक्षा करना कर्तव्यता का मानक है ,पर वही यदि धर्म की रक्षा से मनावत का रुन्दन हो तो धर्म की मान्यता समाप्त हो जाती है ।