लेख भीम का पुत्र “घटोत्कच” एक अर्ध-राक्षस April 6, 2026 / April 6, 2026 | Leave a Comment वह दूसरों की तरह “युद्ध” के मैदान में योद्धा नहीं था। उसने कर्ण को अपने मुख्य हथियार (शक्ति) का इस्तेमाल करने के लिए मजबूर किया जिसे कर्ण ने अर्जुन Read more » घटोत्कच
राजनीति डॉ.आंबेडकर को सही परिप्रेक्ष्य में समझने की आवश्यकता ! December 23, 2024 / December 23, 2024 | Leave a Comment डॉ सुधाकर कुमार मिश्रा डॉ आंबेडकरजी भारतीय राजनीति के महान नेता थे। भारत के स्वतंत्रता के समय आंबेडकर जी सामाजिक परिवर्तन चाहते थे, सामाजिक परिवर्तन के पुरोधा समाज की दुरावस्था एवं सामाजिक कुरीतियों को देखकर आत्मा से दु:खी थे और उनको बदलने के लिए प्रयत्नशील थे । उनके सामाजिक कार्यक्रमों में तत्कालीन कांग्रेस ने रोड़ा लगाया था। कांग्रेस के सन् 1886 के दुसरे अधिवेशन में तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष श्री दादाभाई नौरोजी ,जो भारत के व्यवृद्ध व्यक्ति थे और उदारवादी नेता थे ने कहा था कि कांग्रेस संगठन को अपना ध्यान राजनीतिक विषयों पर देना चाहिए। सन् 1887 के मद्रास अधिवेशन के समय भी कांग्रेस अध्यक्ष श्री बदरुद्दीन तैय्यब जी ने कहा कि कांग्रेस के कार्यकर्ता अपने आपको सामाजिक समस्याओं से अलग रखें। डॉ आंबेडकर जी ने अपना ध्यान बाल – विवाह , अछूतोद्धार,स्त्री वर्ग की प्रगति, अस्पृश्यता तथा अन्य रूढ़ियों के समाप्त करने का कार्य किया। यह महत्वपूर्ण तथ्य है कि जिन लोगों ने स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात सत्ता प्राप्त किए , वे समाज सुधार से कोसों दूर चले गए। आंबेडकर जी का कहना था कि “मैं सामाजिक सुधार को राजनीतिक सुधार की अपेक्षा अधिक मौलिक मानता हूं।” वर्तमान में गृह मंत्री श्री अमित शाह जी के बयान को अंबेडकर जी का अपमान क्यों माना जा रहा है? इससे भाजपा की दलित राजनीति कैसे प्रभावित हो सकती है? यदि ईश्वर शोषण से मुक्ति देनेवाला है तो डॉक्टर अंबेडकर जी जाति व्यवस्था में बटे भारतीय समाज के उन करोड़ों लोगों के ईश्वर हैं जिन्होंने सदियों तक सामाजिक, आर्थिक ,राजनीतिक और शैक्षणिक भेदभाव झेला है। ईश्वर वह है जो जीवन की गुणवत्ता ,समानता एवं औषधि प्रदान करता है ।अंबेडकर जी ने दलित वर्गों के लिए अति प्रसंसनीय कार्य किया है ,यही कारण है कि अंबेडकर जी की विचारधारा से जुड़े और दलित राजनीति से जुड़े लोग अमित शाह के इस बयान को अंबेडकर जी के अपमान के रूप में देख रहे हैं। समकालीन में सभी राजनीतिक दलों को अंबेडकर जी को अपनाने की होड़ मची है और राजनीतिक दल अंबेडकर जी के विचारों को क्रियान्वित करने के बजाय उनकी पहचान को इस्तेमाल कर दलित मतदाताओं को अपने राजनीतिक लाभ के लिए उपयोग कर रहे है। […] Read more » आंबेडकर