धर्म-अध्यात्म मकर संक्रांति : भारतीय संस्कृति का शाश्वत महापर्व January 14, 2026 / January 14, 2026 | Leave a Comment भारतीय संस्कृति पर्वों और उत्सवों की संस्कृति है। यहां प्रत्येक पर्व केवल उत्सव नहीं, बल्कि जीवन-दर्शन, प्रकृति से संवाद और आत्मचिंतन का माध्यम है। इन्हीं पर्वों में मकर संक्रांति का विशेष स्थान है। यह पर्व सूर्य, प्रकृति और मानव जीवन के गहरे संबंधों को दर्शाता है। मकर संक्रांति केवल एक तिथि या धार्मिक अनुष्ठान नहीं Read more » मकर संक्रांति
मनोरंजन सोशल मीडिया : वरदान भी, अभिशाप भी December 29, 2025 / December 29, 2025 | Leave a Comment आज वृद्ध, युवा और बालक—सभी वर्गों के लोग अपने समय का बड़ा हिस्सा मोबाइल स्क्रीन पर बिताने लगे हैं। पारिवारिक संवाद, सामाजिक मेल-जोल और वास्तविक जीवन की संवेदनाएँ धीरे-धीरे आभासी दुनिया में सिमटती जा रही हैं। Read more » सोशल मीडिया
समाज भाई दूर, पड़ोसी नेड़े — आधुनिक जीवन में पड़ोसी संबंधों की प्रासंगिकता December 27, 2025 / December 27, 2025 | Leave a Comment आधुनिक और तथाकथित उन्नत जीवन-शैली में पड़ोसी संबंध लगातार कमजोर होते जा रहे हैं। महानगरों की ऊँची-ऊँची इमारतों में लोग वर्षों तक साथ रहते हैं, फिर भी एक-दूसरे का नाम तक नहीं जानते। ऊपर-नीचे या अगल-बगल की मंज़िलों में रहने वाले लोग केवल औपचारिक ‘नमस्ते’ तक सीमित रह गए हैं। Read more » पड़ोसी संबंधों की प्रासंगिकता
विश्ववार्ता बांग्लादेश में अस्थिरता, अंतरिम सरकार और भारत विरोध की गहरी साजिश December 23, 2025 / December 23, 2025 | Leave a Comment आज बांग्लादेश के प्रबुद्ध नागरिकों, बुद्धिजीवियों, शिक्षाविदों और राष्ट्रहितैषी वर्ग की जिम्मेदारी बनती है कि वे जनता को सच्चाई से अवगत कराएँ। उन्हें यह समझाना होगा कि भारत से बैर नहीं, बल्कि सहयोग ही बांग्लादेश के हित में है। लोकतंत्र, शांति और विकास तभी संभव है जब कट्टरपंथ और नफरत की राजनीति को नकारा जाए। Read more » बांग्लादेश में अस्थिरता
धर्म-अध्यात्म भारतीय वैदिक संस्कृति में सोलह संस्कार: जीवन को वैज्ञानिक और नैतिक दिशा देने वाली परंपरा December 17, 2025 / December 17, 2025 | Leave a Comment जातकर्म, नामकरण और निष्क्रमण संस्कार शिशु के जन्मोपरांत उसके स्वास्थ्य, सामाजिक पहचान और बाह्य संसार से परिचय से जुड़े हैं। नामकरण केवल पहचान नहीं, बल्कि व्यक्तित्व निर्माण की प्रथम सीढ़ी है। मनोविज्ञान भी मानता है कि नाम व्यक्ति के आत्मबोध और सामाजिक व्यवहार को प्रभावित करता है। Read more » जीवन को वैज्ञानिक और नैतिक दिशा देने वाली परंपरा भारतीय वैदिक संस्कृति में सोलह संस्कार
बच्चों का पन्ना मनोरंजन सोशल मीडिया और बच्चे : बढ़ती लत, गहराता संकट December 13, 2025 / December 13, 2025 | Leave a Comment भारत भी इस चुनौती से अछूता नहीं है। यहाँ स्थिति और भी जटिल है क्योंकि डिजिटल उपकरणों की पहुँच अब गांव-गांव तक हो चुकी है। बच्चे जिस उम्र में खेलकूद, मित्रता, रचनात्मकता और अध्ययन में रमना चाहिए, वह समय अब अनियंत्रित स्क्रीन टाइम की भेंट चढ़ रहा है। मोबाइल फोन आज बच्चों का मनोरंजन साधन नहीं, बल्कि दिनचर्या का प्रमुख हिस्सा बन गया है। Read more » सोशल मीडिया और बच्चे
विश्ववार्ता शेख हसीना को सजा: बांग्लादेश के लोकतंत्र पर गहरा आघात और भारत के लिए गंभीर चिंता November 18, 2025 / November 18, 2025 | Leave a Comment बांग्लादेश की वर्तमान राजनीतिक स्थिति गहरी चिंता उत्पन्न करने वाली हैं। शेख हसीना को सुनाई गई फांसी की सजा केवल न्यायिक निर्णय नहीं, बल्कि एक बड़े राजनीतिक षड्यंत्र का हिस्सा प्रतीत होती है। Read more » शेख हसीना को सजा
लेख ईर्ष्या : मनुष्य के भीतर जलती अदृश्य आग October 6, 2025 / October 6, 2025 | Leave a Comment ईर्ष्या का भाव सामान्यतः तब जन्म लेता है, जब मनुष्य स्वयं को दूसरों से कमतर महसूस करने लगता है। जब किसी का साथी, पड़ोसी, सहकर्मी या परिचित व्यक्ति किसी क्षेत्र में आगे बढ़ता है, तो ईर्ष्यालु व्यक्ति का मन भीतर ही भीतर सुलग उठता है। यह सुलगन धीरे-धीरे उसकी सोच, व्यवहार और दृष्टिकोण को विषाक्त बना देती है। Read more » : मनुष्य के भीतर जलती अदृश्य आग ईर्ष्या
खान-पान खाने में मिलावट से भी घातक: थूक लगाकर रोटियाँ परोसने की भयावह प्रवृत्ति September 26, 2025 / September 26, 2025 | Leave a Comment देश के अलग-अलग हिस्सों से आए दिन ऐसी घटनाएँ सामने आ रही हैं, जो समाज को अंदर तक झकझोर देती हैं। भोजनालयों, ढाबों और होटलों में ग्राहकों को परोसे जाने वाले भोजन की स्वच्छता और पवित्रता पर हमेशा से सवाल उठते रहे हैं। लेकिन हाल के वर्षों में जिस तरह से “थूक लगाकर रोटी” परोसने […] Read more » Deadlier than food adulteration: The horrific trend of spitting on rotis थूक लगाकर रोटियाँ परोसने की प्रवृत्ति
शख्सियत समाज साक्षात्कार पंडित दीनदयाल उपाध्याय : एकात्म मानववाद और अंत्योदय के प्रणेता September 25, 2025 / September 25, 2025 | Leave a Comment भारत के राजनीतिक, सामाजिक और वैचारिक इतिहास में पंडित दीनदयाल उपाध्याय का नाम एक ऐसे महापुरुष के रूप में लिया जाता है, जिन्होंने भारतीय चिंतन की जड़ों से जुड़कर आधुनिक युग के लिए एक नई दिशा प्रस्तुत की। उनका जन्म 25 सितम्बर 1916 को मथुरा जनपद के नगला चंद्रभान ग्राम (उत्तर प्रदेश) में हुआ। अल्पायु […] Read more » पंडित दीनदयाल उपाध्याय
राजनीति आधुनिक तकनीक के साथ कदम – ताल करता भारत September 20, 2025 / September 20, 2025 | Leave a Comment हाल ही में केंद्रीय मंत्री अश्वनी वैष्णव का आलेख तकनीक बनी शासन की भाषा समाचार पत्रों में प्रकाशित हुआ हैं।आज के दौर में यदि किसी राष्ट्र की असली ताकत को परखा जाए तो उसमें सेना, अर्थव्यवस्था और संसाधनों के साथ-साथ तकनीकी विकास को भी सबसे अहम माना जाता है। आधुनिक युग में तकनीक केवल जीवन […] Read more » आधुनिक तकनीक के साथ कदम - ताल करता भारत आधुनिक तकनीक के साथ भारत
लेख समाज उपेक्षा और संवेदना के बीच बुजुर्गों की स्थिति September 16, 2025 / September 16, 2025 | Leave a Comment भारतीय समाज की रीति-नीति और सांस्कृतिक परंपराओं में बुजुर्गों का स्थान हमेशा से उच्च माना गया है। “यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता” की भाँति ही हमारी संस्कृति में यह भी विश्वास किया गया कि बुजुर्गों के आशीर्वाद से घर-परिवार की उन्नति होती है। यही कारण है कि सदियों तक संयुक्त परिवार की परंपरा ने […] Read more » बुजुर्गों की स्थिति