रामस्वरूप रावतसरे
अयोध्या में प्रभु श्री राम के मंदिर की नींव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 5 अगस्त 2020 को रखी थी और 22 जनवरी 2024 को श्री राम जन्मभूमि मंदिर का भव्य उद्घाटन भी हो गया था। इस ऐतिहासिक घटना से भारत की सांस्कृतिक चेतना की पुनर्स्थापना तो हुई ही, साथ ही साथ अयोध्या केवल एक धार्मिक नगरी से आगे बढ़कर अर्थव्यवस्था के एक बड़े केंद्र के रूप में भी उभरकर सामने आने लगी है। केंद्र और यूपी सरकार की कोशिशों से अयोध्या विकास की पटरी पर सरपट दौड़ रही है।
भारत के मंदिर केवल आस्था के केंद्र नहीं रहे बल्कि उन्होंने सदियों से स्थानीय अर्थव्यवस्था, रोजगार और बुनियादी ढाँचे को मजबूत करने में बड़ी भूमिका निभाई है। तिरुपति, वैष्णो देवी और उज्जैन के महाकाल जैसे तीर्थस्थल इसके उदाहरण हैं। अब अयोध्या भी इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए आधुनिक विकास और सांस्कृतिक विरासत के संगम का नया मॉडल बनती जा रही है।
भारत की टेंपल इकोनॉमी को लेकर जानकारों का कहना है कि टेंपल इकोनॉमी का मतलब उन सभी आर्थिक गतिविधियों से है जो मंदिरों के कारण पैदा होती हैं जैसे दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालु, तीर्थ पर्यटन, मंदिर प्रबंधन, प्रसाद, फूल-माला, होटल, परिवहन और अन्य सेवाएँ। भारत में मंदिर सिर्फ पूजा के स्थान नहीं रहे बल्कि हजारों सालों से आर्थिक गतिविधियों के बड़े केंद्र भी रहे हैं। पुराने समय में जब अर्थव्यवस्था स्थानीय स्तर पर चलती थी, तब मंदिर आसपास के लोगों को रोजगार और व्यापार के अवसर देते थे। तीर्थयात्रा के कारण दुकानदारों, कारीगरों, पुजारियों, गाइडों और अन्य काम करने वालों को काम मिलता था। वाराणसी, मदुरै, पुष्कर और उज्जैन जैसे शहर इसके उदाहरण हैं। ये शहर किसी बड़े उद्योग के लिए नहीं बल्कि अपने प्रसिद्ध मंदिरों और तीर्थ स्थलों के लिए जाने जाते हैं। मंदिरों के आसपास बनी यह अर्थव्यवस्था सदियों से इन शहरों को सहारा देती रही है।
स्टेटबैंक ऑफ इंडिया और अन्य आर्थिक विशेषज्ञों के अनुमान के अनुसार, भारत की टेंपल इकोनॉमी हर साल लगभग 3.02 लाख करोड़ से 6 लाख करोड़ तक का योगदान देती है। यह देश के कुल जीडीपी का करीब 2.3 प्रतिशत से 3 प्रतिशत हिस्सा है। इसी संदर्भ में राम मंदिर अयोध्या की अर्थव्यवस्था में अहम भूमिका निभा रहा है और शहर को दुनिया के प्रमुख तीर्थ स्थलों में शामिल कर रहा है। राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने 5 फरवरी 2020 से 5 फरवरी 2025 के बीच लगभग 400 करोड़ कर के रूप में सरकार को दिए। इसमें 270 करोड़ जीएसटी और 130 करोड़ अन्य करों के रूप में शामिल हैं। राम मंदिर के निर्माण पर सरकार को लगभग 400 करोड़ जीएसटी मिलने का अनुमान बताय जा रहा है।
अयोध्या में श्री राम मंदिर के उद्घाटन के बाद आर्थिक गतिविधियों का प्रभाव कई गुना बढ़ गया है। धार्मिक पर्यटन ने यहाँ परिवहन, होटल, भोजन, व्यापार और दान अर्थव्यवस्था को अभूतपूर्व गति दी है। आईआईएम लखनऊ की रिपोर्ट में बताया गया है कि जनवरी से दिसंबर तक 2024 के बीच अयोध्या में 15 करोड़ से अधिक श्रद्धालु पहुँचे। इसी प्रकार 2025 में जनवरी से जून तक 23 करोड़ 81 लाख 64 करोड़ 744 भारतीय और 49993 विदेशी श्रद्धालु अयोध्या दर्शन के लिए आये।
भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के एक शोध के मुताबिक, वित्त वर्ष 2024 में सिर्फ अयोध्या से जुड़ी तीर्थ यात्रा और उससे संबंधित गतिविधियों से 4 लाख करोड़ से ज्यादा का आर्थिक उत्पादन (इकोनॉमिक आउटपुट) होने का अनुमान बताया था। यानी राम मंदिर के कारण यहाँ आने वाले श्रद्धालुओं से पर्यटक, होटल, दुकानों और परिवहन जैसी सेवाओं से बहुत बड़ा आर्थिक फायदा हो रहा है।
जानकारों के अनुसार मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के बाद इसकी लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि एक ही दिन में 3 करोड़ से ज्यादा की भेंट चढ़ाई गई थी। यह दिखाता है कि श्रद्धालुओं की आस्था के साथ-साथ यहाँ बड़ी आर्थिक गतिविधि भी जुड़ी हुई है। वित्त वर्ष 2025 में उत्तर प्रदेश सरकार को अतिरिक्त 25,000 करोड़ तक का कर राजस्व मिलने की संभावना जताई गई है। इसमें जीएसटी और अन्य तरह के टैक्स शामिल हैं। यानी मंदिर और पर्यटन से राज्य की आमदनी भी बढ़ रही है, जिसका इस्तेमाल विकास कार्यों में किया जा सकता है।
रिपोर्ट के मुताबिक, राम मंदिर निर्माण की परियोजना से सीधे 1,000 से अधिक लोगों को रोजगार मिला है, जो राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से जुड़े हुए हैं। यानी मंदिर के प्रबंधन, सुरक्षा, प्रशासन और अन्य कार्यों में हजार से ज्यादा लोग नियमित रूप से काम कर रहे हैं। निर्माण के दौरान स्थिति और भी व्यापक थी। मंदिर के निर्माण कार्यों में 50,000 से अधिक मजदूर अलग-अलग चरणों में जुड़े। इसमें राजमिस्त्री, इंजीनियर, पत्थर तराशने वाले कारीगर, ट्रांसपोर्ट से जुड़े लोग और अन्य श्रमिक शामिल थे। इससे हजारों परिवारों की आमदनी बढ़ी।
जानकारी के अनुसार मंदिर बनने के बाद सिर्फ प्रत्यक्ष रोजगार ही नहीं बल्कि अप्रत्यक्ष रोजगार भी तेजी से बढ़ा। सीधे और अप्रत्यक्ष दोनों तरह से करीब 1.2 लाख नई नौकरियाँ पैदा हुई हैं। ये नौकरियाँ होटल और पर्यटन, हस्तशिल्प और धार्मिक वस्तुओं के व्यापार, स्थानीय परिवहन और टूर गाइड सेवाओं जैसे क्षेत्रों में बनी हैं। लोगों को कई क्षेत्रों में नया रोजगार या अतिरिक्त कमाई का अवसर मिला।
यूपी सरकार ने अयोध्या को एक आधुनिक और विश्व स्तरीय आध्यात्मिक नगरी बनाने के लिए अयोध्या मास्टर प्लान 2031 के तहत 85,000 करोड़ से अधिक के निवेश का प्रस्ताव रखा है। इसका उद्देश्य सिर्फ मंदिर क्षेत्र का विकास नहीं बल्कि पूरे शहर को योजनाबद्ध तरीके से विकसित करना है ताकि आने वाले वर्षों में बढ़ती आबादी और तीर्थयात्रियों को बेहतर सुविधाएँ मिल सकें।
इस योजना में नई सड़कों, बेहतर जल निकासी व्यवस्था, स्मार्ट ट्रैफिक सिस्टम, आधुनिक बस टर्मिनल, पार्किंग जोन और शहरी सुविधाओं के विस्तार पर जोर दिया गया है। यानी अयोध्या को एक व्यवस्थित और साफ-सुथारे शहर के रूप में तैयार किया जा रहा है। इसके अलावा सड़कों, हवाई अड्डों और रेलवे स्टेशनों को भी विकसित किया गया है।
दिसंबर 2023 से शुरू हुआ महर्षि वाल्मिकी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा अयोध्या की कनेक्टिविटी में बड़ा बदलाव लेकर आया है। वित्त वर्ष 2025 में इस हवाई अड्डे ने 1.1 करोड़ से अधिक यात्रियों को संभाला जो पिछले वर्षों की तुलना में 423 प्रतिशत वृद्धि दिखाता है। इसका मतलब है कि अब देश-विदेश से बड़ी संख्या में लोग सीधे अयोध्या पहुँच पा रहे हैं। भविष्य में इसकी क्षमता को 10 करोड़ यात्रियों प्रति वर्ष तक बढ़ाने की योजना है।
साथ ही, अयोध्या धाम जंक्शन रेलवे स्टेशन का पुनर्निर्माण किया गया है। स्टेशन को भव्य डिजाइन, बेहतर वेटिंग रूम, एस्केलेटर, लिफ्ट और आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित किया गया है। इसके अलावा, नए एक्सप्रेसवे और चौड़ी सड़कों ने अयोध्या को लखनऊ, वाराणसी, प्रयागराज और गोरखपुर से जोड़ दिया है। इससे यात्रा समय कम हुआ है और व्यापार तथा लॉजिस्टिक्स गतिविधियाँ भी तेज हुई हैं।
अयोध्या के विकास का असर अब सिर्फ शहर तक सीमित नहीं है बल्कि आसपास के जिलों तक भी साफ दिखाई दे रहा है। फैजाबाद, बस्ती, सुलतानपुर, अमेठी, लखनऊ और गोरखपुर में भी आर्थिक गतिविधियाँ बढ़ी हैं। इन क्षेत्रों में होटल, गेस्ट हाउस और धर्मशालाओं की संख्या बढ़ रही है। साथ ही, लॉजिस्टिक्स हब और परिवहन सेवाओं का विस्तार हुआ है।
इन आर्थिक गतिविधियों से साफ है कि मोदी और योगी सरकार की मंशा केवल अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण करने की नहीं है बल्कि दोनों सरकारें अयोध्या को एक बड़े विजन के तहत विकसित कर रही हैं। जब दुनिया के मानचित्र पर बड़े तीर्थस्थलों का जिक्र किया जाएगा तो उसमें के राम मन्दिर का भी जिक्र अवश्य होगा।
रामस्वरूप रावतसरे