तेरे मेरे दरम्यां ।।

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नहीं चाहिए मुझे,
बड़े-बड़े उपहार ,
मोतियों के हार ,
बड़ी-बड़ी बातें ,
गर्मियों में कश्मीर जाना,
सर्दियों में दक्षिण भारत घूमना।

चाहिए मुझे तो बस,
तेरा प्यार से घण्टों,
एकटक मुझे निहारना।

मेरे हाथों को अपने हाथों में ले,
बात बेबात हंसना, मुस्कुराना
घंटों मेरे साथ बैठे रहना।

मेरे बालों में धीरे -धीरे,
तेरा उंगलियां फिराना।
मेरी हथेलियों पर ,
प्यार भरी थपकी देना।
मेरे उदास होने पर ,
मेरे चेहरे पर खुशी लाने का
हरसंभव प्रयास करना।

कभी मेरी आंखों को ,
अपनी हथेलियों से बंद कर देना।
प्यार भरे मीठे बोल बोलना ,
हंसी ठिठोली करना।

ऑफिस में जाना ,
जब तब मुझे फोन कर लेना।
मेरी खुशी में ही,
अपनी खुशी ढूंढ़ लेना।

मेरे हर कदम से कदम,
मिलाकर चलना।
भूल से भी भूल कर बैठूं,
मेरी भूल को भूल जाना।

मेरी आँखों में आंखे डाल,
मेरे दिल में उतर जाना।
मैं कुछ ना भी कहूँ तो भी,
मेरे ज़ज़्बात समझ लेना।

हवा के रुख़ से ही,
मेरे होने का एहसास कर लेना
तेरे सुख-दुख में मेरे,
मेरे सुख-दुख में तेरे,
दिल के तार बजना ।

यूं ही अचानक ,
मेरे माथे को चूम लेना ,
अपनी बाहों में मुझे भर ,
मेरे सारे गिले- शिकवे ,
छूमंतर कर देना ।

मैं चाहूं भी अगर गुस्सा होना,
तेरे मुस्कुराते चेहरे को देख,
मेरे गुस्से का फुर्र हो जाना।

मैं तो चाहूँ बस इतना,
कोई भी दूरी ना रहे,
तेरे मेरे दरम्यां ।।

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